Ass Sex Kahani – Free Hindi Sex Stories

Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Ass Sex Kahani – Free Hindi Sex Stories to make every night hot about Ass Sex Kahani – Free Hindi Sex Stories story.

Story Start Here :

ऐस्स सेक्स कहानी में मैंने दीदी के घर में उनकी साड़ी और सारे कपड़े पहन लिए. मैं दीदी जैसा दिखने लगा. जीजू ने मुझे देख लिया. उनका लंड खड़ा हो गया.

फ्रेंड्स, मैं आपको अपनी गांड चुदाई की कहानी सुना रहा था.

कहानी के पहले भाग
मुझे लड़कियों के कपड़े पहनना पसंद था
में आप अब तक पढ़ चुके थे कि मैं अपनी दीदी जीजा जी के फ्लैट पर रुका हुआ था.
दीदी ने मुझे एक अलग कमरे में रुकने का इंतजाम किया था.
उधर अल्मारी में दीदी की साड़ी आदि कपड़ों को निकाल कर मैं एक विवाहित महिला के जैसे सज गया था और अपनी ही वासना में फुँक रहा था.
तभी कमरे की कुंडी खड़कने की आवाज आई और मैं घबरा कर पर्दे के पीछे छुप गया.

दीदी जीजा जी कमरे में आ गए और जीजा जी दीदी के कहने पर मुझे चूमने लगे और पेलने की तैयारी करने लगे.

अब आगे ऐस्स सेक्स कहानी:

मेरे बदन को जैसे बिजली का हल्का झटका महसूस हुआ.
मेरे जीवन में पहली बार किसी मर्द के होंठ मेरे होंठों को छू रहे थे!
उनके होंठों के नर्म गर्म स्पर्श का जवाब मेरे होंठों ने अपने आप दे दिया.

मेरा निचला होंठ उनके दोनों होंठों में घुसकर उनकी लहराती हुई जीभ से जा मिला और मेरी जीभ उनके गर्म ऊपरी होंठ का स्वाद लेने लगी.
मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा.

जीजू की गर्म सांसें मैं अपनी गर्दन पर महसूस करने लगा.
यहां तक कि जब मैं अपने साथ शिकार होने जैसी की हालत में था, तब भी मैं इस मर्दाना स्पर्श की लालसा करने लगा.

मैं अपने बर्ताव से आश्चर्यचकित था.

उनके दोनों हाथ मेरी पीठ को कसके सहला रहे थे.
मेरा पल्लू मेरे सीने से फिसल कर नीचे गिर गया.

मेरे कपड़ों पर छिड़की गई सेंट की मादक खुशबू धीरे-धीरे चढ़ते नशे की तरह मुझे मदहोश कर गई.
यकायक मेरी आंखें बंद हो गईं.

मैंने महसूस किया कि जीजू का हाथ कस गया है.
उनकी नुकीली दाढ़ी मेरी ठुड्डी से रगड़ रही है और वहां मेरे रोंगटे खड़े हो गए.

मेरे होंठों को जोर से चूसते हुए वह पीछे से मेरे मांसल नितंब जोर जोर से दबाने लगे.

किस जारी रखते हुए मैंने अपने दोनों हाथ अपनी छाती से नीचे ले जाकर उनकी कमर पर लपेट लिए और अपनी कमर हिलाकर मैं उनका साथ देने लगा.

मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि जीजू भी मुझमें मदहोश हो रहे हैं.
मुझे उनका खड़ा लंड मुझे मेरे लंड पर रगड़ता हुआ महसूस हो रहा था.

मुझे अपनी पैंटी के अन्दर से अपना स्खलन महसूस हुआ.
मेरा शरीर संतुष्ट था लेकिन मेरा मन अब अपने कौमार्य भंग होने के लिए तरस रहा था.

दस मिनट तक कसकर मेरे होंठों को चूमने के बाद जीजू ने मेरे होंठों को धीरे से छोड़ दिया.

मैंने अपनी आंखें खोलकर जीजू की आंखों में देखा.
मुझे ऐसा लगा जैसे हमारी आंखों में कोई मौन बातचीत हो रही हो.

भले ही मैं किसी पहाड़ी से फेंके जाने जैसी हालत में था, फिर भी मेरा मन इस विचार से मचल रहा था कि जीजू जैसे ताकतवर आदमी द्वारा मेरा कौमार्य भंग होने वाला है.

अब जीजू ने अपने दोनों हाथों से मेरे कंधों को दबाया और मुझे घुटनों के बल बैठने का इशारा किया.
जब मैं अपनी साड़ी ठीक करते हुए घुटनों के बल बैठा तो उन्होंने मेरा सिर अपनी पैंट पर दबा दिया.

मेरे मुँह में जीजा जी की पैंट के अन्दर उनका सख्त लंड महसूस हुआ.
मुझे पता चल गया था कि अब मुझे क्या करना है.

मैंने एक प्यारी-सी मुस्कान के साथ उनकी तरफ देखा और धीरे से उनकी पैंट की बेल्ट खोली.
पैंट को अंडरवियर समेत नीचे खींच दिया.

अब मेरे सामने जीजू का बड़ा-सा छह इंच का तना हुआ लंड मेरे मुँह में जाने के लिए उतावला हो रहा था.
मैंने तुरंत जीजू का लंड एक हाथ से पकड़ा, मुँह में लेकर उसे चूसने लगा.

आह … कितनी अधिक गर्मी थी उसमें!

मेरे होंठों और जीभ पर उस लंड के गर्म अहसास ने मेरे बदन को गर्म कर दिया.
इस अजीब स्थिति में मेरी कामेच्छा बढ़ने लगी और मैं जीजू के छह इंच मोटे सांप को अपने मुँह में पूरा अन्दर लेने की कोशिश करने लगा.

जीजू ने एक हाथ से मेरा सिर दबाना शुरू कर दिया और अपनी कमर ऐसे हिलाने लगे मानो वह मेरे मुँह को चुत समझ कर संभोग कर रहे हों.

मैं दीदी को अनदेखा करके जीजू के लंड को पूरी शिद्दत से चाटने और चूसने लगा.
जैसे ही लंड मेरे गले को छूने लगा, मुझे ऐंठन महसूस हुई. मैं उसे दबाने की कोशिश कर रहा था.

तभी जीजू ने मेरा सिर पकड़ कर अपनी कमर का एक जोर का झटका मारा और मेरी सांसें गले में अटक गईं.
मैं अपना मुँह दूसरी ओर ले जाकर खांसने लगा.

पंद्रह मिनट तक ऐसे ही लंड चूसने के बाद मैं ठीक से सांस ले रहा था.

‘बस इतने में थक गई तुम?’
मैंने जीजू को मुझे प्यार से पूछते हुए सुना.

मुझे बहुत अच्छा लगा कि जीजू ने मेरा हाल जानने की चेष्टा की.
मैं जान चुका था कि जीजू मेरी ओर पूरी तरह से आकर्षित हो चुके थे.

जब उन्होंने मेरे लिए ‘थक गई तुम?’ जैसे स्त्रीवाचक संज्ञा का उपयोग किया तो मैंने उनकी ओर एक चुटीली मुस्कान के साथ देखा.

फिर प्यार भरे लहजे में जवाब दिया- मैं तुम्हारी इस्तेमाल-शुदा पत्नी हूँ क्या … जो इतने में थक जाऊंगी!

यह कह कर मैंने दीदी की तरफ देखा तो वे एकदम से गुस्साई नजरों से मुझे देख रही थीं.

अगले ही अपनी आंखों से जीजा जी के लंड की ओर इशारा करते हुए कहा- अगर आज मुझे मरना भी पड़ता, तो भी मैं आपके इस औज़ार से बार-बार मरना पसंद करूँगा!

फिर जैसे एक औरत अपने पति की बांहों में से अपनी सौतन की तरफ हिकारत से देखती है, वैसे मैंने दीदी की आंखों में आंखें डालकर उन्हें नीचा दिखाते हुए भंगिमा बनाई और जीजू के सामने पीठ के बल खड़ा हो गया.

मेरी पीठ उनकी छाती पर टिक गई और मेरी मांसल कमर उनके लंड को रगड़ने लगी.
उन्हें अहसास हुआ कि मेरी गांड उनके लौड़े के भीतर आने का इंतज़ार कर रही थी.

उन्होंने मेरा पेट पकड़ कर मेरी कमर को अपने लंड पर दबा दिया और मेरी मांसल कमर का पूरा मजा लेने लगे.

उनका घर्षण मेरी साड़ी का आकार बिगड़ रहा था लेकिन मैंने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया.

मैंने गर्म आह भरी और दीदी की ओर देखा.
दीदी किसी सौतिया ढाह की जलन से आग-बबूला हो रही थीं और हम दोनों को गुस्से से घूर रही थीं.

मुझे दीदी के चेहरे से साफ लग रहा था कि कुछ देर पहले मेरी कही गई आशिकाना बातें उनके दिल पर चोट कर गई थीं.
अब दीदी को पता चल गया था कि जीजू मेरी ओर पूरी तरह से आकर्षित हो चुके थे.

एक खूबसूरत औरत की खूबसूरती उसका सच्चा स्वाभिमान होता है और मेरे अन्दर की औरत इस बात से बहुत खुश थी कि मैंने आज दीदी के स्वाभिमान को कुचल दिया है.
दीदी का चेहरा लाल हो गया था.

दीदी के सामने उनके पति को मेरे लिए मदहोश होते देखना मेरे लिए आंतरिक खुशी थी.
चूंकि दीदी ने मुझे नीचा बनाने के लिए जो सज़ा देने की कोशिश की थी, उसके परिणाम को अब वे सहन नहीं कर पा रही थीं.

वे क्रोध से फनफना उठीं और मेरी ओर दौड़ पड़ी.

मैंने प्रतिकार करने के लिए अपने हाथ उसके सामने कर दिए और अपनी आंखें बंद करके अपना चेहरा एक तरफ कर लिया.
तभी मुझे जीजू का झटका लगा और मैं नीचे गिर गई … फर्श पर बैठ गई.

मेरी आंखें अभी भी कसकर बंद थीं.
मैंने दो पल के लिए एक तेज आवाज सुनी और फिर पास में कोई भारी चीज जमीन पर पटकने की आवाज़ आई.

मैंने धीरे-धीरे आंखें खोलीं और उस ओर देखा. मैं जो देख रहा था, उस पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था!
दीदी मेरे सामने फर्श पर गिरी हुई पड़ी थीं.

उनकी आंखें सुस्त लग रही थीं.
मुझे बहुत ग्लानि महसूस हुई कि मेरी बहन मेरी वजह से गिर गई है.
इसलिए मैं उनकी मदद करने उनके पास गया.

मैंने जीजू की तरफ देखा जो दीदी की तरफ गुस्से से देख रहे थे.
मेरी उलझन देखकर उन्होंने मुझे दोनों हाथों से पकड़ कर अपने सामने खड़ा किया और पूछताछ की.

मैंने अपना पल्लू ज़मीन से उठाया और अपने सीने पर ओढ़ लिया.
मैं दीदी की तरफ देख नहीं पा रहा था. मुझे पसीना आने लगा.

मेरी ओर देखते हुए जीजू ने मुझे संवारते हुए कहा- आखिरकार उसे अपने कर्मों का फल मिल ही गया! उसने अपने जीवन में कभी किसी को महत्व नहीं दिया. सबसे पहले मुझे मेरी इच्छा के विरुद्ध भागकर शादी करने के लिए मजबूर किया. यही औरत तुम्हारे पिताजी की मृत्यु की असली जिम्मेदार थी लेकिन मेरा मन इस बात के लिए खुद को हमेशा कोसता रहा. फिर भी वह संतुष्ट नहीं थी!

मैं जीजा जी की बातों को हतप्रभ होकर सुन रहा था.

‘मेरी पीठ पीछे उसने मेरे ही दोस्तों के साथ संबंध रखे. ये बात मुझे पता चलने पर उसने मुझे मेरी ही मर्दानगी में कमी होने का झूठा बहाना सुनाया … और अब तुम्हें परेशान करने की योजना बनाई!’

मुझे लग रहा था कि जीजा जी यह सब दिल से बोल रहे थे.

उन्होंने आगे कहा- मैं उसके व्यवहार से इतना निराश हो गया था कि मैं उसकी मानसिक पीड़ा के कारण उसे छोड़ देने के बारे में सोच रहा था.

मेरे मन में ख्याल आया कि दीदी के बाद अब जीजू कहीं मेरी भी ऐसी ही हालत न कर दें.
मैंने उनसे कहा- आप जो कहेंगे, मैं वह करने को तैयार हूँ! मैं आपको अपनी आधी जायदाद दे दूँगा, बस मुझे सताना मत … मुझे अपनी जिंदगी जीने दो! मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा!

जीजाजी मेरी बात सुनकर कुछ पल तक मेरी आंखों में देखते रहे.
वे मेरी उलझन को समझ गए.
उन्होंने सहज भाव से कहा- मैं कोई जोखिम नहीं ले सकता.
मैं डर गया.

जीजू ने आगे कहा- मुझे दोनों को पाने का एक ही रास्ता दिख रहा है.
‘कौन सा रास्ता? मैंने झट से उनसे पूछा.

उन्होंने आदेशात्मक स्वर में मुझसे कहा- आज से तुम्हें अपनी दीदी की सौतन बन कर रहना होगा … मतलब मेरी दूसरी पत्नी बनकर रहना पड़ेगा … सारी जिंदगी.

यह कैसे संभव हो सकता है!
यह सुनकर मैं असमंजस में पड़ गया.

वास्तव में यह मेरे सपनों के सच होने जैसा था.
लेकिन मेरे मुँह से निकल गया- लोग क्या कहेंगे?

जीजू धीमे से बोले- जब तुम साड़ी में थीं, तो मैं तुम्हें तुम्हारी दीदी समझ बैठा. जब मैं फंस गया, तो लोगों के लिए तुम्हें पहचानना संभव नहीं होगा.

उनके द्वारा अपनी सुंदरता की अनजाने तारीफ़ सुनकर मैं खुशी से भर गई!
मैंने अपना निर्णय मन ही मन तय कर लिया.
अब मेरे मन का तनाव हल्का हो गया.

उस पल मैंने उस शख्स पर अपनी जान लुटा दी, जो कुछ वक्त पहले मेरी गांड फाड़ने आया था.

मेरी औरत बनने की छिपी तमन्ना मुझे अब पूरी होती दिख रही थी!

मैं उनके पास गई और उनके पैर छुए.
यह देख उन्होंने मुझे गले लगा लिया और इस तरह मेरे नए जीवन की शुरुआत हुई.

इतने अजीब मिलन के बाद मुझे मेरे अधूरे हनीमून को पूरा करने की चाहत होने लगी.
मेरी आधी-अधूरी भूख मिटाने के लिए मैं बेसब्र हो गई.

मैं उनके लंड को अपनी गांड की सैर कराने के लिए उतावली हो गई.

मैंने अपने गालों में थोड़ी मुस्कुराहट लाकर और प्यार भरे स्वर में उनसे कहा- आपने दीदी की सारी इच्छाएं पूरी कीं, अब उनकी वह इच्छा पूरी क्यों नहीं करते, जो वे कमरे में आकर आपसे कह रही थीं?

उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरा निमंत्रण स्वीकार किया और मुझे दोनों हाथों से उठाकर बिस्तर पर पटक दिया.

हमारी सांसें फिर से तेज होने लगीं!
मेरे शरीर में खून तेजी से बहने लगा.

उन्होंने मुझे घोड़ी बनाकर मेरी साड़ी को कमर तक ऊपर उठा दिया और अन्दर की पैंटी को खींचकर नीचे सरका दिया.
मैं अपने सामने दर्पण में अपना प्रतिबिंब देखकर रोमांचित हो उठी थी.

आखिरकार मेरी गांड आज एक असली लौड़े की ताकत का आनन्द ले रही थी.
मैं अकेलेपन से मुक्ति के कगार पर पहुंच गई थी.

अपने सामने आईने में एक औरत को अपने पति के सामने झुकते हुए देखकर मैं आवेश में आ गया.

जैसे ही मुझे अपनी गांड के दरवाजे पर जीजू की थूक से लबालब भीगी उंगलियों का स्पर्श महसूस हुआ, मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई.
मेरी आंखें कसकर बंद हो गईं.

उन्होंने अपनी दो उंगलियां मेरी गांड में डाल दीं और उन्हें फेरते हुए गांड का मुँह ढीला कर दिया.

तभी जीजू ने मेरी मांसल कमर को दोनों पंजों से पकड़कर अपने लौड़े का मुँह मेरी गांड में घुसा दिया.
मुझे ऐसा लगा जैसे कोई गर्म पत्थर मेरे अन्दर घुस गया हो.

मुझे बहुत दर्द हुआ, मैं कराहने लगी.
फालतू सिलिकॉन के लौड़े की तुलना में एक असली दमदार लौड़े की ताकत कहीं अधिक मजेदार थी!

जीजू ने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाई और अपने लौड़े को मेरी गांड में मसलने लगे.
मुझे बहुत दर्द हुआ, मेरी सांसें मेरे सीने में अटक गईं.

मैं जोर से ऐसे कराह उठी, जैसे मेरी जान ही निकल रही हो!

मेरी चीख सुनकर जीजू एक पल के लिए रुके.
मैंने उन्हें शीशे में देखा और दृढ़ता से कहा- अब अगर मैं मर भी जाऊं, तो मत रुकना! मुझे मार डालो … मैं यही चाहती हूँ!

यह सुनकर जीजू की गाड़ी तेजी से चल पड़ी.
पहले ही धक्के में उन्होंने अपना लौड़ा पूरी तरह से मेरी गांड में घुसा दिया.

मुझे मेरी गांड में गर्माहट महसूस हुई! मुझे बहुत दर्द हो रहा था.
मेरी कमर दर्द से टेड़ी होने लगी.

लेकिन जैसे ही उन्होंने मेरी कमर को अपने मजबूत पंजों से जकड़ा, मुझे लगा कि मेरी जान निकल गई है!

मैं उमड़कर आहें भरने लगी.
उनका लंड एक लय में मेरी मोटी गांड में घुसने लगा.
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी गांड में लोहे का तप्त सरिया घुस रहा हो.

धीरे-धीरे मेरा दर्द कम हो गया और मुझे हम दोनों एक होने का अहसास होने लगा.
मैं अब ठीक से सांस ले पा रहा था और खुशी के आसमान में पहुंच गया था.

अनजाने में ही मेरे मुँह से ‘आह … ह्म्म्म्म … आह … ओह … आआह!’ ऐसी आवाजें निकलने लगीं.

पंद्रह मिनट तक उन्होंने जोरदार धक्के देकर मेरी गांड रगड़कर तोड़ दी.

उनके दिए हर झटके के साथ मेरी जांघों पर मेरी साड़ी घिस कर एक लुभावना अहसास दे रही थी.
ऐस्स सेक्स ही तो मेरी ख्वाहिश थी, जो आज पूरी हो रही थी!

मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग गया था.
शीशे में मैं देख रहा था कि एक बेशर्म औरत खुलकर अपने साथी को अपनी जवानी का आनन्द दे रही थी.

यह देखकर मैं और उत्तेजित हो गया और अपने निचले होंठों को दांतों से मसलने लगा.

लगभग बीस मिनट के बाद मुझे लगा कि जीजू धीमे हो रहे हैं.
उन्होंने मुझे पीठ के बल लेटने का इशारा किया और मैं पलटकर पीठ के बल लेट गई.

उन्होंने मेरी आधी उतारी हुई पैंटी भी पूरी उतार कर फेंक दी, मेरी कमर के नीचे एक तकिया लगाया और मेरे पैरों को ऊपर की ओर उठाकर अपने लौड़े को फिर से मेरी गांड में धकेल दिया.

वे पुनः जोर-जोर से अपना लंड मेरी गांड में अन्दर-बाहर करने लगे और अपने दांतों से मेरे गालों, होंठों और गर्दन पर जोर-जोर से काटने लगे.

इस पोजीशन में मुझे और उत्तेजना मिलने लगी.
पंद्रह मिनट तक इसी पोजीशन में रोमांस करने के बाद उनकी स्पीड कम हो गई.
उन्होंने अपना लंड निकाला और वे उसे मेरे मुँह के सामने ले आए.

मैंने गंदी लड़की की तरह अपना मुँह खोला, आंखें बंद कर लीं और अपने जिस्म पर पहली वीर्य वर्षा के लिए उत्सुक हो गई.

कुछ ही देर में उन्होंने मेरे चेहरे और छाती पर अपने गर्म वीर्य का फव्वारा छोड़ दिया, जिसका कुछ हिस्सा मेरी जीभ पर उतर गया.
मैंने आंखें खोलकर जीजू की तरफ देखा और अपनी जीभ पर लगा नमकीन वीर्य पी लिया.

मुझे पूर्ण रूप से संतुष्ट करके मेरे जीजू थककर मेरे ऊपर गिर गए.
मेरा शरीर दर्द कर रहा था, हम जोर-जोर से सांस ले रहे थे.

मैं हल्का महसूस करने लगा. मैं अपनी गांड में दर्द महसूस कर रहा था लेकिन मैंने अनुभव किए हुए चरमसुख के सामने इसकी कीमत कुछ भी नहीं थी.
मेरे चेहरे पर उनके दांतों से काटने की चुभन महसूस हो रही थी.

मैंने उन्हें प्यार से देखा और उनके सिर पर हाथ फेरने लगी.
जीजू ने मेरी बाईं बगल में करवट लेकर अपने दाहिने हाथ की उंगलियों से मेरे लंड को पकड़ लिया और मेरे लंड को ऊपर-नीचे करते हुए मेरे होंठों को चूमने लगे.

उन्हें खुद से मेरे सुख की इतनी चिंता करता देख मेरा दिल भर आया.
मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और सपनों में डूब गया.

बस दो ही मिनट में मेरा स्खलन हो गया.

जैसे ही मैंने अपनी आंखें खोलीं और उन्हें देखा, मैंने सोचा- मैं कितनी घृणित और बेशर्म हूँ जो अपनी ही बहन के ही पति के साथ उसका बिस्तर गर्म कर रही हूँ!

लेकिन अब मेरा दिल कठोर हो गया था.
मैं अब अतीत को भूल गई और अपनी नई दुनिया के ख्यालों में खो गई.

तभी एक हंसने की आवाज आई, जिसे सुनकर मैं एकदम से अवाक रह गई.

मेरी बहन उठ कर खड़ी हो गई थी और जीजू के लंड को पकड़ कर हंस रही थी.
मुझे माजरा समझ में ही नहीं आया कि यह सब क्या हुआ?

बाद में दीदी जीजा जी ने मुझे सब बताया कि उन्होंने मेरे इस कमरे में एक गुप्त कैमरा लगाया हुआ था क्योंकि दीदी को मेरी क्रॉस ड्रेसिंग की आदत मालूम थी और वे मुझे रंगे हाथों पकड़ कर मस्ती करना चाह रही थीं.

फिर सब कुछ यहां इतना सा औचक यह हुआ था कि दीदी को भी समझ में नहीं आया.
उन्हें यह नहीं मालूम था कि जीजा जी भी बड़े वाले समलैंगिक निकलेंगे. उन्होंने सिर्फ मजाक में जीजा जी से मेरी गांड चुदाई के लिए कहा था.

जीजा जी पहले से ही दीदी से यह तय करके आए थे कि यदि मुझे मेरा साला पसंद आ गया, तो मैं उसके साथ सेक्स करूंगा.
उस बात को दीदी ने मजाक में लिया था.

मैंने राहत की सांस ली और उसके बाद जीजा जी ने मुझे अपनी दूसरी बीवी बनने का प्रस्ताव दिया.
दीदी दौलत के कारण राजी थीं, तो मैंने भी सोचा कि संपत्ति तो जीवन बिताने में साथ देने के लिए ही होती है.

जीजा जी मुझे पत्नी बना कर रखेंगे तो दिक्कत क्या है.
बस अब मैं भी अपनी दीदी की सौतन बन कर जीजा के लंड से बंध गई.

दोस्तो, आपको मेरी यह ऐस्स सेक्स कहानी पसंद आई होगी.
प्लीज मेल जरूर करें.
yashjst4uster@gmail