Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Bahan Chudai Kahani – बड़ी बहन ने दिया पहली चुदाई का आनन्द to make every night hot about Bahan Chudai Kahani – बड़ी बहन ने दिया पहली चुदाई का आनन्द story.
Story Start Here :
यह बहन चुदाई कहानी मेरे चाचा की लड़की के साथ सेक्स के मजे की है. एक शाम दिन ढले मैं अकेला मुठ मार रहा था कि उसने मुझे देख लिया. फिर हम दोनों ने सारी हदें पार कर दी.
यह कहानी बस कुछ ही समय पहले की है जब मुझे मेरी ज़िंदगी का पहला सेक्स अनुभव प्राप्त हुआ और वो भी मेरी अपनी ही बहन के साथ!
तो चलिए, बहन चुदाई कहानी शुरू करते हैं।
मैं 20 साल का एक नौजवान लड़का हूँ।
जैसे-जैसे जवानी आई, मुझे भी सेक्स की कमी महसूस होने लगी।
दिखने में मैं काफी खूबसूरत हूँ पर अब तक मुझे ऐसी कोई लड़की नहीं मिली थी जिसके साथ मैं सेक्स कर सकूँ।
परंतु एक दिन वो मौका भी आया, और वो भी अपनी चाचा की लड़की यानी मेरी बहन के साथ।
उसका नाम कोमल है और उम्र लगभग 22 साल है।
वह दिखने में हुस्न की बला है, उसे देखकर हर कोई पागल हो जाता है।
उसके शरीर की बनावट उसकी खूबसूरती को चार चाँद लगाती है।
उसके अंगों के तो कहने ही क्या! उसके स्तन (चूचे) मानो उसकी कुर्ती फाड़ कर बाहर निकलने को बेताब रहते हों, और उसकी गांड इतनी गोल और सुडौल है कि जो उसे एक बार जींस में देख ले, वो उसका दीवाना हो जाए।
हुस्न से भरपूर मेरी बहन के दीवाने तो हजार थे पर वह ज्यादातर किसी से बात करना पसंद नहीं करती थी और न ही बाहर घूमती थी।
उसके पापा, यानी मेरे चाचा की गाँव में एक लाइब्रेरी थी; वह अक्सर वहीं बैठकर पढ़ती थी।
मैं भी उसी लाइब्रेरी में पढ़ता था।
बाकी सारे लड़के छुप-छुप कर उसे देखते रहते थे।
शुरू में मेरे मन में उसके लिए ऐसे ख्याल नहीं थे, परंतु सेक्स न मिलने के कारण मैं हर किसी को ताकने लगा था।
मैं उनकी पीछे से मटकती हुई गांड देखने लगा।
एक बार तो स्थिति यह थी कि सेक्स स्टोरी साइट पर ‘Gay sex stories’ पढ़कर मेरा मन लड़कों के साथ भी संबंध बनाने का होने लगा था।
पर कुछ दिनों के बाद मुझे मौका मिला।
आमतौर पर कोमल जब भी लाइब्रेरी से उठकर जाती, मैं चुपके से उसे देखता रहता।
जब वह चलती, तो मैं उसकी गांड देखता और उसकी जींस के ऊपर से पैंटी की लाइन देख कर खुश होता।
कभी-कभी वह मुझे ताकते हुए देख भी लेती थी।
पर सेक्स न मिलने का सुरूर ही ऐसा था कि मैं अपनी हरकतों से बाज नहीं आता था।
कोमल के पापा और मम्मी प्राइवेट टीचर थे, इसलिए वे कभी-कभार शादी वगैरह में बाहर जाते थे, परंतु कोमल घर पर ही रहती थी।
कभी-कभी चाचा मुझे उसका ख्याल रखने को बोल कर जाते थे क्योंकि शाम 7 बजे के बाद लाइब्रेरी खाली हो जाती थी और अंत में मैं ही उसे बंद करता था।
मुझे शाम को खाली लाइब्रेरी में बैठकर सेक्स वीडियो देखते हुए हस्तमैथुन (मुट्ठी) मारने की आदत हो गई थी।
उस दिन भी ऐसा ही हुआ।
चाचा-चाची किसी शादी में गए थे और मुझे बोलकर गए थे कि हम रात को देर से लौटेंगे, तुम कोमल का ख्याल रखना।
शाम होते ही जैसे ही लाइब्रेरी खाली हुई, मैंने लाइट ऑफ कर दी और कोने में जाकर बैठने लगा।
तभी मुझे कोमल का रुमाल दिखा।
मैंने सोचा कि कोमल इससे अपने होठों को छूती होगी, तो क्यों न आज इसी पर अपना वीर्य निकाला जाए!
