Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Hard Fuck Bhabhi Story – मेरी चूत में गैरमर्द के लंड की तलब to make every night hot about Hard Fuck Bhabhi Story – मेरी चूत में गैरमर्द के लंड की तलब story.
Story Start Here :
हार्ड फक भाभी स्टोरी में शादी के बाद मुझे नए लंड नहीं मिल रहे थे. मेरी सहेली ने अपने देवर की शादी में बुलाया तो मेंकुछ दिन पहले चली गयी. वहां मेरी चूत लंड की ताबड़तोड़ फायरिंग किसने की?
दोस्तो, आप सभी को मेरा नमस्कार.
एक बार फिर अपनी सेक्स कहानी आपके सामने पेश कर रही हूँ.
ये हार्ड फक भाभी स्टोरी मेरी शादी के बाद की है.
दरअसल, मेरी शादी हुए एक साल हो गया था.
मैं परिजनों से दूर इंदौर में अपने पति के साथ रहती थी.
वे जॉब करते थे.
जब से शादी हुई थी तब से अब तक पति ही मेरा सहारा थे.
मैंने अपनी चुदने की पुरानी आदतों के चलते अपनी सारी जरूरतों को भुला दिया था.
मेरे पति मुझे जितना खुश कर पाते थे, मैं उसी में खुश रहने लगी थी.
मुझे अपने पति के सामान्य आकार के लंड से कभी-कभार महीने में एक या दो बार ही सुख मिलता था.
जबकि मैं एक ऐसी मछली थी कि मुझे एक तालाब के पानी में मजा नहीं आता था.
मैं पानी और तालाब बदलने वालियों मछलियों में से थी.
अब शादी के बाद सब बदल चुका था.
मेरी एक बेस्ट फ्रेंड थी प्रीति.
वह भोपाल में थी, उसकी ससुराल भोपाल में ही थी.
हम लोग बचपन से बहुत ही ज्यादा क्लोज फ्रेंड रही थीं.
प्रीति के देवर की शादी थी.
उसने मुझे इनविटेशन भेजा था.
मैंने हसबैंड से कहा तो वे बोले कि मैं उसी दिन आ जाऊंगा, तुम पहले जाना चाहो तो चली जाओ.
मैंने ओके कह दिया और प्रीति से अपने आने की बात कही.
उसने मुझे अपने घर 5 दिन पहले आने की कह दी- यदि तू पांच दिन पहले नहीं आई तो मैं गुस्सा हो जाऊंगी.
अब मैंने अपना प्लान बनाया और सब कुछ सैट करके मैं उसके घर आ गई.
उसके घर में उसके जेठ और पति और देवर और एक ननद थी.
यह शादी उसके घर की आखिरी शादी थी.
उन लोगों के तीन घर थे और सभी शानदार घर थे.
वे बहुत ही धनी और जाने माने लोग थे.
सबके अलग-अलग घर आजू-बाजू में ही थे.
प्रीति की जिठानी की हाल ही में डिलीवरी हुई थी, उनको लड़का हुआ था.
मैं पहले दिन उनके घर में सबके साथ रहकर अच्छा फील कर रही थी.
अगले ही दिन से कुछ और भी निकट के रिश्तेदार आने लगे थे.
इस बीच मैंने देखा कि प्रीति के जेठ की नजर मेरे ऊपर ही लगी थी.
उसका नाम रिक्की था.
मैं जब से प्रीति के घर आई थी, तभी से रिक्की मुझे घूरे जा रहा था.
मैंने ध्यान दिया तो रिक्की को अपनी पुरानी वाली नजर से तौला.
वह शरीर से एकदम कड़क, ऊंचा और फिट मर्द था.
उसकी स्टेमिना की चर्चा प्रीति को उसकी जिठानी सुनाया करती थी कि वह काफी देर देर तक घोड़े की तरह रौंदता रहता था.
यह सब सुनकर मेरी चुत फड़क उठी.
मैं यदि उसको अपनी कामुक नजरों से देखती तो वह मुझे अच्छा मर्द दिखता था.
लेकिन मैं अपनी वासना को काफी हद तक दबा चुकी थी और फिलहाल प्रीति के घर शादी में आई थी.
मैं यह नहीं जानती थी कि प्रीति का यह जेठ सच में कितना बड़ा हरामी आदमी है.
अगले दिन मैं ऊपर वाले रूम में नहाने गई थी.
