Sex Feeling Story – पुत्र वधू के प्रति कामवासना का उद्भव

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Story Start Here :

सेक्स फीलिंग स्टोरी में मेरे बेटे की शादी के बाद घर में मैं और मेरी बहू ही होते हैं दिन में. एक दिन मुझे चक्कर सा आया तो मेरी बहू ने मुझे सम्भाला.

दोस्तो, मैं आपका प्यारा शरद एक बार फिर आपके सामने एक नई कहानी के साथ प्रस्तुत हूँ।

वैसे दिल की बात बताऊँ कि कोई जबरदस्त कहानी नहीं है मेरे दिमाग में, इसलिये कहानी लिखने का मन नहीं करता।

मेरे चाहने वाले बार-बार मुझे एक नई कहानी लिखने के लिये कह रहे थे और साथ ही सुझाव दे रहे थे कि रिश्तों में चुदाई की कहानी हो तो और भी मजा आ जाए।

मैंने भी इस बारे में काफी सोचा और यही दिमाग में आया कि बहू की चुदाई की कहानी सही रहेगी।
चूंकि यह सेक्स फीलिंग स्टोरी काल्पनिक रहेगी तो आप सिर्फ मनोरंजन के लिए इस कहानी का आनंद लें।
पढ़ने के बाद अपनी राय जरूर दें कि आपको कितना मजा आया।

इस कहानी को मैंने ही लिखा है तो नायक मैं ही हूं।

मेरी बहू का नाम मरियम और बेटे का नाम सुमित मैंने रखा है।
तो कहानी शुरू करता हूं।

मेरी पत्नी को गुजरे हुए यही कोई दो वर्ष बीत चुके थे।
पिछले साल ही मैंने अपनी बेटी की शादी एक अच्छे खासे परिवार में कर दी थी।
लेकिन दिक्कत उसकी विदाई से होनी शुरू हो गयी।

अब सवाल यह था कि खाना कैसे बनेगा, कौन बनायेगा।
बहुत विचार करने के बाद एक खाना बनाने वाले रसोईये को रख लिया।
बेटी के जाने के बाद सब उथल-पुथल हो चुका था।

हम लोग (मैं और मेरा बेटा सुमित) न खाना समय पर खाते थे और न ही हम दोनों का मन होता था।
फिर कुछ दिन बाद मेरी साली साहिबा आयी और हमारे घर की हालत को देखते हुए मुझसे और सुमित से बोली कि सुमित को शादी कर लेनी चाहिये।

चूंकि सुमित अच्छा खासा कमा रहा था और परिवार की जिम्मेदारी अच्छे से निभा रहा था तो मुझे कोई आपत्ति नहीं थी और सुमित भी मान गया था।

तो मेरी साली साहिबा ने सुमित से कहा- सुमित, यदि तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड हो तो बता दो, उसी से शादी करा देंगे। जीजाजी को इसमें कोई परेशानी नहीं है।

लेकिन सुमित ने उल्टा अपनी मौसी पर ही भरोसा जताते हुए बोला कि वो जिस भी लड़की से शादी करने के लिये कहेगी, वो उसी से ही शादी कर लेगा। बस वो इस घर का ध्यान रखे और हो सकता है कि उसे ज्यादा बार अपने घर जाने का मौका ना मिले।

अगले छ: महीने में मेरी साली नम्रता अपनी सहेली, जिसका नाम आयशा था, की बेटी मरियम का रिश्ता लेकर आयी और मरियम सुमित को भी अच्छी लगी।
मरियम बला की खूबसूरत है, हुस्न की परी उर्वशी रौटेला जैसी.
मरियम ने भी हमारे घर की परिस्थियों से सामंजस्य बैठाने का वादा किया था।

इतनी सुन्दर लड़की पाकर हमने धर्म का विचार भी नहीं किया.

फिर एक दिन मरियम हमारे घर की बहू बनकर हमारे घर की चौखट को पार करके अंदर आ गई।
उसके आने से घर में चारों तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ थीं।

मरियम ने मानो पूरे घर को खुशियों से भर दिया था।
सुमित के चेहरे की रौनक बढ़ गई थी।

मेरी प्यारी बहू मेरा बहुत अच्छे से ध्यान रखती थी।

कैसे दो साल बीत गए पता ही नहीं चला।
मगर अनहोनी कब घट जाए पता ही नहीं चलता।

अचानक एक अनहोनी मेरे और मेरी प्यारी बहू मरियम के बीच घट गई।

एक सुबह सुमित अपने काम पर चला गया।
मैं नाश्ता करने के बाद आराम कर रहा था और शायद बहू अपना काम निपटाने के बाद नहाने गई थी।

तभी पता नहीं मुझे क्या हुआ कि एकदम से मैं कुर्सी से नीचे गिर पड़ा, और लगभग अचेत हो गया।
‘धम्म’ की आवाज सुनकर मरियम दौड़ी आई- क्या हुआ पापाजी, क्या हुआ पापाजी?

