Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Train Toilet Xxx Kahani – ट्रेन के सफर में मासूम लड़की चोद दी to make every night hot about Train Toilet Xxx Kahani – ट्रेन के सफर में मासूम लड़की चोद दी story.
Story Start Here :
ट्रेन टॉयलेट Xxx कहानी में ट्रेन में 20 साल की एक लड़की मेरे साथ सेक्स के लिए तैयार होकर वाशरूम में आ गयी. हम दोनों चुदाई के लिए बेचैन थे.
कहानी के पहले भाग
ट्रेन के सफर में मासूम लड़की पट गयी
में आपने पढ़ा कि मैं ट्रेन से जा रहा था कि एक परिवार की जवान लड़की से मेरी अँखियाँ लड़ गयी. वह मेरे नीचे बिछने को आतुर हो गयी. हमने वहीं बैठे बैठे किसिंग की और आगे की चुदाई के लिए टॉयलेट में आ गए.
अब आगे ट्रेन टॉयलेट Xxx कहानी:
मैंने मौका देखा अच्छा था, उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और वह मेरे शॉर्ट्स के ऊपर मेरे लंड को दबाने लगी।
फिर क्या था, मेरा लंड शॉर्ट्स को फाड़ कर बाहर आने को बेताब होने लगा।
मैं भी खड़े-खड़े उसकी बुर को अपनी उंगली से रगड़ता रहा।
अब मैं आगे बढ़ना चाहता था।
मैं उससे बोला, “अपनी कुर्ती उतार दो!”
उसने अपने हाथ ऊपर कर दिए और मैंने उसकी ब्लैक कुर्ती निकाल दी।
अब मेरे सामने ब्लैक कलर की ब्रा में उसकी 32 नंबर की चूचियां लहरा रही थीं।
मैंने अपने बड़े-बड़े पंजों से उसकी चूचियों को जकड़ लिया।
उसके मुंह से आह निकल गई!
मैं देर ना करते हुए उसको थोड़ा अपनी तरफ खींच कर पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।
जैसे ही ब्रा गिरने वाली थी उसने अपने हाथों से ब्रा को पकड़ लिया.
मैंने हंसते हुए कहा, “शर्मा क्यों रही हो, मैं ही दबाऊंगा!”
वो स्माइल करने लगी।
मैंने ब्रा उसके हाथ से लेकर साइड में रख दी और झुककर उसकी चूचियों को पीने लगा।
दोस्तो, मुझे चूचियां पीना, उन्हें मसलना, उनके निप्पल से खेलना बहुत ही पसंद है और जब मैं चूचियां दबाते हुए पीता हूं तो लड़कियां क्या… भाभियां और आंटियां मेरे चूची पीने के तरीके की दीवानी हो जाती हैं!
सायमा भी मदहोश होने लगी… चूचियां पीते हुए मैं फिर से उसकी बुर की फांकों को रगड़ना शुरू किया, अब तो उसकी बुर और ज्यादा पानी छोड़ रही थी।
उसने अपने हाथ से मेरा लंड जोर-जोर से दबाना जारी रखा।
मैंने उससे पूछा, “मुंह में लोगी?”
उसने मना कर दिया।
मैंने बोला, “क्या हुआ?”
वह बोली, “अच्छा नहीं लगता!”
मैंने कहा, “कोई बात नहीं!”
और फिर से उसके गले पर किस करने लगा।
वह मदमस्त होने लगी।
किस करते हुए मैं उसके पूरे शरीर जहां-जहां मेरा हाथ पहुंच रहा था, सहला रहा था।
अब मैंने उसको बेसिन से उतार कर खड़ा कर दिया और उसको घुमा दिया।
और पीछे से उसकी गांड और पीठ को सहलाने लगा।
कुछ देर बाद एक हाथ से उसकी एक चूची को पकड़ लिया।
अब मैं पीछे से उसकी एक चूची को पकड़ कर मसल रहा था और उसकी पीठ को चूम रहा था, वह एकदम पागल हो गई थी।
मैंने धीरे से कान में कहा, “अब अंदर डालूं?”
उसने कुछ नहीं बोला… बस स्माइल कर दी!
मैं समझ गया कि अब सायमा की बुर में अभिमन्यु का लंड पेलने का समय आ गया है।
फिर क्या था … मैंने खोल दिया सलवार का नाड़ा!
अब ब्लैक पैंटी में वो मेरे सामने थी… साली ने क्या मैचिंग कराई थी!
ब्रा पैंटी सबकुछ ब्लैक-ब्लैक… बस उसका जिस्म व्हाइट!
