Jawan Bahu Fuck Story – सेक्सी बहू की पहली चुदाई का मजा

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Story Start Here :

जवान बहू फक स्टोरी में बहू ने मुझे अपनी जवानी के दर्शन अपने जालीदार गाउन से करवा दिए तो बहू का कोमल जिस्म देखकर मेरे अंदर का मर्द बेचैन हो गया। मुझे इससे ज्यादा की भूख लगी थी.

दोस्तो, मैं आपको अपनी बहू की चुदाई की कहानी बता रहा था जिसके पहले भाग
पुत्र वधू के प्रति कामवासना का उद्भव
में मैंने बताया था कि कैसे मुझे अपनी बहू मरियम के जिस्म की तरफ आकर्षण हो गया था।
मेरे कहने पर उसने मेरी इच्छा भी पूरी कर दी और मुझे गाउन में अपने खूबसूरत जिस्म के दर्शन भी करवाए।

लेकिन कहते हैं कि हवस की भूख ऐसी … जितनी मिटाओ उतनी बढ़े।
मैं अब कुछ और भी चाहता था।

अगले दिन मरियम का बर्थडे था और मुझे इस दिन का पूरा फायदा उठाना था।

अब आगे की जवान बहू फक स्टोरी:

कल मरियम का बर्थडे आने वाला था।
मैं उसको बर्थडे गिफ्ट देने के बारे में सोच ही रहा था कि वो पारदर्शी गाउन में मेरे सामने आ खड़ी हुई।
उसके हाथ में चाय थी।

उसने मुझे झकझोरते हुए पूछा- पापा … क्या सोच रहे हैं आप?
मैं- कुछ नहीं, हाँ … एक बात बताओ! तुम्हारा साईज क्या है?

वो बोली- 32-34-36। लेकिन मेरी साईज क्यों पूछी आपने?
मैं- तुम बहुत सेक्सी हो, तुम्हारी बॉडी परफेक्ट है।

थोड़ी देर वो मेरे साथ बैठी रही और फिर अपना आगे का काम निपटाने के लिये मेरे कमरे से बाहर आ गयी।
मैं बस बेबस सा उसकी हिलती हुई गांड को देखता रहा।

जबरदस्ती करने का मतलब था कि कुछ भी बवाल होना … और मैं नहीं चाहता था कि ऐसा कुछ हो।

हालाँकि मैं यह भी अच्छी तरह जान पा रहा था कि हल्की सी जबरदस्ती और मान मनोव्वल करूँगा तो शायद वो मेरे नीचे आने को तैयार हो जाये.
लेकिन मजा तो तब है कि उसकी सहमति हो न कि मेरी जबरदस्ती।

मैं अपनी सोच के साथ बालकनी में टहलने लगा.
तभी मेरी नजर उसकी पैंटी और ब्रा पर पड़ी।

आज से पहले कभी भी मैंने उसके अंडरवियर बाहर इस तरह से नहीं देखे थे।
मुझे एक रास्ता तो उसकी इच्छा जानने के लिए मिल ही गया था।

मैंने उसकी पैंटी और ब्रा को बारी-बारी से देखा.

और फिर जब शहर की मार्केट खुल गयी तो मरियम को बताकर मैं बाहर आ गया।

मैं एक ऐसी दुकान में घुस गया जहाँ लोग कम थे।
बड़ी मुश्किल से एक डिजायनर और मँहगी पैंटी-ब्रा मैंने खरीद ली।

मैंने यह भी सोच लिया था कि उसकी नजर कैसे इस पैंटी ब्रा पर गिरानी है।
अब मुझे मरियम का रिएक्शन देखना था जिसमें उसकी सहमति या असहमति होनी थी।

मेरे लिए आज का दिन बड़ी मुश्किल से कटा।
और रात तो उससे भी ज्यादा भारी लग रही थी।

एक तरह से पूरी रात मैंने करवटे लेते हुए बदली।

दूसरे दिन मैं बस सुमित के जाने का इंतजार कर रहा था।
मैंने उन दोनों को बातें करते हुए भी सुना था कि सुमित आज घर जल्दी आ जायेगा और फिर आज दोनों लोग बाहर जाकर मरियम का बर्थडे सेलीब्रेट करेंगे।

