Young Girl S3x Kahani – मस्त लड़की से दोस्ती और चुदाई की तैयारी

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Story Start Here :

यंग गर्ल S3x कहानी मेरे जीवन में सेक्स के पहले अनुभव की कहानी है। कहानी शुरू मे थोड़ी रोमांटिक है। फिर लड़की की चूत की गर्मी ने उसे मेरे सामने स्वयम् नंगी कर दिया.

दोस्तो, यह मेरे जीवन में सेक्स के पहले अनुभव की कहानी है, आशा है कि आपको पसंद आएगी.

मेरी सेक्स कहानी शुरू में थोड़ी कम रोमांटिक हो सकती है, पर बाद में आपको एक अलग किस्म की अनुभूति होगी, ऐसा मुझे विश्वास है.

यह यंग गर्ल S3x कहानी अब से 5 साल पहले की उस वक्त की है जब मैं 18 साल का था और मेरी जवानी की आग अपने चरम पर थी.
तब मैं स्कूल में ही पढ़ता था.

मैं अपना नाम नहीं बताना चाहता हूँ इसलिए खुद को राज कह कर बुलाऊंगा.

मैं एक मासूम और भोला-भाला सा लड़का था जो अभी अपनी 11 वीं कक्षा पास करके 12 में आया ही था.

हर लड़के या लड़की की तरह मुझको भी अपनी बढ़ती उम्र और यौवन के चलते दिल में कुछ होने लगा था.

स्कूल से फ्री होने के बाद मैं अपना होम वर्क करता और ऐसे ही ख्यालों में खोया रहता कि काश मेरे पास भी कोई बात करने वाला, मुझको अपना कहने वाला हो … जिसकी बांहों में मैं अपना सर रखकर सुकून से सो सकूँ.

मैं खेलने में भी अच्छा था, मेरी बॉडी एकदम फिट थी, लड़कियों को पसंद आने वाले सिक्स पैक्स भी थे.
फिटनेस का शौक होने के कारण उसी तरह की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए कभी कभी मेरा बाहर आना जाना हो जाता था.

एक दिन की बात बात है, मैं ऐसे ही पार्क में गया हुआ था तो मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी.
वह इतनी खूबसूरत लग रही थी कि एक बार कोई देख ले तो उसको देखता ही रह जाए.

गोरा रंग, पतली कमर, तीखी चितवन .. आह कोई एक बार में ही खुद उसका शिकार बनने को रेडी हो जाए.
उसके पतले पतले रसभरे से होंठ, बिल्कुल लाल लाल … जिनको देखने के बाद किसी का भी मन विचलित हो जाए.

मेरा भी वही हुआ, जो नहीं होना चाहिए था.

बोलने में बिल्कुल ब.च्चों जैसी हरकतें साफ बता रही थीं कि वह एकदम मासूम है.
उसकी ब.च्चों वाली मासूम सी शक्ल पर मेरा दिल फिदा हो गया.

मैं उसको लगभग दो घंटा तक बैठे बैठे देखता रहा, समय का पता ही नहीं चला कि कब इतना सारा समय बीत गया.

उसके बाद वह लड़की अचानक से वहां से कहीं गायब हो गयी.
अब मैं रोज उसी जगह उसी समय जाता कि वह कहीं तो मुझे दिख जाए.

ऐसे ही दिन बीतते रहे.
मैं वहां रोज जाता और उसके आने का इंतज़ार करता मगर मेरी किस्मत ही साथ नहीं दे रही थी.

मुझे मुश्किल से तो कोई पसंद आया था.
मैं अपनी क्लास की लड़की में से किसी को भी पसंद नहीं करता था.
ना ही किसी से बात करता था क्योंकि मेरा व्यवहार थोड़ा अंतर्मुखी किस्म का था.

पहली बार तो किसी लड़की को देख कर ऐसा लगा था कि लाइफ में मुझे भी कुछ मिल गया है और मेरा अकेलापन अब खत्म हो जाएगा. मेरी बेचैनी खत्म हो जाएगी.

पर मुझे क्या पता था कि कमबख्त तड़प का नाम ही प्यार है.

कई दिन इसी तरह बीते, मैं उसके सपने लेने लगा.
मुझे हर जगह बस वही दिखने लगी.
जबकि मैं उसके बारे में कुछ जानता भी नहीं था कि वह कौन है!

एक दिन भगवान् ने मेरी सुन ली और वह लड़की मुझे उसी पार्क में मिल गयी.

बस अब क्या था, मेरी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था.
मैं उसके आस-पास मंडराने लगा और उसको भी खुद के आस-पास होने का अहसास कराने लगा.

वह एक छोटे पप्पी के साथ खेल रही थी.
तो मैं भी मौका देख कर उसके पास जाने लगा और उसके पप्पी के साथ करीबी बढ़ाने लगा.

अब वह रोजाना उस पार्क में आने लगी थी अपने उसी पिल्ले के साथ.

फिर एक दिन की बात है, जब मैं उस पार्क में गया तो वह लड़की मुझे थोड़ी उदास सी दिखी.