मैं ‘Stepsister Porn’ वीडियो लगाकर देखने लगा।
उस वीडियो की लड़की में मैं कोमल की छवि देख रहा था और धीरे-धीरे अपने लन्ड को हिला रहा था।
कोमल के रुमाल को सूंघकर मैं उसकी खुशबू महसूस कर रहा था।
मैं इस कदर खो गया कि मुझे पता ही नहीं चला कि कोमल कब धीरे से लाइब्रेरी के अंदर आ गई और मुझे पीछे से देखने लगी।
जब मैं अपने चरम पर था, मैंने अपना सारा वीर्य कोमल के रुमाल पर निकाल दिया।
तभी मैंने पीछे मुड़कर देखा तो मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं! एक बार के लिए तो मेरी गांड़ फट गई!
मैंने जल्दी से अपना लन्ड पैंट के अंदर किया और उसे ‘सॉरी’ बोलने लगा।
पर कोमल के चेहरे पर तो कुछ और ही हाव-भाव थे!
उसने बिना कुछ कहे अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए!
मैं डरा हुआ था, मैं थोड़ा दूर हुआ और कोमल की तरफ देखा।
उसने कहा, “तुम भी मेरे साथ करना चाहते हो? मैं तुम्हें रोजाना देखती हूँ मेरी गांड को घूरते हुए!”
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
तभी उसने फिर कहा, “मेरा भी बहुत मन करता है, पर मम्मी-पापा की सख्ती के कारण अब तक नहीं कर पाई!”
इतना कहकर उसने मुझे जोर से गले लगा लिया (हग कर लिया)।
मुझे भी इसी मौके की तलाश थी!
मैंने उसके गालों पर चुम्बन करना शुरू किया और धीरे-धीरे उसके होठों को अपने होठों के बीच ले लिया।
मेरे होंठ उसकी मिठास चख रहे थे और मेरे हाथ उसकी गांड़ को नाप रहे थे।
किस करते-करते मैंने धीरे से उसकी टी-शर्ट ऊपर उठाई और उसकी कमर को चूमना शुरू किया।
वह भी मानो पागल हो रही थी।
फिर मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी।
काली ब्रा के अंदर उसके चूचे देख कर मैं पागल हो गया और उन पर टूट पड़ा!
किसी बच्चे की तरह मैं उन्हें पीने लगा और वह हल्के-हल्के मीठे दर्द में कराहने लगी।
उसकी काली ब्रा उसके स्तनों की खूबसूरती को दोगुना कर रही थी।
उत्तेजना में मैंने उसकी ब्रा को जैसे फाड़ ही दिया!
अब मेरे हाथ उसकी गांड़ पर थे और उसके हाथ मेरे लन्ड पर।
हम दोनों एक-दूसरे में समा जाने को तैयार थे।
उसने मेरी टी-शर्ट उतार कर फेंक दी।
हम सेक्स की तलब में इतने खोए हुए थे कि लाइब्रेरी में कैमरों के नीचे ही इस खेल में लगे हुए थे।
अब मैंने उसकी पैंट को धीरे से नीचे खिसकाया।
उसकी काली पैंटी में उसकी गोरी-गोरी टांगें देख कर मैं मदहोश हो गया; मानो मैंने स्वर्ग देख लिया हो!
मैंने उसकी पैंट पूरी उतार दी, बस पैंटी छोड़ दी ताकि थोड़ी देर उससे और खेल सकूँ।
मैं और कोमल सेक्स की आग में पूरी तरह जल रहे थे।
मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी गांड़ को चूमा और उसकी चूत को महसूस किया।
कोमल भी मेरे लोड़े को देखने के लिए बेताब थी, जो पैंट के अंदर से बाहर निकलने को फड़फड़ा रहा था।
उसने मेरा लोअर उतारा और मेरे 7 इंच लंबे लन्ड के निकलते ही उसे अपने होठों से छू लिया!
मानो मेरी आत्मा ही निकल गई हो!
उसने धीरे-धीरे उसे किस किया और मुँह में लेने लगी।
थोड़ी देर ऐसा करने के बाद, मैंने उसका मुँह अपने वीर्य से भर दिया!
वह अपना मुँह और मेरा लन्ड पोंछने के लिए खड़ी हुई।
अब हम दोनों लाइब्रेरी से नंगे ही बाहर निकले क्योंकि बाहर कोई नहीं था।
चाँद की रोशनी में कोमल को नग्न देखकर मेरा मन किया कि उसे वहीं बाहर चोद दूँ.
