Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Hot Mausi Chudai Kahani – मौसी को सेक्स के लिए मनाकर चूत मार ली to make every night hot about Hot Mausi Chudai Kahani – मौसी को सेक्स के लिए मनाकर चूत मार ली story.
Story Start Here :
हॉट मौसी चुदाई कहानी में मैं अपनी मौसी के सेक्सी फिगर को बहुत पसंद करता था। एक बार हमें इमरजेंसी में रात में होटल में रुकना पड़ गया। वहां मैंने मौसी को मनाकर उनकी चूत मार ली।
दोस्तो, मैं अंतर्वासना का नियमित पाठक हूं।
मैंने अंतर्वासना पर रिश्तों में चुदाई, आंटी की चुदाई, बहन की चुदाई, गे सेक्स, वाइफ स्वैपिंग सेक्स जैसी अनगिनत कहानियां पढ़ी हैं।
लेकिन कभी अपनी कहानी कहने का मौका नहीं मिला।
तो आज मैं आप लोगों को अपनी दास्तां बताने जा रहा हूं।
यह घटना मेरे और मेरी हॉट, सेक्सी मौसी के बीच हुई थी।
हॉट मौसी चुदाई कहानी लिखने में कोई गलती हो तो मुझे माफ करिएगा।
मेरा नाम कृष है और मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से शहर का रहने वाला हूं।
मेरे पिताजी 3 भाई हैं जिनमें मेरे पापा दूसरे नंबर के, मतलब मंझले भाई हैं।
मेरे बड़े पापा अलग रहते हैं अपने परिवार के साथ।
मेरे पापा और चाचा का परिवार साथ में रहता है।
मेरे चाचा की शादी मेरी मम्मी की चचेरी बहन जिनका नाम शकुंतला है, उनसे हुई थी।
मैं उनको चाची कम और मौसी ज्यादा मानता हूं क्योंकि मम्मी से उनका रिश्ता पुराना है।
मौसी की सेक्सी फिगर का मैं दीवाना था।
उनका रंग बहुत ही अच्छा है मतलब न तो ज्यादा गोरा और न ज्यादा सांवला।
एकदम परफेक्ट स्किन कलर है।
उनका फिगर ऐसा है कि वो किसी हिरोइन से कम नहीं लगती है।
हम लोग साथ में रहते थे तो अक्सर मेरी नजर मौसी पर रहती थी और मैं उनको बहुत पसंद करता था।
हालांकि मेरे चाचा की तबियत खराब रहती थी और बाद में फिर उनका देहांत हो गया था।
मगर उनके जाने से पहले उनके दो बच्चे हो चुके थे जिनमें एक लड़का था और एक लड़की।
अब असली कहानी पर आते हैं।
यह बात 2018 की है जब मैं अपने कॉलेज में फाइनल ईयर में पढ़ रहा था।
तो एग्जाम खत्म कर के मैं घर छुट्टी मनाने के लिए आने वाला था।
फिर उसी वक्त मुझे घर से कॉल आया कि जितनी जल्द हो सके घर आ जाना, कुछ जरूरी काम है।
मैंने पता किया क्या हो गया ऐसा, क्या जरूरी काम आ गया।
तब मुझे पता चला कि मौसी के लड़के (अनुज) की तबियत काफी खराब हो गई थी और उसको लेकर बड़े अस्पताल शहर में जाना था।
मैं घर आया और तैयारी शुरू कर दी शहर जाने की।
उसी रात को हम बस से शहर के लिए रवाना हुए।
सुबह तक हम अस्पताल पहुंच गए।
अनुज का इलाज हुआ और डॉक्टर ने कहा एक दिन और रुकना पड़ेगा रिपोर्ट के लिए।
तो हम लोग पास ही में एक लॉज में रुक गए।
तब तक मेरे मन में मौसी के लिए कोई भी सेक्स जैसा विचार नहीं था।
सुबह रिपोर्ट चेक करके हम वापस लौट गए और एक हफ्ते बाद डॉक्टर ने फिर बुलाया था ऑपरेशन करने के लिए।
तो हफ्ते भर बाद हम तीनों ही वापस शहर को आ गए लेकिन कुछ दिक्कत की वजह से ऑपरेशन में दो दिन लगने वाले थे।
हम उसी लॉज में रुके जहां पहले रुके थे लेकिन इस बार होनी को कुछ और ही मंजूर था।
मैंने मौसी को किसी से फोन पर बात करते हुए सुना।
उनकी बातों से लगा कि उन्होंने चाचा के जाने के बाद कहीं और ही अपना जुगाड़ लगा लिया है।
होता भी क्यूं ना, शरीर की जरूरत भी तो होती है, सिर्फ 31 साल की उम्र में वो अकेली रह गई थी।
अब मैंने सोचा क्यों न मैं भी ट्राय करूं, आखिर शरीर की जरूरत रिश्ते नहीं देखती।
काफी मशक्कत के बाद डरते-डरते मैंने बात शुरू की।
आखिर वो मेरी चाची और मौसी दोनों थी और बात बिगड़ जाती तो मेरा दाना पानी सब बंद हो जाता।
घर से मार पड़ती वो अलग।
मैंने दूसरे दिन पूछा- मौसी, रात में किससे बातें हो रही थीं, ब्वॉयफ्रेंड था क्या?
मैंने हंसते हुए पूछा था तो मौसी भी बात टाल गई और बोली- फालतू की बात मत कर।
डॉक्टर से चेकअप के बाद हम वापस लॉज में आए और शाम का खाना खाया और मैं बिस्तर पर पड़े-पड़े नेट चला रहा था.
लेकिन नेटवर्क डाउन होने की वजह से नेट नहीं चल रहा था।
मैंने देखा मौसी को भी नींद नहीं आ रही थी।
मैंने पूछ लिया- ब्वॉयफ्रेंड की याद आ रही है क्या?
मौसी ने जवाब नहीं दिया।
मैंने भी सोच लिया कि जो होगा देखा जाएगा।
मैंने डरते-डरते उनकी कमर पर हाथ लगा दिया और कहा- ब्वॉयफ्रेंड नहीं तो क्या हुआ, मैं तो हूं ना!
वो चौंक गईं।
भाई दूसरे बेड पर सो चुका था, लाइट भी बंद थी।
मौसी ने कहा- चुपचाप सो जाओ, फालतू चीजों में ध्यान ज्यादा लग रहा है तुम्हारा आजकल।
दोस्तो, मगर मैंने भी ठान लिया था कि आज नहीं तो कभी नहीं।
मैं बोला- मुझे पता है कि आप अपने ब्वॉयफ्रेंड से बात कर रही थीं, लेकिन अभी तो मैं हूं आपके पास, बॉयफ्रेंड ही समझ के मान जाओ और आ जाओ मेरे पास, यहाँ कौन देख रहा है जो बदनामी होगी? मैं किसी को बताऊंगा नहीं और आप भी मत बताना।
कहते हुए मैंने उनके पेट पर हाथ लगा दिया और धीरे-धीरे सरकाने लगा नीचे की ओर।
वो भी अब मेरी बातो में आ चुकी थी, लेकिन नाम मात्र का विरोध भी कर रही थी।
मैंने मौके को देखते हुए उनकी साड़ी खींच कर नीचे सरका दी।
उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई।
मैंने उनके हाथ को पकड़ कर अपने लन्ड पर रखवा दिया।
वो भी 5.5 इंच बड़े मेरे लन्ड का अंदाजा लगा चुकी थी।
अब वो भी मेरा साथ देने लगी।
मैंने उनकी साड़ी पेटीकोट समेत नीचे कर दी और पैंटी को सरका दिया।
मौसी की चूत नंगी थी मेरे सामने।
अब मैं उनकी चूत चाटने लगा।
क्या ही नजारा था, मैं बयां नहीं कर सकता।
मौसी की मस्त चूत चाटने का मौका मिल रहा था।
एकदम से कसी हुई सी लग रही थी चूत और उस पर बाल भी नहीं थे।
मैं मौसी की चूत में जीभ देने लगा।
मौसी भी अब मादक सिसकारियां लेने लगी थी।
वो मेरे बालों को सहला रही थी।
चूत की चुसाई करते हुए मैं मौसी के चेहरे को देख रहा था।
मौसी की हवस बढ़ती ही जा रही थी।
अब मुझे समझ आ रहा था कि मौसी अपने बॉयफ्रेंड से क्यों बात कर रही थी क्योंकि शायद मौसी का सेक्स का मन कर रहा था और अगर आज मैं मौसी को नहीं चोदता तो वो जरूर दो चार दिन बाद किसी लंड से जाकर चुदने वाली थी।
मौसी बार-बार अपनी गांड को उठाकर अपनी चूत में जीभ को और अंदर तक डलवाने की कोशिश कर रही थी।
मैं भी पूरे जोश में आ चुका था।
मेरा लंड मेरी पैंट में बगावत कर रहा था और फाड़कर बाहर आने को हो रहा था।
अब हम दोनों से रहा नहीं जा रहा था।
मौसी ने कहा- प्लीज डाल दो अब अंदर!
मैं भी नया-नया था इस खेल में!
मैंने भी देर ना करते हुए लंड को बाहर निकाल लिया।
मैंने अपनी पैंट उतारी और घुटनों तक कर दी।
फिर मौसी की टांगों को फैलाया और लंड को चूत पर लगा कर अंदर घुसा दिया।
चूत चाटने के के कारण अंदर से काफी गीली हो चुकी थी।
मौसी की चूत ने काफी पानी भी छोड़ रखा था।
इस वजह से चूत अंदर से पूरी चिकनी हुई पड़ी थी।
लंड को अंदर घुसने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी।
मैंने धक्का मारा तो आधा लंड मौसी की चूत में उतर गया।
उनको दर्द हुआ और वो उचक गई।
लेकिन वो दर्द को बर्दाश्त कर गई।
फिर मैंने चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए।
कुछ ही देर में मौसी को भी मजा आने लगा।
अब मैं मौसी की चुदाई जमकर करने लगा।
मौसी भी लंड लेने का पूरा मजा ले रही थी।
धीरे धीरे मेरी रफ्तार बढ़ने लगी।
मैं तेजी से मौसी की चूत में धक्के लगाने लगा।
चोदते हुए मुझे भी बहुत मजा आ रहा था और मौसी की भी सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह कृष … ओह्ह … और तेज … आह्ह बहुत मजा आ रहा है आह्ह कृष … ओह्ह आह्ह।
एकाएक मुझे लगा कि मेरा छूटने वाला है।
मौसी की मादक सिसकारियों से मेरा वीर्य मेरे काबू के बाहर हो चला था।
मैं धक्के मारते हुए मौसी की चूत में खाली होने लगा।
देखते ही देखते सारा माल मैंने चूत में गिरा दिया और मेरी स्पीड कम होते होते चुदाई रुक गई।
मैं मौसी के ऊपर लेट गया।
वो भी समझ गई कि मेरा माल निकल चुका है।
अब मेरा लंड सिकुड़ने लगा लेकिन मौसी का मन नहीं भरा था।
वो उठी और फिर लंड चूसने लगी।
मुझे गुदगुदी हो रही थी लेकिन मजा भी आ रहा था।
लगभग दस मिनट तक लगातार मौसी ने मेरा लंड चूसा और फिर मेरा लंड खड़ा होने लगा।
देखते ही देखते मेरा लंड फिर से अपने पूरे आकार में आ गया।
मैंने एक बार फिर से मौसी की चूत का निशाना साध लिया।
इस बार मौसी घोड़ी की पोजीशन में थी।
मैंने पीछे से लंड लगाया और मौसी की चूत में धक्कम पेल शुरू हो गई।
आधे घंटे तक मैंने मौसी की चूत मारी और फिर चूत में ही माल छोड़कर सो गया।
रात भर यही खेल चला।
हम सुबह के 4.30 बजे सोये थे और 9 बजे उठ गए।
फिर जाने का समय हो गया।
हमने 2 स्लीपर और एक चेयर की सीट बुक कराई थी।
भाई को नींद नहीं आ रही थी तो वो चेयर वाली सीट पर चला गया।
मैं और मौसी स्लीपर में थे।
मेरा ट्रेन में चुदाई का मन कर रहा था।
मैंने मौसी को इशारा किया।
शायद उसके मन में भी चुदाई का ही ख्याल चल रहा था।
वो भी तुरंत मान गई।
मैं उठकर मौसी की सीट पर चला गया। जब रात को सब सो चुके थे तो सबके पर्दे लगे हुए थे। पर्दे के अंदर किसी को कुछ पता नहीं चलने वाला था।
जाते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। कुछ देरे मैंने मौसी के बूब्स को दबाया और फिर चूत को रगड़ना शुरू कर दिया। मैं मौसी की सलवार में से ही चूत को रगड़ रहा था।
वो भी गर्म होने लगी। मौसी ने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया। अब मैं मौसी की चूत को सहला रहा था और वो मेरे लंड को सहला रही थी।
जब मौसी से रुका नहीं गया तो मौसी ने मेरी पैंट को खोल लिया। फिर वो नीचे को सरक गई और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी। कुछ ही देर में लगने लगा कि जैसे छूट जाएगा तो मैंने मौसी को हटने का इशारा किया।
मैंने उनको नीचे लेटाया और खुद ऊपर आकर चूत में लंड डाल दिया। मैं मौसी को आहिस्ता आहिस्ता से चोदने लगा। फिर कुछ देर में मेरा वीर्य निकलने को हो गया और मैंने मौसी की चूत में ही अपना माल निकाल कर खाली कर दिया।
फिर मैं अपनी सीट पर आकर सो गया। तो अनुज का इलाज चलने तक कई बार ऐसे ही मैंने मौसी की चुदाई की। फिर एक बार जब सब घरवाले शादी में गए हुए थे तो हमने पूरी सुहागरात मनाने का प्लान किया।
हमने बेड को फूलों से सजाया, मौसी ने लाल साड़ी पहनी और हमने सुहागरात मनाई। अब तक हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे।
उस रात मैंने भाभी को पांच बार चोदा। भाभी ने भी मेरे लंड का माल पीया। हमने बेड पर चुदाई की। सोफे पर चुदाई की और बाथरूम में शॉवर चुदाई का मजा भी लिया।
इस तरह से हमारा चुदाई का खेल अब चलता ही जा रहा था। जब भी घर में मौका मिलता था तो चुदाई का पूरा मजा लेते थे। मौसी और मैं जैसे पति-पत्नी बन गए थे।
दोस्तो, 6 महीने से अब मौसी और मैं साथ नहीं हैं। अब मैं अकेला सा हो गया हूं। चूत चुदाई किए हुए बहुत दिन हो चुके हैं और मैं किसी सेक्सी की चूत की तलाश में भटक रहा हूं।
यह थी मेरी हॉट मौसी चुदाई कहानी। आपको यह स्टोरी कैसी लगी मुझे जरूर बताना। आप सबकी प्रतिक्रियाओं का मुझे इंतजार रहेगा।
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