Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Garam Bhabhi Sex Story – मॉल में मिली भाभी से दोस्ती और सेक्स to make every night hot about Garam Bhabhi Sex Story – मॉल में मिली भाभी से दोस्ती और सेक्स story.
Story Start Here :
गरम भाभी सेक्स स्टोरी में मॉल में मूवी देखने गया तो एक सेक्सी भाभी से नजर मिल गयी. मैं उसे रूप को निहारने लगा. मैं जैसे किसी नशे में हो गया और गिरते गिरते बचा.
हॅलो, मेरा नाम साहिल है और मैं न्यू मुंबई में रहता हूँ।
मैं यहाँ एक कंपनी में डिज़ाइन इंजीनियर हूँ और मैं 25 साल का एक गुड लुकिंग डिसेंट लड़का हूँ।
जॉब अभी नयी-नयी जॉइन करने की वजह से मैं यहाँ अकेला रहता हूँ।
मुझे मुंबई आए हुए कुछ 2 महीने हो गए थे और मैं एक फ्लैट रेंट पे लेके यहाँ अकेला रह रहा था।
मैं ज्यादा लोगों से घुलता-मिलता नहीं हूँ, अपने में ही मस्त रहने वाला लड़का हूँ।
गरम भाभी सेक्स स्टोरी तब बनी जब एक बार मैं मूवी देखने के लिए सिवुड मॉल में गया था।
संडे होने के कारण मॉल में ठीक-ठाक भीड़ थी।
मैं अपने मोबाइल में टिकट चेक करते हुए एलिवेटर से ऊपर जा रहा था.
उतने में मेरी नजर एक बहुत ही आकर्षक दिखने वाली लेडी पे जा पहुँची।
वो अपनी कुछ सहेलियों के साथ मूवी थिएटर के बाहर खड़ी थी।
उन्होंने एक काले और लाल रंग की साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज पहना था।
5 फिट 6 इंच की हाइट और तराशा हुआ बदन!
उनके बाजू की चमकती हुई स्किन, खुले बाल, वो कुछ 35 की लग रही थीं और उनकी सहेलियां 40-43 की।
मैं उनकी सुंदरता को ऊपर से नीचे तक निहार रहा था।
उनको ऐसे निहारते हुए उन्होंने मुझे देख लिया और थोड़ा गुस्से से मेरी तरफ देखा।
उतने में मेरी नजर उनकी थोड़ा गुस्से वाली नजर से जा मिली.
मैं उनकी बड़ी-बड़ी आँखों में जैसे खो ही गया!
मुझे एलिवेटर के खत्म होने का पता ही नहीं चला और मैं गिरते-गिरते बच गया।
ये देख के उनको अपनी हँसी कंट्रोल नहीं हुई, वो मुँह पे हाथ रख के हँसने लगीं.
मैं वहाँ से चुपचाप वॉशरूम में चला गया।
वॉशरूम से आके मैं सीधा मूवी हॉल में चला गया और मेरी सीट ढूँढने लगा कि उतने में मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं!
जो हॉट लेडी मुझे थोड़ी देर पहले दिखी थी, वो मेरी सीट पर बैठी हुई थी और उनके साइड में उनकी बाकी सहेलियां थीं।
वो भी मुझे देखती रह गईं।
“तुम?? तुम मेरा पीछा करते हुए यहाँ तक आ गए??” वो बोलीं।
मैंने बहुत ही पोलाइटली उनको कहा, “मैडम, आप गलत समझ रही हैं। एक्चुअली आप गलती से मेरी सीट पे बैठ गई हैं!”
उन्होंने अपने टिकट निकाले और फटाफट चेक करने लगीं और थोड़ा शर्मिंदगी के साथ उन्होंने कहा, “सॉरी, मुझे माफ कर दीजिए मैंने खामखा आप पे शक किया!”