सुमित जैसे ही ऑफिस के लिये निकला, मैंने बाथरूम में जाकर लायी हुई पैंटी ब्रा को टाँग दिया।
साथ ही मैं उसके उस गाउन को अपने साथ ले आया और अब बाकी का काम मरियम के ऊपर छोड़ दिया।

मैं बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार कर रहा था।
ऐसा लग रहा था कि समय कट ही नहीं रहा है।

मगर मरियम अपने ही समय पर दोनों के लिये चाय लेकर आ गयी।
मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था।

वो मेरी लायी हुई पैंटी-ब्रा में ही आयी थी।
मुझे ऐसा लगा कि वो टू पीस मरियम के दूध जैसे उजले जिस्म के लिये ही बना है, बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।
इस टू पीस में उसकी चाल भी बड़ी कातिलाना लग रही थी।

मैंने तुरंत ही उसके हाथ से चाय की ट्रे ली और उसकी कमर को अपनी बाँहों के घेरे में लेकर उसे बर्थडे विश किया और बोला- बहुत ही सुंदर, सेक्सी और मेरे ऊपर कहर ढहाने वाला रूप लेकर आई हो।
वो हँसते हुए बोली- पापा, मैं अपने इस बर्थ डे गिफ्ट को कभी भी नहीं भूलूँगी।

फिर वो मुझसे थोड़ा दूर हटकर घूम-घूमकर अपना जलवा बिखेरने लगी।
फिर हम दोनों ने चाय साथ पी।

अब घर का बाकी काम निपटाने के लिए जब वो जाने को हुई तो मैंने मरियम को पीछे से पकड़ लिया।

मैंने बोला- मेरा गिफ्ट?
मरियम- पहन तो लिया आपका गिफ्ट! अब क्या?

मैंने उसकी खुली पीठ पर एक चुम्बन दिया और बोला- तुम समझ तो रही हो कि मुझे गिफ्ट में क्या चाहिये … ध्यान से सोचकर, देखकर बताओ।

मरियम के ख्यालों में खोने के कारण मेरे लंड में तनाव था और मरियम से चिपके हुए होने के कारण उसके चूतड़ों से टच हो रहा था।
शायद मरियम को भी इसका अहसास हो रहा था।

उसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने उसके हाथ से ट्रे लिया और एक किनारे रखते हुए उसको अपनी गोद में उठाया।
इधर उसने भी विरोध नहीं किया।
हाँ, बस अपनी आँखें बंद कर ली थीं।

मैंने उसे पलंग पर लेटाया और उसके अधरों पर एक चुंबन जड़ दिया।
विरोध अभी भी नहीं था, बस वो शर्म ही उसे मुझसे खुलकर न बोलने के लिये विवश कर रही थी।

मैंने अपना काम जारी रखा।
मैंने उसके अधरों के बाद, पलकों को चूमा, कानों को चूमा, गर्दन को … फिर बारी-बारी से उसके अंगों को चूमते हुए नीचे की तरफ आने लगा।

मैंने उसके स्तनों के पास आकर उसकी ब्रा को उसके स्तनों से हटाया और निप्पल पर अपनी जीभ चलाने लगा।
मैंने जब मरियम के रिएक्शन को देखा तो मरियम अपने होंठों को कसकर अपने दाँतों के बीच भींचे हुए थी और अपनी पलकों को कसकर बंद कर रखी थी।

मैं उसके निप्पल को बारी-बारी से चूस रहा था।
इस बीच मैं भी पूरी तरह से नंगा हो गया था।
मेरे लंड में तनाव बढ़ता ही जा रहा था।

थोड़ी देर बाद मैं उसकी नाभि में जीभ चलाने लगा और साथ ही उसकी पैंटी को जिस्म से अलग करने लगा।

उसने भी अपनी कमर उचकाकर पैंटी को अपने जिस्म से अलग होने में मेरी मदद की।
एक हल्का सी उँगली मैंने उसकी चूत में फेरी, चूत गीली थी।

मैं उसकी टांगों के बीच आया और अपना लंड उसकी चूत से रगड़ने लगा।
‘उफ्फ!’ एक हल्की की सिसकारी उसने ली।
इस पूरी प्रक्रिया में यह पहली आवाज थी।