पर डर भी था कि कोई देख न ले।
अंदर जाते समय उसकी गांड पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मार कर मैंने अपने दिल को खुश किया।
फिर हम दोनों घर के अंदर आ गए।
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जैसे ही हम लाइब्रेरी से निकलकर घर के अंदर दाखिल हुए, बाहर की ठंडी हवा ने हमारी उत्तेजना को और भी भड़का दिया था।
घर में सन्नाटा था, पर हमारे दिलों की धड़कनें साफ सुनाई दे रही थीं।
कोमल का गोरा बदन चाँदनी में चमक रहा था और उसकी मटकती हुई गांड़ देखकर मेरा संयम जवाब दे रहा था।
जैसे ही मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया, कोमल ने मुड़कर मुझे बाहों में भर लिया।
उसने मेरी आँखों में झांकते हुए कहा, “अब और इंतज़ार नहीं होता, आज मुझे पूरी तरह अपना बना लो!”
मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसके ऊपर आ गया।
उसके रेशमी बदन का अहसास मेरे ७ इंच लंबे लन्ड को और भी सख्त कर रहा था।
मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया और हाथ नीचे ले जाकर उसकी पैंटी को धीरे-धीरे उसकी जांघों से नीचे उतार दिया।
अब वह मेरे सामने पूरी तरह निर्वस्त्र थी— हुस्न का एक ऐसा खजाना जिसे मैं सालों से पाना चाहता था।
मैंने उसकी दोनों टांगों को फैलाया और उसकी चूत की सुर्खी देखकर दंग रह गया।
वह बिल्कुल साफ और गुलाबी थी।
मैंने झुककर अपनी जीभ से उसे सहलाना शुरू किया, तो कोमल बिस्तर की चादरें मुट्ठी में भींचने लगी।
वह सिसकते हुए बोली, “आह्ह्ह… ये क्या कर रहे हो! बहुत अजीब पर बहुत अच्छा लग रहा है!”
मैंने अपनी उंगलियों से उसकी गांड़ के छेदों को सहलाया और फिर धीरे-धीरे अपना लन्ड उसकी चूत के मुहाने पर सेट किया।
जैसे ही मैंने थोड़ा दबाव डाला, कोमल ने एक चीख मारी और मेरे कंधे पर अपने नाखून गड़ा दिए।
वह पहली बार कर रही थी, इसलिए उसकी चूत काफी तंग थी।
मैंने रुककर उसके माथे को चूमा और कहा, “घबराओ मत कोमल, बस थोड़ा सा दर्द होगा, फिर मज़ा आएगा!”
मैंने एक जोरदार धक्का मारा और मेरा आधा लन्ड उसकी गहराई में समा गया।
कोमल की आँखों से आँसू निकल आए, पर साथ ही वह अपनी कमर ऊपर की तरफ उछालने लगी।
धीरे-धीरे मैंने अपनी बहन चुदाई की रफ़्तार बढ़ाई।
कमरे में मांस से मांस टकराने की ‘चप-चप’ आवाज़ गूँजने लगी।
मैं उसकी गांड़ के नीचे तकिया रखकर उसे और भी गहराई से चोदने लगा।
कोमल अब पूरी तरह खुल चुकी थी।
वह चिल्ला रही थी, “हाँ… और ज़ोर से! मुझे ऐसे ही चोदो! आज सारा दर्द निकाल दो!”
हम दोनों पसीने से लथपथ थे।
मैं उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए उसे कुतिया (Doggy style) बनाकर चोदने लगा।
उसकी हिलती हुई गांड़ का नज़ारा मुझे पागल कर रहा था।
तभी अचानक बाहर मुख्य दरवाजे पर दस्तक हुई—’खट-खट-खट’।
हमारी सांसें थम गईं।
कोमल के चेहरे से हवाइयाँ उड़ने लगीं।
उसने फुसफुसाते हुए कहा, “मम्मी-पापा तो इतनी जल्दी नहीं आने वाले थे! ये कौन हो सकता है?”
गांड फटकर हाथ में आ गई थी।
मैंने जल्दी से अपना लन्ड बाहर निकाला और अपनी पैंट पहनी।
कोमल ने भी जैसे-तैसे अपनी कुर्ती डाली।
मैंने खिड़की से झाँक कर देखा तो वहाँ गाँव का चौकीदार और उसके साथ दो अजनबी लड़के खड़े थे, जो लाइब्रेरी के पास चक्कर काट रहे थे।
उन्हें शायद हमारी आहट मिल गई थी।
चौकीदार ने ज़ोर से चिल्लाकर कहा, “कोमल बिटिया! दरवाजा खोलो, लाइब्रेरी की लाइट खुली रह गई है और हमें कुछ संदिग्ध लगा!”
कोमल ने मुझे अलमारी के पीछे छुपने का इशारा किया और खुद बाल बिखेरते हुए दरवाजा खोलने गई।
जब उसने दरवाजा खोला, तो उन लड़कों की नज़रें कोमल के अस्त-व्यस्त कपड़ों और उसके उभरे हुए सीने पर टिक गई थीं।
चौकीदार ने शक भरी निगाहों से पूछा, “तुम इतनी घबराई हुई क्यों हो? और ये पसीना कैसा?”