एक बार पैंटी के ऊपर से बुर की फांकों को सहलाया और फिर धीरे से नीचे सरका दिया।
अब मेरे सामने थी सायमा शेख की चिकनी गोरी-गोरी बुर और गोल-गोल गांड।
मैंने गांड पर जोर से स्पैंक कर दिया, वो छटपटा उठी।
बोली, “जानवर हो क्या?”
मैंने कहा, “अभी आगे देखो!”
वो बोली, “दिखाओ!”
ट्रेन टॉयलेट Xxx करने के लिए अब मुझसे रहा नहीं गया और बिना थूक लगाए ही पीछे से मैंने अपना लंड जिसको… मैं शॉर्ट्स को नीचे सरका कर पहले ही बाहर निकाल चुका था… उसकी चुत की दरार पर रखा और धीरे से धक्का दे दिया।
मेरा लंड तो थोड़ा सा ही अंदर गया.. लेकिन उसका मुंह खुल गया… और एक दर्द भरी आह निकल गई।
मैं बोला, “आवाज मत करो!”
वो बोली, “थोड़ा धीरे से डालो… दर्द हो रहा है!”
मैं हंस दिया।
मैंने मन में सोचा, “हां यार… यह भाभी थोड़ी है जिसकी बुर फैली हुई होगी!”
फिर मैंने लंड पर थूक लगाया और धीरे-धीरे उसकी बुर में घुसाने लगा… और धीरे-धीरे मेरा लंड उसकी बुर में आधे से ज्यादा घुस गया।
वो कसमसाने लगी और मेरे लंड पर पीछे की तरफ गांड दबाने लगी।
बोली, “जोर से करो…!”
मैंने कहा, “जैसी तुम्हारी मर्जी!”
धीरे-धीरे हिलाते-हिलाते मैंने उसकी कमर को कसकर पकड़ा और एक जोर का धक्का दे दिया!
लंड उसकी बुर के हर कोने को चीरता हुआ पूरा अंदर घुस गया।
उसके मुंह से “आआह्ह…” और गांड से पाद निकल गई!
वो छूटकर जाने की कोशिश करने लगी.
लेकिन मैंने उसकी कमर को पकड़ रखा था… जाती कैसे!
मैंने झुक कर उसके कान में धीरे से कहा, “मजा आया??”
वो बोली तो कुछ नहीं, लेकिन उसकी फूली हुई सांसें बता रही थीं कि वो लंड को अपनी बुर में एडजस्ट करने की कोशिश कर रही थी और अभी कुछ बोल पाने की हालत में नहीं थी।
जिसने कभी भी किसी लड़की को चोदा है उसको पता होगा… मर्द को सबसे ज्यादा संतुष्टि तब मिलती है जब औरत के अंदर लंड जाए और औरत की सांसें उखड़ने लगें।
और सायमा का पसीने से डूबा जिस्म और उखड़ती सांसें मुझे परम संतुष्टि दे रही थीं।
अब उसकी बुर में मैं धक्के पर धक्के मार रहा था।
हर धक्के के साथ उसके मुंह से “आ.. आ..” निकल जाता।
उसकी पूरी आह निकले, उससे पहले ही दूसरा धक्का लग जाता… उसकी गोरी मखमली गांड हिलोरे मार रही थी जैसे समंदर की लहरें।
मैंने फिर से दो थप्पड़ मार दिए गांड पर।
वो सांस थामते हुए बोली, “आवाज बाहर चली जाएगी!”
मैं भी सचेत हो गया।
हालांकि उसकी गांड लाल हो गई।
अब मैंने उसकी कमर छोड़कर उसकी चूचियों को पकड़ लिया।
चूचियां पकड़ के उसको मैं जोर के धक्के देने लगा। वो अपने आपको और अपनी सांसों को संभालने में लगी रही।
कभी वो बेसिन की टोटी पकड़ती तो कभी हाथ पीछे करके अपनी गांड फैलाती कि अच्छे से मेरा लंड घुस जाए।
सच में आज सायमा को चोदकर मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था!
मुझे मेरी स्पोकन क्लास वाली टीचर साजिया खान याद आ गई… जिसने मुझे होम ट्यूशन देते हुए.. अपनी बुर भी दे दी थी।
खैर, 5 मिनट चोदने के बाद मुझे लगा कि मेरा वीर्य निकल जाएगा तो मैंने धक्के एकदम से रोक दिए।
वो पीछे मुड़ी और बोली, “रुक क्यों गए? करो न!”
मैंने कहा, “तुम अब घूमो, दूसरी तरफ से करूंगा!”
मैंने उसको घुमा दिया और उसको बेसिन शेल्फ पर बिठा दिया और उसकी टांगों को फैला दिया।
अब उसकी चुत मेरे सामने थी।
कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से नॉर्मल हो चुका था।
बस फिर क्या था, सुपारा रखा उसकी चुत पर और अंदर सरका दिया!