वह शायद कुछ ढूंढ रही थी, जैसे उसका कुछ खो गया हो.
मुझे लगा कि पास जाकर पूछना चाहिए कि क्या माजरा है.

मैंने कुछ हिम्मत जुटाई और आगे बढ़ा.
लेकिन मेरे पैर उठ नहीं रहे थे … जैसे जमीन ने कसके पकड़ लिए हों.

तभी मुझे शक हुआ कि वह हमेशा अपने पप्पी के साथ आती थी, लेकिन आज वह अकेली थी … मतलब उसका पप्पी शायद गुम हो गया था और वह उसे ही खोज रही थी.

इधर शाम का वक्त हो चुका था और मौसम भी बारिश का था, जैसे अभी बारिश आने वाली थी.

मैं भी उसके कुत्ते को खोजने लगा लेकिन कहीं नहीं मिला.
अब वह लड़की भी अपने घर को जा रही थी, मैं भी वापिस अपने घर की ओर हो लिया.

तभी पार्क के कुछ दूरी पर मुझे झाड़ियों में वह कुत्ता दिखाई दिया.
मैंने उसको उठाया और सोचा कि अच्छा मौका है उस लड़की की मदद करके दोस्ती करने का.

ये सोच कर मैंने उसे अपनी गोदी में उठाया और जैसे ही पार्क की ओर मुड़ा कि तेज बारिश आने लगी.
मैंने पार्क में किसी तरह जाकर देखा लेकिन तब तक तो वह लड़की अपने घर जा चुकी थी.

अब क्या हो सकता था.
मैं उस कुत्ते को लेकर अपने घर आ गया.

उसको सुखाया और खाना खिलाया.
सोचा कि कल वापस कर दूँगा और इसी बहाने दोस्ती के लिए भी पूछ लूँगा.

लेकिन जैसे जैसे में उस कुत्ते के साथ समय बिता रहा था, मुझे उससे लगाव होता जा रहा था.

मैंने उसके साथ खेलते खेलते उसे खाना खिलाकर अपने साथ ही सुला लिया.
मैं लड़की के बारे में सोचने लगा और उस कुत्ते से बात करने लगा.

ऐसा करते करते मुझे नींद आ गयी.

अगले दिन मेरी आंख खुली तो देखा कि 8 बज चुके थे.
मैं जल्दी से उठा कि आज तो स्कूल के लिए देर हो गई थी तो आज तो डांट पक्का पड़ेगी.

मैंने मम्मी से कहा- आपने मुझे जगाया क्यों नहीं?
मुझे मम्मी ने कहा कि क्या हुआ … आज तो संडे है … किधर जाना था?

मैं उस लड़की के चक्कर में सब कुछ भूलता जा रहा था.
मैंने मम्मी से कहा- कुछ नहीं और वापस अपने कमरे में पप्पी के पास आ गया.

उसके बाद मैंने उस कुत्ते को खाना खिलाया और शाम होने का इंतजार करने लगा कि वह लड़की पार्क में आएगी और मैं उसको उसका कुत्ता लौटा दूंगा.
शाम होते ही में पार्क में पहुंचा और काफी देर तक वेट करने के बाद भी जब वह लड़की नहीं आयी तो मैं घर आ गया.

ऐसे 3-4 दिन चलता रहा, लेकिन वह लड़की नहीं आती.
शायद उसने आना बंद कर दिया था.

इन 3-4 दिनों में मेरी उस कुत्ते से काफी अच्छी दोस्ती हो गयी थी, हम साथ खेलते, साथ खाते, साथ घूमने जाते.
एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना उस लड़की के घर का पता लगाया जाए.

कुत्ते काफी समझदार होते हैं तो मैंने सोचा कि इस कुत्ते को पार्क में ले जाकर खुला छोड़ देता हूँ … और क्या पता ये कुत्ता ही अपने आप घर चला जाए और अपनों से मिल जाए.
लेकिन मेरा मन अब उस कुत्ते को छोड़ने का भी नहीं कर रहा था क्योंकि अब हम अच्छे दोस्त बन चुके थे.

जैसे तैसे मैंने अपने मन को समझाया और पप्पी को पार्क में ले जाकर छोड़ा, तो वह अपने घर की ओर चल पड़ा.
थोड़ी दूर जाने के बाद वह एक घर के सामने जाकर रुक गया.

उसी वक्त उस घर से वह लड़की निकली जिसकी मुझे तलाश थी.

उसने कुत्ते को देखा तो दौड़ कर आई और पप्पी को गोद में उठा लिया.

उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.
वह बहुत खुश थी.

उसने मुझसे पूछा तो मैंने सारी बात बताई, उसने मुझे थैंक्यू बोला और घर के अन्दर आने के लिए कहा.
मैं खुशी खुशी अन्दर आ गया.

वह भी एकदम माल लग रही थी.
मेरा मन कर रहा था कि उसे एक बार छूकर देख लूं.

उसने मुझे पानी पिलाया,
मैंने पूछा- तुम्हारे घर वाले कहां हैं?

उसने बताया कि वे सब लोग किसी शादी में गए हैं!
मैंने कहा- अच्छा तभी तुम पार्क में नहीं आ रही हो!

उसने मेरी तरफ तिरछी नज़र से देखा और बोली- तुम्हें कैसे पता?
मैं सकपका गया.

फिर उसने कहा- क्या तुम मुझे फॉलो कर रहे थे?
मैंने कोई जवाब नहीं दिया.

उसने फिर से कहा- कहीं तुमने मुझसे मिलने के लिए तो मेरे कुत्ते को नहीं उठाया था?
मैंने कहा- कसम से ऐसा कुछ नहीं है, बस मैं भी कई दिन से पार्क में आ रहा था तो पता है.

उसने मुझे घूरा.

मैंने धीरे से कहा- तुम बहुत सुंदर हो.
वह मेरी तरफ देख कर हंस दी- क्या सच में?
मैंने कहा- तुम्हें नहीं पता है क्या?

इसी तरह से कुछ देर तक हम दोनों की बात हुई.

अब मैं घर आने के लिए उठ गया और उसके दरवाजे पर आकर मैंने पलट कर उससे कहा- मेरी फ्रेंड बनोगी?
वह जोर से हंसी.
मैं कुछ समझा नहीं.

उसने कहा- अगर तुम बातें करोगे तो … अगर ऐसे बात कि जैसे अभी कर रहे हो तो बिल्कुल नहीं!
मैं समझ गया कि यह क्या चाहती है.

मेरी तो निकल पड़ी.
मैंने कहा- तो डील डन!

वह फिर से हंसी और पूछा- कितने दिनों से ट्राई कर रहे थे मेरे पीछे?
मैं हंस दिया और मैंने आंख दबा दी.

वह भी मुस्कुरा दी.

मैंने उससे उसका नंबर मांगा तो उसने दे दिया और कुत्ते के लिए दोबारा से थैंक्स कहा.
मैं घर आ गया.

अब हमारी रोज बात होने लगी.
वह मेरे मोबाइल पर अपनी सुंदर सुंदर सी फोटो भी भेजने लगी और मैं उसकी सुंदरता की तारीफ करने लगा.

एक दिन मैं उससे मिलने के लिए कहने लगा. वह भी राजी थी तो हम दोनों मिले.
तब मुझे उसके बारे में एक और बात पता चली कि वह मुझसे उम्र में दो साल बड़ी थी.

हम दोनों में प्रेम परवान चढ़ने लगा था और जवान जिस्म की आग बढ़ने लगी थी.

हम दोनों में सेक्स को लेकर बात हुई.
वह राजी थी.

फिर एक दिन में दोस्त के घर जाने के बहाने से निकला और वह अपने कॉलेज के बहाने से.
हम दोनों आयो होटल में मिले.

कमरे में जाते ही उसने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और किस करने लगी.
मुझे भी अच्छा लग रहा था लेकिन मुझे डर भी लग रहा था.

उसने मुझे बेड पर लेटाया और जोर जोर से चुंबन करने लगी.
मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था.

मैं भी उसे चोदने के मूड में आ गया था.
मैंने उठ कर अपने कपड़े उतारे और उसके सामने आ गया.

वह मुझे वासना से देखने लगी और उसने अपने हाथ ऊपर कर दिए तो मैंने अपने हाथों से उसकी टी-शर्ट को ऊपर उठाते हुए उसके जिस्म से अलग कर दी.
वह रेशमी लाल रंग की ब्रा में क्या मस्त माल लग रही थी, जैसे कोई परी जमीन पर उतर आई हो.

मैं उसे वासना से देखने लगा तो वह भी नशीली आंखों से मुझे देखने लगी.
मैंने उसके दूध ब्रा में कैद देख कर अपने होंठों पर उस अंदाज में जीभ फेरी मानो बिल्ली को दूध दिख गया हो.

उसने शायद मेरी भावना को समझ लिया था लेकिन वह आंख मारती हुई बोली- पियोगे?
मैंने हंस कर कहा- हां पिलाओ न!

वह बोली- लेकिन अभी दूध नहीं आता है!
मैंने कहा- मैं इनमें से दूध निकलवा सकता हूँ.

वह हंस कर बोली- अभी खेत को तो जोत ले मेरे मेहनती किसान.
मैंने कहा- हां मेरी जान, मेरा हल तो रेडी है.

यह कह कर मैंने अपने लौड़े को सहलाया.

वह भी अपनी चुत पर हाथ फेर कर बोली- मेरा खेत भी जुताई के लिए एकदम रेडी है.

मैंने आगे बढ़ कर उसे अपनी बांहों में भरने की कोशिश की तो वह मुझसे दूर छिटक गई और हंसने लगी.

दोस्तो, इस यंग गर्ल S3x कहानी के अगले भाग में आपको पढ़ने को मिलेगा कि किस तरह से मैंने उस मस्त नमकीन लड़की की चुत को चोदा और उसके बाद क्या हुआ?
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