Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Cross Dressing Hobby Story – मुझे लड़कियों के कपड़े पहनना पसंद था to make every night hot about Cross Dressing Hobby Story – मुझे लड़कियों के कपड़े पहनना पसंद था story.
Story Start Here :
क्रॉस ड्रेसिंग हॉबी स्टोरी में मैं बिलकुल अपनी दीदी जैसे दिखता था और मुझे लड़कियों जैसा दिखना पसंद था. मैं दीदी के कपड़े पहनकर शीशे में देखता तो मेरी बहन जैसा लगता.
हाय फ्रेंड्स, आज मैं आपके साथ एक रोमांचक घटना साझा करने जा रही हूँ.
यह क्रॉस ड्रेसिंग हॉबी स्टोरी वाली घटना उस वक्त घटी थी, जब मैं 25 साल की थी.
क्रॉस-ड्रेसिंग के अपने शौक की वजह से कैसे मैं मौत के मुँह से जिंदा बचकर एक औरत की जिंदगी जीने लगी … ये सब सुनकर आप हैरान रह जाएंगे.
मुझे बचपन से ही लड़कियों के कपड़े पहनना और लड़कियों की तरह दिखना बहुत पसंद था.
जब मैं घर पर अकेला होता तो बहन के कपड़े पहनने का कोई मौका नहीं छोड़ता था.
योगिता दीदी, जो मुझसे सिर्फ डेढ़ साल बड़ी थीं, वे बिल्कुल मेरे जैसी ही दिखती थीं.
हम दोनों की शक्ल सूरत लगभग एक जैसी थी.
छोटी उम्र में तो लोग हमें जुड़वां बहनें ही समझते थे.
मैं उन्हें हमेशा दीदी बुलाता था.
जब भी मैं छुप-छुपकर दीदी के कपड़े पहनता तो आईने में मुझे अपनी बहन की छवि दिखाई देती.
कॉलेज के दिनों में मेरी बहन ने पिताजी की इच्छा के खिलाफ भागकर शादी कर ली थी.
पिताजी इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सके और कुछ ही दिनों में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई.
मरने से कुछ दिन पहले जब वे अस्पताल में थे, तब उन्होंने अपनी सारी जायदाद मेरे नाम कर दी.
मुझे बिना कुछ किए पिताजी की संपत्ति से मोटा किराया मिलने लगा, कोई काम करने की जरूरत ही नहीं पड़ी.
मरने से पहले उन्होंने मुझसे वादा लिया था कि मुझे मिले पैसों में से एक रुपया भी दीदी को नहीं दूँगा.
दीदी को महंगी चीजों पर पैसे उड़ाने की आदत थी.
शादी के बाद उनकी फिजूलखर्ची के कारण उन दोनों पति-पत्नी की तनख्वाह कम पड़ने लगी थी.
इसलिए दीदी मुझसे अपना हिस्सा मांगने लगीं.
मैंने पापा को दिए वादे के कारण साफ मना कर दिया.
दीदी पर मुझे बहुत गुस्सा आता था क्योंकि पापा की मौत के लिए वही जिम्मेदार थीं.
लेकिन मैंने कभी उन्हें ये अहसास नहीं होने दिया.
इधर एक बात और बताना जरूरी है कि जब मैं छोटा था, तब मां भगवान के घर चली गई थीं और अब पिताजी भी चले गए, तो मैं पूरी तरह अकेला रह गया था.
अपनी उदासी मिटाने के लिए मैं क्रॉस-ड्रेसिंग करने लगा.
ऐसा करने से मुझे खुद को किसी मर्द की बांहों में सौंपने की तीव्र ख्वाहिश जाग उठी.
मैंने एक गे साइट पर प्रोफाइल बनाई और साड़ी में अपनी सूरत क्रॉप करके तस्वीरें अपलोड कर दीं.
मुझे ढेर सारी फ्रेंड रिक्वेस्ट आईं लेकिन ज्यादातर प्रोफाइल नकली लगती थीं.
मुझे जो असली से लगते थे वे मुझे पसंद नहीं आते थे.
इसलिए मैंने अपनी वासना की आग बुझाने के लिए एक आठ इंच के सिलिकॉन के नकली लौड़े का सहारा लेना शुरू कर दिया था.
इसमें मुझे सुख की प्राप्ति होने लगी थी.
एक बार दीदी ने मुझे नासिक अपने घर बुलाया.
जब मैं वहां पहुंचा तो उन्होंने मुझे कुछ दिन उनके साथ ठहरने का आग्रह किया.
मैं मना नहीं कर पाया.
उनका घर पंद्रह मंजिला इमारत की आखिरी मंजिल पर था.
घर में दो बेडरूम थे.
एक में दीदी और जीजू सोते थे, दूसरे में मेरा इंतजाम था.
जब मैं उस रूम की खिड़की से बाहर देखता तो मुझे बहुत सुंदर व्यू दिखाई देता था.
सामने सिर्फ छोटे-छोटे मकान थे और एक भी ऊंची इमारत नहीं थी.
मेरा कमरा बड़ा था.
उसके बीच में एक विशाल बिस्तर था और बिस्तर के ठीक पीछे दीवार में एक बड़ी अलमारी थी जिसके दोनों दरवाजों पर बड़े-बड़े आईने लगे हुए थे.
पहले दिन सोने से पहले मैंने वह अल्मारी खोली और देखा कि वह पूरी तरह से दीदी की इस्तेमाल न की जाने वाली नई साड़ियों, कपड़ों और अन्य श्रृंगार सामान से भरी पड़ी थी.
पूरी अल्मारी साड़ियों, वन-पीस गाउन, मिडीज़, पंजाबी ड्रेस, स्कर्ट और अन्य चीजों से ठसाठस भरी हुई थी.
साड़ियां साफ-सुथरे तरीके से हैंगर पर टंगी हुई थीं.
एक क्षण के लिए मैं इतनी महंगी और खूबसूरत साड़ियां देखकर मंत्रमुग्ध हो गया.
मेरी नजर हैंगर पर लटकी हुई एक गुलाबी साड़ी पर ठहर गई.
उसका झिलमिलाता कुरकुरा जॉर्जेट कपड़ा मेरे मन को चुंबक की तरह अपनी ओर खींच रहा था.
मेरा मन सामने दिख रही उस गुलाबी साड़ी को तुरंत पहनने के लिए मचलने लगा.
पहले दो दिन तो मैंने किसी तरह अपने मन पर काबू रखा.
लेकिन तीसरे दिन रात को मुझसे रहा नहीं गया और मैंने साड़ी पहनने का फैसला कर लिया.
रात के ग्यारह बजे दीदी और जीजू अपने बेडरूम में सो चुके थे.
मैं अपने बिस्तर से उठा और कमरे की कुंडी लगाने गया.
मेरे कमरे के दरवाजे की कुंडी का सॉकेट टूटा हुआ था, फिर भी मैंने कुंडी लगा दी और पुश लॉक भी चढ़ा दिया … जो सिर्फ अन्दर से ही खुल सकता था.
अब बिना चाबी के कोई बाहर से दरवाजा नहीं खोल सकता था.
बिना समय गंवाए मैं तुरंत बाथरूम में गया.
पहले अच्छे से नहाया, अपने बदन के सारे बाल साफ किए और एक लड़की की तरह अपनी छाती पर मोटा तौलिया लपेट कर बाहर आया.
मेरे हाव-भाव बिल्कुल लड़कियों जैसे हो चुके थे.
मैंने अपनी एड़ियां थोड़ी ऊपर उठाते हुए अपनी पसंदीदा गुलाबी साड़ी का हैंगर निकाला और सामने बिस्तर पर रख दिया.
उसका बॉर्डर सुनहरे रंग का था.
तुरंत ही मुझे मैचिंग पेटीकोट और ब्लाउज भी मिल गए.
अल्मारी के एक कोने में महिलाओं के इनर वियर का एक सैट दिखा.
मैंने तुरंत उसे बाहर निकाला.
यह एक नया लाल रंग का विक्टोरिया सीक्रेट ब्रांड का ब्रा-पैंटी सैट था.
मैंने डिब्बा खोला और उसे हाथ में ले लिया.
उसकी मुलायम जालीदार बनावट के स्पर्श ने मेरे अन्दर कामुक भावनाएं जगा दीं.
मैंने दोनों पैरों को पैंटी में डाला और उसे कमर तक खींच लिया.
सीने का तौलिया हटाकर ब्रा पहनी और पीछे के हुक लगा दिए.
फिर ब्रा के दोनों खाली खांचों के बीच कपड़े की दो गेंदें रख दीं.
मेरी छाती अब थोड़ी कस गई थी लेकिन ब्रा के कसाव और कपड़े के हल्के वजन के कारण मुझे अपनी छाती पर असली स्तन महसूस हो रहे थे.
मैंने शीशे में देखा … ब्रा और पैंटी मुझ पर बिल्कुल फिट आ रही थी.
दीदी और मेरा एक जैसा कद होने का मुझे यह फायदा मिला.
मैंने शीशे में खुद को आगे-पीछे देखा.
ब्रा-पैंटी का लाल रंग मेरे मांसल गोरे शरीर पर खूब उभर रहा था.
जो ब्रा मैंने पहनी थी, वह पैडेड थी.
मेरे हिलने पर जैसे ही मेरा हाथ पैंटी और ब्रा के जालीदार बाहरी कपड़े से घिसता था तब मेरी पैंटी के अन्दर तनाव महसूस होता.
मैंने अपने हाथ के पंजे को पैंटी पर फेर कर और लंड को सहला कर उसका सेक्सी फील लेना शुरू कर दिया.
फिर मैंने पेटीकोट पहना.
वह साटन का स्पैन्डेक्स पेटीकोट था.
यह उस तरह का था जो जांघों पर इलास्टिक की तरह टाइट फिट हो जाता है और उसके ऊपर साड़ी पहनने पर फिगर बेहद सेक्सी लगता है.
जैसे ही पेटीकोट का निचला कपड़ा मेरी टांगों की कोमल त्वचा को घिसता, मुझे अपनी पैंटी में हलचल महसूस होने लगी.
पेटीकोट ऊपर खींच कर मैंने उसे अपनी कमर पर कसकर बांध लिया और शीशे में देखने लगा.
मेरा अपना प्रतिबिंब मुझे सेक्स अपील करने लगा था.
जैसे ही पेटीकोट का फिसलन भरा साटन का कपड़ा मेरे पैरों की कोमल त्वचा से घिसना शुरू हुआ, मेरे अन्दर एक स्त्री रसायन बनने लगा और मेरे दिल में गुदगुदी होने लगी.
मैं अपनी गर्म सांसें महसूस कर सकता था.
बिना समय गंवाए मैंने बिस्तर पर पड़ा ब्लाउज उठा लिया.
भूरे रंग का स्ट्रेचेबल ब्लाउज, जिस पर बढ़िया डिज़ाइन थी.
उसका कपड़ा बहुत महीन और पतला था.
मैंने अपने दोनों हाथ ब्लाउज की आस्तीन में डाले.
दूसरा हाथ डालते समय मुझे अपनी पीठ पर तनाव महसूस हुआ.
चूंकि ब्लाउज स्ट्रेचेबल था, सो वह मेरी छाती पर बिल्कुल फिट बैठ गया.
ब्लाउज के हुक लगाने और शोल्डर, ब्रा स्ट्रैप को ब्लाउज में सैट करने के बाद मैं थोड़ा पीछे झुका और खुद को फिर से शीशे में देखा.
ब्लाउज बिल्कुल फिट बैठा था.
मैंने अपना हाथ अपने स्तनों पर फेरा और उन्हें हल्के से दबाना शुरू कर दिया.
चूंकि ब्लाउज आगे से गहरा था और मेरी ब्रा पैडेड थी, इसलिए मेरे स्तन मुझे एकदम असली लग रहे थे.
ब्लाउज का पिछला भाग इतना गहरा था कि वह मानो बैकलेस लग रहा था.
मेरी गोरी मांसल पीठ साफ़ दिख रही थी.
मैं खुश था.
‘बिल्कुल सही!’
मैं मन ही मन बुदबुदाया.
फिर आखिरकार मैंने साड़ी पहनना शुरू किया.
‘गुलाबी साड़ी और लाली लाल लाल …’
यह मशहूर गाना गुनगुनाते हुए मैंने साड़ी का एक सिरा पेटीकोट में फंसाया और खुद घूमकर उसे अपने चारों ओर लपेट लिया.
प्लेट्स को एक जैसा सैट करके पेट के नीचे पेटीकोट में घुसा दिया और उसे हल्का सा उछाल कर सैट कर दिया.
फिर सावधानी से पल्लू को जितना संभव हो सके, उतना बारीकी से सैट किया, पल्लू को कंधे पर ब्लाउज में पिनअप किया और एक लंबी आह भरी.
मेरे अन्दर की औरत अब पूरी तरह से जाग गई थी.
आईने में खुद को सिर से पांव तक निहार कर मैंने अल्मारी से मेकअप बॉक्स निकाला और चेहरे पर हल्का सा मेकअप किया.
फिर आंखों पर काजल लगाया.
चूंकि मेरा रंग गोरा है, इसलिए मुझे ज़्यादा मेकअप की ज़रूरत महसूस नहीं हुई.
उसके बाद होंठों पर गहरे गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगाई और होंठों को तिरछा-मिरछा बनाकर लिपस्टिक को ठीक से सैट किया.
माथे पर टीका लगाया और हाथ में कंगन पहन लिए.
जब मैं अपनी गर्दन को एक तरफ झुकाकर कानों में झुमके और गले में एक पतला पेंडेंट पहन रही थी तो मेरी नजर अल्मारी के एक कोने में रखी सेंट की बोतल पर पड़ी.
यह एक लेडीज़ सेंट था … एस्काडा कीसलैंड.
मैंने उसे हाथ में लिया … आह्ह्ह्म्म … मैंने तुरंत सेंट की बोतल खोली और अपने ऊपर स्प्रे किया.
सेंट की नशीली स्ट्रॉबेरी खुशबू तुरंत हवा में महक उठी.
उस खुशबू की सुगंध में जादू था.
मैं उसकी गंध से मदहोश हो गई.
मुझे एक असली औरत होने का अहसास होने लगा.
मैं अपनी सुंदरता और मादक खुशबू से किसी भी पुरुष को आकर्षित कर सकती हूँ, ऐसा मुझे लगने लगा.
अंत में और कुछ मिलने की आस में मैंने दो-चार डिब्बे खोले.
उनमें से एक में मुझे नकली बालों का एक विग मिल गया.
उसे देखकर मुझे ताज्जुब हुआ लेकिन बिना समय गंवाए मैंने तुरंत इसे अपने सिर पर रख लिया.
मेरे कंधों तक लहराने वाले बाल इतने जंच रहे थे कि किसी को भी इनके नकली होने का संदेह नहीं हो सकता था.
मैं पीछे हट गया और खुद को आईने में निहारने लगा.
मैं अपने सामने एक ऐसी महिला को देख रहा था जिसकी जवानी तन पर पहनी हुई मखमली गुलाबी साड़ी में उमड़ रही थी.
गुलाबी रंग की साड़ी से मेरी खूबसूरती और भी बढ़ गई थी.
खुले बाल मेरी नंगी पीठ को सहला रहे थे.
मेरी बड़ी-बड़ी आंखें, उभरी छाती और सुडौल कमर से कामुकता छलक रही थी.
इस समय अगर कोई मुझे देखता, तो मैं लड़का हूँ … ये कोई भी नहीं पहचान पाता.
मेरे पास ऐसा फिगर था, जो किसी भी मॉडल को शर्मसार कर दे.
मेरे हुस्न से मैं किसी भी आदमी को घायल कर सकता था.
मुझे आईने में अपनी बहन की तरह ही प्रतीत होने लगा लेकिन शायद मैं उससे भी थोड़ा ज्यादा खूबसूरत लग रही थी.
तभी अचानक मुझे अपने कमरे के दरवाजे के हैंडल की खटखटने की आवाज़ सुनाई दी.
मैंने घड़ी की तरफ देखा … दो बज रहे थे.
आवाज़ सुनकर मुझे पसीना आ गया.
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ.
मैंने जल्दी से कमरे की लाइट बंद कर दी और खिड़की के बगल में फर्श से छत तक लगे पर्दे के पीछे छिप गया.
दो मिनट तक कोई हलचल नहीं हुई.
कुछ क्षण बाद मैंने पर्दे के पीछे से अपने कमरे का दरवाजा चाबी से खोले जाने की आवाज़ सुनी और देखा कि दो आकृतियां हल्के कदमों से भीतर आईं.
वे दोनों मेरे सामने बिस्तर के पास आकर थम गईं.
तभी मुझे दीदी की धीमी आवाज़ में बात करने की आवाज़ सुनाई दी- वह यहां नहीं है … कहां चला गया बहनचोद!
उसके मुँह से निकली गाली सुनकर मैं भौचक्का रह गया!
इतने में जीजू की आवाज़ आई- श्श्श … रुको, मैं लाइट जलाता हूँ!
उनकी बात ने मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया.
मैंने अपनी आंखें कस के बंद कर लीं.
अब मैं उन्हें इस हालत में दिखूँगा, तो वे क्या सोचेंगे … यह सोचकर मेरा सिर भारी होने लगा.
मैं अबला नारी की भांति दोनों हाथों से अपनी छाती ढककर पर्दे के पीछे खड़ी थी.
कुछ ही पल में लाइट जल गई.
जीजू ने तुरंत मुझे पर्दे के पीछे पहचान लिया.
उन्होंने पर्दा एक तरफ खींच दिया और जोर से आवाज़ आई!
मैंने घबराकर आहिस्ता-आहिस्ता आंखें खोलीं तो पाया कि जीजू मुझसे एक कदम की दूरी पर खड़े थे.
सामने दीदी भी खड़ी थीं.
दोनों के चेहरे पर वासना के भाव थे और उनकी आंखों में किसी को अपने मुताबिक देखने का भाव दिख रहा था.
उन दोनों को सामने देखकर मेरा दिल बैठ गया.
मुझे पल भर में अहसास हो गया कि आज मैं फंस गया.
मुझे रोना आने लगा और मेरा बदन डर से कांपने लगा.
तभी दीदी ने इस सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा- तुझे मेरे ही घर में ये ठरकी काम करने में शर्म नहीं आई?
जीजू इस वक्त मुझे घूर-घूरकर देख रहे थे.
उनका छह फीट लंबा कद, मजबूत कद-काठी वाले सांवले रंग के जीजू मुझे रावण जैसे दिखने लगे थे.
मेरी आंखों में आंसू आ गए.
मैं अपनी बांहें अपनी छाती से लगा कर अपना सीना ढकने की कोशिश करने लगा और अपने आंसू छुपाने की कोशिश करते हुए नीचे देखने लगा.
दीदी ने आगे कहा- तेरी अकड़ की वजह से मुझे मेरा हक पाने के लिए तेरे सामने गिड़गिड़ाना पड़ा … और तू मेरे घर में सरे-आम ऐसे घिनौने शौक पूरे कर रहा है! आज मैं तुझे पहले तूने मुझ पर ढाए सितम का बदला लेकर रहूँगी!
ऐसा बोलकर उसने जीजाजी की तरफ देखा.
वे अब भी मुझे घूर रहे थे.
दीदी ने जीजाजी को आदेशवाचक स्वर में कहा- आज मैं इसे तड़पता हुआ देखना चाहती हूँ! तुम अपने आप को असली मर्द समझते हो न? तो आज दिखाओ अपनी मर्दानगी का सबूत! इस छमिया की तब तक इज्जत लूटो, जब तक ये छूटने की गुहार न लगाए! क्योंकि मैं इसे आज छोड़ने वाली नहीं … मुझे इसकी चीखें सुनाओ!
दीदी की चुनौती जीजू ने झट से स्वीकार कर ली.
मैं घबराकर पीछे हट गई.
उन्होंने झटके से मुझ पर छलांग लगाई और मुझे अपनी बांहों में कसकर जकड़ लिया.
मैं खुद को छुड़ाने के लिए व्यर्थ संघर्ष करती रही.
तब मैं पूरी तरह अबला महसूस करने लगी.
तभी अचानक से एक अंग्रेजी मुहावरा मेरे ख्याल में आया ‘जब आप किसी मुसीबत से बच नहीं सकते, तो सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दो.’
मेरे दिमाग में यह बात बैठ गई और मैंने खुद हल्का छोड़ दिया.
मुझे थमा हुआ देख जीजाजी ने मुझे अपने पास खींच लिया. मैंने उनकी आंखों में देखा और वे मेरे होंठों की ओर आ गए.
जीजा जी ने मेरे होंठों को अपने होंठों से दबाया और चूमना शुरू कर दिया.
दोस्तो, मेरी इस क्रॉस ड्रेसिंग हॉबी स्टोरी को पढ़ कर आपको कैसा लग रहा है, प्लीज मुझे जरूर बताएं.
yashjst4uster@gmail
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