Hot Mausi X Story – मौसी ने मेरा लंड पकड़ लिया

Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Hot Mausi X Story – मौसी ने मेरा लंड पकड़ लिया to make every night hot about Hot Mausi X Story – मौसी ने मेरा लंड पकड़ लिया story.

Story Start Here :

हॉट मौसी X स्टोरी में मेरी विधवा मौसी मायके में रहती हैं. मम्मी ने मुझे मौसी को लाने नानी के घर भेजा. मौसी की सेक्सी फिगर देख मेरा मन डोल गया.

मेरी चचेरी मौसी जो मुझसे करीबन दस साल बड़ी हैं.
उनके पति का देहांत हुए लगभग छह साल हो गए हैं और अब वे अपने मायके में ही रहती हैं.

ये सत्य घटना उनके और मेरे कार में कहीं जाते हुए घटी.

नमस्कार मित्रो, ये मेरी दूसरी सेक्स कहानी है … जो कि पहली वाली कहानी
मम्मी की जवान सहेली की मदमस्त चूत चोदी
की तरह ही सत्य घटना पर आधारित है.

जैसा कि मैंने बताया था कि मेरी शादी नहीं हुई है.
मेरी उम्र 30 साल की हो चुकी है और मुझे कोई रेगुलर सेक्स नहीं मिलता.

यह हॉट मौसी X स्टोरी गर्मियों की है.

मुझे लगभग हर दो-तीन महीने के अंतराल पर अपने गांव जाना पड़ता है जो कि मेरे शहर से लगभग 150 किलोमीटर दूर पड़ता है.

मेरे गांव से ही करीब साठ किलोमीटर दूर मेरा ननिहाल भी है तो कभी कभी मैं वहां भी हो आता हूं.

मेरे ननिहाल में अब मेरी चचेरी नानी और उनकी विधवा बेटी यानि मेरी मौसी रहती हैं.
उनके पास खेती काफी अच्छी है तो घर खर्च उसी से चलता है.

घर की देखभाल और कामकाज के लिए एक अधेड़ उम्र का नौकर भी है जो घर के बाहर वाले एरिया में एक अलग कमरे में रहता है.

अब आप सबको अपनी मौसी जी के बारे में थोड़ा परिचय दे दूं.
मेरी मौसी की उम्र अब 40 साल की है. उनकी शादी तब हो गयी थी, जब वे 24 साल की थीं और उनका वैवाहिक जीवन अच्छा चल रहा था.

लेकिन छह साल बाद ही एक सड़क दुर्घटना में उनके पति का देहांत हो गया जिसके चलते वे अपने मायके में आकर रहने लगीं और अपनी मां से साथ ही जीवन-यापन करने लगीं.
मौसी जी देखने में सुन्दर हैं, उम्र की वजह से शरीर थोड़ा भरा-भरा है जो कि काफी अच्छा लगता है.

उनके मोटे मोटे स्तन और चौड़े चूतड़ उनकी सुन्दरता को और भी बढ़ा देते हैं.
मौसी जी से मेरी अक्सर फोन पर और व्हाट्सैप पर बात होती रहती है लेकिन अब तक सब कुछ एकदम दायरे में ही होता रहा है.

चूंकि मौसी जी मुझसे अच्छे से घुली-मिली हैं तो हंसी मजाक आदि सब होता रहता है.
मेरी मां अक्सर उनको मेरे घर रुकने और शहर घूमने के लिए बुलाती हैं.

इस बार भी मां ने मौसी से कहा था- सीमा कुछ दिन के लिए हम लोगों के पास आ जाओ, तुम्हारा भी मूड फ्रेश हो जाएगा और इसी बहाने हम सब भी घूम लेंगे. इस बार जब शरद उधर जाएगा तो तुम उसके साथ ही कार से आ जाना.

तो मैं जब पहुंचा नानी के यहां तो नानी और सीमा मौसी से मुलाकात हुई और बातें वगैरह हुईं.

पहुंचने में मुझे शाम हो गयी थी तो दिन भर की थकान की वजह से मैं वहीं पड़ी खटिया पर लेट गया.