मुझे भी मरियम की गर्म चूत बता रही थी कि वो चुदने को तैयार है।
मैंने चूत के केंद्र पर लंड को सटाया और धक्का दे दिया।

यहां दो बातें थी जिन्होंने साथ दिया।
एक तो चूत गीली थी और दूसरी चुदने के कारण खुली हुयी थी।
इसलिये ज्यादा मेहनत नहीं लग रही थी।
मेरा लंड सरसराते हुए अंदर जाकर मस्त हो गया।

अब मैं धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करने लगा।
फिर जवान बहू फक करने में धीरे-धीरे मेरे धक्के तेज होते गये।

अभी भी मरियम ने अपनी आँखें बंद ही की हुई थीं।
वो दोनों हाथों से चादर को कसकर पकड़े हुए आह-ओह … आह-ओह … जैसी आवाजें किए जा रही थी।

काफी दिनों के बाद मेरे लंड ने किसी चूत की गहराई की गर्मी को अनुभव किया था।
इसलिए मैं भी चूत का पूरा आनंद ले रहा था।

बहू की चुदाई करते हुए कोई 2-4 मिनट ही हुए थे कि मेरे लंड ने अपनी हार मान ली।
वो वीर्य का फव्वारा छोड़ने के लिये तैयार था।
मैंने भी समय की नजाकत को देखते हुए लंड को बाहर खींचा और उसकी चूत पर ही वीर्य को छोड़ दिया।

उसके बाद मैं मरियम के ऊपर ही लेट गया।
मरियम ने भी मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया।

मैंने उसके अधरों को एक बार फिर चूमा और बोला- हैप्पी बर्थडे!
मरियम- थैंक्स पापा, आज आपने तो मुझे दो-दो गिफ्ट दे दिये।
मैं- हाँ अभी रात को तुम्हें तीसरा गिफ्ट भी मिल जायेगा।

मरियम- नहीं, सुमित ने तो कल रात को ही अपना गिफ्ट दे दिया था। आपका ये वाला गिफ्ट खास है और… आज पूरे दिन इसका अहसास मैं करूँगी।
इतना कहकर वो उठी और अपनी पैंटी-ब्रा को पहनने के बाद मेरे से बिना नजरें मिलाये कमरे से बाहर चली गयी।

अब मैंने भी तय कर लिया था कि उसके जिस्म के रस को मैं आज अपने जिस्म से अलग नहीं होने दूँगा।
इसलिये मैंने पूरे दिन सुमित के आने तक नंगा ही रहने का फैसला किया।

उधर मरियम भी जब-जब मेरे पास आयी वो भी उसी टू-पीस में थी।

दूसरे दिन भी वही हुआ।
मरियम चाय लेकर आयी।
हम दोनों ने चाय पी और जब वो जाने लगी तो मैंने उसे एक बार फिर पीछे से अपनी बाँहों में कैद किया।

मैंने उसकी गर्दन और पीठ को चूमा और अपनी गोद में उठाकर बेड पर लेटा दिया।
हाँ, आज उसने वही पारदर्शी गाउन पहना हुआ था।

फिर मैंने उसके नर्म और मुलायम गुलाबी होंठों को चूमा, पलकों को प्यार किया और फिर गर्दन से लेकर उसकी नाभि तक को प्यार किया।

ये सब करने से पहले मुझे उसके गाउन को उतारने मे थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि मरियम कल की तरह आज भी अपनी आंखें बंद किए हुए थी और गाउन उतारने में उसने मुझे थोड़ा भी सहयोग नहीं किया।

इतना करने के बाद मैं मरियम की टाँगों के बीच आकर बैठ गया।
मैंने अपना लंड उसकी चूत पर सेट करके हल्का सा जोर दिया और फिर उसकी चूत की घिसाई करनी शुरू कर दी।

हाँ, आज मैं चोदने के साथ ही उसके निप्पलों को बारी-बारी, बीच-बीच में मुँह में लेकर चूसता जा रहा था।

मरियम की चूत को अपनी जीभ से चाटने की मेरी बड़ी इच्छा थी, लेकिन एक संकोच के कारण मैं रूका हुआ था।

