Indian Sister Chudai Kahani – बच्चे की चाहत में दीदी मुझसे चुद गई

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Story Start Here :

इंडियन सिस्टर चुदाई कहानी में मेरे जीजू के शराब पीने के कारण उनकी पौरुष शक्ति कम हो गयी. दीदी को बच्चा नहीं हो रहा था, वे परेशान थी. मैंने उनसे परेशानी पूछी.

सभी साथियों को मेरा नमस्कार.
मैं आपका साथी काशी अपने जीवन की एक सच्ची इंडियन सिस्टर चुदाई कहानी आपके साथ साझा कर रहा हूँ.

दोस्तो, मैं अन्तर्वासना का बहुत पुराना पाठक हूँ. मेरी उम्र 25 साल की है.
मेरी बड़ी बहन, जिनके साथ ये घटना घटी, उनका नाम बबीता है.

बबीता दीदी की उम्र 28 वर्ष है.
उनकी शादी को आठ वर्ष हो गए हैं.
उनकी एक बच्ची भी है, जिसकी उम्र करीब 7 वर्ष होगी.

चूंकि दीदी की शादी जल्द हो गई थी तो वे अपनी पढ़ाई को रोकना नहीं चाहती थीं.
अपनी पढ़ाई के सिलसिले में उन्होंने दूसरे बच्चे का इरादा रोका हुआ था.

उनके शरीर की बनावट 34-32-36 के लगभग की है जो मैंने बाद में उनके साथ सेक्स के दौरान देखा था.

एक दिन मैं अपने घर में सो रहा था.
तभी घर ताई जी और दीदी आ गईं और मां से बात करने लगीं.

उन तीनों की बातों से मेरी आंख खुल गई.
पर मैं आलस्य के कारण ऐसे ही पड़ा रहा.

तब मम्मी मेरी दीदी से बात कर रही थीं कि अब तो काशी के जीजा जी की नौकरी भी लग गई है. अब तो दूसरा बच्चा कर ले.
दीदी ने मां की बातें ऐसे ही टाल दीं.

तभी ताई जी ने कहा- मैं भी इसको यही समझा रही हूँ.
ताई और मां की बात सुनकर दीदी ने कुछ नहीं कहा, वे बस चुप रहीं.

कुछ देर और बात करने के बाद वह दोनों चली गईं.

उनके जाने के बाद मैं भी उठकर बाहर चला गया.
कुछ दिनों बाद जीजा जी दीदी को ले गए और समय इस तरह ही गुजरता चला गया.

करीब 6 माह बाद में दीदी घर आईं.
मां ने उनके साथ फिर से वही पुरानी बात करना शुरू कर दी ‘एक बच्चा और कर ले!’

इस बात पर दीदी कुछ मायूस-सी हो गईं.
मैं उन दोनों के पास आ गया, तो मम्मी उठ कर कुछ काम के लिए चली गईं.

मैंने देखा कि दीदी अकेली कुछ उदास-सी बैठी हैं.

तो मैंने कहा- कैसी हो बबीता दीदी? उदास-सी लग रही हो!
उन्होंने कहा- मैं कहां उदास हूँ, कुछ भी तो नहीं है!

हम दोनों भाई-बहन में कुछ सामान्य सी बातें होने लगीं.

दीदी- आजकल क्या कर रहा है? पढ़ाई में क्या चल रहा है. सरकारी जॉब के लिए क्या तैयारी कर रहा है?
मैंने कहा- अभी तो बस लगा हूँ.

दीदी बोलीं- अब तू शादी कर ले.
मैंने कहा- अभी नहीं दीदी, पहले जॉब तो लग जाने दो.

तो उन्होंने कहा- जॉब तो लग ही जाएगी, शादी कर ले नहीं तो फिर …
इतना कह कर वे चुप हो गईं.

मैंने उन्हें कुरेदते हुए पूछा- नहीं तो फिर … क्या?
वे कुछ नहीं बोलीं.

मेरे दोबारा कहने पर बोलीं कि फिर उम्र के बाद शादी भी नहीं होगी.
इसके अलावा दीदी ने और भी कुछ अपने मन ही मन में बुदबुदाया और उठकर अपने कमरे में चली गईं.

शाम को जीजा जी आए तो दीदी अपने घर चली गईं.

समय इस तरह ही निकलता गया.

कुछ समय बाद मुझको एक कंपटीशन का एग्जाम देने दीदी के शहर जाना पड़ा.
तो मैं दीदी के घर ही चला गया क्योंकि मां ने दीदी से पहले ही कह दिया था कि मैं आ रहा हूँ.

मैंने पहुंचकर दीदी से पूछा- जीजा और गुड़िया कहां हैं?
दीदी की बच्ची को सभी गुड़िया कहते थे क्योंकि वह गुड़िया की तरह ही बड़ी प्यारी लगती है.

उन्होंने बताया कि जीजा जी ड्यूटी गए हैं और गुड़िया अपने दादा-दादी के पास अपने गांव गई है.
हम दोनों बातें करने लगे.

फिर शाम को जीजा जी भी ड्यूटी से आ गए.
हम दोनों में बातें होने लगीं.

बातों ही बातों में जीजा जी ने मुझसे पूछा- क्या तू दारू वगैरह कुछ लेता है तो बता?
मैंने मना कर दिया.

फिर भी वे एक बोतल ले आए और पैग बनाकर पीने लगे.

मैंने मना कर दिया था कि मैं दारू नहीं पीता तो मैं उन्हें अजीब सी नजरों से देख रहा था.
मुझे आज ही पता चला था कि वे दारू भी पीते हैं.

उस दिन जीजा जी जल्दी जल्दी पैग पर पैग लेते चले गए और वे फुल नशे में टल्ली हो गए.

उन्हें ये भी होश नहीं रहा था कि वे उस वक्त क्या कह रहे हैं.
वे बड़बड़ा रहे थे- तेरी बहन ने मेरा जीवन खराब कर दिया, दूसरा बच्चा नहीं कर पा रही है साली मादरचोद!

उन्होंने और भी बहुत कुछ इस तरह की भाषा में कहा.

वे फुल नशे में थे ही, तो नहीं पता कि सामने कौन है और किसके सामने ऐसी बातें कह रहे हैं.
मैं चुप रहा क्योंकि अगर मैं कुछ कहता तो मेरी बहन का घर बर्बाद हो जाता इसलिए मैं सब्र के घूँट पीकर सब सुनता रहा.

तभी मैंने देखा कि दीदी हमारे पीछे खड़ी हैं.
हम दोनों की नजरें मिलीं तो वे मुझसे कहने लगी- इनको कमरे में लिटाने में मेरी मदद कर दे.

एक तरफ से मैंने जीजा जी को पकड़ा और एक कंधे से दीदी ने.
तभी मेरा हाथ अचानक दीदी के चूतड़ से लग गया.

उन्होंने मेरी तरफ देखा, मैंने नजरें नीचे कर लीं.
हम दोनों जीजा को कमरे में लेटाकर आ गए.

कुछ देर में दीदी ने मेरे और अपने लिए खाना लगा दिया.

हम दोनों खाना खा रहे थे, तभी दीदी रो पड़ीं.

मैंने पूछा- दीदी, रो क्यों रही हो?
तो उन्होंने कुछ नहीं बताया.

मैं उठकर उनके पास को चला गया.

मेरे काफी पूछने पर दीदी ने कहा- इनका अब ये रोजाना का रूटीन हो गया है. पीने के बाद मुझको बहुत गंदा-गंदा कहते हैं. मैं किसी से कह भी नहीं सकती. घर में सब परेशान हो जाएंगे, इसलिए मैं किसी से नहीं कहती.

एक पल रुकने के बाद वे आगे बोलीं- भाई, तू भी किसी से मत कहना.
मैंने कहा- किसी से नहीं कहूँगा, पर ये ऐसा करते क्यों हैं?

तो दीदी बोलीं- कहते हैं कि इन्हें एक बच्चा और चाहिए और इनमें ही कमी है.
यह कह कर दीदी ने मुझको कमर से पकड़ लिया क्योंकि वे बैठी थीं और मैं उनके ही पास में खड़ा था.

कुछ देर ऐसे ही पकड़े रहने के बाद मेरे शरीर में हलचल-सी हुई और मेरा लंड खड़ा होने लगा क्योंकि उस वक्त दीदी के चूचे लगभग मेरे लंड के पास ही थे.

मैं पीछे को हट गया और दीदी भी.
मैंने उन्हें चुप कराया और अपने हाथों से खाना खिलाया.

खाना खाकर हम दोनों अपने-अपने बिस्तर सोने चले गए.
मेरा बिस्तर दूसरे कमरे में … और दीदी-जीजा जी का दूसरे कमरे में था.

मैं जल्दी ही सो गया क्योंकि सुबह को मेरा एग्जाम भी था.
रात को करीब 2 बजे मेरी आंख खुली तो मुझको कुछ फुसफुसाहट-सी सुनाई दी.
शायद दीदी और जीजू सेक्स कर रहे थे.

तभी दीदी बोलीं- आपका बहुत जल्दी हो जाता है और आपको बच्चा चाहिए … अन्दर तक वीर्य तो जाता नहीं है, बच्चा कैसे होगा?

कुछ देर की फुसफुसाहट के बाद दोनों सो गए.

पर अब मेरी नींद उड़ चुकी थी.
मेरे मन में दीदी के लिए गलत विचार आने लगे थे.

सुबह हुई और मैं एग्जाम देने चला गया.
जीजा जी ने मुझे एग्जाम सेंटर पर छोड़ा था क्योंकि उन्हें वहीं से 7 बजे तक के लिए ड्यूटी जाना था.

मैं 3 घंटे बाद दीदी के घर पहुंचा और डोरबेल बजाई.

शायद दीदी उस समय बाथरूम में नहा रही थीं.

उन्होंने आवाज लगाई- कौन?
बाहर से मैं बोला- दीदी, मैं काशी.
वे बोलीं- अभी आई.

बस 2 मिनट बाद दीदी ने दरवाजा खोला.

मैंने देखा कि दीदी एक बाथ टॉवल बांधकर दरवाजा खोलने आई थीं, जो छाती से थोड़ा ही ऊपर बँधा था और घुटनों से ऊपर तक था.
गर्दन पर पानी की बूंदें दीदी की खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थीं.

दीदी नहाकर वैसे ही दरवाजा खोलने आ गई थीं, तो मैं उन्हें देखता ही रह गया.
और मेरा लंड खड़ा हो गया.

मैं बस उन्हें देखने लगा और मुझे होश ही न रहा कि दरवाजा खुल गया है और मुझे अन्दर आ जाना चाहिए.

तभी दीदी ने मुझे आवाज लगाई और पकड़ कर हिलाया, तब मैं होश में आया.

दीदी बोलीं- कहां खो गया?
मैंने कहा- कहीं नहीं दीदी, बस यूँ ही!

फिर वे अन्दर चली गईं.
मैं पीछे से उनकी 36 के चूतड़ देखता रहा और वासना से तप्त होता रहा.

वे अपने कमरे में चली गईं.

कुछ देर बाद दीदी बाहर आईं.
उन्होंने लाल रंग की फ्रॉक वाली कुर्ती पहन ली थी.

इसके साथ दीदी ने नीचे सलवार आदि कुछ नहीं पहनी थी क्योंकि वह फ्रॉक उनके घुटनों से थोड़ी सी नीचे तक ही आ रही थी.

वे कयामत लग रही थीं.
मैं उन्हें ऐसे ही देखता रहा और पता नहीं चला कि कब मेरा हाथ मेरे लंड पर चला गया.

तभी दीदी ने मुझे इस तरह देख लिया और बोलीं- लगता है अब तेरी शादी करानी पड़ेगी.

मैं हड़बड़ा कर अपने लंड से हाथ हटाता हुआ बोला- मुझे नहीं करनी अभी शादी … अभी मेरी उम्र ही क्या है?

तो दीदी हंसने लगीं और वे मेरे सामने कुछ इस प्रकार से बैठने लगीं कि उन्हें अपने एक पैर के ऊपर दूसरा पैर रखना था.
उन्होंने जैसे ही अपने एक पैर को ऊपर उठाया तो मुझे उनकी लाल रंग की पैंटी दिखाई दे गई.

वे इसी तरह ही बैठी रहीं.

मैं उन्हें देख कर गर्म हो रहा था.
वे मेरे सामने बैठकर बोलीं- उम्र निकल जाएगी तो फिर क्या फायदा?

मैं बोला- शादी में फायदा जैसा क्या है?
वे बोलीं- फायदा तो बहुत है, अगर पार्टनर ठीक हो तो …

मैं बोला- मैं कुछ समझा नहीं दीदी!
वे बोलीं- वह तेरी अच्छी केयर करेगी.

मैं समझ नहीं पाया.

दीदी आगे बोलीं- कोई लड़की पसंद नहीं है?
मैंने कहा- नहीं!

वे बोलीं- क्यों?
मैंने कहा- मुझे कोई ढंग की मिलती ही नहीं है!

वे बोलीं- तुझे कैसी लड़की पसंद है?
मैंने कहा- दीदी, ऐसी लड़की पसंद है जो आप जैसी हो. सुंदर हो, संस्कारी हो और अपने पति की देखभाल करने वाली हो!

दीदी बोलीं- पति भी तो ऐसा होना चाहिए, जरूरत पूरी करने वाला.
यह कह कर वे रोने लगीं.

फिर रोती हुई वे अपने कमरे में चली गईं.
पीछे से मैं भी उनके साथ कमरे में चला गया.

मैंने देखा कि दीदी बेड पर पेट के बल लेटी हुई हैं और रो रही हैं.
मैं भी पीछे से उनके पास बिल्कुल बगल में जाकर बैठ गया और उन्हें चुप कराने की कोशिश करने लगा.

तो उन्होंने अपना सिर मेरी जांघ के पास रख दिया.
उन्होंने अपना सिर कुछ इस तरह से रखा था कि मेरा लंड उनके गाल के पास जा रहा था.

मैंने दीदी से पूछा- आप रो क्यों रही हो? जीजा जी आपको परेशान करते हैं क्या?
वे कुछ नहीं बोलीं.

मेरे बार-बार कहने पर उन्होंने बताया- मैं क्या करूँ? उनको एक बच्चा और चाहिए और उनसे कुछ होता नहीं है … तो तू ही बता, मैं क्या करूँ?

ये बात सुनने के बाद मैंने कहा- एक उपाय है.
वे बोलीं- क्या?
मैं बोला- कुछ नहीं.

उनके दोबारा पूछने पर मैंने कहा- आप बुरा मान जाओगी.
तो दीदी ने कहा- नहीं मानूँगी बुरा .. तू बता!

तब मैंने कहा- आप कहीं और ट्राई कर लो.
तो उन्होंने मुझे एक चाँटा मारा और बोलीं- अपनी बहन से इस तरह की बात कर रहा है!

मैंने कहा- और कोई उपाय है क्या आपके पास?
तो उन्होंने कहा- नहीं और अगर तेरे हिसाब से कही कुछ की … किसी को पता चल गया तो मेरी बदनामी हो जाएगी!

मैंने कहा- किसी ऐसे के साथ करो, जो आपके राज को राज रखे.
तो दीदी ने पूछा- ऐसा कौन हो सकता है?

मैंने कहा- अगर आप बुरा न मानें तो मेरी नजरों में एक है.
उन्होंने कहा- कौन?

मैंने कहा- यदि अगर आप और मैं दोनों … कल तो किसी को भी पता नहीं चलेगा इससे आपका घर भी बच जाएगा और मैं किसी को भी नहीं बताऊंगा. घर की बात घर में ही रह जाएगी.
दीदी नाराज हो गईं और वहां से जाने लगीं.

मैंने कहा- एक बार सोच लेना दीदी, मैं आपका कभी बुरा नहीं सोच सकता.

कुछ देर बाद मैंने अपना सामान उठाया और उनके घर से निकल गया.

अगले दिन हमारे घर दीदी आईं.
मैं अपने कमरे में था.

उन्होंने मम्मी से पूछा- काशी कहां है?
मम्मी ने कहा- वह अपने रूम में है.

दीदी ऊपर मेरे रूम में ही आ गईं.

वे बोलीं- तो कल क्या कह रहा था?
मैंने कहा- जो आपने सुना था.

दीदी बोलीं- मैंने बहुत सोच-विचार किया. मैं तेरे साथ वह सब करने के लिए तैयार हूँ लेकिन इस बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं चलना चाहिए.
इंडियन सिस्टर चुदाई के लिए तैयार थी तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई.
मैंने कहा- दीदी, किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा.

दीदी ने कहा- ठीक है मैं तैयार हूँ उसके लिए … जो करना है, जल्दी करो.
मैंने कहा- दीदी, इतनी भी जल्दी क्या है? यहां पर किसी को शक हो सकता है. हम यहां पर नहीं करेंगे. कहीं और कर सकते हैं.

दीदी ने पूछा- कहां करेंगे?
फिर मैंने कहा- दीदी, आप जो वह फॉर्म भरने को कह रही थीं, वह भर दिया क्या?

दीदी बोलीं- अभी तो नहीं … क्यों?
मैंने कहा- तो उसमें आप कहीं बाहर का सेंटर डालना. देहरादून लिख देना, मैं भी वहीं का सेंटर लिख दूँगा.

दीदी ने कहा- इससे क्या होगा?
तब मैंने कहा- जब एग्जाम देने चलेंगे, तो हम दोनों ही साथ में जाएंगे. आप जीजा जी से कह देना कि एग्जाम सेंटर गलत हो गया. हम दोनों के सब पेपर साथ होंगे, तो मैं और आप केवल दोनों ही पेपर देने जाएंगे. फिर जो कुछ भी होना होगा, वहीं पर होगा.

दीदी समझ गईं.

तभी नीचे से ताई जी की आवाज आ गई.
वे दीदी को बुला रही थीं.

दीदी जाने लगीं, तो मैंने कहा- मेरा गिफ्ट!

दीदी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ लगा दिए और चूम कर नीचे चली गईं.

उस रात मुझे नींद नहीं आई.

अगले दिन दीदी अपनी ससुराल चली गईं.

दीदी ने अपने फॉर्म में सेंटर देहरादून डाला.
डेढ़ महीने बाद एग्जाम था.
दीदी के और मेरे एग्जाम एक दिन आगे-पीछे थे.

घरवालों ने कहा- जीजा जी को छुट्टी नहीं मिली है. तुम और बबीता दोनों साथ चले जाना.
मैंने कहा- जैसा आपको ठीक लगे.

मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ.
मैंने घर वालों से कहा कि मैं गाड़ी लेकर जाऊंगा.
उन्होंने कहा- ठीक है.

एग्जाम से एक दिन पहले मैं दीदी को लेने पहुंच गया.

उसी दिन हम दोनों एग्जाम सिटी के लिए निकल गए.
हम घर से निकले.

उस वक्त दीदी के चेहरे पर एक अलग ही खुशी झलक रही थी, जो मैंने महसूस की.

मैंने कहा- दीदी, क्या बात है? बहुत खुश लग रही हो!
दीदी बोलीं- कुछ नहीं बस वैसे ही.
मैंने भी मुस्कुरा कर कहा- ठीक है.

हम करीब दस किलोमीटर दूर ही पहुंचे होंगे कि दीदी ने कहा- गाड़ी साइड में रोक ले!

मैंने पूछा- क्या हुआ?
उन्होंने कहा- रुको तो, मुझे पेशाब आई है.

मैंने जगह देखकर गाड़ी रोक दी.

गाड़ी के रुकते ही दीदी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ लगा दिए.
हमने लंबा किस किया.

वे बोलीं- अब चलो!
मैंने कहा- दीदी, आपको तो पेशाब लगी थी न!

उन्होंने कहा- पहले तो मुझे दीदी मत कहो … मुझे मेरे नाम से बुलाओ और मुझे पेशाब नहीं लगी थी. मैंने इसलिए गाड़ी रुकवाई थी कि मैं रुक नहीं पा रही थी.

हम पूरे रास्ते इसी तरह मस्ती करते हुए और लगभग 4 घंटे बाद देहरादून पहुंच गए.

वहां पहुंचकर मैंने एक रिसॉर्ट में एक अच्छा सा कमरा बुक कराया.
जब हम पहुंचे तो होटल वालों को लगा कि हम दोनों पति-पत्नी हैं तो उन्होंने हमारे रूम में थोड़ी और ज्यादा सुविधाएं दे दीं.

जब हम अपने रूम में पहुंचे और जैसे ही मैंने दरवाजा बंद किया, तुरंत ही एक-दूसरे को गले लगा कर किस करने लगे.
हमारा चुंबन लगभग दस मिनट तक चला.

हम दोनों सफर की वजह से काफी थक गए थे इसलिए आराम करने की सोची.
मैं बेड पर बैठ गया और दीदी वॉशरूम में चेंज करने के लिए गईं.

जब वे बाहर आईं, तो कयामत ढा रही थीं क्योंकि वे सिर्फ लाल रंग की ब्रा और पैंटी में थीं.
मैंने कहा- वाह बबीता डार्लिंग तुम तो गजब लग रही हो.

दीदी मेरे पास आईं और किस करने लगीं.
धीरे-धीरे मैं भी केवल अंडरवियर में आ गया और हम दोनों एक-दूसरे को खाए जा रहे थे.

अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया.

मेरा लंड देखकर दीदी ने कहा- ओह, तेरा कितना बड़ा है!
मैंने कहा- दीदी, अब यह आपका ही है.

उन्होंने मेरे गाल पर एक चाँटा मारा और बोलीं- साले मना किया न … अब दीदी नहीं बोलना!
मैंने कहा- अरे डार्लिंग, गलती से निकल गया … आओ, इसे चूसो.

दीदी नीचे बैठ गईं और उसे किसी आइसक्रीम की तरह चूसने लगीं.

एक दो मिनट चूसने के बाद मैंने दीदी को उठा दिया और उनकी लाल रंग की ब्रा और पैंटी को उतार दिया.
दीदी की चूत पर एक भी बाल नहीं था. लग रहा था जैसे आज सुबह ही किसी क्रीम से चुत साफ की हो.

मैंने जैसे ही दीदी की चूत पर हाथ रखा, दीदी एकदम से मुझसे चिपक गईं.

कुछ देर तक चुत पर हाथ फेरने के बाद हम दोनों 69 पोजीशन में आ गए और लगभग 15 मिनट तक एक-दूसरे के साथ इसी पोजीशन में रहे.

कभी दीदी मेरा चूसतीं, तो कभी मैं.

यही सब चलता रहा.
हम दोनों ने लगातार एक दूसरे का लंड चुत नहीं चूसा … रुक रुक कर चूसा ताकि हम दोनों चुदास से भर जाएं और स्खलित भी न हों.

ऐसा दीदी इसलिए चाहती थीं कि उन्हें मेरा वीर्य बर्बाद नहीं करना था.
हालांकि दीदी ने अपना एक बार पानी छोड़ दिया था, जिसे मैंने चाटकर साफ कर दिया था.

उसके बाद मैंने दीदी को बेड पर लिटाया और अपना लंड उनकी चूत के मुहाने पर रखा.

छेद की गर्मी पाते ही मैंने एक जोरदार झटका मारा, जिससे मेरा पूरा लंड दीदी की चूत में चला गया.
दीदी की एक जोर की चीख निकलने को हुई जिसे उन्होंने दबा लिया.

वे मुझसे अपने ऊपर से हटने के लिए कहने लगीं ‘हट जाओ … दर्द हो रहा है!’
मैंने उनकी एक नहीं सुनी.

कुछ पल बाद मैंने लंड को चलाना शुरू किया तो उनको भी मजा आने लगा.

मैंने कहा- बबीता जान, अब कैसा लग रहा है?
उन्होंने कहा- बहुत मजा आ रहा है. जिंदगी में पहली बार ऐसा महसूस हुआ है. मैं बहुत खुश हूँ.
मैंने कहा- अभी तो बस शुरुआत है.

हम दोनों की ये चुदाई अलग-अलग पोजीशन में लगभग 20 मिनट तक चलती रही.
जब मेरा वीर्य निकलने को आ गया, तब तक बबीता दीदी एक बार और झड़ चुकी थीं.

दूसरी बार में हम दोनों साथ में झड़े.

चुदाई के बाद लगभग दस मिनट तक हम दोनों एक-दूसरे के साथ चुपचाप पड़े रहे ताकि मेरा वीर्य पूरी तरह से दीदी की चुत में चला जाए और वे गर्भवती हो जाएं.

अब मेरा लंड बाहर आ चुका था.

मैंने पूछा- डार्लिंग, कैसा लगा?
बबीता दीदी ने बताया- इतना मजा जिंदगी में मुझे पहली बार मिला है.

मैंने कहा- अभी तो हम दोनों पूरे 2 दिन साथ रहेंगे. देखो आगे क्या-क्या होता है.
वे मुस्कुरा दीं और हम दोनों दूसरे राउंड के लिए एक दूसरे को गर्म करने लगे.

दोस्तो, अगली कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी बहन की गांड मारी और उसे अपने दो बच्चों की मां बनाया.

फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसकी हम दोनों को उम्मीद नहीं थी.
वह सब आपको अगली बार पढ़ने को मिलेगा.

दोस्तो, मेरे लिए यह जानना बहुत बहुत महत्वपूर्ण है कि इस इंडियन सिस्टर चुदाई कहानी पर आपकी राय क्या है.
जिन परिस्थितियों में मैंने ये सब किया, क्या वह सही था या गलत, प्लीज जरूर बताएं.
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