मुझे याद है कि मेरी आँखें बोझल हो रही थीं।
तभी मरियम ने मेरे सिर को अपनी गोद में रखा और सुमित को कॉल लगा कर मेरी स्थिति से अवगत कराया।
लेकिन मेरे नथूने में मरियम के जिस्म से आती हुई भीनी-भीनी खुशबू समा रही थी और उसके बालों से रिसते हुए पानी की बूँदें मेरे ऊपर गिर रही थीं।

तभी अचानक से मुझे उल्टी हो गई।
मरियम थोड़ा और घबराते हुए मेरे ऊपर झुक गयी और इसके कारण उसके दूध मेरे चेहरे और मुँह से टच कर रहे थे।

एक के बाद एक, दो उल्टी मुझे हो गई।
मरियम ने जो कपड़े पहने हुए थे वो खराब हो गए।

इसी बीच सुमित आ गया।

वह भी परेशान हो गया।

आते ही उसने मुझे सँभाला और मरियम को कपड़े चेंज करने के लिए बोला।

इस बीच मुझे थोड़ा सा होश आने लगा।
सुमित फुसफुसाते हुए मरियम से बोला- जाओ जल्दी से अपने कपडे चेँज करो, अगर पापा को होश आ गया और तुम्हें ऐसे गाउन में देख लेते तो?
जवाब में मरियम ने कहा- मैं क्या करती सुमित? अचानक से पापा गिर पड़े तो मैं क्या करती?

न चाहते हुए भी मैंने अधखुली आँखों से मरियम को देखा।
वो एक पीली कलर की झीनी सी गाउन पहने हुए थी जिसमें से उसका नंगा बदन झाँक रहा था।
वो जब वापस जाने लगी तो उसके चूतड़ हिल रहे थे।

इस बीच सुमित ने मुझको अच्छे से सँभाला और होश में आने के बाद मेरा हाल चाल लेते हुए बोली- पापा, अगर ज्यादा तबियत खराब हो तो डॉक्टर के पास चलें?
मैंने उसको मना कर दिया।

तब तक मरियम भी वापस आ चुकी थी उसकी नजरें थोड़ा झुकी हुई थीं।
मैं उसकी झुकी हुई नजरों के कारण को समझ सकता था।

बात आयी गयी हो गयी और फिर दिन बीतने लगे।

कुछ समय बीत जाने के बाद एक दिन फिर मुझे उसी तरह का दौरा पड़ा और मैं जमीन पर गिरने वाला ही था कि मरियम ने मेरा पूरा बोझ अपने ऊपर ले लिया और मुझे सँभाल लिया।

वह सुमित को फोन करने वाली ही थी कि मैंने उसे रोक दिया।
मगर वो कहाँ मानने वाली थी … मेरे लाख मना करने के बाद भी मरियम ने सुमित को फोन लगा दिया।

सुमित एक बार फिर मेरी वजह से हाँफते-काँपते घर आया और जिद करके मुझे हॉस्पिटल ले गया जहाँ मुझे दो दिन के लिए भर्ती किया गया।

दो दिन तक मेरी प्यारी बहू ने मुझे एक पल भी नहीं छोड़ा।
घर आने के बाद भी वो मेरे साथ लगी रही।

अब चूँकि मेरी नजर उसके प्रति बदल चुकी थी तो उसका हर एक स्पर्श मुझे अच्छा लगता था।
उत्तेजना की एक अलग से अनुभूति होती थी।

इस दरम्यान एक बार भी मैंने सुमित के बारे में नहीं सोचा कि मरियम उसकी बीवी है, न कि मेरी।
मैं लाख अपने को समझाने की कोशिश करता पर शायद मैं वासना के अभिभूत अंधा हो चुका था और मुझे कुछ अच्छा बुरा नहीं समझ में नहीं आ रहा था।

खैर मरियम क्या सोच रही थी मुझे नहीं मालूम लेकिन इस समय एक पत्नी की ही तरह वो मेरी देखभाल कर रही थी और उसकी इस सेवा से मैं जल्दी ही रिकवर हो गया।

फिर एक दिन वो भी आया जहाँ से चीजें बदलने वाली थी।

सुमित के ऑफिस जाने के बाद मरियम मेरे और अपने लिये चाय लेकर आयी और मुझे देते हुए बोली- पापा जी, एक बात पूँछू?
“हाँ पूछो?” मैंने कहा।