“ठीक है, छोटी सी बात है!” कह कर मैं अपनी सीट पर बैठ गया और वो उठ कर मेरी साइड वाली सीट पर बैठ गईं।
मुझे मन ही मन बहुत खुशी हो रही थी।
उनकी वो खुली बाँह मेरी तरफ थी और मैं मूवी कम और उसे ही ज्यादा देख रहा था।
उन्होंने भी ये नोटिस कर लिया था और अब वो भी मेरी तरफ बीच-बीच में देख रही थीं।
कभी मैं उनकी आँखों में देखता तो कभी आँखें झुका लेता।
मूवी के फर्स्ट हाफ में हमारी कुछ बात नहीं हुई, सिर्फ आँखों से ही बात हो रही थी।
इंटरवल होने के बाद उनकी सहेलियां पॉपकॉर्न लेने के लिए चली गईं लेकिन वो नहीं गईं।
इसलिए मैं भी वहीं बैठा रहा।
सब जाने के बाद उन्होंने पूछा, “तो आप हमेशा अकेले ही मूवी देखने आते हैं?”
मैंने कहा, “जी, जी नहीं, यहाँ किसी को जानता नहीं हूँ ज्यादा तो अकेला ही आ गया!”
उन्होंने कहा, “जानता नहीं हूँ मतलब?? दोस्त और मम्मी पापा कहाँ रहते हैं तुम्हारे?”
“वो पुणे में रहते हैं, मैं यहाँ जॉब के लिए रहता हूँ, 1 महीने पहले ही शिफ्ट किया है!”
ये सब कहते हुए मैं बार-बार उनकी गोरी-गोरी बाँहें और रसीले होंठ देख रहा था।
वो भी मेरी आँखों में उनके मादक रूप की कामना देख सकती थीं और उनकी आँखों में भी मैं कुछ उत्सुकता देख रहा था।
मैंने उनको कहा, “बाय द वे, मेरा नाम साहिल है। आपका?”
उन्होंने हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा, “मैं निशा!”
मैंने भी उनकी हथेली की नाजुक उंगलियां अपने हाथ में थाम लीं।
मैंने उनसे कहा, “माफ करना मैं आपको ऐसे घूर रहा था. लेकिन आप बहुत ज्यादा अट्रैक्टिव दिख रही हैं!”
उतने में उनकी सहेलियां आ गईं और फिर मैंने उनका हाथ छोड़ दिया, वो भी थोड़ा चौंक कर सीधी बैठ गईं।
अब उनका भी मेरी तरफ देखना बढ़ गया था।
मैं इस मौके को गँवाना नहीं चाहता था।
मैं भी उनको बीच-बीच में स्माइल पास कर रहा था।
थोड़ी देर में उन्होंने मुझे पॉपकॉर्न ऑफर किए, मैंने थोड़े ले लिए और उन्होंने पॉपकॉर्न हमारी सीट के बीच रख दिया।
हम उसमें से लेके खा रहे थे।
थोड़ी देर में उन्होंने पॉपकॉर्न लेने के लिए हाथ डाला और वो देख कर मैंने भी सेम टाइम हाथ डाल दिया।
हमारी उंगलियां एक-दूसरे से टच हो रही थीं लेकिन किसी ने हाथ बाहर नहीं निकाला!
उन्होंने एक बार अपनी कातिल नजरों से मेरी तरफ देखा और एकदम हल्की सी स्माइल दी।
मैंने भी मौका देख कर उनका हाथ अंदर ही पकड़ लिया और प्यार से उंगलियों को सहलाने लगा।
लेकिन कहते हैं ना, अच्छा समय जल्द ही गुजर जाता है, वैसे ही मूवी कब खत्म होने आई पता ही नहीं चला।
वो वक्त खत्म होने की उदासी हम दोनों में बराबर थी।
लेकिन मैं कुछ कहता उसके पहले, निशा ने अपना फोन बैग से निकाला और मेरे हाथ में दिया और कान में बोली, “सेव योर नंबर!”
मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था!
मैंने फटाफट नंबर सेव किया और एक रिंग मेरे मोबाइल पे कर ली।
कुछ देर में मूवी भी खत्म हो गई, सब लोग बाहर जाने लगे।
निशा ने भी एक बार मेरी तरफ देख के स्माइल की और अपनी सहेलियों के साथ बाहर चली गईं।
जाते वक्त भी मेरी नजर उनके मादक बदन को ही देख रही थी।
उनका गोरा बदन, सुडौल नितंब, लंबा कद, किसी अप्सरा से कम नहीं था।
वो अपनी कार में बैठ कर अपनी सहेलियों के साथ वहाँ से चली गईं और मैं उनकी जाती हुई गाड़ी देखता रहा।
मैं अपने घर आ कर आराम से बैठ गया लेकिन दिल को आराम नहीं था।
दिल बार-बार निशा के कॉल का इन्तजार कर रहा था।
शाम बीत गई, रात को डिनर कर के मैं सोने की तैयारी कर रहा था उतने में मेरे मोबाइल पे नोटिफिकेशन आ गई।
वो निशा थी!
“डिनर हो गया क्या??” उन्होंने लिखा था।
मैंने तुरंत रिप्लाई किया, “हाँ हो गया, आपका??”
उन्होंने पूछा, “क्या कर रहे थे?”
मैंने बोला, “सच बताऊं?”
“हाँ एकदम सच!” निशा ने कहा।
“आपके मैसेज का वेट कर रहा था शाम से!” मैंने कहा।
“सच कहूँ तो मैं भी तुमसे बात करने के लिए कब से इंतजार कर रही थी!” निशा बोली।
“फिर किया क्यों नहीं??” मैंने पूछा।
“I am not single like you, हसबेंड सो गए उसके बाद मैसेज किया है। और एक बात, मेरा ‘Bye’ मैसेज आने के बाद फिर से रिप्लाई मत करना!”
“ओके! आपके घर में कौन-कौन रहता है?” मैंने पूछा।
“मैं और हसबैंड। और यहाँ मुंबई में तुम्हारे घर पे कौन रहता है? फ्लैटमेट है या रिलेटिव के यहाँ??”
“मैं यहाँ अकेला रहता हूँ!” मैंने बताया।
“सच में? यहाँ किसी को नहीं जानते??” वो बोलीं।
“सच में नहीं!” मैंने कहा।
“कोई बात नहीं, मुझे जान गए हो ना बस है तुम्हारे लिए!” निशा ने कहा।
“आपको अभी जानना कहाँ है? सिर्फ देखा है, जानना अभी बाकी है!” मैंने जवाब दिया।
उस रात हमने बहुत सी चैट की।
मैंने उनसे कहा- मुझे आपकी आवाज बहुत याद आ रही है, क्या आप कॉल कर सकती हो?
वो बोलीं कि अभी नहीं, कल जब हसबैंड ऑफिस जाएंगे तब करूँगी।
मैंने कहा- ठीक है.
और थोड़ी बातें कर के हम सो गए।
दूसरे दिन मैं उठ के ऑफिस निकल गया।
लेकिन उनको मैसेज नहीं किया क्योंकि उन्होंने मना किया था खुद से मैसेज करने।
9 बजे निशा का मैसेज आया, “गुड मॉर्निंग!”
मैंने रिप्लाई कर दिया, “गुड मॉर्निंग डियर!”
थोड़ी देर बाद निशा का कॉल आया, “सीधा डियर??”
उनकी आवाज कानों में इतनी मीठी लगी कि मैं एक सेकंड फील कर रहा था।
“ओए हीरो, कहाँ खो गए?” निशा ने पूछा।
“कितना मिस कर रहा था मैं आपकी आवाज, और कितना मिस कर रहा हूँ आपको!” मैंने कहा।
“मिस तो मैं भी कर रही हूँ! क्या कहा था तुमने? बहुत अट्रैक्टिव दिख रही हूँ?? कौन कहता है ऐसे पहली बार में?”
“मैंने झूठ नहीं कहा, जो दिल में था वो सच बोल दिया!” मैंने कहा।
“ओह माय गॉड! तुम जानते हो ना कि मैं तुमसे बड़ी हूँ और शादीशुदा हूँ?” निशा ने पूछा।
“जानता हूँ, लेकिन आकर्षण इन सब बातों के बारे में कहाँ सोचता है?” मैंने कहा।
“ऐसा क्या है मुझ में?” उन्होंने पूछा।
“मिलने के बाद बताऊंगा!” मैंने जवाब दिया।
“मैं भी तुमसे मिलना चाहती हूँ। वैसे तो हम कभी भी मिल सकते हैं। तुम एक काम करो, ऑफिस के बाद मुझे इनॉर्बिट मॉल में मिलो, मुझे कुछ काम है उसके बाद हम कॉफी पीने जाएंगे!”
मैं भी खुश हो गया और फटाफट ‘ठीक है’ बोल दिया।
मैं फिर से निशा को छूने के लिए पागल हो रहा था।
आखिरकार मैं शाम को ऑफिस से निकल गया।
मैंने निशा को कॉल किया कि निकल गया हूँ.
उन्होंने भी बोला- ठीक है, मैं भी 15 मिनट में वहाँ पहुँच जाऊंगी।
मैं अपने ऑफिस के फॉर्मल कपड़ों में ही था।
वैसे मुझ पे अच्छे लगते हैं फॉर्मल्स।
मैं मॉल में पहुँच गया और उतने में ही निशा ने कॉल किया।
उन्होंने मुझे देख लिया था।
“यहाँ राइट में देखो हीरो, स्टारबक्स में!”
मैंने मुड़ के देखा तो निशा को देखता ही रह गया!
उन्होंने जींस और एक स्लीवलेस ब्लैक टॉप पहना था।
वो बहुत ही अट्रैक्टिव दिख रही थीं।
मैं उनके पास गया.
वो भी मेरी आँखों में देख रही थीं और मैं भी उन्हें घूरे जा रहा था।
थोड़ी देर में साइड से एक आदमी गया तो हमारा ध्यान टूट गया।
“तुम बहुत हैंडसम दिख रहे हो फॉर्मल्स में, आओ अंदर जाते हैं!” वो बोलीं।
हम अंदर गए अपना ऑर्डर लेके कॉर्नर के एक टेबल पे बैठ गए।
पहले मैं निशा के सामने बैठा था।
उन्होंने मेरी आँखों में देखा, एक बहुत ही मादक स्माइल की और मुझे कहा, “साहिल, क्या तुम मेरे साइड में बैठ सकते हो?”
मैंने ‘हाँ’ में अपना सर हिलाया और उनके साइड में जाके बैठ गया।
उन्होंने मेरे हाथ में अपना लेफ्ट हाथ डाला और दूसरे हाथ से अपनी कॉफी का एक सिप लिया।
“साहिल, तुमसे मिलने के बाद मैं बहुत एक्साइटेड थी फिर से मिलने के लिए! थोड़ा डर भी लग रहा था, लेकिन अब तुम यहाँ हो तो अच्छा लग रहा है!” उन्होंने कहा।
मैं ये सुन के थोड़ा हैरान हो गया कि निशा पहली बार प्यार में पड़ी लड़की की तरह बात कर रही थीं।
लेकिन मेरा भी यही हाल था।
मैंने भी अपना दिल थोड़ा खोला, मैंने कहा, “मैं भी कल से आपके बारे में सोच रहा हूँ, आपसे फिर मिलके सच में बहुत अच्छा और एक्साइटेड फील कर रहा हूँ!”
मैंने उनकी गोरी बाँहों को उंगलियों से सहलाया, मुझसे रहा नहीं गया।
उन्होंने आँखें बड़ी कर के मेरी तरफ देखा, जैसे वो कहना चाह रही हों कि कोई देख लेगा!
मुझे भी समझ गया और थोड़ा दूर होकर बैठा।
लेकिन मैं बार-बार उनके बदन को छूना चाहता था, मेरी आँखों में वो कामना साफ दिख रही थी, और वो भी उसे देख रही थीं।
वो भी अपने बदन को मेरे हाथों से छूने देना चाहती थीं।
अब तक वो मुझे ठीक से परख चुकी थीं— मेरे गोल्स, मेरा हाइजीन।
वो मेरे बारे में कॉन्फिडेंट फील कर रही थीं।
मैंने भी उनके बारे में पूछा।
वैसे मैं उनको परिवार के बारे में पूछ कर ऑकवर्ड फील नहीं करवाना चाहता था, पर उन्होंने क्लियर होने के लिए बताया, “मेरे घर में मैं और मेरे हसबैंड रहते हैं। मेरी बेटी पढ़ाई के लिए बाहर रहती है। मैं एक कंपनी में मैनेजर थी लेकिन 2 साल पहले मैंने जॉब छोड़ दी है!”
हमने वहाँ बहुत सारी बातें कीं, उस बीच मैंने उनको और उनके बदन को दिल भर के ताड़ लिया।
मेरे दिल में उनको पाने की भावना बहुत ज्यादा जाग उठी थी।
थोड़ी देर बाद जाने का टाइम आ गया, उन्होंने मुझे प्यारी सी स्माइल देके बाय बोला, उनकी आँखों में अलग ही नशा था।
थोड़ा आगे जाके वो रुकीं और उन्होंने कहा, “साहिल, क्या मैं तुम्हें घर ड्रॉप कर दूँ?”
मैंने ‘हाँ’ में सर हिलाया।
मैं उनकी कार में बैठ गया।
जैसे ही दरवाजा बंद किया, बाहर की सारी आवाज बंद हो गई, कार के अंदर हम दोनों की एक दूसरे के लिए कामना शोर करने लगी!
उनका मखमली रंग, उनका मादक परफ्यूम मुझे वो बहुत अच्छा लग रहा था।
मैं मदहोश होकर निशा को देख रहा था— उनके सुडौल वक्ष, मक्खन सी बाँहें, कटावदार शरीर!
अचानक उनके गाल पर उनकी एक लट गिर गई।
मैंने बिना कुछ सोचे उनकी उस लट को कान के पीछे डाल दिया।
मेरा वो अकेले में किया कृत्य उनके शरीर पर रोंगटे खड़े करने के लिए काफी था!
उन्होंने गाड़ी स्टार्ट की और थोड़ी देर में हम मेरे घर के नीचे पहुँच गए।
मैं गाड़ी से नीचे उतरा, उनको बाय बोला.
तो उन्होंने आँखें दिखाते बोला, “अरे! घर पे भी बुलाना होता है!”
मैं थोड़ा शरमा गया क्योंकि घर थोड़ा मैसी हो गया था।
उन्होंने ही गाड़ी साइड में लगाई और गाड़ी से बाहर निकल गईं।
मैंने दिल में सोचा कि ये आज घर देख के ही मानेंगी!
हम ऊपर आ गए।
मैं सेकंड फ्लोर पे रहता हूँ, अच्छा हुआ वहाँ कोई नहीं था।
फटाफट घर का दरवाजा खोल के मैं अंदर आ गया और उन्हें भी अंदर ले लिया।
साइड के फ्लैट का दरवाजा भी बंद था।
अंदर आते ही निशा मेरे घर को देखने लगीं और मैं उनको।
दिल तो कर रहा था कि उनको अपनी बाँहों में लेकर उनके रसीले होंठों को चूम के पी जाऊँ!
वो घर में आगे बढ़ने ही वाली थीं कि मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और वो मेरी तरफ हैरानी से अपनी बड़ी-बड़ी मादक आँखों से देखने लगीं।
एक ही पल में उनके आँखों में हैरानी की जगह एक मर्द के लिए वासना और प्रेम ने ले ली और वो मुझसे साँप की तरह लिपट गईं!
दोस्तो, क्या जादू है जवानी का, कल थिएटर में मिली एक हसीन औरत का जिस्म आज मेरी जवान बाँहों में था!
मैं उनको अपनी बाहों में मसल रहा था।
निशा मेरे शर्ट के बटन खोलने लगी, उन्होंने मेरा शर्ट निकाल दिया और मेरे सीने को मेरे कांधों को चूमने लगी।
मैंने भी उनके हाथों को ऊपर कर के उनका ब्लैक टी-शर्ट निकाल दिया और उनके गले को चूमने लगा।
मुझे उनका टेस्ट मदहोश कर रहा था।
मेरे लिंग में ऐसा तनाव मैंने पहले महसूस नहीं किया था, मेरा लिंग पैंट को फाड़ने के लिए तैयार था!
उनकी नाभि को मेरा लिंग पैंट के अंदर से छू रहा था।
निशा अपनी कमर हिला के उसे अपने पेट से रगड़ रही थी।
मैंने उनके दोनों गालों को पकड़ के उनके रसीले होंठों पे अपने होंठ रख दिए और उनको चूसने लगा, जैसे कि उनके अंदर का सारा रस पी रहा हूँ!
निशा ने भी मुझे खुद को एकदम से सौंप दिया और अपने आप को छूने और चूम के लेने मुझसे और लिपट रही थी।
उनकी आँखें बंद थीं जब हम एक दूसरे के होंठों का रस पान कर रहे थे।
लेकिन अचानक उन्होंने हैरानी से आँखें खोल के मेरी तरफ आश्चर्य से देखा!
निशा ने मेरी पैंट को खोल के मेरे लिंग को अपने हाथ में पकड़ लिया था।
उनकी आँखों में मेरे लिंग के आकार का आश्चर्य मैं साफ़ देख रहा था!
निशा ने खींच के पैंट निकाल दी और नीचे मेरे लिंग को बड़ी खुश होकर देखने लगीं।
अगले ही पल वो अपने घुटनों पे बैठ के मेरे लिंग को अपने मुँह में लेकर मजे से चूसने लगीं!
ये मेरे लिए अकस्मात सुखद अहसास था।
जब भी कोई औरत अपने दिल से आपके लिंग को चूसती है तब उसका अहसास रोमांचक होता है।
मैं निशा के बालों को पकड़ के अपने लिंग को उनके मुँह में दबा रहा था, वो भी जी भर के मेरे लिंग को चूस कर उसको प्रेम कर रही थीं।
ऐसे में मेरा लिंग गरम लोहे की तरह हार्ड हो गया और निशा की गीली योनि चोदने के लिए एकदम तैयार हो गया!
मैंने निशा को उठा के उनको किचन के प्लेटफॉर्म पर बिठा दिया और उनकी जींस और पैंटी निकाल दी।
एक 35 की औरत के हिसाब से उनकी योनि काफी सुंदर थी, कामरस के कारण उनकी योनि चमक रही थी।
मुझसे रहा नहीं गया, मैंने अपने होंठ उस गीली योनि पर रख के उसको चूसने लगा।
अपनी जीभ को अंदर डाल के जितना हो सके उनके योनि का रस पीने लगा।
मुझे एक अलग ही आनंद आ रहा था निशा की योनि चाटने में।
निशा मेरे बालों में हाथ रख के मेरे सर को अपने टांगों के बीच योनि पर जोर से दबाए जा रही थी और ‘आह्ह्ह ओह्ह्ह ह’ ऐसे आहें ले रही थी, और उनकी योनि भी भरपूर पानी बहा रही थी!
अब निशा ने मुझे खींच के अपने पास लिया, मेरे गरम लोहे जैसे लिंग को पकड़ के हिलाया, उसकी स्किन को पूरा नीचे सरका के लाल टोपे को अपनी योनि के होंठों के बीच रगड़ने लगी।
मैंने निशा को पकड़ के अपना गरम लिंग उसके अंदर दबा दिया!
उनकी चिकनी योनि में मेरा आधे से ज्यादा लिंग फँस गया।
उनके मुँह से ‘आहा’ की बड़ी ही कामुक आवाज निकल गई!
उनके पैर कांपने लगे लेकिन वो मुझे अपने से दूर छोड़ नहीं रही थी।
निशा ने अपने नाखून मेरी पीठ पे गाड़ के मुझे कस के पकड़ रखा था।
अब मैं भी अपना लिंग पूरा उनकी योनि में दबाने लगा, मुझे बहुत मजा आ रहा था।
उनकी योनि की चिकनाहट और कसावट मुझे सुख दे रही थी।
मैं उन्हें और पाने के लिए अपने लिंग को जोर से चलाने लगा।
निशा की योनि से कामरस बह रहा था, और मैं उनको चोदे जा रहा था।
कुछ ही देर बाद निशा ने मेरे सर को अपने छाती से जोर से लगा लिया और अपने पैर मेरी कमर में डाल के मेरे लिंग को अंदर ही जोर से दबा लिया!
उनका शरीर कांपने लगा और इस आघात से मेरे शिश्न में भी अधिक उत्तेजना के कारण तूफान सा आ गया और मेरा गाढ़ा वीर्य निशा के योनि की गहराई में बहने लगा.
गरम भाभी सेक्स के आनंद से मेरे गरम वीर्य को जैसे अपने अंदर महसूस कर रही थी।
काम का सुख मैं निशा के चेहरे पर देख पा रहा था।
कुछ पल वैसे ही रहने के बाद मैंने निशा को उठा के बेड पे लिटा दिया और उनसे लिपट गया।
थोड़ी देर बाद मेरी आँख खुली, निशा मेरी छाती के युवा बालों पे अपनी उंगली घुमा रही थी।
जैसे ही मैंने उनकी तरफ देखा, उन्होंने मुझे किस किया!
ये था एक 25 साल के लड़के और एक 35 साल की औरत के प्रेम और काम का पहला अनुभव।
प्रेम और सेक्स का रिश्ता ये गलत था या सही था इससे ज्यादा कितना गहरा और हसीन था यह ज्यादा मायने रखता है।
आपको क्या लगता है?
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