मुझे थोड़ी ही देर में गहरी नींद आ गयी.

जब रात के करीब नौ बज गए तो मौसी जी ने मुझे उठाया- बेटा उठो और खाना खा लो काफी रात हो गयी है!

दोस्तो, गांवों में रात के नौ बजे तो समझिये कि काफी रात हो गई है.

मैंने मौसी की बात सुनी और खाना खाने के लिए उठ कर आ गया.
मौसी भी मेरे साथ खाना खाने लगीं.

इधर मैं आपको बता दूं कि मौसी जी के लिए मेरे मन में कभी कोई ऐसी बात नहीं आई कि मैंने उनको गंदी नज़र से देखा हो.

लेकिन उस दिन जब वे मेरे साथ खाना खा रही थीं तो उन्होंने दुपट्टा नहीं लिया हुआ था और उनकी चूचियों की क्लीवेज साफ दिख रही थी.
जब भी वे हल्का सा झुकतीं तो उनकी क्लीवेज और अन्दर तक दिख जाती.

मुझे ये देख कर काफी अलग और अच्छा लग रहा था.

ऊपर से रात का मौसम था और मौसी मुझसे थोड़ी बहुत मजाक भरी बातें भी कर रही थीं.

‘शरद, और बताओ सब कैसा चल रहा है, तुम्हारा नया बिजनेस कैसा है और दोस्त सब कैसे हैं?’
‘मौसी जी, बिजनेस अच्छा चल रहा है और दोस्त सब अच्छे हैं!’

खाना खाते हुए मेरी चम्मच नीचे गिर गयी और जब तक मैं चम्मच उठाने के लिए नीचे झुकता, तब तक मौसी झट से नीचे झुकीं और चम्मच उठा ली.

वे उसे मेज पर रखने ही वाली थीं कि उनकी नज़र मुझ पर पड़ गयी.

मेरी नज़रें मौसी जी की चूचियों पर थी, जिनकी क्लीवेज और भी गहरी दिख रही थी.
मौसी जी ने मुझे उनकी चूचियों को देखते हुए देखा तो थोड़ा सा झेंप गयीं … लेकिन उन्होंने खुद को ऐसे दिखाया, जैसे कि कुछ हुआ ही ना हो.

उसके बाद सब कुछ सामान्य करने के लिए मौसी मुझसे बातें करने लगीं.
थोड़ी देर हम दोनों बरामदे में टहलते रहे और इधर उधर की बातें करते रहे.

फिर मौसी ने बोला- शरद, तुम्हारा बिस्तर मैंने अपने कमरे में ही लगा लिया है. नानी भी उसी कमरे में सो रही हैं तो किसी को अकेले नहीं सोना पड़ेगा. अब हम तीनों की खटिया एक ही कमरे में लगी थी.
पहले नानी की खटिया बीच में, फिर मौसी की और उनके बाद मैं आ गया था.

हम लोग सोने के लिए अपने अपने बिस्तर पर लेट गए.
मौसी जी ने सोने से पहले बोला- शरद सुबह जल्दी उठ जाना, जिससे शहर निकलने में देर ना हो!

मैंने हां में सिर हिलाया और फिर सोने की कोशिश करने लगा.

लेकिन दिमाग में मौसी जी की चूचियां और क्लीवेज ही चल रही थी और सामने मौसी सो भी रही थीं.

उस समय मौसी जी ने सलवार सूट पहना हुआ था जिससे उनकी चूचियों और चूतड़ों दोनों का ही आकार पूरा समझ आ रहा था.

आधी रात में मेरी नींद खुली और मैंने देखा कि मौसी जी का कुर्ता हल्का ऊपर की ओर उठ गया है.
इससे उनके पेट की मुलायम त्वचा और पीठ दोनों थोड़ी थोड़ी दिखने लगी थीं.

मौसी जी का रंग गोरा होने की वजह से उनकी नंगी पीठ चमक रही थी, जिसे देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा … लेकिन मैंने खुद को समझाया और सो गया.

अगले दिन‌ सुबह हम जल्दी उठ गए और नहा धोकर मैं तैयार हो गया.
चूंकि गर्मी काफी थी इसलिए मैंने सफर के लिए टीशर्ट और शॉर्ट्स ही पहन लिए.