उस टाइम करीब सुबह के 11 बजे का समय हुआ होगा.
मैं इस बात से अनजान थी कि ऊपर जिस बाथरूम में मैं जा रही हूँ, उसमें पहले से ही कोई अन्दर होगा.
मैं रूम का डोर लॉक करके बाथरूम में अन्दर घुसने को हुई.
चूंकि बाथरूम का गेट भी अनलॉक था, इसलिए मैं एकदम बिंदास थी.
मैं जैसे ही अन्दर गई तो देखा कि प्रीति का जेठ रिक्की नंगा नहा रहा था.
मैं उसे देखकर एकदम से शर्मा गई और अपनी इस नादान हरकत पर लाज महसूस करने लगी.
मैं वापस दरवाजे की तरफ जाती हुई बोली- ओह सॉरी-सॉरी, मैंने देखा नहीं था!
उधर रिक्की अपने लौड़े को सहलाता हुआ बोला- सुनो-सुनो यह सब क्या … तुम कैसी लड़की हो? मैं नहा रहा था और तुम एकदम से अन्दर आ गई? मेरा सब देख लिया रुक जाओ, मैं बोलता हूँ प्रीति को कि बदतमीज फ्रेंड है तुम्हारी!
अब मेरा दिल धक-धक होने लगा.
अब तो मर गई, खामखां में मैं बदनाम हो जाऊंगी.
साला लंड भी नहीं लिया और चुत की दुग्गी भी पिट गई.
उस वक्त मेरा होश फाख्ता था और दिमाग काम नहीं कर रहा था.
मेरे सामने वह जानबूझ कर अपने लंड को पकड़ कर सहला रहा था और मेरे सामने ही बहन का लौड़ा लंड पकड़ कर मूतने लगा.
लौड़े से मूत की धार निकल रही थी और वह उसी दरमियान शैंपू एक हाथ में लेकर लंड पर मल कर उसे साफ करने लगा था.
दूसरे हाथ से उसने कुंडी को पकड़ा हुआ था ताकि मैं बाहर न जाऊं!
मैं- आप ये सब मत करो और प्लीज किसी से कुछ मत कहना … मैंने जानबूझ कर नहीं किया.
‘ये सब छोड़ो मैडम तुमने मेरा सब कुछ देख लिया है, अब आप पहले इधर आओ!’
मैं सहम कर उसके नजदीक को गई.
वह बोला- चलो अब जल्दी से तुम भी अपना सब कुछ दिखाओ.
यह कह कर वह मेरी मैक्सी खींचने लगा.
उसने मेरी मैक्सी नीचे से ऊपर करके उठा दी.
मैं उसके सामने घिघिया रही थी- प्लीज़ माफ़ कर दो!
वह बोला- कोई बात नहीं, इसमें माफी की क्या बात है. अब तुम और मैं दोनों बिना कपड़ों के होकर नहाएंगे, यह सही रहेगा .. वैसे भी तुम नहाने ही तो आई थी!
यह कह कर उसने एक हाथ से शॉवर चालू कर दिया.
मैं जब तक कुछ समझ पाती तब तक उसने मेरी मैक्सी को मेरे जिस्म से हटा कर अलग कर दिया और ब्रा को खींच कर फाड़ दिया.
मैं केवल पैंटी में रह गई थी तो उसने मुझे अपनी बांहों में खींचा और मेरे चूतड़ों की तरफ से अपने दोनों हाथ मेरी पैंटी में डाले और पैंटी को भी मेरे जिस्म से अलग कर दिया.
मैं नंगी थी और मेरी चुत उसके लौड़े से चुम्मा ले रही थी.
चुत को मेरी शर्म लिहाज से कोई मतलब नहीं था … वह खुद को हॉट महसूस कर रही थी.
उसका कड़क लंड सांवला था और बड़ा ही बड़ा व मोटा था.
जिस किसी को देखना हो, मुझे मेल करके बोल सकता है … मैं उसके लौड़े की फ़ोटो भेज दूँगी.
अब मेरी सहेली के जेठ का नंगा बदन और उसकी मजबूत बांह पर बना एक लंड के आकार का टैटू मुझे उत्तेजित करके भड़का रहा था.
मेरी चूचियां उसके सीने से रगड़ खा रही थीं.
वह मुझे चूमता हुआ बोला- नीचे बैठ जाओ और लौड़े को प्यार करो!