फिर कोई 5-6 मिनट बाद मैंने अपना सारा रस उसकी चूत के ऊपर उड़ेल दिया और उसके ऊपर गिर पड़ा।
मरियम ने भी मुझे कल की भाँति ही अपनी बाँहों में जकड़ लिया।

कुछ देर तक दोनों के गर्म जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए थे।
फिर मैं खुद ही उसके ऊपर से हट गया और मरियम भी थोड़ी देर बाद वहाँ से चली गयी।
चार-पाँच दिन से बस सिर्फ ऐसा ही हो रहा था लेकिन जो मैं चाह रहा था।

वो मुझे नहीं मिल पा रहा था जिसकी प्यास मुझे कई दिन से लगी थी।
इसमें हम दोनों का ही थोड़ा संकोच और शर्म थी जिसके कारण ही मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

अगले दिन मैंने सोच लिया था कि मरियम बोले न बोले आज उसकी चूत को चाटकर उसकी चूत का रसपान करूँगा ही करूँगा।
मरियम को मेरे बारे में जो सोचना हो सोचे।

इतनी बात ख्याल में आते ही मेरे लंड मे तनाव आना शुरू हो चुका था।
तभी मरियम चाय लेकर मेरे कमरे में आ पहुंची।

आज मेरे अंदर हवस का अलग ही तूफान उठा हुआ था।

हम दोनों ने चाय पी और जैसे ही वो वापस जाने के लिये मुड़ी, मैंने उसको अपनी बाँहों में कैद कर लिया।

वो मुझसे खुद को छुड़ाते हुए बोली- पापाजी, आज मेरा मन नहीं है।
मैं- क्यों, क्या हुआ?

वो बोली- नहीं, कुछ नहीं हुआ, लेकिन मेरा आज मन नहीं है।
मैं- मरियम बेटा, माहवारी तो नहीं हुई है?
मरियम- नहीं, वो अभी नहीं हुई है, लेकिन मेरा मन नहीं है।

मैंने कहा- तो फिर ठीक है, अब जब तक मुझे तुम नहीं बताओगी कि क्यों मन नहीं है, मैं तुम्हें नहीं छोडूँगा।
मैंने उसकी गर्दन को चूमते हुए कहा- बता दो, अगर मुझसे कुछ गलत हुआ हो तो मैं सुधार दूँगा।

वो बोली- मुझे आपसे मजा चाहिये, लेकिन आप भी सुमित की तरह केवल सम्भोग करते हैं, पर मजा नहीं देते।
मैं समझ गया था कि मरियम क्या कहना चाहती है।

इत्तेफाक की बात थी कि आज जो मैं उसके साथ करने वाला था, उसकी मांग मरियम खुद ही कर रही थी।
फिर भी मैंने अनजान बनते हुए कहा- मैं समझा नहीं बेटा, तुम किस मजे की बात कर रही हो, अगर थोड़ा खुलकर बोलोगी तो मैं समझ पाऊंगा।

उसने कहा- जैसे पोर्न मूवी में मजा होता है, उसी तरह का।
मैं- हम्म! लेकिन तुमने पोर्न मूवी देखी कहाँ?
मरियम ने मेरी तरफ सवालिया नजरों से देखा?

मैं समझ गया कि मेरा प्रश्न ही गलत है।
अपनी झेंप मिटाने के लिए मैंने फिर पूछा- इसका मतलब तुमको पोर्न मूवी की तरह मजे चाहिये?
वो बोली- हाँ पापा!

कहते हुए उसने इतने दिनों में पहली बार अपना हाथ पीछे करके मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में दबा लिया।
मुझे जन्नत सी का अहसास मिला।
बहुत ही कोमल स्पर्श था लंड पर!