फिर नाश्ता वगैरह किया और उसके बाद मौसी जी ने कहा- चलो शरद, मैं तैयार होकर आती हूं. तुम ड्राइवर से बोलो कि गाड़ी निकाले.
‘जी मौसी जी!’

जब मौसी जी तैयार होकर आईं तो मेरी आंखें फटी रह गयीं.
मैंने बहुत साल पहले उनको साड़ी में देखा था और आज फिर से वे साड़ी में मेरे सामने आईं तो मैं अवाक रह गया था.

इसी के साथ ही ना जाने‌ क्यूं, कल रात के बाद से मौसी को देखने की मेरी नज़र भी बदल गयी थी.

इन सब से अनजान मौसी ने मुझसे कहा- ओ हीरो, कहां है ध्यान, चलना नहीं है क्या?

ये बोलकर वे हल्का सा मुस्कुरा दीं और मेरे आगे आगे कार में बैठने को चल दीं.
मैंने भी नानी के पैर छूकर सामान उठाया और मौसी के पीछे चलने लगा.

साड़ी में मटकते मौसी के चूतड़ों को देखकर मैं पागल सा होने लगा.

ऊपर से उन्होंने साड़ी नाभि के नीचे से पहन रखी थी तो उनका‌ गदराया हुआ पेट भी कयामत ढा रहा था.
मैं उनकी मटकती गांड देखते हुए डिक्की तक आया और सामान रख दिया.

मौसी पीछे की सीट पर बैठ गयीं.
मैं भी ड्राइवर के बाजू वाली सीट पर जा बैठा और ड्राइवर से बोला- चलो.

रास्ता शुरू हुआ और हम लोग शहर की ओर बढ़ने लगे.
रास्ता थोड़ा खराब था तो ड्राइवर गाड़ी धीरे धीरे चला रहा था.

चलते चलते एक बड़ा पत्थर गाड़ी के नीचे आ गया और एक जोर की आवाज़ आई ठक्क …
गाड़ी चलते चलते डिसबैलेंस होकर रुक गयी.

अब मैं और ड्राइवर गाड़ी से नीचे उतरे और धक्का देकर गाड़ी को साइड में लगाई.
यह सब देख कर मौसी जी थोड़ा घबरा गयीं, मैंने उनको थोड़ा समझाया.

‘देखते हैं कोई आस पास मैकेनिक होगा .. गाड़ी ठीक होते ही निकल‌ लेंगे, आप परेशान ना हों!’

मैंने घर पर और नानी जी दोनों जगह फोन करके बता दिया कि गाड़ी में जरा गड़बड़ हो गई है और मिस्त्री लगा है, ठीक होने‌ पर जल्द ही निकलेंगे.
फिर एक बाइक निकली तो ड्राइवर उसके साथ बैठ कर पास के कस्बे में गया और उधर से मिस्त्री को ले आया.

मिस्त्री ने अपनी कार से मेरी कार को खींचा और अपने गैरिज पर ले आया.

उधर गाड़ी ठीक होने लगी.
ठीक होते होते शाम हो गयी और उसकी दुकान पर बैठे बैठे मौसी जी और मैं दोनों ही थक गए.

दोपहर का खाना भी नहीं मिला था तो भूख भी जबरदस्त लग रही थी.

जैसे तैसे कार सही हुई तो गाड़ी बढ़ा कर हम लोगों ने आगे एक ढाबे पर रोकी और हम सब ने खाना खाया.

मैंने ड्राइवर से बोला- गाड़ी दूसरे रास्ते से ले चलो, थोड़ा लम्बा पड़ेगा लेकिन रोड अच्छी मिल जाएगी.

अब क्यूंकि खाना खाकर थोड़ा रिलैक्स हो गया था तो मैं भी पीछे वाली सीट पर जाकर मौसी जी के साथ पालथी मारकर आराम से बैठ गया.
हमारा सफर अब लगभग दो घंटे का बचा था और अंधेरा हो चुका था.