मरियम फिर बोली- पापा जी, सच-सच बताना।
जब उसने ये ‘सच-सच’ शब्द बोला तो मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी।
अपनी धड़कनों पर काबू करते हुए मैं बोला- हाँ-हाँ बोल बेटा, सच ही सच बताऊँगा।

मरियम- डॉक्टर ने बोला है कि आप बहुत सोचते हैं।
मैं- नहीं, बेटा ऐसी कोई बात नहीं है।

वो अपने हाथ में मेरा हाथ लेते हुए बोली- पापा, अभी आपने सच बोलने का वादा किया है।
मैं- लेकिन बेटा, ऐसी कोई बात नहीं है।

वो थोड़ा तुनकते हुए बोली- कोई बात नहीं है पापा, मत बताईये। अब मैं आपसे बात नहीं करूँगी।

बात हाथ से न फिसले, इसलिये मैंने मौका जाने देना उचित नहीं समझा।

मैं- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, लेकिन तुम जिद कर रही हो तो मैं बता देता हूँ, पर मेरी शर्त है।
‘क्या?’ मरियम ने मुझे देखते हुए कहा।

मैं- पहले वादा करो कि मैं जो तुमको बताऊँगा वो तुम सुमित या अन्य किसी से कभी भी नहीं बताओगी और न ही मुझसे बात करना बंद करोगी। हाँ, चाहे तो तुम मुझसे नाराज रह सकती हो।
मरियम- ‘हम्म’ …
कहते हुए उसने अपनी उँगली अपनी ठुड्डी पर रखी और कुछ देर तक सोचने की मुद्रा में रही और फिर बोली- ठीक है।

मैं- तुम्हें याद है जब मैं पहली बार बेहोश हुआ था तो तुमने मेरे सिर को अपनी गोदी में रखा था।
मरियम- हाँ मुझे याद है पापा!

मैं- बस वो सीन मैं अभी तक नहीं भुला पा रहा हूँ और सुमित ने जब तुमसे कपड़े बदलने के लिये कहा था तो मैंने तुम्हें जाते हुए देख लिया था। तब से वही सीन मेरे दिमाग में छाया हुआ है। मैं बस एक बार उसी ड्रेस में, तुमको उसी अवस्था में देखना चाहता हूँ। और चाहता हूँ कि तुम एक बार उसी तरह से मेरे सिर को अपनी गोद में ले लो।

मरियम एक झटके से उठी।
मेरे मुँह से तुरंत ‘सॉरी’ निकला और मैंने अपने कान पकड़ लिये।

लेकिन वो मेरी तरफ बिना देखे चली गई।
मेरी इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि मैं उसे रोक लूं।

मैं अपने आपको कोसते हुए वापस अपने बेड पर लेट गया।
मेरी आँखों में आँसू आ गये थे- यह मैंने क्या कर दिया … मैं अपने ही घर में अपनी ही बहू को बुरी नजर से देख रहा था।
कहीं दिल के कोने में डर भी था कि मरियम सुमित को बता देगी।

इसी ग्लानि ने काफी देर तक मुझे घेरा हुआ था।

मगर कोई आधे घंटे के बाद मेरे सिर पर मरियम का हाथ मुझे महसूस हुआ।
फिर उसने आंखों पर हाथ रख दिया।

उसने मुझे उठाते हुए कहा- पापा, अपनी आँखे मत खोलियेगा।
कहकर उसने मेरे सिर को अपनी गोद में रख लिया।

उसके जिस्म से वही खुशबू आ रही थी।
मैंने आँखें खोलनी चाहीं तो मेरी आँखों के ऊपर अपने हाथ को रखकर वो बोली- आँख मत खोलिये, मुझे शर्म आ रही है।

मैं- थैक्यू बेटा।
मैंने एक आह … भरते हुए कहा- तुम्हारी सुगंध मेरे नथूनों मे भर गई, कितनी मादक है ये!

फिर वो मेरी तरफ हल्की सी झुकी।
उसने एक हल्की सी सांस खींची और अपनी छाती का दबाव मेरे सिर के ऊपर देने लगी।
ठीक उस दिन वाला अहसास आने लगा था।

उसके मुलायम-मुलायम दूध का दबाव मेरे ऊपर था।

मैं बस अपनी आँखें बंद किये उसके जिस्म से आती हुई सुगंध का आनंद ले रहा था जबकि मरियम मेरे चेहरे को सहला रही थी।

कुछ देर बाद बोली- पापा, अब मैं जाऊँ? आपके लिये चाय नाश्ता भी बनाना है … हम्म?
मैं- मन तो नहीं कर रहा है मेरा, पर रोकूँगा भी नहीं।

