Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Two Sex Girls Story – चचेरी बहनों का लेस्बियन सेक्स to make every night hot about Two Sex Girls Story – चचेरी बहनों का लेस्बियन सेक्स story.
Story Start Here :
टू सेक्स गर्ल्स स्टोरी दो कामपिपासु लड़कियों की है, जो पहले आपस में लेस्बियन सेक्स करती हैं, फिर अपनी चुत की आग बुझवाने के लिए अपने कजिन भाई से चुदवाने की योजना बनाती हैं.
हाय मैं कबीर अग्रवाल एक और नई सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ.
ये कहानी मेरी एक लड़की दोस्त की है.
उसने मुझे ये कहानी भेजी थी, जिसे मैंने विस्तार से लिखा है.
आगे की कहानी आप उसी की जुबान में सुनें.
हाय, मेरा नाम आकांक्षा है और मैं गुजरात के वडोदरा से हूँ.
मेरी शादी हो चुकी है लेकिन ये टू सेक्स गर्ल्स स्टोरी मेरी शादी से पहले की है.
ये कहानी मेरी एक कजिन सिस्टर कुसुम और हमारी भुआ के लड़के कबीर के बीच की है.
नाम बदले हुए हैं.
कुसुम, कबीर और मैं तीनों एक ही उम्र के हैं.
बचपन से साथ में बहुत रहे हैं.
बचपन में जब भी छुट्टियां होती थीं तो हम तीनों एक साथ ही वेकेशन स्पेंड करते. साथ में खेलते, मस्ती करते.
अब साथ में रहते रहते अन्दर से तीनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे.
लेकिन रिश्ते में भाई बहन लगते थे इसलिए कभी किसी की फीलिंग्स बाहर नहीं आती थी.
जब हम खेलते मस्ती करते, तो उस दौरान कभी कभी कबीर का हाथ हमारे बूब्स या पिछवाड़े को छू जाता, तो अन्दर कुछ कुछ होने लगता था.
कबीर भी हमारे बूब्स को घूरता रहता था.
जब हम लोग बड़े हुए, तब हमें सेक्स के बारे में पता चल गया था कि कैसे होता है.
मैं और कुसुम एक साथ पढ़ते थे तो हमारी सहेलियों ने हमें इस बारे में बता दिया था.
हमने भी जब पढ़ा तो हमारे अन्दर भी सेक्स के बारे में ख्याल आने लगे थे.
मैं तो जब भी अकेली होती तो अपनी बुर में उंगली करने लगी थी.
कबीर गांव में रहता था और वहीं पढ़ता था.
मेरी और कुसुम की कॉलेज की पढ़ाई थी, तो हम साथ में स्टडी करते थे.
एक बार हम दिन में स्टडी कर रहे थे.
घर पर कोई नहीं था, सिर्फ हम दोनों ही थे.
तब कुसुम ने ऑनलाइन स्टोरी की साइट दिखाई जिसमें हर तरह की चुदाई वाली सेक्स स्टोरीज थीं.
हम दोनों उन सेक्स कहानियों को पढ़ कर बहुत एक्साइटेड हो गए व अपनी चूत को कपड़ों के ऊपर से रगड़ने लगे.
फिर कुसुम को क्या हुआ पता नहीं, मुझे पकड़ लिया और जोर जोर से किस करने लगी.
मुझे भी मजा आने लगा.
मैं भी उसका साथ देने लगी.
बहुत ही मजा आ रहा था
फिर दोनों अलग होकर एक दूसरे को आंखों में आंख डाल कर देखने लगीं.
फिर जैसे एक दूसरे को सहमति दे दी कि अब कुछ ज्यादा करते हैं.
कुसुम ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे सारे कपड़े उतार दिए.
मैं थोड़ी सांवली थी लेकिन बहुत सेक्सी दिखती थी … और अभी भी दिखती हूँ.
कुसुम मेरे ऊपर आ गई और मुझे चूमने लगी.
पहले माथे को, फिर गालों को, फिर हाथों को … फिर मेरे बूब्स को चूमने लगी.
