Love Love Story – मेरे चाचा की शादी मेरी माशूका से

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Story Start Here :

लव लव स्टोरी में दूर के रिश्ते की एक लड़की मेरी महबूबा थी. वह हमारे घर आती थी. घर वालों को वह अच्छी लगी और मेरे चाचा का निकाह उससे हो गया.

बात उन दिनों की है जब मैं छुट्टी पर घर गया हुआ था।
मेरे चाचा की शादी होने वाली थी।
उनकी शादी एक बहुत खूबसूरत लड़की से होने वाली थी।
लड़की का नाम था अनाया।

लड़की मेरे अब्बू के चाचा की बेटी की बेटी थी।
बचपन में हम दोनों ने साथ में कई सारे गेम खेले थे, जैसे छुप्पन-छुपाई, चिड़िया उड़, शौहर-बीवी।

और मैंने शौहर-बीवी गेम में उसका शौहर बन के उसको किस किया था!
या फिर छुप्पन-छुपाई में उसके साथ छुप के मजे लेता था।

इस लव लव स्टोरी में मेरा इरादा तो उसे चोदने का था।
मैंने कई बार उसके मम्मे दबाए थे और उसकी चूत को कई बार सहलाया था।

मगर, चूंकि वो संस्कारी लड़की थी, उसने मुझे कभी भी इससे आगे बढ़ने नहीं दिया।

मैंने गुस्से में कहा, “तुम मुझे क्यों चोदने नहीं देती! जब तुम्हें पता है, मैं तुमसे प्यार करता हूँ, तुम्हें चोदना चाहता हूँ, तो चुपचाप मेरा लन्ड अपनी चूत में ले लो!”

तो उसने बड़े ही प्यार से जवाब दिया, “मैं ऐसा नहीं कर सकती, ये मेरे शौहर के लिए है। जब आप सच में मेरे शौहर बनोगे, मुझसे शादी करने के बाद, तब मैं आपको चोदने दूँगी।”
“ठीक है, फिर क्यों नहीं तुम मुझे अपनी गांड ही दे देती, मेरा तो लन्ड खड़ा है, मैं तो इसे शांत करना चाहता हूँ!” मैंने कहा और उसकी गांड पर हाथ रख के सहलाने लगा।

उसने मेरा हाथ अपनी गांड पर से हटा दिया और मेरा लन्ड अपने हाथ में लेके सहलाने लगी, “कोई गांड भी मारता है क्या, मैं आपका लन्ड सहला के ही शांत कर दूँगी।”
मुझे उस पर गुस्सा आ रहा था, कि वो मुझे दे नहीं रही थी।

“ठीक है, फिर याद रखना, तुम्हारी शादी अगर मेरे सिवाय किसी और से हुई, तो तुम्हारी शादी से पहले मैं तुमसे सुहागरात मनाऊँगा! और शादी के बाद भी तुम्हें जी भर के चोदूँगा! हो सके तो तुझे हमल से भी मैं ही करूँगा और तब कोई बहाना नहीं मानूँगा!” इतना कह के मैंने अपना लन्ड उसके मुँह में डालने की कोशिश की।

वो मुँह में भी नहीं लेना चाह रही थी।
मगर मैंने उसे गुस्से से देखा तो मेरा लन्ड खुद से उसने अपने मुँह में ले लिया.
थोड़ी देर उसके मुँह में हिलाने के बाद, फिर एक झटके से उसका मुँह खींचा, और मेरा लन्ड उसके गले तक चला गया, और फिर मैं झड़ गया।

इस तरह से, जब भी अनाया हमारे गाँव पर आती, तो वो मेरे घर पर आती.
हालाँकि मैं उसे चोद नहीं पाता, मगर उसको मैंने कई बार नंगी करके, उसके बदन के साथ खेला।
और उसके मुँह में कई बार मैंने अपना लन्ड दिया है, और उसको अपना वीर्य पिलाया है।

अनाया ने भी इसकी आदत डाल ली थी, और कहीं मैं उसे चोद ना दूँ, इस डर से वह, जब भी मेरा लन्ड खड़ा होता, वह मेरा लन्ड चूसकर, मेरा वीर्य पी जाती थी।

अनाया को बराबर घर आते देख, हमारे घर वालों को थोड़ा शक हुआ।
क्योंकि मेरे छोटे चाचा मुझसे थोड़े ही बड़े थे, सबको लगा अनाया उनके लिए आती थी।

और उन्होंने अनाया की शादी मेरे छोटे चाचा से फिक्स कर दी।
यह सुन के मुझे बहुत गुस्सा आया।
और मैं इस बार अपना गुस्सा अनाया पर उसे चोद के उतारना चाहता था।

मगर उसके बाद से अनाया कभी आई ही नहीं।

फिर शादी वाला दिन आया, हम बाराती बन के अनाया के घर गए।
और मैं मौका देख के, उसके कमरे में घुस गया।

उस समय काफी लड़कियाँ थीं अनाया के बगल में, मैंने अनाया को इशारा किया.

