Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Nude Teacher Kahani – सहकर्मी के बड़े लंड से लेडी टीचर की चुदास भड़की to make every night hot about Nude Teacher Kahani – सहकर्मी के बड़े लंड से लेडी टीचर की चुदास भड़की story.
Story Start Here :
न्यूड टीचर कहानी में मैंने अपने साथ काम करने वाले टीचर का बड़ा लंड देखा मैं उसे अपनी चूत में लेने को लालयित हो गयी. पर मेरे अंदर शर्म थी.
यह कहानी सुनें.
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दोस्तो, मैं आस्था एक विवाहित महिला हूँ और अपने पति से दूर एक गांव में सरकारी टीचर की नौकरी करती हूँ.
मेरी सेक्स कहानी के पहले भाग
सहकर्मी का बड़ा लंड देखा
में आपने अब तक पढ़ लिया था कि सरकारी टीचर की नौकरी में हम लोगों को कुछ ऐसा काम मिल गया था, जिसमें एक स्टोर की सारी बुक्स को डिजिटल करने लायक बनाना था.
उधर मेरे साथ एक युवा साथ रोशन भी काम कर रहा था.
धूल भरे स्टोर में कुछ ऐसी स्थितियां बनी थीं कि रोशन पूर्ण नग्न होकर अपना काम करने लगा था और मैं भी उसकी देखा देखी नंगी होने लगी थी.
पूरी डिटेल पढ़ने के लिए आप एक बार पुनः पहले भाग को जरूर पढ़ लें.
अब आगे न्यूड टीचर कहानी:
अगले दिन, मैंने ट्रांसपेरेंट लिंगरी डाली, जो मेरी सबसे सेक्सी लिंगरी थी.
उस दिन तो मॉर्निंग में ही उसका लंड खड़ा हो गया.
आज उसका लंड कुछ ज़्यादा ही बड़ा लग रहा था.
मैं चोरी-चोरी देख रही थी कि वह मुझे देखकर अपना लंड सहला रहा है.
तो मैंने भी चुपचाप उसे अपना नंगा शरीर दिखाना जारी रखा.
लंच के बाद, मुझे एक फाइल जो उर्दू में थी … वह मिल गई.
अब मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी उसे बुलाने की, पर क्या करती?
मैंने उसे बुलाया तो वह सकपकाते हुए अपना लंड हिलाता हुआ आया.
मेरे हाथ में फाइल थी और हम दोनों नंगे शरीर इतना पास खड़े होकर बात कर रहे थे.
उसने फाइल का डिटेल दिया तो फाइल वापस करते हुए उसका लंड मेरे पेट के ऊपर से टच करता हुआ गया.
मेरी चूत से तो पानी की नदी सी बह गई.
मैंने फिर भी अपने को संभाल कर रखा.
उस रात मैंने उसके लंड के स्पर्श को याद करके 2 बार मुठ मारी और चूचियों को भींच भींच कर उसके लौड़े को याद किया.
अगले दिन मैं पक्का प्लान करके गई कि आज तो उसके लंड को टच करके रहूँगी.
मैं स्कूल आकर सीधा रिकॉर्ड रूम में गई और अपनी वाली रैक का काम करके जल्दी से नेक्स्ट रैक पर आ गई, जो रोशन की रैक के पास ही थी.
रोशन आया और चुपचाप अपना काम करने लगा. हम दोनों एक-दूसरे को देख तो रहे ही थे.
वह रैक बहुत लंबा था.
ऊपर वाली ड्रॉअर में मेरा हाथ नहीं जा रहा था.
मैंने रोशन को हेल्प करने के लिए बुलाया.
रोशन फाइल उतार कर दे रहा था तो उसका खड़ा लंड मेरे शरीर को कई बार टच करके गया.
हम दोनों ही बहुत गर्म हुए पड़े थे, पर हिम्मत किसी की नहीं हो रही थी कि कौन पहल करे.