उसके बाद वह एक मेरे निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगी.
मेरी हालत खराब होने लगी.
फिर उसने मेरी चूत पर मुँह रख दिया और चूत को जोर जोर से चूसने लगी.
ये पहली बार था कि कोई और मेरी चूत को छू रही थी.
फिर वह अपनी जीभ को मेरी चुत के अन्दर डाल कर मुझे चोदने लगी.
मैं ज्यादा कंट्रोल नहीं कर पाई, मेरा पानी निकल गया जिसे कुसुम ने अपनी जीभ से चाट कर साफ कर दिया.
वह लंबी लंबी सांसें भरती हुई मेरे पास लेट गई.
कुसुम अभी भी कपड़े पहने हुई थी.
फिर कुसुम ने कहा- मैंने कल पहली बार रियल चुदाई देखी थी … तो बहुत मन कर रहा है चुदाई का!
मैंने पूछा- किसकी देखी?
तो उसने कहा- मामा और मामी की.
मैं उसे सवालिया नजरों से देखने लगी.
‘कल शादी के बाद वे दोनों पहली बार यहां आए थे. रात को जब मैं पानी पीने उठी, तो उनके रूम से आवाज़ आ रही थी. मैंने खिड़की से देखा तो अन्दर दोनों चुदाई कर रहे थे.’
मेरे मुँह से निकला- फिर?
‘मामी दर्द से तड़प रही थीं, फिर भी खुश लग रही थीं. मामा का मोटा लंड मामी की चूत में आगे पीछे हो रहा था और मामी मजे से चुद रही थीं.’
मैं उसे सुनकर उसके दूध दबाने लगी.
‘मुझसे ज्यादा सहन नहीं हुआ, तो अपने रूम में जाकर नंगी हो गई और जोर जोर से चूत में उंगली करने लगी. जब तक पानी नहीं निकला, उंगली करती रही!’
कुसुम की बातें सुनकर मैं और एक्साइटेड हो गई. मैंने कुसुम को पूरा नंगी कर दिया.
कुसुम के बूब्स मुझसे ज्यादा बड़े थे और चूत भी गोरी और गुलाबी थी.
मैं कुसुम पर चढ़ गई और उसका पूरा बदन चूमने लगी.
कुसुम के निप्पल चूस चूस कर लाल कर दिए
फिर मैं कुसुम की गुलाबी चूत पर टूट पड़ी.
बहुत मस्ती से उसकी चूत की चुसाई चल रही थी.
कुसुम ज्यादा देर नहीं टिक पाई, उसका पानी निकल गया.
हम दोनों कुछ देर ऐसे ही नंगी पड़ी रहीं, फिर कपड़े पहन लिए.
अब जब भी मौका मिलता, एक दूसरे की चूत चाटतीं, उंगली करतीं, चूमाचाटी करतीं, बूब्स चूसतीं और कभी कभी खीरा अपनी चूत में डालतीं.
अब हम दोनों को रियल लंड लेने का मन करने लगा.
लेकिन किसका लें, जिससे कहीं बदनाम न हो जाएं.
तब कुसुम बोली- कबीर का लेते हैं!
मैं बोली- वह तो भाई लगता है!
कुसुम बोली- आजकल ऐसे कजिन भाई बहन बहुत होते हैं, जो सेक्स करते हैं.
मैं बोली- वह नहीं मानेगा तो?
वह बोली- वह जरूर मानेगा. मैंने कबीर को बहुत बार लंड हिलाते देखा है और उसका लंड भी बड़ा है.
मैंने पूछा- कब देखा था?
तो वह बोली- बहुत बार देखा है लास्ट बार जब उसके घर गई थी, तब अपने रूम में हिला रहा था … वह भी आकांक्षा तेरा नाम लेकर!
तब मैं बोली- हां, उसके अगले दिन ही मैं वहां से आई थी. उस दिन कबीर ने मेरी गांड देख ली थी. जब मैं झुकी थी, तो स्कर्ट पहनी थी और चड्डी नहीं पहनी थी, तो उसने देख लिया था. इसलिए शायद मेरा नाम लेकर हिला रहा था.
फिर कुसुम ने कहा- कुछ दिन बाद वह यहां आएगा, तब उसे रोज बूब्स और गांड दिखा दिखा कर एक्साइटेड करते हैं!
मैं राजी हो गई.
कुछ दिन बाद वह हमारे यहां रहने आया, तो हम दोनों जानबूझ कर अपने बूब्स और गांड उसे दिखाते.
कबीर भी हम दोनों के बूब्स और गांड को बहुत घूरता.
फिर जब उससे कंट्रोल नहीं होता था, तो बाथरूम में चला जाता.
हम तीनों कुसुम के घर पर छत पर सोते थे.
कुसुम की चाची भी वहां सोती थीं, तो मौका नहीं मिलता था कि कबीर से कुछ बात करें या कुछ करें.
एक दिन मेरे घर वाले सब बाहर गए थे.
घर पर हम तीनों ही थे.
घर वाले शाम को आने वाले थे तो आज पूरा दिन हमारे पास था और हम दोनों ये मौका खोना नहीं चाहती थीं.
मैंने और कुसुम ने आज पक्का कर ही लिया कि आज कैसे भी करके कबीर से चूत चुदवानी ही है.
कबीर हॉल में बैठकर टीवी देख रहा था.
मैंने कुसुम से कहा- तुम्हारे बूब्स ज्यादा बड़े हैं, तुम उसके सामने पौंछा मार कर बूब्स दिखाओ.
कुसुम ने बड़े गले वाली टी-शर्ट पहनी और उसने बाथरूम में जाकर पौंछा व बाल्टी ले ली. उसने जाने से पहले खुद को झुका कर मिरर में देखा तो उसे अपनी ब्रा एक समस्या दिखाई दी.
उसने झट से अपनी ब्रा को निकाल दिया.
फिर वह कमरे में आ गई और झुक कर पौंछा लगाने लगी.
पौंछा लगाती हुई जब वह कबीर के सामने आई तो कबीर ने उसे देखा.
वह और ज्यादा झुककर पौंछा लगाने लगी थी.
इस वजह से उसके लगभग पूरे दूध कबीर को दिख रहे थे.
कबीर भी अपनी वासना भरी नजरों से कुसुम के मम्मों को देख रहा था.
उसने एक पल के लिए भी अपनी बहन के मम्मों से अपनी नजरों को नहीं हटाया था, वह लगातार अपनी आखें उसके मम्मों पर ही टिकाए हुए था.
बहन के दूध देख कर कबीर का लंड खड़ा होने लगा जो उसकी पैंट में से साफ नजर आ रहा था.
कबीर अपने हाथ को भी अपने लंड पर रगड़ने लगा.
मैंने भी एकदम टाइट लेगिंग्स पहनी थी.
फिर मैंने भी चुदास भाव से भर कर बाथरूम के अन्दर जाकर अपनी पैंटी उतार दी और वापस लेगिंग्स पहनकर किचन में आ गई.
अब मैंने कबीर को आवाज़ लगाई- इधर आओ कबीर, मुझे तुमसे कुछ काम है.
कबीर का लंड वैसा ही खड़ा ही था. वह किचन में आ गया.
मैंने उसे किचन में ऊपर से 2 डिब्बे निकालने को कहा.
उसने निकाल दिए.
वह जाने लगा, तो मैंने कहा- अभी रुक, वापस रखना भी है.
वह पसीने में हांफ रहा था.
मैं आगे का अपना प्लान तय करने लगी … तो वह वहीं खड़ा हो गया
अब मैं उसके आगे आकर नीचे ऐसे झुककर कुछ ढूंढने लगी कि मेरी गांड उसके खड़े लंड पर लग गई.
अब मैं जानबूझ कर उसके लंड पर बिना पैंटी की गांड रगड़ने लगी.
मेरी लेगिंग्स का कपड़ा बहुत पतला था तो उसे मेरी मुलायम गांड महसूस होने लगी.
उसका लंड एकदम टाइट हो गया.
फिर उससे कंट्रोल नहीं हुआ तो वह बाथरूम की ओर जाने लगा.
तभी कुसुम ने उससे कहा- बाथरूम में मत जाना, सभी बाथरूम में एसिड डाला हुआ है … साफ करने के बाद जाना.
ये सब हमने प्लान के तहत किया था.
हमें पता था कि उससे कंट्रोल नहीं होगा, तो वह अपना लंड हिलाने जाएगा. लेकिन बाथरूम में हम उसे पकड़ नहीं पाएंगे, तो बाथरूम जाने का रास्ता ही बंद कर दिया.
ताकि वह कमरे में जाए.
यही हुआ भी … वह सीधा कमरे में गया. उधर जाकर वह अपना लंड बाहर निकाल कर हिलाने लगा.
हम दोनों भी फटाफट वहां आ गईं.
कमरे का दरवाजा बंद था लेकिन उसमें दो खिड़कियां थीं.
उन दोनों खिड़कियों में से एक पीछे की तरफ वाली खिड़की पानी से फूल कर खराब हो गई थी.
वह आराम से खुल सकती थी तो हमने वहां जाकर खिड़की खोल दी.
पहले तो हम दोनों ने उसे नंगा देखा, फिर कुसुम ने चुपके से लंड हिलाते हुए उसका वीडियो बना लिया, ताकि जरूरत पड़े तो इस्तेमाल कर सकें.
कबीर का पानी निकले और उसके पहले हम दोनों उसे आवाज देतीं कि उससे पहले ही किसी ने घर के मेन-गेट पर आकर रंग में भंग डाल दिया.
किसी ने मुख्य दरवाजे पर नॉक किया था.
कबीर ने फटाफट कपड़े पहन कर बाहर आ गया.
हम दोनों ने भी जल्दी से हॉल में आकर कबीर को आवाज दे दी थी और मेन गेट खोलने भेजा.
वह गया तो हम दोनों ने फटाफट से अपने अन्दर के कपड़े पहन लिए ताकि कोई मेहमान या कोई और हमें उस हालत में न देखे.
जब हम दोनों वापस हॉल में आईं तो देखा कि पापा के कुछ मेहमान आए थे.
वे सब मिला कर 6 लोग थे.
इतने में पापा का फोन आया कि उन्हें बिठाकर कुछ चाय नाश्ता कराओ, तब तक वे आते हैं.
मैं और कुसुम दोनों उदास हो गईं.
हाथ में आया मौका चला गया था.
लेकिन यह सुकून भी था कि कुछ होने से पहले ही यह हो गया वर्ना पकड़े जाते.
हालांकि हम दोनों मन ही मन में उन मेहमानों को गाली दे रही थीं.
फिर ऐसे ही पूरा दिन गुजर गया.
रात को मैं कबीर को लेकर कुसुम के घर सोने गई.
हम तीनों बहुत एक्साइटेड थे लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे थे.
हमने छत पर कुछ इस तरह सोने के लिए व्यवस्था की थी कि सबसे पहला बिस्तर कुसुम की चाची का था.
उनसे कुछ दूर मेरा और कुसुम का था.
फिर हमने थोड़ा गैप रखकर कबीर का बिस्तर बिछा रखा था.
रात को मैंने गाउन पहना था और कुसुम ने भी गाउन पहना था.
कबीर ने शॉर्ट पहना था और बनियान पहनी थी.
चाची चाचा से फोन पर बात कर रही थीं और कबीर मूवी देख रहा था.
मैंने कुसुम से कहा- आज कुछ करते हैं जो होना होगा, देखा जाएगा.
कुसुम ने कहा- तू ट्राई कर पहले …
मैंने ओके बोला.
फिर हम दोनों ने कबीर से कहा- हमें भी मूवी देखनी है.
तो उसने कहा- आ जाओ.
हम दोनों कबीर के दोनों तरफ आ गईं और उससे चिपक कर मूवी देखने लगीं.
पहले तो हम दोनों ऐसे लेटीं कि उससे हमारा कुछ टच न हों, फिर हम थोड़ा उसके नजदीक सरक आईं और मूवी देखने लगीं.
हम दोनों ऐसे लेटी थीं कि उसके हाथ की कोहनी हमारे बूब्स को टच करे.
अब धीरे धीरे कबीर का ध्यान मूवी से हटकर हमारे बूब्स पर जा रहा था.
उसकी हाथ की कोहनी मेरे बूब्स को ज्यादा प्रेस कर रही थी, तो मैं और उसके करीब सरक गई.
इतने में चाची अपनी जगह आकर सो गईं.
फिर मैंने कुसुम को इशारा किया, तो वह भी नींद का बहाना करके सो गई.
फिर मैं कबीर से और चिपक गई.
अब वह मेरे बूब्स को और प्रेस करने लगा.
मैंने भी उसके लंड पर ऐसे हाथ रख दिया, जैसे मूवी देखते अनजाने में रखा हो.
एकदम तंबू बना हुआ था उसका लंड शॉर्ट में …
मैंने हल्के से दबा दिया, तो कबीर को पता चल गया कि मैं क्या चाहती हूँ.
कबीर ने अपना हाथ मेरे बूब्स पर रख दिया.
मैंने अन्दर ब्रा नहीं पहनी है, ये उसे हाथ रखते ही पता चल गया.
वह धीरे धीरे मेरे बूब्स दबाने लगा.
मैं भी उसके शॉर्ट के ऊपर से लंड को सहलाने लगी.
अब वह जोर जोर से मेरे बूब्स दबा रहा था.
मैं ऊंह ऊंह करने लगी.
उसने मेरे गाउन के ऊपर के बटन खोलकर अन्दर हाथ डाल दिया और बूब्स दबाने लगा.
इस वजह से मैं और एक्साइटेड होने लगी.
मैंने आंखें बंद कर लीं.
फिर उसने मेरे गाउन को थोड़ा ऊपर करके अन्दर हाथ डाला और वह मेरी चूत को सहलाने लगा.
मेरी चूत पर एक भी बाल नहीं था.
आज सुबह ही मैंने और कुसुम ने चुत की झांटों को फिर से साफ किया था.
फिर मैंने आंखें खोलकर चाची को देखा, वे दूसरी तरफ मुँह करके सो रही थीं.
साफ लग रहा था कि वे गहरी नींद में हैं.
कुसुम को देखा तो वह चुपके से हमें देख रही थी.
कबीर अब अपनी उंगली मेरी चूत में करने लगा.
इससे मैं और एक्साइटेड होने लगी.
मैंने कबीर का शॉर्ट नीचे कर दिया और पतली सी चादर उसके ऊपर ले ली ताकि चाची उठ जाएं तो उन्हें पता न चले कि हम क्या कर रहे हैं.
मैंने उसका लंड हाथ में लिया और आगे पीछे करने लगी.
उसका लंड एकदम सख्त हो गया था.
ऐसा लग रहा था जैसे कोई बाँस हो.
कबीर मेरे पास आकर बोला- दीदी, अन्दर डालना है!
वह मुझे दीदी कहता था और कुसुम को कुसुम.
मैंने कहा- डाल दो, लेकिन मेरा पहली बार है … तो तकलीफ होगी … पता नहीं आराम से अन्दर जाएगा कि नहीं?
कबीर बोला- रुको, मैं आता हूँ.
दोस्तो, मेरा कजिन उठ गया था और मैं चुदास से तड़फ उठी थी.
टू सेक्स गर्ल्स स्टोरी के अगले भाग में मैं आपको चुदाई से भरी इस सेक्स कहानी को विस्तार से लिखूँगी.
तब तक आप अपने प्यार भरे मेल भेजें.
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टू सेक्स गर्ल्स स्टोरी का अगला भाग:
