Semi Nude Hot Story – सहकर्मी का बड़ा लंड देखा

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Story Start Here :

सेमी न्यूड हॉट स्टोरी में मैं टीचर हूँ. मेरे स्कूल में एक नया टीचर आया. हम दोनों की ड्यूटी धूल भरे स्टोर रूम में रिकॉर्ड मैनेज करने की लग गयी. वो शर्ट पैन्ट उतार कर काम करने लगा.

यह कहानी सुनें.

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मैं बहुत दिनों से सोच रही थी कि अपनी जिंदगी की कहानी लिखूँ.

कम से कम जिंदगी के इस मोड़ पर आकर तो पीछे मुड़कर देखने का बहुत मन करता है.
वह वक्त और दौर कुछ अलग सा ही था.

सेमी न्यूड हॉट स्टोरी कहां से शुरू करूँ, कुछ समझ नहीं आता.
पर हिम्मत शायद एक ही जगह से आई कि कुछ तो गलत हुआ है, जो ठीक करना चाहिए था.

मेरा नाम आस्था है और मैं जयपुर की रहने वाली हूँ.
मेरी शादी एक अच्छे परिवार में हुई थी.

ससुराल वाले अच्छे लोग हैं.
पति का बैंगलोर में अपना बिजनेस है और ज्यादातर वे भारत से बाहर ही रहते हैं.

मैंने शादी से पहले डबल एम.ए., बी.एड. और एम.एड. किया था.
मन था कुछ करने का.

जयपुर में ससुराल वालों का अच्छा नाम था तो गवर्नमेंट जॉब मिल गई … टीचर की.
सब अच्छा चल रहा था.

मैं अपनी जॉब से बहुत खुश थी.
पति महीने में एक बार आते थे और सब बड़े प्यार से रखते थे.

फिर सन 2014 में मेरा ट्रांसफर अलवर के पास एक गांव के स्कूल में हो गया.
यह एक छोटा स्कूल था, पर बहुत पुराना था.

वहां हम तीन टीचर थे … मैं, रवि सर और कुसुम मैडम.

कुसुम मैडम स्कूल प्रिंसिपल थीं और काफी उम्रदराज थीं.
रवि सर का ट्रांसफर होना था पर रुका हुआ था.

तभी स्वच्छता अभियान शुरू किया गया और डिजिटलाइजेशन भी.
सारे रिकॉर्ड कंप्यूटराइज करने के लिए दिए गए.
हमारे स्कूल में भी कंप्यूटर आ गया.

एक कंप्यूटर टीचर प्रकाश भी आ गया.
वह अजमेर से था और अभी-अभी नौकरी लगी थी.
वह दिखने में अच्छा था और बड़े प्यार से सब काम किया करता था.

सब अच्छा ही चल रहा था.
तभी रवि सर का ट्रांसफर हो गया और उनकी जगह रोशन आ गया.

वह हॉकी का नेशनल प्लेयर था और गवर्नमेंट जॉब भी उसे कोटा में हुई थी.
उसकी हाइट छह फुट तीन इंच की थी.

उसके आने पर स्कूल में बच्चों में डिसिप्लिन आ गया.
वह बहुत स्ट्रिक्ट था पर हम लोगों के साथ ठीक था.

हमारे स्कूल में स्वच्छता अभियान का पुनः नोटिस आया और स्कूल के रिकॉर्ड रूम की सफाई का काम कुसुम मैडम ने मुझे और रोशन को दे दिया.

काफी बड़ा और पुराना स्टोर रूम था वह.
उस रूम में 50-60 साल का रिकॉर्ड था, न जाने कब से बंद ही पड़ा था.

पहले तो उसकी सफाई करवाई बच्चों से और स्वीपर से.
जाले लगे हुए थे, गंदगी थी … वह सब हटवा दी.

फिर मैं और रोशन एक दिन लंच के बाद उस रूम को देखने के लिए गए.

सारे रिकॉर्ड्स की लिस्ट बनाई और प्रकाश को बुलाकर उससे डिटेल्स ले लीं ताकि हम भरकर उसे दे सकें.

अगले दिन मैं जयपुर से अपनी कार में जब निकली, तभी मुझे अपने घर से फोन आ गया कि मेरे मम्मी-पापा आज आने वाले हैं.
मैंने आकर कुसुम मैडम और रोशन को बताया- आज थोड़ा जल्दी निकल जाऊंगी.

फिर बच्चों को क्लास में बिठाकर मैं और रोशन रिकॉर्ड रूम में गए.
मैंने उस दिन साड़ी पहनी हुई थी.

हम दोनों ने अपने-अपने रैक तय किए और रिकॉर्ड्स को सीरियल वाइज लगाने लगे.
उनमें से कुछ रिकॉर्ड उर्दू में थे जो मुझे समझ नहीं आए.

मैंने रोशन को बुलाकर पूछा तो उसे उर्दू आती थी.
उसने मुझे गाइड कर दिया.

उस दिन मेरे कपड़े उन पुराने रिकॉर्ड्स की वजह से बहुत गंदे हो गए.
रोशन का भी वही हाल था.

हम दोनों के कपड़ों पर धूल मिट्टी लगी हुई थी.

मैं उस दिन लंच में ही निकल गई.
घर आकर सबसे पहले कपड़े चेंज किए और नहाकर आई.

बाद में नोटिस किया कि मेरी साड़ी एक जगह से फट भी गई थी … शायद किसी रैक में फंसकर ऐसा हुआ होगा.

उस रात देर तक मम्मी-पापा से बात करती रही, तो अगले दिन मैं थोड़ा लेट हो गई.

देखा तो रोशन पहले से रिकॉर्ड रूम में चला गया था.
मैं जल्दी-जल्दी भागकर रिकॉर्ड रूम में आई और आकर अपने रैक पर काम करना शुरू कर दिया.

मैंने अंदाज़ा लगाया कि रोशन अपने रैक के पीछे ही था.

थोड़ी देर में मैंने देखा कि रोशन के कपड़े बाहर वाली चेयर पर रखे थे.
पीछे मुड़कर देखा तो मैं देखती ही रह गई … रोशन नंगा ही अपने रैक पर काम कर रहा था.

वह पूरा तो नहीं नज़र आया, पर समझ आ गया कि वह नंगा ही है.
उसने मेरी तरफ देखा भी नहीं.

मैं भी चुपचाप अपना काम करती रही. हम दोनों ने कोई बात नहीं की.

रिसेस की बेल बजी तो मैं पहले निकल गई.
कुसुम मैडम के पास जाकर मैंने अपना लंच शुरू किया.
रोशन भी आ गया और लंच करने लगा.

सामान्य बातें चलती रहीं.

फिर जब हम वापस जा रहे थे, तो रोशन ने कहा- कल मेरे कपड़े खराब हो गए थे और मैं अकेला रहता हूँ, घर पर कोई साफ करने वाला भी नहीं है. इसलिए मैंने सोचा कपड़े उतारकर काम कर लूँ, ताकि कपड़े खराब न हों.
मैं चुप रही.

उसने मुझसे पूछा- आपको कोई प्रॉब्लम तो नहीं है?
मैंने उससे कोई ऑब्जेक्शन नहीं जताया.

उसका आइडिया मुझे भी अच्छा लगा क्योंकि मेरी साड़ी फट गई थी.
तो मैंने भी अपनी साड़ी उतार दी.

मैं ब्लाउज़ और पेटीकोट में ही काम करने लगी.

उसका रैक अलग था और मेरा अलग, तो हम दोनों को कोई प्रॉब्लम नहीं हुई.
उसने कोई गंदी हरकत नहीं की और मेरी तरफ देखा तक नहीं.

अगले दिन हम दोनों एक साथ गए.
मैं साड़ी उतार रही थी और वह अपने कपड़े उतारकर चेयर पर रख रहा था.

मुझे साड़ी उतारने में थोड़ा टाइम लगता है और वह अपनी शर्ट-पैंट उतार कर चला गया.

जब वह वापस आ रहा था तो मैंने देखा कि उसने अंडरवियर भी नहीं पहना था और वह बिल्कुल नंगा था.
मैं उसके चूतड़ देख रही थी जो काफी कसे हुए थे.

फिर वह और मैं अपने काम में लग गए.

रिसेस की बेल हुई तो मैं जल्दी से साड़ी पहन रही थी, तभी रोशन आ गया.
उसका लंड बहुत बड़ा था … इतना बड़ा लंड मैंने कभी नहीं देखा था.
बैठा हुआ भी कम से कम 5 इंच का था. मैंने देखकर मुँह फेर लिया.

रोशन ने बोला- सॉरी मैडम, हमारे यहां अंडरवियर नहीं डालते, पर आप चिंता न करें … मैं आपको कोई प्रॉब्लम नहीं दूँगा!

लंच के बाद, हम दोनों आए और इस बार न जाने क्यों मैं जानबूझ कर साड़ी उतारने में थोड़ा लेट कर रही थी क्योंकि मैं रोशन का लंड देखना चाहती थी.
उसने जब कपड़े उतारे, तो मैं कनखियों से उसका लंड देख रही थी.

उफ्फ! कितना बड़ा और मोटा था!

मेरे पति का खड़ा होकर भी सिर्फ 5 इंच का था और इसका तो बैठा हुआ ही इतना बड़ा था.
उस दिन मैं चोरी-चोरी उसका लंड देखने की कोशिश करती रही, पर इतनी दूर से कुछ साफ नहीं दिखाई दिया.

छुट्टी में जाते हुए थोड़ी देर तक देखती रही.
कार चलाते हुए भी मैं उसके लंड को ही सोच रही थी.

घर आकर पहले तो ठंडे पानी का शावर लिया.
मेरी चूत पूरी गीली थी.
बहुत देर तक उसके लंड को सोचकर उंगली करती रही.

रात को पति को फोन किया कि वे आ जाएं.
पति ने कहा- इस महीने नहीं, क्योंकि मुझे हांगकांग जाना है एक बिजनेस ट्रिप पर.

मैं उनसे क्या कहती?
पूरी रात ऐसे ही निकल गई.

अगले दिन मैंने जानबूझ कर सलवार सूट डाला और स्कूल चली गई.
पर स्कूल आकर कपड़े उतारने की हिम्मत ही नहीं हुई और उसका लंड ही देखती रही.

दोपहर तक मेरी चूत में इतना पानी भर गया कि टॉयलेट जाकर अपने को शांत करना पड़ा.
जब रिसेस की बेल हुई, तो वह बिल्कुल पास था और मैं काम करने के बहाने उसका लंड ही देखती रही.

मेरे कुर्ते पर बहुत मिट्टी लग गई थी.
पहले तो उसे साफ किया और चुत को रगड़ कर ढीली करके हाथ धोकर खाना खाने आ गई.

हमने लंच साथ में किया और इधर-उधर की बातें करते रहे.
रिसेस के बाद जब हम वापस आए, तो मैंने हिम्मत करके अपना कुर्ता उतार दिया.

मैंने नीचे ब्रा डाली थी, पर रोशन का मुँह खुला रह गया.
मेरी 34D की चूचियां देखकर उसके लंड में हल्की सी फुरकन हुई … पर उसने कुछ कहा नहीं और कोई हरकत नहीं की.

हम दोनों ने चुपचाप अपना काम किया और छुट्टी के टाइम ही एक-दूसरे के सामने आए.

उस वक्त उसके लंड में कोई उफान नहीं था और मैं अपने पर गुस्सा हो रही थी कि मेरी ब्रा में कसी हुई चूचियां देखकर भी उसका लंड खड़ा नहीं हुआ.

अब मेरा पूरा ध्यान उसका खड़ा लंड देखने पर लगा था.

उस दिन भी मैंने पति के साथ बहुत देर तक बात की.

उन्हें समझाया कि मुझे उनकी ज़रूरत है और वह आ जाएं.
पर उन्होंने बड़े प्यार से समझा-बुझा कर मुझे सुला दिया.

अगले दिन भी मैंने सलवार सूट डाला और अपनी मनपसंद लायेंजरी सैट डालकर गई.

उस दिन हम दोनों स्टोर में एक साथ घुसे और अपने कपड़े उतारने लगे.

उसने पहले उतार लिया था पर वह जानबूझ कर रुक रहा था.

मैंने अपना कुर्ता उतारा और आज तो मैं अपनी सलवार का नाड़ा भी खोलने लगी.

उसके लंड में थोड़ा सा उफान आ गया था.
पता नहीं कैसे मैंने हिम्मत की और सलवार उतारकर चेयर पर रख दी.

फिर बिना पीछे मुड़े अपनी रैक पर चली गई, क्योंकि उसकी नज़रों से नज़रें मिलाने की हिम्मत नहीं थी मुझमें.

थोड़ी देर में मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वह अपने काम में लगा था.

अब तो मुझे बड़ा गुस्सा आ रहा था और अपने को कोस रही थी कि मैंने ये क्यों किया!
रिसेस की बेल हुई तो मैं थोड़ा रुकी.

वह आया और जब अपने कपड़े पहन ही रहा था कि मैं जानबूझ कर इस तरह आई कि वह मुझे पूरी तरह से देख सके.
मैं उसकी नज़रों का पीछा कर रही थी.

उसने ऊपर से नीचे तक मुझे देखा और घूरता ही रहा.
उसके हाथ रुक गए थे.

मैं आई और अपनी सलवार उठाकर पहनना शुरू कर दिया.
मेरी नज़र उसके लंड पर पड़ी … हे भगवान! वह तो खड़ा होने लगा था!

उसका लंड कितना मोटा और लंबा होता जा रहा था … मैं फटी हुई आंखों से उसे लंड को देख रही थी.

मेरे भी हाथ रुक गए.
मैं जानबूझ कर कुछ इस तरह से झुकी कि वह मेरी चूचियां और गांड दोनों देख सके.

कुर्ती डालते हुए मैंने देखा कि उसने पैंट पहन ली और अपना खड़ा लंड एडजस्ट करने लगा.

हमने उस दिन चुपचाप लंच किया और ज़्यादा बात नहीं की.

रिसेस के बाद जब हम आए तो हम दोनों एक-दूसरे को देखकर कपड़े उतार रहे थे.
पर आज हमारी नज़रें आपस में नहीं मिलीं.
क्योंकि मैं उसका लंड देख रही थी और वह मेरा नंगा शरीर.

उस दिन काम में न तो मेरा मन लगा और मैं चोरी-चोरी देख रही थी कि वह मुझे घूरे जा रहा था.

पर हम दोनों की ही हिम्मत नहीं हुई कुछ करने की.
मेरी तो बिल्कुल भी नहीं थी.

इतना भी मेरे लिए बहुत था.

दोस्तो, मैं आपको इधर रोक रही हूँ और अगले भाग में विस्तार से अपनी वासना की तृप्ति को लेकर लिखूँगी.
आप मेरी इस सेमी न्यूड हॉट स्टोरी पर अपने विचार जरूर भेजें.
धन्यवाद.
singhvikrantpratap@gmail

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