मैं बाथरूम गई और अपनी चूत के तूफान को शांत किया, वापस आकर काम करने लगी.
मैंने नोटिस किया कि रोशन मुझे देखकर मुठ मार रहा है.
पर मैंने इग्नोर ही किया.
लंच के बाद हम दोनों एक ही रैक पर काम कर रहे थे.
पर वह एक तरफ से और मैं दूसरी तरफ से.
हम दोनों के बीच में वह रैक था और फाइलों के बीच से थोड़ी-थोड़ी जगह, जहां से हम दोनों एक-दूसरे के शरीर को देख रहे थे.
मैं नीचे वाले ड्रॉअर में काम करती हुई नीचे बैठकर फाइल निकाल रही थी.
आज उसका लंड बिल्कुल मेरी नज़रों से सिर्फ 4 फीट दूर था और वह मुझे देख भी नहीं सकता था.
उफ्फ … कितना बड़ा और मोटा लंड था!
उसको देखते-देखते मुझे उसका लंड चूसने का मन करने लगा और मैं अपनी चूत में छुपाकर उंगली करने लगी.
थोड़ी देर में ही मेरी चूत ने पानी की धार बहा दी.
मैंने अपने मुँह पर दूसरा हाथ रख लिया ताकि मेरी सिसकारियां रोशन को न सुनाई दें.
लंच करते हुए, रोशन मेरे ससुर के बारे में पूछने लगा.
वह जानता था कि वे पॉलिटिकली काफी पावरफुल हैं.
अब मुझे समझ आ रहा था कि वह पहल क्यों नहीं कर रहा था.
उसे मेरे परिवार का डर था.
उस दिन भी कुछ नहीं हुआ और हम दोनों मन मारकर रह गए.
छुट्टी के टाइम कपड़े डालते हुए हम दोनों की ही नज़रों में प्यास थी.
घर आकर मैं काफी देर तक सोचती रही और मैंने ही हिम्मत करने की सोची.
अगले दिन मैं जानबूझ कर ब्रा पहन कर नहीं गई.
जब कपड़े उतार रहे थे तो मैंने पहले सलवार उतारी और वह पैंट उतार कर जाने ही वाला था कि मैंने दूसरी तरफ मुँह करके अपनी कुर्ती उतार दी.
मैंने धीरे से कहा- रोशन जी, मैं आज ब्रा नहीं डालकर आई हूँ, तो थोड़ी शर्म आ रही है.
उसने कहा- कोई बात नहीं मैडम, मैं दूसरी तरफ की रैक पर काम कर लूँगा.
मैंने कहा- कोई बात नहीं, आप अपना काम कर लो, बस इधर मत देखना!
यह कह कर मैं पलट गई.
मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां उसकी नज़रों के सामने थीं और मैं चुपचाप उसके सामने से लगभग नंगी होकर जा रही थी.
उसकी हालत सोचकर ही मेरी चूत गीली हो रही थी.
हम दोनों काम करने लगे और एक-दूसरे को देखकर मुठ मारते रहे.
आज उसका मुठ मारना मैंने लाइव देखा.
मैं भी नीचे बैठकर अपनी चूत में उंगली करने लगी.
मुझे पता था कि आज वह मुझे देख रहा है, तो ये सोचकर ज़्यादा ही एक्साइटेड थी.
रिसेस की बेल हुई, तब तक हम अपना काम भी करते रहे और एक-दूसरे को देखते भी रहे.
मेरी पैंटी पूरी गीली हुई पड़ी थी.
उसका भी मुठ मारकर बुरा हाल था.
हमने एक-दूसरे के शरीर को देखते हुए कपड़े पहने और चुपचाप लंच किया.
लंच के बाद स्टोर रूम में आते हुए रोशन ने दरवाजे की अन्दर से कुंडी लगा दी जो वह नॉर्मली नहीं लगाता था क्योंकि उसको डर था.
पूरे स्कूल में ऐसा काम पहली बार होने वाला था.
मैं समझ गई कि उसको हिम्मत आ गई है और वह कुछ करेगा.
पर उस दिन भी कुछ नहीं हुआ और मैं मन मारकर रह गई.
अब मेरी हिम्मत जवाब दे गई थी और मुझे लंड चाहिए था.
स्टोर का काम लगभग पूरा हो गया था और सिर्फ 2 रैक बाकी बचे थे.
मतलब जो भी करना है, सिर्फ अगले 2 दिनों में करना है.
मैं सारी शर्म-हया भूलकर अगले दिन बिना अंडरगारमेंट्स के ही स्कूल गई.
आज हम दोनों बिल्कुल नंगे हुए.
हम दोनों ने एक-दूसरे को वहीं चेयर के पास ही खूब अच्छे से देखा.
पर मैं आज भी ज़्यादा हिम्मत नहीं कर पाई और नंगी ही उसके सामने से चलती हुई अपनी रैक पर चली गई.
वह मेरी गांड देख रहा था और मैं चुपचाप नज़रें नीचे करके चली गई.
कुछ देर बाद वह रैक के इस तरफ आ गया और हम दोनों एक-दूसरे से थोड़ी दूर ही रैक के एक ही साइड में आकर काम करने लगे.
हम दोनों का बुरा हाल था.
न आज वह मुठ मार सकता था और न मैं अपनी चूत में उंगली कर सकती थी, तो हम दोनों ही जल रहे थे!
मुझसे रुका नहीं गया और मैं बाथरूम जाकर चूत को ठंडा करके आई.
उसने भी शायद मुठ मार ली थी, तभी उसका लंड बैठा हुआ था.
लंच के बाद आकर हम फिर से नंगे हुए.
फिर से एक-दूसरे को देखा और फिर से गर्म हो गए.
अब हम दोनों बहुत पास थे.
मैंने रोशन को बुलाया और ऊपर वाली रैक से फाइल निकालने को कहा.
रोशन फाइल उतार कर दे रहा था.
मैं फाइल नीचे रखती जा रही थी.
उसका लंड मेरी पीठ पर बार-बार लग रहा था.
मैंने कोई ऐतराज़ नहीं किया.
वह मेरे पीछे आया और ऊपर वाली रैक से फाइल उतारने लगा तो उसका लंड अब पूरा मेरी पीठ पर था.
मैं इतनी गर्म हो गई कि मेरे पैर कांपने लगे और मैं झड़ने लगी!
मैं वहीं बैठ गई.
रोशन ने पूछा- क्या हुआ मैडम?
मैंने कहा- कुछ नहीं, फाइल गिर गई थी.
अब मैं नीचे बैठी थी और वह ऊपर से ही फाइल दे रहा था.
उसका लंड बिल्कुल मेरी आंखों के सामने था.
मेरा मन कर रहा था कि मुँह में ले लूँ और चूस लूँ, पर हिम्मत नहीं हो रही थी.
जानबूझ कर फाइल उठाने के बहाने मैंने उसके लंड को अपने होंठों पर रगड़ लिया.
अब तो उसकी भी हालत खराब हो रही थी.
फाइल देकर वह अपने काम में लग गया.
अभी 15-20 मिनट ही हुए थे कि वह फिर आया और बोला- कुछ फाइल रह गई हैं. मैं उन्हें भी उतार देता हूँ.
मेरे मुँह से कुछ आवाज़ ही नहीं निकल रही थी क्योंकि मैं इतनी ज्यादा गर्म थी कि अब मेरे मुँह से सिर्फ सिसकारियां ही निकल सकती थीं.
मेरा मन कर रहा था कि चूत में उंगली कर लूँ और चूत थी कि पानी की नदी बहा रही थी.
वैसे भी मेरी चुत से रस निकलते हुए मेरे पैरों तक आ रहा था.
रोशन ऊपर से फाइल उतारने के बहाने मेरे पीछे आया और अब उसका लंड मेरी पीठ पर था.
हाय … इतना लंबा न होता तो बिल्कुल मेरी गांड पर लगता उसका लंड!
उसने फाइल उतारी और आगे हाथ करके मेरे हाथ पर रखने लगा.
इसी बीच उसने जानबूझ कर मेरी चूचियों को छू लिया.
उफ्फ! मेरे निप्पल्स हार्ड होते चले गए. इतने हार्ड कि बिल्कुल अकड़ गए.
वह ऊपर फाइल ढूंढने के बहाने अपना लंड मेरी पीठ पर रगड़ता रहा.
मैंने कुछ रिस्पॉन्स नहीं दिया, बल्कि चुपचाप एंजॉय करती रही.
उसकी हिम्मत बढ़ गई और उसने अपना हाथ नीचे करके अपना लंड मेरी गांड पर लगा दिया.
उफ्फ! मैं तो सिहर गई, कांप गई थी मैं!
उसने महसूस कर लिया था, पर कुछ बोला नहीं और अपना लंड मेरी गांड की दरार में सैट करने लगा.
मैं चुपचाप वहीं खड़ी रही.
वह थोड़ा सा नीचे झुका और लंड को इस तरह से मेरे पैरों के बीच में से निकालते हुए सैट किया कि वह अब मेरे पैरों के आर-पार हो गया.
मैं तो सातवें आसमान पर थी.
मेरी चूत से पानी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.
मैंने धीरे से पैरों को थोड़ा खोल लिया ताकि उसके मोटे लंड के लिए जगह बन जाए.
पर जैसे ही वह सीधा हुआ, उसका लंड मेरे पैरों में ही फंस गया.
वह वहीं से थोड़ा-थोड़ा धक्का लगाने लगा और मैं चुपचाप मजे ले रही थी.
पर उसका लंड अभी भी मेरी चूत से कुछ इंच नीचे था.
मैंने हिम्मत की और अपना एक पैर उठाकर थोड़ा सा और अपनी गांड को खोल दिया.
अब उसका लंड मेरी चूत के होंठों पर था.
उफ्फ … चुत से लंड छू गया था.
मेरी तो जान ही निकल गई!
वह भी अब मजे ले रहा था.
ऊपर से फाइल ढूंढने के बहाने वह धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा.
मेरी चूत का पानी उसके लंड पर लग गया और वह लुब्रिकेंट का काम करने लगा.
उसका लंड आगे-पीछे होते हुए मेरी चूत के होंठों को फैला रहा था.
मैं फिर से उसके लंड पर ही झड़ गई और कांपने लगी.
गिर न जाऊं इसलिए उसका हाथ पकड़ लिया और उसके हाथ के सहारे खड़ी हो गई.
हम दोनों के शरीर आपस में चिपक गए थे.
उसका लंड पूरा भीग गया था.
मैं बस आंखें बंद करके मजा ले रही थी.
तभी स्कूल की बेल बज गई और हमें जाना ही पड़ा.
हम दोनों ही अधूरी प्यास के साथ स्टोर रूम से निकले.
घर आकर मैंने शावर लिया और फिर से चूत का पानी निकाल कर सो गई.
उस रात बड़ी अच्छी नींद आई, क्योंकि कल मेरी चूत की प्यास बुझने वाली थी.
वैसे तो मैं इधर भी शॉर्ट में लिख सकती थी कि रोशन ने मुझे पकड़ लिया और मैं भी पिघल कर उसकी बांहों में समा गई.
हम दोनों के बीच जबरदस्त सेक्स हुआ और मैं उसके लंड से चुद कर तृप्त हो गई.
लेकिन यह सब कैसे हुआ, इसको विस्तार से जानने के आप मुझे मेल करें, तो ही मैं आपको अपनी चुदाई की कहानी लिखूँगी.
न्यूड टीचर कहानी कैसी लगी आपको?
धन्यवाद.
singhvikrantpratap@gmail