मैं- प्लीज …
वह- शांत बैठकर मुँह खोल लो मेरी जान.
मैं मन ही मन में गर्म महसूस करने लगी थी तो बेमन से बैठ रही हूँ, ऐसा दिखाती हुई घुटनों पर बैठ गई.
वह बोला- अपनी आंखें बंद करो!
मैंने आंखें बंद कर लीं.
हालांकि मुझे मालूम था कि यह क्या करने वाला है … और मैं खुद को मानसिक रूप से तैयार भी कर चुकी थी.
फिर उसने अपने एक हाथ से मेरे दोनों गाल पकड़ कर मेरे मुँह को दबाया तो मेरा मुँह खुल गया.
मेरी सहेली के जेठ जी ने अपना लंड मेरे मुँह में पेल दिया.
मैंने महसूस किया कि उसका गर्म और सख्त लवड़ा मेरे मुँह में आ गया था और मेरी पुरानी हसरतों को जगाने लगा था.
लेकिन ड्रामा करना जरूरी था तो मैं लंड को मुँह से बाहर निकाल कर बोली- आह छी … मैं यह नहीं करूँगी!
उसने मेरे बाल पकड़ कर जबरदस्ती अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया और अन्दर बाहर करते हुए मेरे मुँह को चोदने लगा.
मुझे अपनी सहेली के जेठ का लंड चूसने में मजा आने लगा था लेकिन मैं यही दिखा रही थी कि मुझे यह सब मजबूरी में चूसना पड़ रहा है.
अब तक मैं भी यही चाहने लगी थी कि जल्दी से मेरी चुत की चुदाई इस लौड़े से हो जाए.
उसका लंड मस्त और जबरदस्त था.
मैं अपने मुँह में हक्क-हुक्क … हुक्क खों गों करती हुई लंड को चूसने लगी थी.
जेठ जी का लंड मेरे मुँह में झटके पर झटके दे रहा था.
कुछ ही समय में मेरी पुरानी रंडी जाग गई और मैं लंड को पूरा अन्दर तक लेने वाली कला को प्रदर्शित करती हुई लंड मुँह में लेने लगी थी.
जेठ जी का लंड मेरे गले के अंतिम छोर तक जा रहा था.
मेरे मुँह का थूक बाहर बहने लगा था.
वह मेरे दूध मसलता हुआ कहने लगा- साली तू तो बड़ी मस्त लंड चूसती है. तेरे पति का भी बड़ा लौड़ा है क्या?
मैं कुछ नहीं बोली, मगर मुझे एक आइडिया सूझ गया था कि मैं इसके सामने अपनी रांडपने वाली हरकत को छिपाती हुई गर्म हो जाने का ड्रामा कर सकती हूँ.
कुछ देर तक लंड चूसने के बाद मैंने उससे मेरी चूत चूसने को कहा.
वह खुश हो गया और उसने मुझे जमीन पर लिटा दिया.
मेरे पैरों को अपने दोनों कंधों पर रखकर सीधा चूत पर अपना मुँह लगा दिया.
वह मेरी चुत पर मुँह लगाकर चूसने लगा.
मैं उसके बालों को पकड़कर ‘आह … आह … ’ करने लगी.
कुछ समय तक इसी आनन्द के बाद वह अलग हुआ और मुझे अपने लौड़े के नीचे ले आया.
उसने लंड को चूत पर रख दिया और मेरे हाथ से लंड पकड़वा कर उसे मेरी चूत पर सैट करवाने लगा.
ये एक अच्छा अहसास था.
उसका लंड मुझे मेरी चुत पर बड़ा ही गर्म और सख्त लग रहा था तो मेरी चुत उसे गपक लेने के लिए मचलने लगी थी.
फिर उसने एक दबाव दिया तो उसका कड़क लंड मेरी रसीली चूत की फांकों में जगह बनाते हुए अपने नाम का झंडा गाड़ने लगा.
मैं भी उसकी सांसों से सांसें मिलाकर ‘आह … आह … ’ करने लगी.
वह मेरे होंठों को अपने होंठों से जकड़ कर तगड़ा शॉट मारने के लिए रेडी था … यह मुझे समझ में आ रहा था.
मैं भी चुत चुदवाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो गई थी.
तभी मेरी सहेली के जेठ ने अपने चाकू जैसे हथियार से मेरी प्यारी सी चूत को चीरना आरंभ कर दिया था.
जल्दी ही मेरी चिकनी और रसभरी चुत ने उसके लौड़े को अन्दर तक खींच लिया.
मुझे मीठा मीठा दर्द तो रहा था लेकिन काफी दिनों बाद किसी मूसल ने मेरी चुत को चीरा था तो एक अजीब सी मस्ती छा रही थी.
जल्द ही उसके दोनों गोटे मेरी गांड पर पट्ट-पट्ट लपेड़े देने लगे थे और जेठ जी का हथियार मेरी चुत को फाड़ने में लग गया था.
मेरी दोनों टांगें रिक्की के कंधों से अलग होकर हवा में फैल गई थीं और मैं उसके लौड़े से मस्ती से चुदवाने लगी थी.
उसने मुझे चूमा और मेरे एक दूध को अपने मुँह से भर कर खींचते हुए कहा- मजा आ रहा है न मेरी जान!
मैंने भी उसकी छाती को चूमते हुए कहा- हां रिक्की, अब बेड पर चलो … बाकी का मजा उधर लूंगी.
फिर वह मुझे उठा कर कमरे में ले आया और बेड पर पटक कर मुझे करवट देकर लिटा दिया.
अब उसने मेरी कमर पकड़ कर लंड को चूत में पेला और धकापेल चोदने लगा.
मैं भी उसके तगड़े झटकों से ‘आह … आय … आंह …’ करने लगी.
वह- जान, ज्यादा चिल्लाओ मत यार … कोई सुन लेगा तो तेरी चुत के लिए और भी बंदे आ जाएंगे!
मैंने कहा- क्या तुम्हारे घर में सब खुले सांड हैं?
वह हंस दिया और जोर जोर से पेलता रहा.
मैं तेज तेज स्वर में चिल्ला रही थी तो उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया और झटके पर झटके देने लगा.
मैं भी दबी जुबान से ‘आह … आह … ऊंम्म … ’ करती रही.
करीब बीस मिनट और चुदने के बाद वह झड़ने पर आ गया था.
वह बोला- आह मैं झड़ने वाला हूँ!
मैंने कहा- अन्दर नहीं … बाहर निकालना.
यह कहती हुई मैं तुरंत झटके से आगे को हुई और उसके लंड को अपनी चुत से बाहर निकाल कर अलग हो गई.
वह एकदम से उठा और अपने लंड को मेरे मुँह के पास ले आया.
मेरा गला पकड़ कर उसने कहा- आ करो … जल्दी.
मैंने मुँह खोल दिया तो उसने अपना लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया और झड़ने लगा.
मैं मुँह में वीर्य जाते ही उल्टी-सी करने लगी … मगर तब भी वह नहीं माना और उसने अपने लौड़े का पूरा पानी मुझे जबरदस्ती पिला ही दिया.
हार्ड फक भाभी का मजा लेने के बाद वह नहाने के लिए वापस बाथरूम में चला गया और कुछ पल बाद नहा कर मुझे देखता और मुस्कुराता हुआ बाहर निकल गया.
उसके जाने के बाद मैं बाथरूम में चली गई और बिना दरवाजा लगाए नहाने लगी.
उस रात को जेठ जी ने मुझे अलग रूम में एडजस्ट करवा दिया.
मैं समझ गई कि ये अब रात को चोदने आएगा. मुझे भी उसका लंड पसंद आ गया था तो मैंने भी हंस दिया
रात को जेठ जी मुझे चोदने आ गए.
उस रात उसने मुझे चार बार बजाया.
अगले दिन संगीत था, जिसमें बीच प्रोग्राम से मुझे उसने बुलाया और उसी सेपरेट कमरे में ले जाकर मुझको नंगी करके नाच करवाने लगे.
उस रात में भी उसने मेरी जमकर चुदाई की.
अगले दिन हल्दी का प्रोग्राम था तो उसने मेरे पूरे बदन पर हल्दी लगाई और नंगा होकर अपने लौड़े को मेरे मुँह में दे दिया.
मैंने मस्ती से उसके लंड को चूसा और बाद में लंड में हल्दी लगा कर चुत में ले लिए.
अपनी चुत को अन्दर तक हल्दी लगवा कर लौड़े से चुदवाया और बाद में सबके पास आ गई.
हल्दी वाली रात को जेठ ने मेरी बहुत ही जबरदस्त चुदाई की.
उस रात उसने ड्रिंक करके मेरी चुदाई की और मुझे भी दारू पिलाई.
उस रात दारू के नशे में उसने अपने लौड़े का पानी मेरी चूत के अन्दर ही निकाल दिया था.
मैंने भी मन बना लिया था कि इसके लौड़े के बीज से यदि मैं पेट से हुई तो बच्चे को जनूँगी.
फिर शादी वाले दिन जो हुआ … ओए होए … वह तो आप सोच भी नहीं सकते.
उस रात दरअसल मेरे हसबैंड आ गए थे और रिक्की ने उनके ही सामने मुझे बुलाते हुए कहा- तुझे प्रीति बुला रही है.
मैं उसके साथ गई तो वह मुझे रूम में ले जाकर चुदाई करने लगा.
तभी मेरे हसबैंड का फोन आया.
वे मुझे ढूँढ रहे थे.
मैंने कहा- बस अभी आ रही हूँ.
बाद में मैं अपने पति से कमरे में मिली.
उस वक्त रिक्की बाथरूम में घुस गया था.
मेरे हसबैंड को चुदास चढ़ गई थी तो मैंने हसबैंड को गर्म किया और उनके लौड़े चुदने के लिए रेडी हो गई.
मुझे पता था कि हसबैंड का लंड ज्यादा देर तक नहीं चलेगा और चुदाई के बाद वे बाथरूम में जरूर जाएंगे.
मैंने अपने पति से कुछ देर तक प्यार किया और इतने में रिक्की को मैंने बाहर जाने का इशारा कर दिया.
वह बाहर निकल गया.
हसबैंड ने दो मिनट तक मुझे चोदा और मेरी चुत में आग लगा कर खुद ठंडे हो गए.
वे मुझे चोदने के बाद बाहर गए तो रिक्की ने मेरे हसबैंड को खुद के साथ बिठाया और उन्हें दारू पिलाई.
जब हसबैंड को नशा हो गया तो वह मुझे चोदने आ गया.
उस वक्त मुझे मेरी चुत में लंड की सख्त दरकार थी तो मैं रगड़ रगड़ कर चुदी.
फिर शादी होने के बाद रात दो बजे होटल के रूम में ले जाकर रिक्की ने मुझे चोदा और सुबह चार बजे तक में दो बार हचक कर चुदाई की.
मैंने भी प्रीति के जेठ रिक्की को अपने पास ही सुला लिया.
जब उधर से घर वापस आई तो इस बार मेरा पीरियड मिस हो गया था और मैं रिक्की के बीज से प्रेग्नेंट हो गई थी.
मैंने बच्चे को जन्म देने का तय कर लिया था.
मेरे पति को मालूम हुआ कि मैं पेट से हूँ तो वे बहुत खुश हुए कि चलो उनके लंड से बच्चा कोख में आ गया.
फिर अल्ट्रासाउन्ड से पता चला कि अन्दर ट्विन्स हैं.
यह जानकर मैं और खुश हो गई थी.
मैंने यह मान लिया कि एक मेरे पति की देन है, एक रिक्की की देन है.
पर यह तय था कि मेरी प्रेग्नेंसी रिक्की के लंड से ही हुई थी.
ये सब बातें जब मैंने रिक्की को बताईं, तो वह भी बहुत खुश हो गया था.
अभी डिलीवरी को टाइम नजदीक आ गया है.
रिक्की कभी-कभी मेरे घर आ जाता है. उस वक्त मेरे हसबैंड अपने ऑफिस में रहते हैं.
अब तो मेरे हसबैंड और रिक्की में अच्छी दोस्ती भी हो गई है.
जब मेरी डिलीवरी का समय दूर था तब रिक्की मेरे हसबैंड को ओवर ड्रिंक कराकर सुला देता था और रात को मुझे ताबड़तोड़ चोद देता था.
दोस्तो, अब मेरे जुड़वां बच्चे पैदा हो गए हैं और कुछ दिन बाद रिक्की के लौड़े से चुदाई का सिलसिला फिर से चालू हो जाएगा.
मेरी हार्ड फक भाभी स्टोरी आपको कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
अपना समय देने के लिए आप सभी का धन्यवाद.
raajputsanaya@gmail
मेरी पिछली कहानी थी: बिग बॉस ने सैंडविच चुदाई करवा के मजा दिलाया