कोमल ने हिम्मत जुटाकर कहा, “कुछ नहीं काका, मैं सो रही थी और सपना देखकर डर गई थी। लाइब्रेरी मैं अभी बंद करके आई हूँ!”
पर उन लड़कों में से एक, जो गाँव का सबसे बड़ा बदमाश था, मुस्कुराते हुए बोला, “झूठ मत बोलो कोमल, हमने लाइब्रेरी के शीशे से जो देखा है, अगर वो तुम्हारे पापा को पता चला तो क्या होगा?”
कोमल का शरीर कांपने लगा।
उसने उन लड़कों की आँखों में वही हवस देखी जो अब उसके लिए मुसीबत बनने वाली थी।
उन लड़कों ने एक शर्त रखी— अगर कोमल उन्हें भी वही ‘सुख’ दे जो वह अंदर दे रही थी, तो वे राज़ दफन रखेंगे।
कोमल ने मेरी तरफ देखा, जो अंधेरे में छुपा सब सुन रहा था।
उसकी आँखों में बेबसी थी।
चौकीदार और उन दोनों लड़कों की आँखों में जो हवस थी, उसे देखकर कोमल के पैर काँप रहे थे। उस बदमाश लड़के, जिसका नाम विक्की था, उसने कोमल के कंधे पर हाथ रखा और फुसफुसाते हुए बोला, “अंदर कौन है हमें सब पता है, अगर चाहती हो कि बात बाहर न जाए, तो हमें भी थोड़ा चखने दो।”
कोमल ने बेबसी में मेरी तरफ देखा।
मैं अलमारी के पीछे छुपा हुआ था और मेरा खून खौल रहा था, पर अगर मैं बाहर आता तो बात और बिगड़ जाती।
कोमल ने हिम्मत जुटाई और कांपती आवाज़ में कहा, “ठीक है… पर काका को घर जाने दो, तुम दोनों अंदर आ जाओ।”
चौकीदार को कोमल ने कुछ पैसे देकर चलता किया।
जैसे ही वह गया, विक्की और उसका दोस्त लाइब्रेरी के उसी केबिन में घुस गए जहाँ हम थोड़ी देर पहले थे।
कोमल ने मुझे इशारे से वहीं छुपने को कहा और खुद उनके साथ चली गई।
अंदर जाते ही विक्की ने कोमल को दीवार से सटा दिया।
विक्की बोला, “वाह! क्या माल है, आज तो मज़ा आ जाएगा!”
कोमल ने कहा, “प्लीज… जल्दी करो, मेरे पापा आते ही होंगे!”
उसने अपनी कुर्ती उतारी।
उन दोनों भेड़ियों की नज़रें कोमल के गोरे बदन पर जम गईं।
विक्की उसके जिस्म को सहलाने लगा.
पर तभी मैंने देखा कि कोमल ने मेज़ पर रखा एक भारी पेपरवेट उठा लिया था।
जैसे ही विक्की उसके करीब आया, कोमल ने पूरी ताकत से उसके सिर पर दे मारा!
विक्की लहूलुहान होकर ज़मीन पर गिर पड़ा।
उसका दोस्त घबरा गया, पर इससे पहले कि वह चिल्लाता, मैं अलमारी के पीछे से निकला और उसे पीछे से दबोच लिया।
मैंने उसे ज़ोर से धक्का दिया और वह रैक से टकराकर गिर गया।
मैंने कोमल का हाथ पकड़ा और हम भागकर घर के पिछले दरवाज़े से अंदर आ गए।
हम दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे।
कोमल ने मुझे गले लगा लिया और फूट-फूट कर रोने लगी।
उसने सुबकते हुए कहा, “अगर तुम नहीं होते तो आज मेरा क्या होता!”
मैंने उसे शांत कराया और उसके कपड़े ठीक किए।
हमने तय किया कि हम किसी को कुछ नहीं बताएंगे।
कुछ देर बाद जब चाचा-चाची आए, तो हमने ऐसा नाटक किया जैसे हम सो रहे थे।
अगले दिन पता चला कि विक्की और उसके दोस्त ने चोरी के इरादे से लाइब्रेरी में घुसने की कहानी गढ़ी थी ताकि वे पकड़े न जाएं।
उस रात के डर ने हमारे बीच के रोमांच को और गहरा कर दिया था।
अब जब भी चाचा-चाची बाहर जाते हैं, लाइब्रेरी की वो काली ब्रा और कोमल की मटकती बहन की गांड मेरा इंतज़ार करती है।
जल्द ही मैं हाजिर होऊँगा आगे की कहानी लेकर, तब तक आप एन्जॉय कीजिए!
और मुझे बताना न भूलें कि बहन चुदाई कहानी कैसी लगी!
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