उसने सभी लड़कियों को जाने को कह दिया।

“तो तुम किसी और की होने जा रही हो?” मैंने पूछा, अब जब कई दिन बीत गए थे, तो मेरा गुस्सा भी शांत हो गया था।

अनाया मेरे पास आई, उसने मुझे गले लगाया, और रोने लगी, “मैंने अम्मी-अब्बू को काफी समझाया, कि मैं सिर्फ आपसे शादी करना चाहती हूँ, मगर वो नहीं माने, आई एम सॉरी। प्लीज मुझे माफ कर दो!”
वो इतना कहके रोने लगी।

“अब तो तुम्हारी शादी होने ही वाली है, अब क्या, चलो ठीक है मैं चलता हूँ, नहीं तो लोगों को शक होने लगेगा.” इतना कहके मैं जाने ही वाला था, कि उसने मुझे पकड़ लिया।

वो थोड़ा शरमाई, मगर हिम्मत करके मुझसे बोली, “आज की रात कोई नहीं आएगा, आप चाहें तो मुझे जी भरके चोद सकते हैं। जैसा आप बचपन में कहते थे। आज मैं आपको नहीं रोकूँगी। चाहे आप मुझे गर्भवती ही क्यों ना बना दें!”

मैं समझ गया कि अनाया अभी भी मुझसे ही प्यार करती है और वो अफसोस में अपनी शादी होने से पहले मुझे खुश करना चाहती है।
मैंने उसकी तरफ देखा, उसके होंठ पर अपना होंठ रख के एक बोसा दे दिया।

“अनाया, अगर तू मेरे चाचा के अलावा किसी से शादी करती, तो मैं तुझे जी भर के चोदता, और तो और तेरे शौहर के सामने भी चोदता। मगर मैं अब नहीं कर सकता। और यह मेरी आखिरी मुलाकात है।” इतना कहके मैं बाहर आ गया।

मैं जानता था, कि अनाया एक कायदे वाली लड़की है और वो सिर्फ मुझे खुश करने के लिए अपना कायदा तोड़ रही थी।
मगर मैं नहीं चाहता था, कि उसके दामन पे दाग लगे।

फिर शादी के बाद हम अनाया को घर ले के आए और मैं फिर अपने कॉलेज के लिए चला गया।

फिर एक साल बाद मैं घर आया त्यौहार में।
सब कुछ सही चल रहा था।

मैं सबसे मिला पर अनाया से मिलने नहीं गया क्योंकि मैं दूरी बना के रखना चाहता था।

और वैसे भी अब मेरी कई सारी गर्लफ्रेंड है, तो अब मुझे उतनी वासना भी नहीं थी।

फिर रात हुई, मैं अपने कमरे में सो रहा था, तभी मेरे कमरे में कोई आया।

मैं सोचा अम्मी होगी, मेरा ख्याल लेने आई है।
मगर नहीं, वो अनाया थी।

अभी भी उतनी ही सुंदर, उसके फिगर में थोड़ा भी फर्क नहीं पड़ा था।

“क्या हुआ, इतनी रात को क्यों आई हो, कोई देख लेगा तो गलत समझेगा, वापस चली जाओ.” मैंने उससे कहा।

अनाया ने मेरे बातों का जवाब नहीं दिया और वो मुझसे लिपट गई।
और फिर रोने लगी.
उसे पहली बार मैंने रोती हुई देखा था।

मैंने उसके आँसू पोंछे, और उसकी पीठ सहलाई, “बताओ क्यों रो रही हो?”

उसने जवाब नहीं दिया, करीब बीस मिनट तक रोई, फिर वो शांत हो गई, “आप ठीक हो ना, आपकी तबीयत ठीक है ना?”