मैं- हम्म!, ठीक है, मैं तुमको उससे भी ज्यादा मजे दूँगा, पर शर्त है मेरी?
मरियम अब मेरी तरफ घूम गयी और मुझे देखते हुए बोली- मुझे आपकी हर शर्त मंजूर है।

मैं- तो ठीक है, फिर तो तुमको बिल्कुल बेशर्म होना पड़ेगा।
मैंने उसके कान में धीरे से कहा- तुम्हें मूवी की तरह ही रंडी बनना पड़ेगा।

इतना कहते हुए मैंने उसकी गांड में उंगली कर दी।
बदले में उसने मेरे आंडों को कसकर दबा दिया और बोली- पापा, आप मुझे चुदाई का मजा दीजिये, मैं आपकी रंडी बनने को तैयार हूँ। मैं आपके लंड की दीवानी हो गयी हूँ।

उसी पल मैंने मरियम को हवा में उठाया।
उसका चेहरा और मेरा चेहरा आमने-सामने हो गया था।
उसने अपने पैरों का फंदा मेरी कमर में डाल दिया और बाँहों की माला मुझे पहना दी।

मैं- अगर तुम मुझे पहले ही दिन बोल देती तो अब तक मैं तुम्हे अलग-अलग तरीके से चुदाई का मजा देता और कितने ही पोज में अब तक तुम चुद चुकी होतीं। लेकिन तब तुम आपनी आँखें बंद किये हुए केवल चुदती गयी।

मरियम- मैं सोच रही थी आप पहल करेंगे, लेकिन हारकर आज मुझे ही बोलना पड़ा।
मैं- आज तो मैंने भी सोच लिया था कि तुमको बुरा लगे या अच्छा, आज मुझे तुम्हारी चूत को चाटना ही था।

मरियम- मैं तो पहले दिन से ही चाह रही थी कि आप मेरी चूत चाटो और मैं आपके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसूं!
मैं- तो चलो … अब भी देर नहीं हुई है।
कहते हुए मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और मरियम मेरी जीभ अपने मुँह में भरकर चूसने लगी।

फिर उसने अपनी जीभ निकाली और मैं उसकी जीभ अपने मुँह में भरकर चूसने लगा।
थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही रसों का आदान-प्रदान करते रहे।

उसके बाद मैं उसे अपनी गोद में लिये हुए बाथरूम में गया और शॉवर चलाकर उसको दीवार से सटा दिया।
पानी गिरने लगा और मैं उसके गाउन के अंदर घुसकर उसकी बुर पर अपनी जीभ चलाने लगा।

मरियम सिसयाई- ‘आह पापा’ … इसी चीज के लिये तो मैं तरस रही थी। मुझे अपनी रंडी ही समझिये और मुझे खूब मजा दीजिए, जो आप कहोगे मैं वो सब करूँगी।

अब मैंने गाउन के अंदर ही हाथ उठाकर उसकी चूचियों को भी दबाना शुरू कर दिया।
साथ ही मैं उसकी चूत भी चाटे जा रहा था।

मरियम- आह्ह … पापा मजा आ रहा है, ऐसे ही चाटो मेरी बुर को। चाटो … मेरी बुर को … आह्ह … मेरे जिस्म की गर्मी निकाल दो।

इसी बीच मरियम ने अपने गाउन को अपने से अलग किया और अब मैं उसकी बुर चाटते हुए ऊपर की तरफ उसके पेट और हर जगह जीभ चलाते हुए उसकी चूचियों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा।

थोड़ी देर बाद मरियम पलटी और अब उसकी पीठ मेरी तरफ थी।
क्या चिकनी पीठ थी …. पानी भी उसकी पीठ पर रूक नहीं पा रहा था।
मैं पीठ चूमते हुए नीचे की तरफ बढ़ा।

सामने उसकी गांड थी।
ओह्ह … क्या गुब्बारे जैसी गांड थी … एकदम से उठी और फूली हुई।

मन तो कर रहा था कि उसकी गांड को काट-काटकर खा लूं।

लेकिन एक ही दिन में इतना मजा भी नहीं देना था उसे कि आगे का आनंद देने का रास्ता खत्म हो जाए।

मैं उसे मजा भी देना चाहता था और तड़प भी बाकी रहने देना चाहता था ताकि वो भी अगले मिलन का इंतजार करे।

यहां आपको भी थोड़ा इंतजार करना होगा कहानी के अगले भाग के लिए।
आपको मेरी जवान बहू फक स्टोरी कैसी लग रही है आप मुझे अपनी प्रतिक्रियाओं के रूप में जरूर अवगत करवाएं।
आपके मैसेज और कमेंट्स का इंतजार रहेगा।
मेरा ईमेल आईडी है- 1973saxena@gmail

जवान बहू फक स्टोरी का अगला भाग: