Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Step Mom Chudai Kahani – चुत की आग सौतेले बेटे के लंड ने बुझाई to make every night hot about Step Mom Chudai Kahani – चुत की आग सौतेले बेटे के लंड ने बुझाई story.
Story Start Here :
स्टेप मॅाम चुदाई कहानी में मैं बहुत चुदक्कड़ औरत हूँ पर मेरी चूत काफी प्यासी थी. एक दिन मैंने बाथरूम में मेरे चड्डी में वीर्य लगा देखा तो मैं समझ गई कि यह मेरे सौतेले बेटे की करतूत है.
‘जब भी तुझे देखती हूँ, मेरी अन्दर आग लग जाती है मेरे राजा, आ चोद अपनी मां को, चाटने से ऐसी आग नहीं बुझेगी … जल्दी से चोद दे.’
तभी उसने अपने आठ इंच के लंड को मेरी चूत में डाल दिया और मैं चिल्ला उठी. मेरी आवाज़ सुनकर दीदी मस्ती करने लगीं, वे मेरे चूचों को सहलाने लगीं.
यह मेरी स्टेप मॅाम चुदाई कहानी का अंश है, जिसे आप आगे पढ़ेंगे.
हाय दोस्तो, मैं कविता … महाराष्ट्र के अमरावती की रहने वाली हूँ.
मेरी उम्र 38 वर्ष की है.
मैं दिखने में काफी हॉट हूँ.
मेरा रंग गोरा है.
मेरी हाइट लगभग पांच फुट चार इंच की है.
मेरे मम्मे एकदम मुसम्मी के जैसे गोल और बड़े-बड़े आकार के हैं.
वैसे तो मैं बहुत बड़ी चुदक्कड़ औरत हूँ पर पिछले कई सालों से मेरी चूत काफी प्यासी थी.
अंततः मेरे सौतेले बेटे ने मुझे चोद कर मेरी प्यास बुझा दी है और अब वह रोज ही मुझे चोद कर मेरी चुत की आग को बुझा देता है.
जिस वक्त मैं स्कूल में थी, तब मैं एक साधारण लड़की थी और लड़कों से काफी दूर रहती थी.
जब मेरा स्कूल खत्म हुआ तो मैं कॉलेज में आ गई और मैंने उधर काफी सारी लड़कियों से दोस्ती कर ली.
मेरी इन सहेलियों में एक लड़की काफी बड़ी चुदक्कड़ थी.
उसका नाम सुनीता था.
वह लड़की मेरी बहुत अच्छी दोस्त बन गई थी.
हमारा एक-दूसरे के घर आना-जाना भी होने लगा था.
सुनीता को मेरी मम्मी भी बहुत पसंद करने लगी थीं.
एक दिन दोपहर को अचानक मुझे सुनीता की याद आई तो मैं उससे मिलने को उसके घर गई.
उसके घर का दरवाज़ा खुला था तो मैं अन्दर चली गई.
हॉल में जाते ही मुझे कुछ अजीब सी आवाज़ आई.
पर मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और सुनीता को पुकारने लगी.
तभी फिर से वही आवाज़ आई.
अब मुझे कुछ गड़बड़ लगी, तो मैंने सुनीता के रूम में झांक लिया.
मैं अन्दर का नजारा देख कर दंग रह गई.
सुनीता पूरी नंगी होकर बेड पर चित लेटी थी. वह अपनी दोनों टांगें चौड़ी करके चुत को खोली हुई लेटी थी. उसने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रखा हुआ था और दूसरे हाथ में मोबाइल को देखती हुई वह अपनी चूत रगड़ रही थी.
ये सब मैंने पहली बार देखा था तो मैं डर गई और जल्दी से अपने घर वापस आ गई.
अगले दिन कॉलेज में सुनीता मुझसे बात करने आई, पर मैं उसे दूर जाने लगी.
दोपहर को सुनीता घर आई और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- क्या बात है कविता …. तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हो?
तब मैं बोली- कल दोपहर में मैं तेरे घर आई थी, तब तू क्या कर रही थी?
सुनीता- अच्छा तो यह बात है … अरे यार तू भी ना पूरी बुद्धू है. माय डीयर जब चूत में आग लगती है ना … तो रहा नहीं जाता रानी.
मैं- छी: पागल … तू कितनी गंदी बातें करती है!
सुनीता- अच्छा, आ तुझे सिखाती हूँ.
फिर सुनीता ने कमरे का दरवाजा बंद किया और मुझे अपने पास बिठाया.
अब उसने अपना मोबाइल निकाला, मोबाइल में उसने एक पोर्न फिल्म चलाई जिसमें एक लड़का लड़की की चूत चाट रहा था.
ये सीन देखकर मुझे भी कुछ कुछ होने लगा था.
उस दृश्य को देख कर मुझे ऐसा लग रहा था मानो मेरी चूत में चींटियां दौड़ रही हों.
कुछ देर बाद सुनीता ने अपना एक हाथ मेरी पीठ पर रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगी.
मुझे भी मजा आने लगा था.
मैं सुनीता की आंखों में देखने लगी.
उसने अपने होंठों मेरे होंठों के नजदीक कर दिए और गर्म सांसें छोड़ने लगी.
देखते-देखते मैंने अपने होंठ सुनीता के होंठों पर रख दिए और मैं पागलों की तरह उसके होंठों को चूसने लगी.
कुछ देर बाद सुनीता ने अपना हाथ मेरे मम्मों पर रख दिया.
वह मेरे मम्मे रगड़ने लगी और मैं पागलों के जैसे सुनीता को अपने ऊपर खींचने लगी.
कुछ देर बाद सुनीता ने मुझे नंगी कर दिया और खुद भी नंगी होकर बेड पर लेट गई.
वह बोली- हां मेरी रानी, चाट मेरी चूत!
मैं मना करने लगी.
तो उसने मेरे बाल पकड़ कर अपनी चूत पर मेरा मुँह रख दिया और दबाने लगी.
कुछ देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा और मैं भी पागलों की भांति सुनीता की चूत चाटने लगी.
सुनीता अपनी गांड उठाती हुई अपनी चुत मेरे मुँह में देने लगी और मादक सिसकारियां भरने लगी ‘आआआ … आ रानी…ईईई!’
कुछ ही देर में सुनीता झड़ने को हो गई.
उसने मेरे बाल पकड़ कर चुत को मेरे मुँह पर दबा दिया और भलभलाकर झड़ने लगी.
सुनीता झड़ती हुई बोली- आह चाट ले कुतिया आह …
मैं भी भावावेश में उसकी चुत का रस चाटने लगी और चुत को चाट कर साफ कर दिया.
अब वह उठ गई और अपने कपड़े पहनती हुई बोली- मुझे थोड़ा काम है.
यह कह कर वह चली गई.
मैं वैसे ही नंगी अपनी चुदास से परेशान तड़पती रह गई.
उस वक्त मुझे लग रहा था कि कोई मेरी चुत में लंड घुसेड़ दे और मुझे चोद दे.
उसके साथ मेरा यही सब चलने लगा.
हम दोनों एक दूसरे के जिस्म को चूस चाट कर एक दूसरे की प्यास बुझाने लगीं.
फिर कुछ समय बाद मेरी शादी हो गई.
मेरी शादी होने के छह महीने बाद मेरे पति की एक हादसे में मौत हो गई और मेरी कोई औलाद न होने के कारण ही मैं वापस अपने माता-पिता के घर आ गई.
इसके कुछ साल बाद मेरी शादी एक दूसरे आदमी से हुई.
उसका एक बेटा था, जो हमारी शादी में किशोर वय का था.
अब वह 19 साल का हो गया है.
उसका नाम आकाश है.
मेरे दूसरे पति भी जल्द ही चल बसे.
उस वजह से मैं अभी तक जिस्मानी तौर पर सही से संतुष्ट नहीं हो सकी थी क्योंकि मेरे दूसरे पति ने मुझे कभी सही से चोदा ही नहीं था.
मैं लंड की जरूरत के चलते परेशान रही और अब तक कभी मूली, तो कभी खीरा से अपनी चुत को चोद कर काम चलाती थी.
मैं तो जैसे लंड का स्वाद भूल ही गई थी और बस अब इसी तरह से मूली खीरा से खुश थी.
एक दिन अचानक ही मैं बाथरूम चली गई.
मैंने उधर अपने कपड़े देखे तो पाया कि मेरी चड्डी पर कुछ लगा हुआ है.
मैंने सूँघा तो वह मर्द का वीर्य था.
मुझे मेरे सौतेले बेटे पर शक हुआ और मैंने उसकी निगरानी करने की सोची.
अगले दिन मैं नहाने के बाद बाहर निकल आई और देखने लगी.
मेरे निकलते ही आकाश बाथरूम में चला गया.
उसके अन्दर जाते ही मैं बाथरूम के पीछे वाली खिड़की से अन्दर झांकने लगी.
मैंने देखा कि आकाश ने मेरी चड्डी और ब्रा उठाई और उसे सूँघने लगा.
उसने एक हाथ से अपने पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को दबाना शुरू कर दिया.
कुछ देर बाद उसने पैंट उतार कर अपने औजार को बाहर निकाल लिया.
उसका मोटा तगड़ा लंड देखकर मेरे मुँह से आवाज निकल गई ‘अरे बाप रे!’
मेरी हल्की सी आवाज सुनकर वह खिड़की की तरफ को हुआ.
तो मैं झट से खिड़की से हट गई.
वह फट से अपनी पैंट पहन कर बाहर आ गया.
अब मैं अन्दर जाकर उसे डांटने वाली थी कि उसी वक्त अचानक से गांव से मेरी दीदी आ गईं.
उनका आना हुआ तो मैं कसमसा कर चुप रह गई.
ये दीदी मेरी मौसी की बेटी हैं.
मेरी दीदी की उम्र चालीस साल है.
हम दोनों बात करने लगीं तो मैंने आकाश को बुलाया और उससे कहा- तू बाजार चला जा और चिकन ले आ!
आकाश बाजार चला गया.
दीदी हाथ-मुँह धोकर तैयार हो गईं.
तब तक मैं भी दीदी के लिए चाय ले गई.
हम बातें करने लगीं.
दीदी बोलीं- क्या हुआ कविता? तेरा मूड कुछ ठीक नहीं लग रहा है … क्या बात हो गई?
मैं बोली- नहीं दीदी, कोई बात नहीं … बस यूं ही.
मैं आकाश की बात बताना तो चाहती थी पर बता नहीं पाई.
अब आकाश चिकन ले आया.
मैं किचन में चली गई और खाना बनाने लगी.
कुछ देर बाद खाना खाकर हम सब सोने के लिए जा रहे थे कि आकाश बोला- मौसी मां, क्या मैं आपके साथ सो जाऊं?
दीदी ने कहा- हां सो जाओ … उसमें क्या पूछना!
मैं समझी कि यह दोपहर की बात के लिए मैं इसे डांटूँगी. इसी लिए वह वहां सो रहा है.
यह सब सोचकर मैं सोने चली गई.
रात करीब बारह बजे मेरी नींद खुल गई.
आज मुझे नींद नहीं आ रही थी.
मेरे आंखों के सामने बार बार आकाश का तगड़ा, मोटा, लंबा लंड ही दिख रहा था.
मेरी आंखों से नींद उड़ चुकी थी.
अब मेरे मन में आकाश को देखने की इच्छा होने लगी.
मैं उठकर दीदी के कमरे की तरफ जाने लगी.
मुझे दीदी के कमरे की लाइट जली हुई दिखाई दी. मैं कमरे के करीब पहुंच गई.
मुझे कुछ आवाजें सुनाई देने लगीं ‘आ राजा चोद मुझे … आआह आह … दईया कितना मोटा है तेरा आह!’
ये आवाज सुनने के बाद मैं कमरे में झांकने लगी.
जब कमरे में झांककर देखा तो मैं देखती ही रह गई.
मेरा बेटा आकाश और मेरी दीदी दोनों नंगे होकर चुदाई कर रहे थे.
दीदी आकाश से बोल रही थीं- बेटा आकाश तुमने अभी तक कविता को चोदा कि नहीं?
आकाश- नहीं मौसी मां, आज ही मैंने उन्हें अपना लौड़ा दिखाया, उससे ऐसा लगा कि वे कुछ करेंगी!
दीदी- अरे बेटा, मुझसे ज्यादा तो उसे लंड की जरूरत है, साली अपनी चुत में खीरा मूली डाल-डाल कर थक चुकी होगी!
आकाश- हां, मैंने भी देखा है हम्म … आह मैं अब झड़ने वाला हूँ!
दीदी- बेटा, मेरे मुँह में झड़ जा.
आकाश ने दीदी की चुत से लंड निकाला और उसने दीदी के मुँह में अपने लंड का माल छोड़ दिया.
दीदी उसके लंड को चाटने लगीं.
यह सब देखकर मैं अब पूरी तरह से गर्म हो गई और मुझसे अब रहा नहीं गया.
तो मैंने उसी वक्त दरवाज़े को धक्का दे दिया और अन्दर चली गई.
दीदी और आकाश मुझे देखकर डर गए.
दीदी बोलीं- अरे कविता तुम?
मैं- दीदी आप मेरे बेटे के साथ चुदवा रही हो … आपको शर्म नहीं आई?
दीदी बोलीं- अरे कविता एक बार तू आकाश का लंड तो लेकर देख … फिर तू मुझे बताना कि कैसा लगता है!
तभी आकाश अपना लंड दिखाते हुए बोला- मम्मी देखो न मेरा!
आकाश हाथ में लंड लेकर हिलाते हुए मुझे दिखाने लगा.
उसके लंड को देखकर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और मैं झपट कर उसके लंड को चूसने लगी.
दीदी मेरी गांड के छेद में जीभ डालकर घुमाने लगीं.
मैं और भी ज्यादा गर्म हो गई थी.
जल्दी ही आकाश का लंड पुनः गर्म लोहे की तरह कड़क हो चुका था.
दीदी बोलीं- आकाश बेटा आज फाड़ डाल अपनी मम्मी की चूत को … उसे सुख दे दे … न जाने कब से लौड़े के लिए परेशान है बिचारी!
ये सुनकर आकाश ने मुझे अपने गोद में उठाकर बेड पर लुढ़का दिया और मेरी टांगों को चौड़ा करके और अपने लंड को मेरी चूत के छेद पर रख दिया.
वह लंड को चुत के छेद पर रगड़ने लगा और दीदी मेरे मुँह पर अपनी चूत रखकर चुसवाने लगीं.
मैं उनकी चुत चूसने लगी.
कुछ देर बाद मेरे बेटे ने अपना लंड का टोपा मेरी चूत में डाल दिया.
मेरे मुँह से कराह निकल गई ‘आआह …’
उसका लंड काफी तगड़ा और मोटा था जबकि मेरी चूत का छेद छोटा था.
सुपारे को तो मैं जैसे तैसे झेल गई मगर जब उसने मेरे दूध पकड़ कर अपना आधा लौड़ा मेरी चूत में पेला, तब तो मैं समझो मर ही गई थी.
मेरे मुँह से गाली निकल गई- आह मादरचोद ने मार दिया!
दीदी ने हंस कर मुझे संभाला और बोलीं- हां तूने सच कहा, यह लौंडा हो तो गया मादरचोद … बड़ा मस्त लंड है इसका.
यह सब सुनकर आकाश भी हंस दिया और वह मुझे चूमने सहलाने लगा.
थोड़ी देर तक यूं रुकने के बाद दीदी ने कहा- बेटा अब तू लंड निकाल कर एक बार कविता की चूत चाट!
आकाश ने लंड चुत से खींचा और वह मेरी चूत चाटने लगा.
मैं फिर से उत्तेजित होने लगी थी.
अब मेरी चूत से पानी आने लगा था.
दीदी चुत का रस देख कर बोलीं- ले बेटा, तेरी मम्मी की चुत चुआने लगी … अब जल्दी से पेल दे इसकी चूत में अपना मोटा लंड और इस बार कोई रहम नहीं करना साले … फाड़ डाल अपनी मां की चूत!
आकाश ने मेरी तरफ देखा और मेरी टांगें चौड़ी करके अपना लंड घुसेड़ दिया.
मेरी चूत में मानो गर्म सरिया घुस गया हो.
मैं दर्द से कराही जरूर मगर सच बताऊं तो राहत मिल गई थी.
मैं पागलों के जैसी अपनी टांगें हवा में उठाकर अपने सौतेले बेटे का मोटा लंड चुत में अन्दर तक लेने लगी थी.
वह भी मेरी चुत को भोसड़ा बनाने के अंदाज में चोद रहा था.
कुछ देर बाद दीदी बोलीं- बेटा … अब मेरी भी चूत में डाल दे!
आकाश ने मेरी चुत से लंड खींचा और दीदी की चुत को चोदना शुरू कर दिया.
मैं उन दोनों की चुदाई को देखती हुई अपनी चूचियों को मसलने लगी और चूत में उंगली करने लगी.
कुछ ही देर में दीदी की चुत का पानी निकल गया.
मैं दीदी की चूत को चूसती हुई कुतिया बन गई और अपनी चूचियों को मसलने लगी.
आकाश ने पीछे से मेरी चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया और वह अपनी मां को चोदने लगा.
मैं भी सड़क छाप कुतिया के जैसी उसके मोटे लंड से चुत चुदवाने लगी.
वह मेरे दूध पकड़ कर मुझे दबादब चोद रहा था और गाली दे रहा था ‘आह साली मां की लौड़ी छिनाल हैं दोनों … आह मस्त मजा दे रही हो मेरी छिनरो मम्मी!’
पांच मिनट तक चुत चोदने के बाद आकाश बिना कुछ कहे मेरी चूत में ही झड़ गया.
मैं भी झड़ गई थी तो तृप्त हो गई थी.
जिंदगी में आज पहली बार मुझे सही मर्द के लंड से चुदने का सुख मिला था.
इसके बाद तो मैं और मेरी दीदी ने मिल कर आकाश से खूब चुदवाया.
दो दिन बाद दीदी चली गईं और आकाश अब मेरी रोजाना लेने लगा.
आपको मेरी यह स्टेप मॅाम चुदाई कहानी कैसी लगी, जरूर बताइएगा.
आपकी चुदासी औरत कविता
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लेखक की पिछली कहानी थी: चुदासी भाभी और बहन की चुदाई