“हाँ मैं ठीक हूँ, अब तो मुझे एक लड़की भी मिल गई है। जिससे मैं बहुत प्यार करता हूँ।” मैंने जवाब दिया.
मैंने जानबूझ कर लड़की का जिक्र किया, ताकि हमारे बीच कोई रिश्ता ना बने।

उसने भी जब मेरे मुँह से लड़की का जिक्र सुना तो थोड़ी सी घबरा गई, और थोड़ी सी गुस्सा भी हुई।
फिर वो मेरे से अलग हुई और चली गई।

मैंने भी राहत की सांस ली।

मैं अगर चाहता तो उसे अभी के अभी चोद सकता था क्योंकि मैं महसूस कर सकता था, वो मेरे पूरे बदन को सहला रही है।

मगर किसी ने देख लिया तो मुझे ज्यादा कुछ फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि मैं लड़का हूँ, मगर वो लड़की है, उसके दामन पे दाग लग जायेगा।
और मैं अभी भी उससे उतना ही प्यार करता हूँ, तो मैं कैसे उसके दामन में दाग दे सकता हूँ।

फिर सुबह हुई, मैंने देखा कि मेरे छोटे चाचा जो कि छुट्टी पे आए हुए अपनी जॉब से, वो किसी अलग कमरे से बाहर निकले, ना कि अनाया के कमरे से।
मगर मैंने इग्नोर किया इस चीज को … और फिर त्यौहार की तैयारी में बिजी हो गया।

तैयारी के बहाने से अनाया मेरे पास कई बार आई, और मुझसे बार-बार टच हो रही थी।

फिर त्योहार भी बीत गया, सब अपने-अपने काम पे जाने लगे, घर में सिर्फ मैं, अम्मी, चाचा, और अनाया रह गई।

चाचा की भी एक दिन बाद ट्रेन थी।
मैंने देखा, कि अनाया चाचा के लिए खाना ला रही है।
वह चाचा को खाना देने के बाद उनके पास बैठ गई।
मगर दोनों में कोई बातचीत नहीं हुई।

फिर सोने का टाइम आया, तो चाचा अलग कमरे में और अनाया अलग कमरे में सोने चली गई।

मैं ये देख के चौंक गया।
मगर मैंने अभी कुछ नहीं पूछा और मैं भी सोने चला गया।

फिर अगले दिन चाचा चले गए।

अनाया आके मेरे पास बैठी, मगर उसने कुछ बोला नहीं।
मगर मैं देख पा रहा था कि हमेशा खुश रहने वाली अनाया अब बिल्कुल शांत थी।

“क्या हुआ है तुम दोनों के बीच, तुम दोनों साथ में क्यों नहीं सोते?” मैंने पूछा।

अनाया शांत थी, वो जवाब नहीं देना चाहती थी, मगर मुझे घूरता हुआ देख, “वो मुझसे प्यार नहीं करते, उन्होंने मुझे साफ मना कर दिया है।”
“ये तो नॉर्मल बात है कि प्यार नहीं करते, वैसे भी शौहर-बीवी में प्यार होने में थोड़ा टाइम लगता ही है।” मैंने कहा और उसके आँसू आते देख उसे पोंछा।

“आज रात, आप मेरे कमरे में आएँगे, मैं पूरी डिटेल से बताऊँगी.” अनाया ने कहा।

वैसे तो मैं नहीं जाना चाहता था, मगर उससे प्यार करता था, तो मान गया।
मैं उसे उदास नहीं देख सकता था।

रात को मैं उसके कमरे में चला गया।

उसका कमरा बिल्कुल सुहागरात वाले दिन की तरह सजा हुआ था।
“बैठिए.” उसने कहा और मैं उसके मुलायम गद्दे पे पहली बार बैठा।

उसके बाप ने बहुत अच्छा सामान दिया था।

“तो बताओ क्या बात है?” मैंने पूछा।
वो थोड़ा देर शांत रही, फिर उसने अपना मुँह खोला, “जिस दिन मैं शादी करके आई, और कमरे में उनका इंतजार कर रही थी। थोड़ी देर बाद वो आए, और मैं अब रेडी थी सुहागरात के कार्यक्रम के लिए। कि तभी, उन्होंने मेरी तरफ देखा और बोले कि भले ही तू मुझसे प्यार करती हो, मगर मुझे तू बिल्कुल पसंद नहीं। मैं किसी और लड़की से प्यार करता हूँ, और अगर तेरे माँ-बाप मेरी शादी नहीं लगाते तुझसे तो मैं उसी से शादी करता। तूने मेरी जिंदगी तबाह कर दी, तो मैं तुझे तलाक तो नहीं दूँगा, मगर तुझसे मेरा कोई रिश्ता नहीं रहेगा। और इतना कहके वो चले गए, और फिर उसके बाद वो मेरे कमरे में कभी नहीं आए। मैंने उन्हें बार-बार समझाने की कोशिश की, ठीक है रिश्ता ना रखें, मगर कम से कम हमारे कमरे में तो सोएं, मगर वो नहीं माने। पूरे एक साल से, उन्होंने मुझसे सही से बात ही नहीं की। मुझे तो समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूँ।”

इतना कहके वो रोने लगी।

मैंने उसे अपनी गोद में लिया और उसके आँसू पोंछने लगा, उसकी पीठ सहलाने लगा.
करीब आधे घण्टे बाद वो शांत हुई।

फिर वो मुझे देख के बोली, “और आपने भी, पूरे एक साल तक मेरी कोई खबर नहीं ली। आप मुझसे इतना नाराज हो गए थे।”

मैं उसे अब कैसे जवाब देता कि मैं तो उसकी इज्जत के लिए उससे सारे रिश्ते खत्म करना चाहता था।

“तो तुम अभी भी कुंवारी हो, तुम्हारी सील नहीं टूटी है?” मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या पूछूँ तो यही पूछ लिया।
वो अचानक से चौंक गई, फिर थोड़ी देर बाद वो बोली, “हाँ अभी भी मैं कुंवारी हूँ।”

मेरे हाथ उसके कपड़े के अंदर जाने लगे और मैंने उसके मम्मे पकड़ लिया, “तो मैं तुम्हारी सील तोड़ दूँ?” मैंने पूछा।
और फिर हमारे गुजरे दिनों की तरह उसने मुझे नहीं रोका उसकी चूचियों से खेलने से लगा मैं।

“नहीं आज रात, मत कीजिए, अभी ममिया यहीं पे हैं, कल वो आपकी नानी के यहाँ चली जाएँगी, कल कीजिएगा।” अनाया ने कहा.
मगर उसने मुझे उसके जिस्म से खेलने से नहीं रोका।

“ठीक है?” मैं थोड़ी देर और रुका, और फिर अपने रूम में आ गया.
क्योंकि अगर मैं ज्यादा देर रुकता, तो उसको चोद देता।

सुबह अम्मी आई।

“अनाया, अरहान का ध्यान रखना, और टाइम पे इसे खाना दे देना, और नहीं तो ये नहीं खायेगा।” अम्मी ने और भी बहुत कुछ अनाया को समझाया।

“हाँ ममिया, मैं इनका पूरा ध्यान रखूँगी,” अनाया ने बोला।
चूंकि अनाया हमारे घर पे बचपन से आती थी और मेरे अब्बू और अम्मी, उसके मामा और ममानी लगते थे तो वह शादी के बाद भी उसी तरीके से हमें बुलाती।

अम्मी नानी के यहाँ चली गई।
और घर में सिर्फ अनाया और मैं रह गए।

शाम हो गई थी।

“तो अनाया, रात को ही हम कार्यक्रम स्टार्ट करें या अभी?” मैंने अनाया को अपनी गोद में बैठा के पूछा।
“रुकिए एक मिनट!” अनाया मेरी गोद में से उठ के अपने कमरे में गई.
फिर वो, चाचा का दूल्हे वाला ड्रेस लेके आई।

“आप नहाने जाइए और फिर ये पहन के आइये,” अनाया ने चाचा का दूल्हे वाला ड्रेस देते हुए कहा।
“क्या बात है मेरी जान, मुझे दूल्हे के ड्रेस में देखना चाहती हो?” मैंने हँसते हुए पूछा।

उसने शर्मा कर मुझे देखा, “प्लीज आप नहा कर आइये!”
उसने मुझे बाथरूम की तरफ धकेला, “और नहाने के एक घंटे बाद आप मेरे रूम में आइयेगा.”
इतना कहके वो भी दूसरे बाथरूम में चली गई।

मैं बहुत खुश था.
भले ही मैंने बहुत सी लड़कियों को चोदा था, और कई तो शादीशुदा थीं। तो खास करके मुझे शादीशुदा महिला ज्यादा पसंद है।
मगर अनाया के लिए मेरे दिल में अलग ही जगह थी।

वो मेरी बचपन की प्यार थी।
और उसे मैं बचपन से ही अपने ब.च्चे की माँ बनाना चाहता था।
मैंने तो उससे शादी करने का सोचा भी था मगर किस्मत में कुछ और ही था।

लेकिन आज मेरी किस्मत बदलने वाली थी, आज मेरी अनाया मुझे अपना सबसे खास चीज देने वाली थी।

नहाने के एक घंटे बाद मैं अनाया के कमरे में घुसा।
तो मैंने देखा कि कमरा बिल्कुल सजा हुआ था।

यहाँ मैं पिछली रात ही था और बिल्कुल ये नॉर्मल था।
मगर आज यह सजा हुआ था।
चारों तरफ से फूलों की मालाएं लगी हुई थीं और बिस्तर पे भी गुलाब की पंखुड़ियां बिखरी हुई थीं।

और बिस्तर के बीचों-बीच, अनाया दुल्हन का ड्रेस पहन के बैठी हुई थी।

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