उसकी आंखें बंद हो गईं, वह मेरे लंड से पेलवाने का आनंद लेने लगी।
मैं उसके चेहरे को देखकर संतुष्ट हो रहा था।
चोदने के साथ-साथ एक हाथ से मैं उसकी बुर के ऊपरी हिस्से को रगड़ने भी लगा… वो तो जैसे पागल हो जा रही थी।
वो “अभिमन्यु, अभिमन्यु” करने लगी।
मुझे लगा कहीं इसकी आवाज बाहर न चली जाए, इसलिए एक हाथ से उसका गला पकड़ लिया मैंने।
और चुदाई और बुर मसलाई जारी रखी।
वो हिलने लगी… उसकी आंखें बंद होने लगीं… और मुझे पकड़ कर चिपक गई।
मैंने कहा, “क्या हुआ??”
मेरे सीने पर चिपकी रही… फिर मैंने पूछा, “हो गया क्या?”
बोली, “हां…!”
मैंने पूछा, “कैसा था?”
बोली, “मैं उड़ रही थी!”
मैंने फिर से चोदना चालू कर दिया।
तीन-चार मिनट और चोदने के बाद मेरा निकलने का हो गया।
मैंने कहा, “अंदर निकाल दूं?”
वो बोली, “नहीं… बाहर निकालो!”
जैसे ही मैं बाहर निकाल रहा था कुछ बूंदें उसकी बुर पर गिर गईं।
मैंने कहा, “यार अब तो रिस्क हो सकता है!”
वह बोली, “कोई बात नहीं मैं दवा खा लूंगी…!”
मैंने कहा, “तब एक बार और करते हैं…!”
वो बोली, “नहीं नहीं अम्मी उठ जाएंगी… मुझे जाना है बहुत लेट हो रहा है!”
मेरा मन तो चोदने से भरा नहीं था.
लेकिन क्या करता मजबूरी थी, हम ट्रेन के टॉयलेट में चोदम-पट्टी कर रहे थे।
मैंने कहा, “तुम मुझे अपना कांटेक्ट दे दो हम फिर मिलेंगे और जमकर पेला-पेली करेंगे!”
उसमें उसने बोला, “मेरे पास मोबाइल नहीं है… अब्बा मोबाइल नहीं रखने देते!”
मैंने कहा, “तुम मोबाइल चला तो रही थीं!”
वह बोली, “वह अम्मी का मोबाइल था!”
“तब मैं कैसे तुमसे जुडूंगा?” मैंने पूछा!
तो वह बोली, “मैं भाभी का इंस्टाग्राम दे देती हूं… उसके थ्रू हम बात कर पाएंगे!”
मैंने कहा, “भाभी को बताओगी… कोई दिक्कत नहीं होगी?”
वह बोली, “भाभी के खुद कई अफेयर हैं, मैं जानती हूं उनके बारे में… हम एक-दूसरे के राजदार हैं!”
मैंने पूछा, “तुम्हारे भाई क्या करते हैं?”
बोली, “कि वो कतर में रहते हैं. कार मैकेनिक हैं!”
मैंने कहा, “ठीक!”
फिर मैंने अपना इंस्टाग्राम खोल कर उसको दे दिया।
उसने उसमें अपनी भाभी की आईडी सर्च करी और फॉलो कर दिया।
इसके बाद फिर से मैं उसको किस करने लगा।
कुछ देर होंठों पर किस करने के बाद उसकी चूचियों को पीने लगा… और बुर को मसलने लगा.
वो फिर से गर्म होने लगी।
मैंने कहा, “चलो एक बार और करते हैं…!” वो तैयार भी हो गई!
इतने में दरवाजे पर दस्तक हुई!
उसकी अम्मी दरवाजे से उसका नाम लेकर बुला रही थी… खड़े लंड पर धोखा हो गया!
उसकी मां ने आवाज दी, “सायमा, बेटा.. बेटा..!”
हम दोनों डर गए।
अब क्या होगा!
हम दोनों कपड़े पहनने लगे।
मैंने तो तुरंत पहन लिए, उसने ब्रा और कुर्ती पहनी और बिना पैंटी पहने सलवार ऊपर चढ़ा ली।
मैंने इशारे से पूछा, “अब क्या करें?”
उसने मुझे इशारा किया, “मैं हूं ना!”
उसने मुझे कोने में कर दिया और थोड़ा सा गेट खोल कर बोली, “अम्मी… साबुन लेते आओ मैं टॉयलेट आई थी!”
उसकी मां साबुन लेने चली गई।
उसने गेट खोल कर देखा बाहर कोई नहीं था, उसने मुझे तुरंत बोला कि निकल जाओ!