मैंने सोचा कि थोड़ा आंखें बन्द करके आराम कर लेता हूं.
मैं पीछे हेडरेस्ट पर सर करके सोने की कोशिश करने लगा और बगल मैं बैठी मौसी जी भी थकान होने की वजह से ऊंघने लगीं.

गाड़ी चलते हुए आधा घंटा हो चुका था.
मौसी मेरी जांघों पर अपना सर रखकर सो रही थीं.

मैंने देखा कि मौसी जी का पूरा नंगा पेट दिख रहा था और लेटे होने की वजह से उनकी चूचियां भी ब्लाउज़ में आगे की ओर निकलने को हो रही थीं.
मौसी का ये मादक रूप देखकर नेकर में ही मेरा लंड टाइट होने लगा.

मौसी ने करवट ली तो उनकी पीठ आगे की तरफ हो गयी और पेट सीट की तरफ.
करवट लेते में उन्होंने अपना‌ हाथ अपने अपने सर पर रख लिया जो लटकते हुए मेरे पैरों के बीच में आ गया, जहां मेरा लंड पहले से उछल-कूद कर रहा था.

मुझे डर इस बात का था कि कहीं मौसी जी का‌ हाथ मेरे लंड पर ना‌ छू जाए.
मैं हिलकर अपना लंड सैट भी नहीं कर‌ सकता था कि कहीं मौसी जी की नींद ना खुल जाए.

मैं इसी आपा-धापी में उलझा हुआ था कि तभी मौसी जी की उंगली‌ मेरे लंड में छू गयी.
मेरा पूरा बदन झनझना‌ गया और लंड और कड़क होकर फुफकार मारने लगा.

मुझे लगा कि मौसी जी को अपने सर के पास कुछ हरकत महसूस हुई इसलिए वे थोड़ी नीचे को हुईं.
जैसे ही वह नीचे हुईं, ऑटोमैटिक उनका हाथ मेरे खड़े लंड पर रख गया.

अब मेरा दिमाग पूरा खराब क्योंकि खड़ा लंड शांत नहीं रहता.
फिर जैसे ही मौसी जी का हाथ उस पर पड़ा, उसने तुरन्त झटका लिया.

ये मौसी जी को महसूस हुआ लेकिन‌ मेरे लिए आश्चर्य ये था कि मौसी जी ने उस पर कोई रिएक्शन नहीं दिया बल्कि हल्के से मेरे लंड को दबा दिया.

अब तो मैं एकदम ऐसी स्थिति में आ गया, जहां मेरे लिए ये समझना मुश्किल था कि ये सब हरकतें जो मौसी जी कर रही हैं … वह सब नींद में कर‌ रही हैं या जानते हुए?

मैंने खुद को समझाया और सोचा कि देखते हैं कि मौसी और क्या करती हैं.

अब मेरा हाल थोड़ा बेकाबू हो रहा था क्योंकि मौसी ने अब लंड हल्का सा पकड़ लिया था.
मेरा मन कर रहा था कि मौसी के हाथ पर अपना हाथ रख कर अपना लंड सहलवाऊं उनसे!
लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी.

यह डर भी था कि ड्राइवर को कहीं पीछे हो रही चीज़ों की भनक ना लग जाए.

मेरा लंड अब मौसी के हाथ में था मेरी नेकर के ऊपर से ही .. और अचानक मौसी ने मेरी सोच के बिल्कुल उल्टा करते हुए अपना हाथ जांघों के साइड से मेरी नेकर के अन्दर डाल कर मेरा खड़ा लंड पकड़ लिया.
अब मेरे आश्चर्य और खुशी दोनों का ठिकाना ना रहा.
जो कभी सोचा नहीं था आज मेरे साथ वह हो रहा था.

दोस्तो, मेरी विधवा मौसी की चुत की प्यास को मैंने किस तरह से बुझाया … यह मैं आपको अपनी सेक्स कहानी अगले भाग में विस्तार से लिखूँगा.
हॉट मौसी X स्टोरी पर आप मुझे मेल जरूर करें.
suvrattripathi@yahoo

हॉट मौसी X स्टोरी का अगला भाग: