Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Hot Bahu Xxx Kahani – थैंक्यू पापा मेरी चूत, गांड और मुंह भरने के लिए to make every night hot about Hot Bahu Xxx Kahani – थैंक्यू पापा मेरी चूत, गांड और मुंह भरने के लिए story.
Story Start Here :
हॉट बहू Xxx कहानी में मेरे लंड के नीचे आकर मेरी बहू ने खुलकर चूत चटवाने के साथ लंड चूसने का मजा दिया। जैसे-जैसे सेक्स का खेल आगे बढ़ा, मुझे उसके नए-नए शौक पता चले.
दोस्तो, मैं आपको अपनी बहू की चुदाई की कहानी बता रहा था।
कहानी के तीसरे भाग
सेक्सी बहू के साथ ओरल सेक्स का मजा
में आपने देखा कि कैसे मैंने और मेरी बहू ने एक दूसरे के साथ चुदाई का मजा लिया।
मैंने मरियम की चूत में जीभ देकर उसे मदमस्त कर दिया।
अब मरियम ने अपनी एक खास इच्छा मेरे सामने जाहिर की.
अब आगे हॉट बहू Xxx कहानी:
मरियम बोली- मैं आपका लंड खुशी-खुशी मुंह में लेने के लिए तैयार हूं। अपना माल भी पिला देना। लेकिन मेरी एक बात आपको माननी होगी।
मैंने कहा- हां बोलो बेटा?
मरियम- पहले बाथरूम में चलो, वहीं पर बताऊंगी।
हम दोनों बाथरूम में गए और मरियम ने पीछे से आकर मेरे लंड को पकड़ लिया।
वो सुपाड़े में अपना अँगूठा चलाने लगी।
मेरे लिए यह भी पहला अनुभव ही था क्योंकि मेरी बीवी ने भी कभी भी ऐसा नहीं किया था।
वो मेरे लंड को हिलाती जा रही थी।
नतीजा यह हुआ कि मेरा पेशाब निकलना शुरू हो गया और उसकी धार यहां-वहां लगने लगी।
मेरे मुंह से मजे में उसकी तारीफ निकलने लगी- अरे वाह … पेशाब करने का नया ही मजा आज मिला है। तुम्हारी सास ने भी कभी ऐसे नहीं मुतवाया था मुझे!
मरियम- मैं भी आपके बेटे के साथ यही सब करना चाहती हूं। लेकिन उसे जैसे इन सब चीजों का शौक ही नहीं है। वो उस अपनेपन से मुझे चोदता ही नहीं है। लगता है जैसे किसी अजनबी से चुद रही हूं। इसलिए तो मैं आपके साथ ये सब कर रही हूं।
मैं- अरे बेटा खूब करो … खूब! मुझे तो बहुत नए-नए अहसास दिला रही हो तुम।
इतना कहने के साथ ही मैंने भी मरियम को पीछे से उठा लिया और बोला- अब मेरी बारी है तुमको मूतते हुए देखने की!
फिर मुस्कुराते हुए वो अपनी चूत को तेज-तेज रगड़ने लगी।
कुछ देर बाद ही उसने भी धार छोड़ना शुरू कर दिया।
जैसे ही उसकी मूत की धार गिरने लगी मैंने उसे अपनी गोद में लेकर गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया।
उसकी धार बाथरूम की दीवार और जमीन पर यहाँ वहाँ लगने लगी।
फिर मैंने मरियम को उसी पोजिशन में दीवार पर सटाया और उसकी चूत की फांकों को फैलाते हुए उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया।
वो सिसकारने लगी- आह्ह … पापा आआ आआह …. आपसे चुदने का मजा ही अलग है।
मैं- बेटा मजा तो मुझे भी आता है तुमको चोदने में, और इस समय मन कर रहा है कि तेरी चूत को चोद दूँ. मगर सुमित आने वाला है।
मरियम- पापा, मेरी भी चूत नहीं मान रही है, आप चोद दो इस मादरचोद को!
आज पहली बार उसके मुँह से गाली भी निकली।
मैं- चल बेटा आ जा मैदान में फिर … तेरी इस मादरचोद चूत को चोद कर शांत कर देता हूँ।
इतना कहने के साथ ही मरियम ने अपने दोनों हाथों को दीवार पर टिका लिया।
उसने कमर को इस तरह से उठाया कि उसकी चूत का मुँह खुलकर मेरे सामने आ गया।
मैंने भी जल्दी से उसकी चूत में लंड को डाला और तेज-तेज चोदना शुरू कर दिया।
मुश्किल से कोई 4-5 मिनट में ही हम दोनों खल्लास हो गये।
मरियम जल्दी से घूमी और मेरे लंड को पकड़कर चूसने लगी और जब तक मेरे वीर्य का एक-एक कतरा उसने चाटकर निगल नहीं लिया मेरे लंड को नहीं छोड़ा।
फिर जब वो मुझसे अलग हुई तो मैंने भी उसकी टांगों को फैलाकर उसकी चूत से टपकते हुए रस को चाट-चाटकर साफ कर दिया।
मैं- थैंक्यू बेटा, मुझे नहीं मालूम था कि मेरी प्यारी बेटी इतनी जल्दी मेरी इस इच्छा को पूरी कर देगी।
सुमित कभी भी आ सकता था तो जल्दी-जल्दी हम दोनों नहा कर अपने अपने काम पर लग गए।
लेकिन पता नहीं क्यूँ आज मैं अपनी बहू की चुदाई होते देखना चाह रहा था।
हम दोनों आपस में काफी खुल चुके थे।
दोनों ही एक दूसरे के जिस्म के एक-एक अंग से भलीभाँति परिचित हो चुके थे।
लेकिन फिर भी मेरे मन में एक डर था कि मेरी इस वाहियात इच्छा को सुनने के बाद मरियम कहीं बुरा न मान जाये।
मैं मौके का इंतजार कर रहा था कि मरियम कुछ पल के लिए मेरे पास आ जाये और मैं उसे अपनी यह इच्छा कह सकूँ।
मरियम रसोई में अपना काम कर रही थी जबकि सुमित अपने लैपटॉप पर कुछ काम करने में मशगूल था।
इसी मौके का फायदा उठाते हुए मैं मरियम के पास पहुँचा और फुसफुसाते हुए बोला- बेटा, आज तेरी और सुमित की चुदाई देखना चाहता हूँ।
वो मेरी तरफ कुछ पल देखती रही, फिर बोली- पापा अब आप बहुत ज्यादा कामुक हो गये हो!
मैं- बेटा क्या करूँ। पता नहीं मेरा बहुत मन कर रहा था कि तेरी और सुमित की लाइव चुदाई देखूँ।
मरियम- हम्म! चलिए ठीक है, मैं कुछ करती हूँ, लेकिन आपको मजा नहीं आयेगा।
मैं- कोई बात नहीं, तुझे चुदते देखकर मेरा मजा अपने आप पूरा हो जाएगा।
मरियम- लेकिन एक शर्त है, अपना माल आप खराब नहीं करोगे!
मैं- अरे बिल्कुल नहीं। वैसे भी तुझे चोदने के लिए बड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
वो हँसते हुए बोली- हम्म लेकिन मजा बहुत देते हो आप। ठीक है, मैं हल्की सी खिड़की खोलकर रखूंगी। आप देख लीजिएगा. लेकिन सुमित की नजर से बचकर!
फिर खाना वगैरह खा-पीकर हस सब फारिग हो गये।
मैं अपने कमरे में, और वो दोनों अपने कमरे में थे।
कमरे का दरवाजा बंद होने के बाद मैं चुपचाप खिड़की से सटकर खड़ा हो गया।
हल्की झिर्री से कमरे का डृश्य साफ दिख रहा था।
सुमित ने भी कपड़े उतार लिए थे और मरियम पूरी नंगी होकर पलंग पर चढ़कर सुमित के पास पहुँच गई।
वो जाकर सुमित की गोद में बैठ गयी।
सुमित उसकी पीठ सहलाते हुए उसकी चूची पीने लगा।
फिर वो मरियम को लेटाकर उसके होंठों को पीने लगा।
चूचियो कों बारी-बारी थोड़ी देर पीने के बाद थोड़ा नीचे की ओर आया।
अब उसने मरियम की नाभि के अंदर अपनी जीभ चलाई और फिर मरियम की दोनों टांगों के बीच आकर उसकी चूत चोदने लगा।
चुदते समय मरियम हिल रही थी और साथ ही उसकी चूची भी हिल रही थीं।
एक ही पोजिशन में सुमित मरियम को चोदता रहा और फिर हाँफते हुए उसके ऊपर लेट गया।
उसी समय मरियम के हाथों का इशारा, जो मेरी तरफ था, मुझे बताने के लिए काफी था कि देखो पापा जी आपका लड़का सिर्फ चुदाई की रस्म पूरी करता है, मजे नहीं लेता!
सुमित का इस तरह सेक्स करना मुझे भी पसंद नहीं आया।
मैं चुपचाप अपने कमरे में सो गया।
मुझे अपनी बहू पर अब और प्यार आ रहा था, मैं उसे और प्यार देना चाह रहा था।
अबकी बार वो फिर उसी पीले गाउन में आई।
मैंने उसे अपनी गोद में बैठा लिया और बोला- तेरी फैली हुई टांगों के बीच सुमित को देखकर बहुत अच्छा लगा।
उसके गाऊन के ऊपर से ही उसकी गांड में उंगली डालते हुए मैं बोला- जब तू नंगी अपनी गांड मटकाते हुए अपने बेड पर चढ़ी तो ऐसा लग रहा था कि ये गांड कह रही हो- ससुर जी तुम भी आ जाओ।
मरियम- अच्छा, जब मेरी गांड बुला रही थी तो आपको आ जाना था। पर चलिए कोई बात नहीं, अब मेरी गांड खुद चलकर आपके पास आ गई।
इतना कहने के साथ ही मरियम ने अपनी चूची मेरे मुँह में ठूंस दी।
मुझे उसकी चूची पीने और गांड को कुरेदने में बड़ा मजा आ रहा था जबकि मरियम मेरे निप्पलों को तेज-तेज मसल रही थी।
फिर मैंने उसका दूध पीना छोड़कर अपनी जीभ निकाली।
मरियम मेरी जीभ को अपने मुँह में भरकर चूसने लगी।
कुछ देर ऐसा करने के बाद मरियम मुझसे अलग हो गई और मेरी टांगों के बीच आकर बैठ गई।
वो कभी मेरे अंडकोष अपनी हथेलियो में कैद करती तो कभी उन पर जुबान चलाती।
लेकिन फिर अचानक उसकी जीभ मेरी गांड के अंदर चलने लगी।
मरियम मेरे चूतड़ों की फांकों को फैलाकर अपनी जीभ को गांड के और अंदर तक डालना चाह रही थी।
मैंने उसकी सुविधा के लिए अपने चूतड़ों को और फैला लिया।
अब उसने अच्छी तरह से मेरी गांड गीली कर दी। फिर मेरे लौड़े को दबोच लिया और त्वचा को नीचे करके सुपाड़े के चारों तरफ अपनी जीभ चलाने लगी।
फिर सुपाड़े को त्वचा के खोल से अच्छे से ढ़क दिया और उस खोल को अपने दांतों के बीच पकड़ लिया।
अब उसकी जीभ खोल के अंदर चल रही थी।
कभी वो सुपाड़े पर जीभ चलाती तो कभी खोल के अंदर अपनी जीभ डाल देती।
करीब कोई सात-आठ मिनट वो ऐसा ही करती रही लेकिन इस बीच उसने अपने मुँह के अंदर लंड नहीं लिया।
सेक्स की काफी भूखी थी मेरी बहू!
उसके तरीके बहुत ही नये और अलग थे।
इतने में मेरा शरीर अकड़ने लगा, मेरे बदन में कंपन पैदा होने लगा।
माल जैसे निकलने ही वाला था।
मैं मरियम को चेताना चाहता था लेकिन वो अपनी ही धुन में लगी हुई थी।
इसी बीच मेरे लंड से रस निकल कर फव्वारे की तरह उसके मुंह के अंदर, उसकी नाक पर और हाथों पर छूटता हुआ सब जगह फैल गया।
वीर्य फैलने के बाद एक नजर उसने मुझे देखा और फिर लंड पर लगे वीर्य की एक-एक बूंद को चाट कर साफ कर दिया।
फिर उसने हाथों पर लगी मलाई भी चाट ली।
मैं बोला- बेटा, तूने तो मुंह से ही सारा माल निकाल दिया। अब मैं तेरी चुदाई कैसे करूंगा।
वो बोली- कोई बात नहीं पापा, आप भी मुझे जीभ से ही चोद दो।
कहते हुए उसने पास आकर अपना मुंह खोल दिया और हम दोनों के होंठ मिलते ही मैंने उसके मुंह में जीभ घुसा दी।
मेरा शरीर ढीला पड़ गया था लेकिन मरियम को अभी प्यार देना बाकी था।
उसकी चूत को अब जीभ से खुश करना था।
मैं बेड पर लेट गया और मरियम का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया।
हम दोनों के होंठ फिर से मिल गए।
कुछ देर इसी अवस्था में उसके होंठों को पीने के बाद मैंने उसे नीचे कर लिया और खुद ऊपर की तरफ आ गया।
मैं उसकी दोनों बाहों को खोलकर उसकी कांखों को चाटने लगा।
अब चूचियों को चूमकर नीचे पेट से होते हुए मैं जांघों तक जा पहुंचा।
जांघों को मैंने चूत के आसपास के एरिया में खूब चूमा।
वो हर चुम्बन के साथ मचल सी जाती थी।
चूत के पास से उसके रस की खुशबू आ रही थी।
फिर मैंने चूत को जीभ से चाटना शुरू किया और मरियम सिसिया गई- आह्ह … स्स्स … ऊईईई पापा आआ।
मैंने जीभ को चूत के अंदर घुसा दिया।
मैंने पूरा जोर लगा दिया ताकि जीभ जितना ज्यादा हो सके अंदर तक पहुंचे।
जीभ को अंदर देकर मैं उसे भीतर-बाहर करने लगा।
इस दौरान उसके चूत रस का स्वाद मेरे मुंह में जा रहा था।
अब वो पागल सी होती जा रही थी- ऊंहह … आह्ह … ऊंहह … आह्ह करते हुए वो मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी।
मन कर रहा था कि उसकी चूत को काट-काटकर खा ही जाऊं।
कुछ देर चूत के अंदर जीभ चलाने के बाद भग्नासा या कह लो, उसके लहसुन के दाने को अपने दांतों से खीचने का बड़ा आनंद आ रहा था।
अब मैं अपनी बेशर्मी की सारी हदें पार कर जाना चाहता था।
मैं मरियम की चूत को चाटते हुए ऊपर की तरफ आया और बोला- मेरी जान, अब तुम पलटो, मुझे भी तुम्हारी गांड चाटने का मजा लेना है।
मरियम- वाह पापा … ‘मेरी जान’! इस शब्द ने तो मेरे कानो में रस सा घोल दिया है, अब चाहे मेरी गांड चाटने के साथ-साथ मार भी लो!
मैं- चिंता मत कर मेरी जान, गांड भी मारूँगा लेकिन उसके लिए लंड का खड़ा होना भी जरूरी है।
वो बोली- चिंता मत करो पापा, जब जवान चूत और गांड सामने है तो आपके लंड की औकात नहीं है कि वो टाईट न हो।
कहते हुए वो पेट के बल लेट गई।
अब मैं उसकी गांड के पास आ गया, उसके कूल्हे को फैलाया और हल्का भूरे रंग का छेद मेरे सामने खुल गया।
मैंने उसकी गांड के छेद पर जीभ लगा दी और उसे चाटने लगा।
कुछ ही देर चाटी थी कि उसने घोड़ी की पोजीशन ले ली जिससे उसकी चूत और गांड खुलकर मेरे सामने आ गई।
वो बोली- लो पापा, मेरी गांड के साथ चूत भी आपके लिए हाजिर है।
मैं- शाबास बेटा! कितना ख्याल रखती हो तुम अपने पापा का!
कहते हुए मैं उसकी गांड और चूत को बारी-बारी से चाटने लगा।
उसकी चूत से निकलने वाले रस को मैं चट कर जाता।
इस बीच मेरा लंड तनकर तैयार हो गया था।
मैंने उसी पोजिशन में उसकी चूत में लंड पेल दिया।
जैसे ही लंड उसकी चूत में गया वो सिसकार उठी- आह्ह्ह सस्स पापा … मजा आ गया।
जोश में आकर मैं उसकी कमर को पकड़कर धक्के देने लगा और बोला- बेटा तेरे को चोदने का अलग ही मजा है।
वो बोली- तो पापा और तेज धक्का मारो, मेरी चूत की नस ढीली कर दो। बता दो मेरी चूत को, कि है कोई तगड़ा लंड जो इसको अच्छे से चुदाई का मजा दे सकता है।
उसकी इस तरह से मेरा हौसला आफजाई करने का मैं कायल हो चुका था।
मेरे धक्के अपने आप उसकी बातों को सुनकर तेज हो चुके थे।
इसी बीच मैंने उसकी गांड में लंड डालने की कोशिश की मगर सफलता नहीं मिली।
दो-तीन बार ऐसा करने पर मरियम बोली- पापा, जरा अपना लंड मेरे पास लाओ।
मैं पास गया तो उसने उसी पोजिशन में मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी।
उसने चूस-चूसकर लंड को अच्छे से गीला कर दिया।
मैं एक बार फिर उस गीले लंड को उसकी गांड में डालने लगा लेकिन फिर लंड फिसल कर बाहर आ गया।
मैं इस समय मरियम के सामने बिल्कुल अनाड़ी सा नजर आ रहा था।
मरियम एक बार फिर बोली- कोई बात नहीं पापा, मैं वैसलीन लेकर आती हूँ।
कहते हुए वो खड़ी हुई और अपनी गांड मटकाती हुई अपने कमरे में चली गई और कुछ देर बाद वैसलीन को लिए हुए कमरे में आई।
उसने मेरे लंड पर क्रीम लगा दी फिर शीशी मुझे देते हुए कहा- पापा, मेरी गांड में इस क्रीम को अच्छे से भर दो। तब देखिये कि कैसे नहीं आपका लंड मेरी गांड में जाता है।
कहते हुए उसने मेरा हाथ पकड़ा और डायनिंग हाल में लेकर आ गई।
फिर डायनिंग टेबल पर अपनी छाती को टिकाकर अपनी टांगों को फैलाकर खड़ी हो गई।
फिर अपने दोनों हाथों से कूल्हों को फैलाकर अपनी गांड खोलते हुए बोली- पापा, आ जाओ और मेरी गांड की सवारी करो।
मैंने भी ढे़र सारी वैसलीन उसकी गांड में भर दी और फिर लंड को पकड़कर उसकी गांड के छेद में टिकाकर हल्का सा जोर लगाया तो सुपाड़ा उसकी गांड में फँस गया।
वो लंड के झटके से सी … सी करने लगी।
मैं बोला- क्या हुआ बेटा?
वो बोली- कुछ नहीं, आप चालू रखो।
उसके माथे पर पसीना सा दिखने लगा तो मैं समझ गया कि इसे दर्द हो रहा है।
मैं- अगर कहो तो मैं लंड को वापस निकाल लेता हूं?
मरियम- नहीं पापा, आप चालू रखो।
इतना कहना था कि मैंने एक और धक्का मारा।
लंड का थोड़ा सा हिस्सा भीतर घुस गया।
वो फिर चीखी- ईईईई आईईई … चालू रखो पापा!
इस बार मैंने थोड़ा लंड को बाहर निकाला और फिर एक जोर से धक्का दिया।
इस बार लंड आधा उसकी गांड में अंदर जा चुका था।
अब मैंने हल्का-हल्का अंदर बाहर करना शुरू किया और उसकी गांड ढीली होने लगी।
थोड़ा समय लगा लेकिन अब लंड पूरी तरह से मरियम की गांड में कैद हो चुका था।
मैंने उसकी चिकनी पीठ पर अपना वजन डाल दिया और अपने दोनों हाथों को उसके सीने की तरफ पहुँचाया और मुलायम चूचियों को दबाने लगा।
उऊऊऊऊऊ … की आवाज करते हुए मरियम बोली- पापा, मेरी गांड में बहुत जलन हो रही है।
मैं- हाँ बेटा, तू सही कह रही है, मेरे लंड में भी जलन हो रही है। चल अब तेरी गांड में लंड डाल ही दिया है तो जलने से क्या डरना!
कहते हुए मैं उठा और थोड़ा सा लंड बाहर निकाला और फिर अंदर पेबस्त कर दिया।
धीरे-धीरे गांड ढीली होने लगी और लंड आसानी से अंदर-बाहर आने जाने लगा।
मेरी प्यारी बहू को भी मजा आने लगा।
मेरा उत्साह बढाते हुए वो बोली- पापा, इसको कहते हैं प्यार से गांड मारना!
मैं उत्साह में मरियम की चूचियों को दबाते हुए उसकी गांड मारे जा रहा था.
और वो आह-ओह … की आवाज निकाल कर मेरी ताल से ताल मिलाये जा रही थी।
तभी वो समय आया जब मेरी स्पीड बढ़ना शुरू हुई और उसका चिल्लाना भी तेज हो गया।
एकाएक मेरे बदन में झटके लगने लगे और लंड ने गांड के अंदर ही पानी फेंक दिया।
मैं मरियम की गांड पर ही लेटकर हांफने लगा।
कुछ देर तक लंड उसकी गांड में फंसा रहा और फिर सटाक से बाहर निकल आया।
मैं तुरंत ही मरियम के ऊपर से उठ गया और मरियम भी खड़ी हो गई।
उसकी नजर मेरे लंड पर पड़ी तो अपने कान को पकड़ते हुए बोली- सॉरी पापा, मेरी टट्टी आपके लंड पर लग गई।
मैंने उसे चिपकाते हुए कहा- चल पगली, कोई बात नहीं। तेरी गांड टाईट थी, इसलिए लग गई, अभी चलकर धो देता हूँ, साफ हो जाएगी।
मरियम- चलिए, मैं धो देती हूँ।
मैं- अरे नहीं, तू परेशान मत हो, मैं धो लूँगा।
वो मुंह बनाकर बोली- क्या पापा आप भी …
मैंने हॉट बहू Xxx मरियम को गोद में उठा लिया और उसे लेकर बाथरूम में गया जहाँ मरियम ने मेरे लंड को धोया और मैंने अच्छे से उसकी गांड साफ की।
फिर हम दोनों वापस अपने कमरे में आ गए और एक दूसरे से चिपक गए।
अभी भी मेरी उँगलियाँ उसकी गांड को सहला रही थीं और गांड के अंदर जाने की कोशिश कर रही थीं।
थोड़ी देर बाद मरियम घर के काम निपटाने के लिए उठ गई।
बहुत मजा आ रहा था उसके साथ। जब तक सुमित नहीं आ जाता था वो और मैं तब तक नंगे ही रहते थे।
ऐसे ही हमारे दिन बीत रहे थे।
हम दोनों को ऐसे ही प्यार करते हुए कोई दो महीने बीत चुके थे और उसका फल यह हुआ कि मरियम पेट से हो गयी।
उसके चेहरे को देखकर लगता था कि वो कितनी खुश है।
डॉक्टर को दिखाकर आने के बाद मुझसे लिपटकर बोली- थैंक्यू पापा, आपने मेरी चूत, गांड और मुँह भरने के साथ ही मेरा पेट भी भर दिया!
तो दोस्तो, आप लोगों को मेरी हॉट बहू Xxx कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताना।
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