मैं तुरंत बाहर निकल के दूसरी बोगी में चला गया और जाकर गेट के पास खड़ा हो गया।
20 मिनट बाद जब मैं वापस आया तो देखा उसकी मां नीचे सोई हुई थी और वो ऊपर।
मुझे लगा उसकी मां को डाउट हो गया क्या?
खैर, क्या ही कर सकता था।
अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन चुदाई की प्यास बुझाना भी तो जरूरी था।
मैं भी अपनी सीट पर सो गया।
मैंने कनखियों से ऊपर देखा वह जाग रही थी और मेरी तरफ ही देख रही थी।
मैंने होंठों से किस का इशारा किया… वो स्माइल कर दी।
मैं समझ गया सब ठीक है।
मैंने उसे सोने का इशारा किया कि चलो अब सो जाते हैं।
उसने बोला, “नींद नहीं आ रही है…!”
मैंने चुदाई का इशारा किया.
वह फिर से स्माइल कर दी।
फिर हम इशारों में कुछ देर ऐसे ही टाइमपास करते रहे।
और फिर मैंने इशारा किया कि मैं सोऊंगा।
वो बोली, “ठीक है” और एक फ्लाइंग किस दी।
मैंने उसको रिटर्न में फ्लाइंग किस दिया और करवट होकर चादर ओढ़ लिया।
मेरे दिमाग में उसकी चूचियां, उसकी बुर और उसकी गांड घूम रही थी।
और सच में उस पर बहुत प्यार आ रहा था… कि यार ये कितनी ऑसम है!
उसके बारे में सोचते-सोचते… पता नहीं कब मुझे नींद आ गई।
वैसे अच्छी तरह से चोदने के बाद मुझे नींद बहुत अच्छी वाली आती है… और फिर मैं सो गया।
मेरी नींद खुली सुबह 5:30 बजे।
देखा तो वह सो रही थी, उसकी मम्मी बैठी हुई थीं, उसकी भाभी बैठी हुई थीं।
मैं उठा, ब्रश किया, कुछ एप्पल रखे थे तो उसको खाया।
7:00 के करीब उसकी नींद खुली।
सुबह देखा कितनी मासूम लग रही थी… मन हुआ अभी इसी बोगी में ही उसको पटक कर पेल दूं, लेकिन ऐसा कर तो नहीं सकता था।
खैर, वह नजरें चुरा कर मुझे ही देख रही थी।
हम इशारों में बातें कर रहे थे… स्माइल कर रहे थे।
उसके अब्बा भी आ गए थे।
वह ब्रश करने चली गई और धीरे-धीरे मेरा स्टेशन आने वाला था।
मुझे बनारस में अपने एक सर से मिलना था इसलिए मुझे मुगलसराय उतरना था।
8:00 के करीब वो सीट पर आई।
मैंने इशारे से पूछा, “इतनी देर कहां थी?”
उसने इशारे से कुछ समझाया मुझे, बस इतना समझ में आया कि ब्रश कर रही थी।
फिर मैं पैंट लेकर टॉयलेट में गया, शॉर्ट्स उतारकर पैंट पहना… और आकर अपना सामान पैक किया।
उसने इशारे से पूछा, “यह क्या कर रहे हो?”
मैंने इशारे से बताया कि मुझे उतरना है।
उसने स्माइल कर दी।
15 मिनट बाद मेरा स्टेशन आने वाला था… मैंने सामान पैक किया, उसकी तरफ देखा।
वह भी मुझे ही देख रही थी।
मैंने उसे होंठों से चूमने का इशारा किया, आंख मारी और इशारा किया कि फिर मिलेंगे… उसने भी इशारे से चूमा और आंख मारी।
अब ट्रेन स्टेशन पर रुक चुकी थी, मैं सामान लेकर नीचे उतर रहा था… सायमा और ट्रेन पीछे छूट रहे थे।
मेरे दिमाग में घूम रही थी सायमा की चूचियां, उसकी बुर, उसकी गांड और उसका मासूम चेहरा.
तो दोस्तो, ये थी मेरी कहानी!
इसके कुछ दिन बाद इंस्टाग्राम पर मेरी उसकी भाभी से बात होने लगी और फिर इलाहाबाद जाकर मैंने उसकी भाभी को और उसको … दोनों को उनके घर जाकर चोदा!
वह कहानी जब आप लोग मैसेज करके कहेंगे तब बताऊंगा।
तो कैसी लगी मेरी ट्रेन टॉयलेट Xxx कहानी? मेरे ईमेल एड्रेस पर ईमेल करके जरूर बताएं!
मेरे ई मेल एड्रेस पर ईमेल करके जरूर बताएं।
आप सबके ईमेल का इंतजार रहेगा।
sexyjackforgirl@gmail