मरियम- आँखें मत खोलियेगा।
वो मेरे सिर को हटाने का यत्न करती … उससे पहले ही मैंने अपने सिर को हटा दिया और साइड करवट ले ली।
मरियम- पापा, प्लीज आँखें मत खोलियेगा।

मैं- ठीक है, पर एक शर्त है।
मेरी हिम्मत खुलने लगी थी और मुझे मजा भी आने लगा था।
शायद ये मजा उसको भी आ रहा था।

वो बेड से उतरते हुए बोली- क्या शर्त है?
मैं- जब वापस आना तो इन्हीं कपड़ों में आना।
मरियम- पापा, अब आप शैतानी कर रहे हैं।

वो कहते हुए रसोई की तरफ चल दी और मैं उसी तरह कनखियों से उसे देख रहा था।
मतलब मरियम को भी पराये मर्द का मजा लेना था इसलिये उसने मेरी बात रख ली थी।
वो मटकते हुए चल रही थी, जिससे उसकी गांड पेंडुलम की तरह ऊपर-नीचे हो रही थी।

वैसे तो सेक्स में मैं बहुत ही गंदा था, मैं और मेरी बीवी चुदाई के समय किसी चीज से परहेज नहीं करते थे।
लेकिन उसके इस दुनिया से जाने के कारण मेरी जिंदगी वीरान हो चुकी थी।

बीवी को चोदते समय उसकी चीख जब निकलती थी तो मुझे और मजा आता था.
लेकिन मरियम मेरी बहू थी और उससे फिलहाल मुझे बहुत धीरे-धीरे और मजे के साथ खुलना होगा ताकि वो बिना झिझक मुझसे अपनी चुदाई करवाने के लिए बोले।

जब वो मेरी नजरों से ओझल हो गयी तो मैं उसके यौवन के बारे में सोचने लगा।
जब वो मटकते हुए जा रही थी तो कितनी मस्त लग रही थी।
यही सेक्स फीलिंग सोच कर मेरे लंड में तनाव आने लगा था।

कुछ देर बाद ही मरियम चाय के साथ कमरे में आयी और अपनी खनकती हुयी आवाज में बोली- पापाजी, चाय।
मैंने तुरंत ही अपनी आँखें खोलीं।

मेरी आँखें फटी की फटी ही रह गयीं।
क्या यौवन पाया था मरियम ने … अभी भी कच्ची कली ही नजर आ रही थी।

मेरी नजर उसकी तरफ से हट ही नहीं रही थी।
उसकी तनी हुई चूचियां, उसके चूचक, योनि … सब स्पष्टता के साथ मुझे दिखाई पड़ रहे थे।

वो मेरी तरफ चाय का प्याला बढ़ाते हुए बोली- पापाजी, मन भर कर देख लीजिए, मगर इसके आगे अब मैं कुछ नहीं करूँगी।
मैं- नहीं बेटा, मुझे इसी में आनंद प्राप्त हो रहा है।
मैंने चाय का प्याला लेते हुए उसकी तरफ देखकर कहा.

मैं- बहुत ही सुंदर अंग हैं तुम्हारे … सुमित की तो लॉटरी ही निकल गयी।
मरियम- हाँ आज आपने भी उस लॉटरी में हाथ डाल लिया है।

हम दोनों साथ में चाय पीते रहे, फिर वो उठी और घर के बाकी काम निपटाने लगी और साथ ही उसने अपने कपड़े भी चेंज कर लिये।

इस तरह तीन दिन बीत गये लेकिन बात आगे बढ़ नहीं पा रही थी।
पता नहीं वो मेरी परीक्षा ले रही थी या वास्तव में नहीं चाहती थी कि उसके आगे कुछ हो।

सोच में पड़ गया था मैं।
करूँ तो क्या करूँ?

मुझे कुछ समझ मे नहीं आ रहा था।
इसी उधेड़बुन में था।

आने वाले दिन में उसका जन्मदिन था और मुझे इस दिन का पूरा फायदा उठाना था।
क्या मैं ऐसा कर पाया?
कहानी के अगले भाग में आपको बताता हूं।

आपको यह सेक्स फीलिंग स्टोरी कैसी लगी मुझे जरूर इस पर अपनी राय दें।
आपके फीडबैक से ही कहानी लिखने की प्रेरणा मिलती है।
आप मुझे कमेंट बॉक्स में अपनी राय बता सकते हैं या फिर ईमेल पर आपके प्यारे संदेश भेज सकते हैं।

मुझे आप सभी प्यारे पाठकों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।
जल्द ही सेक्स फीलिंग स्टोरी के अगले भाग में मिलेंगे।
मेरी ईमेल आईडी नीचे दी हुई है।
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