Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Desi Girl Xx Kahani – ट्रेन के सफर में मासूम लड़की पट गयी to make every night hot about Desi Girl Xx Kahani – ट्रेन के सफर में मासूम लड़की पट गयी story.
Story Start Here :
देसी गर्ल Xx कहानी में मैं ट्रेन में सफर कर रहा था कि मेरे सामने वाली सीट पर बुर्के वाली लेडी और उसका परिवार आया. उनमें एक लड़की थी मासूम सी. वह मुझे देख रही थी.
नमस्कार दोस्तो! मैं आप सबका अभिमन्यु, बहुत दिनों बाद एक बार फिर से हाजिर हूं।
आशा करता हूं आप सब मुझे भूले नहीं होंगे क्योंकि मेरी पिछली कहानी
रूम पार्टनर की हॉट बहन को चोदा
सितंबर 2019 में प्रकाशित हुई थी।
तब से लेकर अब तक मैंने कितनी ही लड़कियों, भाभियों और आंटियों को चोदा, लेकिन कभी लिखने का समय नहीं मिला और कभी समय मिला तो लिखने का मन नहीं किया।
इन 5 सालों में मैंने बहुत सारी एडवेंचरस चुदाई की।
वो सारी कहानियां मैं एक-एक करके आपके सामने प्रस्तुत करूंगा।
आप सब हर कहानी पढ़कर आहें भरना और मुट्ठ मारना!
और औरतें अपनी चुत में उंगली न करके किसी लड़के के लंड से चुदवा लेना; आपको मजा भी आएगा और किसी छीनरे गरीब का भला भी हो जाएगा।
अब आप लोगों को और बोर न करते हुए ले चलता हूं चुदाई वाली ट्रेन के सफर पर।
बात दरअसल यह है कि मैं पढ़ाई के साथ-साथ थिएटर एक्टिंग भी करता हूं।
तो मुझे अपने थिएटर ग्रुप के साथ पूरे देश में घूमने का मौका मिल जाता है, इस बार की देसी गर्ल Xx कहानी भी उसी से जुड़ी हुई है।
हमारा ग्रुप इस बार ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर गया था।
हमारा एक सप्ताह का प्रोग्राम था जिसे खत्म करके हमको वापस आना था।
हुआ यह कि मुझे एक्टिंग करते देख एक ओड़िया डायरेक्टर को मैं पसंद आ गया जो कि इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स पर काम करते थे।
उनको मेरी तरह दिखने वाला एक बंदा चाहिए था, उन्होंने मुझसे बात की।
तो मैंने बोल दिया कि मेरा ग्रुप प्रोजेक्ट खत्म करने के बाद मैं आपके लिए काम कर सकता हूं।
हालांकि यह प्रोजेक्ट प्राइवेट था पर मुझे ओडिशा घूमने और नए लोगों से मिलने का मौका मिलता, इसलिए मैंने हां बोल दिया।
अब जब हमारे ग्रुप का प्रोजेक्ट खत्म हो गया तो मैं ओडिशा में डायरेक्टर के घर पर ही रुक गया।
फिर उस प्राइवेट प्रोजेक्ट पर लगभग 2 महीने तक काम किया… और उस दौरान भी तीन अलग-अलग औरतों को चोदा, जिसमें डायरेक्टर की बीवी और उसके पड़ोस में रहने वाली भाभी की बेटी और एक हमारे साथ प्रोजेक्ट पर काम करने वाली फोटोग्राफर थी।
वो कहानियां बाद में बताऊंगा।
तो यह प्राइवेट प्रोजेक्ट खत्म करके मैं भुवनेश्वर से वापस आ रहा था।
एसी 3rd क्लास का टिकट था, ट्रेन 12:30 बजे चली, मेरी सीट साइड लोअर थी।
मैं बैठकर मोबाइल चला रहा था।
ट्रेन ढेंकनाल स्टेशन पर रुकी और मेरे बगल वाली सीट पर एक बेहद सभ्य परिवार आकर बैठ गया।
उसमें एक अंकल, आंटी, एक भाभी और एक कोई 20–21 साल की लड़की थी।
जो भाभी थीं, उन्होंने आते ही बुर्का उतार दिया… क्या बला की खूबसूरत थी यार!
मेरा ध्यान न चाहते हुए भी उनकी ओर चला गया।
हालांकि मैं सफर में फैमिली वाले लोगों की तरफ ज्यादा ताका-झांकी नहीं करता क्योंकि उससे फैमिली वाले लोग अनकंफर्टेबल हो जाते हैं लेकिन भाभी की मासूम खूबसूरती थी ही इतनी कातिल कि मेरी आंखें भले मेरे मोबाइल पर लगी थीं, मेरा मन उनके प्यारे चेहरे पर ही ठहर गया था।
इसलिए वो लोग जो बातें कर रहे थे वो मैं न चाहते हुए भी सुन रहा था।
बातों से पता चला कि वो लोग इलाहाबाद जा रहे थे और उनका खुद का नॉन-वेज रेस्टोरेंट था जिसको कि यूपी सरकार तोड़ने वाली थी, जिससे वो लोग परेशान थे और कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगा रहे थे।
मुझे सुनकर अच्छा नहीं लगा और मैं भी बातों में शामिल हो गया।
थोड़ी उनसे सहानुभूति दिखाई, सरकार की बुराई की, फिर अंकल से थोड़ी-थोड़ी बात होने लगी।
अंकल अच्छे व्यक्ति थे, वो अपनी तरफ से मुझे खाने के लिए केक देने लगे, मैंने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया।
खैर, ऐसे ही रुक-रुक कर बातें होती रहीं।
ज्यादा बात अंकल और आंटी कर रहे थे, भाभी बस कभी-कभी हां में सिर हिला देती थीं।
मुझे बात करने के बहाने भाभी की मासूमियत निहारने का मौका मिल रहा था।
इन सबके बीच जो एक बात मैंने नोटिस की वो ये कि जो लड़की साथ आई थी वो मुझे बहुत गहरी नजरों से देखे जा रही थी।
मेरी नजर भी उससे कई बार मिली लेकिन उसने नजर हटाई नहीं, बल्कि मैं ही अनकंफर्टेबल होकर उससे नजरें हटा लेता था; काफी ढीठ थी वो।
खैर, धीरे-धीरे शाम होने लगी।
मुझे थकान सी लग रही थी, ऊपर से एसी की ठंडी हवा तो मुझे नींद आने लगी और मैं सो गया।
नींद तब खुली जब पेंट्री वाला खाने का ऑर्डर लेने आया।
मैं ट्रेन में खाना नहीं खाता, अपने फ्रूट्स, ड्राई फ्रूट्स वगैरह साथ में रखता हूं।
फिर भी मैंने वेज बिरयानी ऑर्डर कर दी।
सबने खाना खाया और 11 बजने वाले थे तो सब सोने की तैयारी करने लगे। अंकल की सीट दूसरे कोच में थी तो वो वहां सोने चले गए। लाइट्स ऑफ… और धीरे-धीरे सब अपने कंबल के अंदर। जो लड़की थी वो लोअर बर्थ पर सोई थी ठीक मेरे सामने, क्योंकि साइड लोअर पूरा मेरा था।
सब सो गए पर मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मोबाइल में पोर्न देखने लगा।
इतने में वो लड़की उठी और उसने मेरे मोबाइल की स्क्रीन साइड से देख ली लेकिन उसने कोई रिएक्शन न दिया बल्कि वो मेरी तरफ मुंह करके देखे ही जा रही थी।
मैंने अब तक कितनी ही लड़कियों को चोदा है और मुझे समझ में आ जाता है कि किस औरत का कब क्या मूड है और मुझे समझ में आने लगा था कि भाभी भले न मिलें, यह लड़की इंटरेस्टेड है और इसका शायद चोदवाने का मन है।
मैंने भी तय कर लिया कि ट्राई करते हैं, चुदेगी तो ठीक नहीं तो मेरा क्या जाता है!
तो मैंने मोबाइल की स्क्रीन थोड़ी और उसकी तरफ कर दी और वीडियो देखता रहा, वो भी देखती रही।
मैं अब मन में उसको चोदने के प्लान बनाने लगा और बात शुरू करने का तरीका सोचने लगा।
इसलिए कुछ देर बाद मैंने उसकी तरफ देखा और आंखों से इशारा किया तो उसने भी इशारे से जवाब दिया।
मैं समझ गया लड़की राजी है, यहां बात आगे बढ़ सकती है।
मैंने मोबाइल बंद कर दिया और नीचे रख दिया।
कुछ देर बाद मैंने पैर फैलाने के बहाने उसकी सीट पर रख दिए।
अब मैं उसको सामने से देख रहा था, वो भी कुछ देर तो बैठी रही फिर खिसककर मेरे पैर के पास आ गई जिससे उसकी जांघें मेरे पैरों से एकदम सट गईं।
यह तो एकदम ग्रीन सिग्नल था!
मैं अपने पैरों को उसकी जांघों पर रगड़ने लगा तो उसने कोई विरोध नहीं किया बल्कि अपने हाथों से मेरे पैरों को आहिस्ते-आहिस्ते छूने और सहलाने लगी।
अब सब कुछ क्लियर था।
मैं इतना तो क्लियर था कि लड़की की सहमति है।
बस फिर क्या था, मैंने अपने पैरों से उसके पैरों को फैलाने का इशारा किया। उसने अपनी टांगें खोल दीं और मैंने अपने अंगूठे को सीधे उसकी बुर पर रख दिया और अंदर ठेलने लगा। पता चला कि उसकी बुर पानी छोड़ चुकी थी। पैंटी और सलवार दोनों थोड़ी-थोड़ी गीली हो चुकी थीं।
मेरे पैरों का अंगूठा बड़े आराम से उसकी गीली बुर की फांकों पर मालिश कर रहा था और वो थोड़ा-थोड़ा हिल रही थी।
मेरे लंड का पानी इधर मेरी जॉकी अंडरवियर को भिगोकर डीकैथलान शॉर्ट्स को भिगोने की तैयारी कर रहा था।
उसकी बुर की फांकों को सहलाते हुए मैंने अंगूठा उसकी बुर में घुसाने की कोशिश की और एक बार अंगूठा कुछ अंदर घुस भी गया लेकिन उसने मेरा पैर पकड़ लिया।
मैं रुक गया।
मैंने उसको इशारा किया, “क्या हुआ?”
उसने ‘नहीं’ में सिर हिलाया।
मैंने फिर से सहलाना शुरू कर दिया लेकिन ठीक से हो नहीं पा रहा था और मन भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रहा था।
अब तो मन कर रहा था कि इसको झुकाकर इसकी बुर में लंड डाला जाए और इसकी कोमल चुचियों को पिया और मसला जाए, इसके कमसिन बदन को जमकर रगड़ा जाए, इसको खूब प्यार किया जाए, इसकी जवानी का पूरा रस लिया जाए।
लेकिन अभी कुछ कर तो सकते नहीं थे तो मैंने उसकी बुर को सहलाना जारी रखा।
इतने में ऊपर वाले बर्थ पर कुछ हलचल हुई तो मैंने तुरंत अपना पैर अपनी सीट पर खींच लिया।
पता चला कि उसकी मां जाग गई थी।
मैं अपनी सीट पर लेट गया जिससे उसकी मां को ये डाउट न हो कि मैं भी जाग रहा हूं उसकी बेटी के साथ।
उसकी मां ने उससे पूछा, “क्या हुआ सायमा? तुम सो क्यों नहीं रही?”
तो उसने अपना मोबाइल हाथ में लेते हुए बोला, “मैं एक पाकिस्तानी सीरियल देख रही हूं, कुछ देर में सो जाऊंगी, आप सो जाइए!”
आंटी जी कुछ देर में सो गईं।
मैं फिर धीरे से उठा और उससे नजरें मिलीं, वो मेरी तरफ ही देख रही थी।
हमारा नैन-मटक्का चल ही रहा था कि उसने मुझे अपनी उंगलियों से इशारा किया अपनी तरफ आने का।
मैंने कंफर्म किया इशारे से, “आऊं?”
उसने फिर से बुलाया!
मैं धीरे से अपनी सीट पर बैठे-बैठे उसकी तरफ झुक गया, वो भी अपनी सीट पर एकदम किनारे आ गई थी।
बस फिर क्या था, हमारे होंठ एक-दूसरे से मिल चुके थे!
अब उसका तो पता नहीं लेकिन मुझे डर लग रहा था कि कोई देख न ले, इसलिए मैंने कुछ सेकंड बाद खुद को अलग कर लिया।
लेकिन आग तो लग चुकी थी!
उसने फिर बुलाया और हमने इस बार कुछ ज्यादा सेकंड्स तक किस किया।
मैं फिर से अलग हो गया।
अब वो गुस्सा हो रही थी तो मैंने समझाया इशारे से कि कोई देख लेगा।
वो चुपचाप बैठ गई।
मैं भी बैठा रहा लेकिन अंदर से चोदने की इच्छा बढ़ती जा रही थी।
मैंने सूखी नजरों से उसकी तरफ देखा, उसने भी मुझे देखा।
फिर मैंने इशारा किया आंखों से, “अब क्या?”
उसने भी सेम इशारा कर दिया।
हम दोनों चुप थे लेकिन कुछ देर बाद उसने अपने पैरों से मेरे पैरों पर ठोकर मारी।
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने स्माइल करते हुए टॉयलेट की तरफ चलने का इशारा किया।
मैंने इशारा किया, “पहले तुम जाओ!”
वो उठी और धीरे से चली गई।
मैं बैठा रहा और देखता रहा कि किसी सीट पर कोई हरकत तो नहीं!
तीन-चार मिनट इंतजार करने के बाद मैं निश्चिंत हो गया कि उसकी मां और भाभी नहीं जाग रही हैं, तो मैं भी धीरे से उठा और टॉयलेट की तरफ चला गया।
वहां गया तो देखा कि एक तरफ का गेट हल्का खुला था।
बस मैंने धीरे से उसे हिलाया और बोला, “सायमा खोलो!”
उसने गेट खोला और मैं चारों तरफ देखते हुए अंदर चला गया।
अंदर जाते ही जैसे हमारे मन की मुराद पूरी हो गई थी।
मैंने उसको देखा और गले लगा लिया।
मेरी हाइट 5″11 है, वो शायद 5″7 रही होगी क्योंकि उसको गले लगाने में मुझे ज्यादा झुकना नहीं पड़ा।
गले लगाकर इतना सुकून मिला कि बता नहीं सकता!
5 मिनट गले लगने के बाद मैंने उसको खुद से अलग किया और धीरे से बोला, “तुमको डर नहीं लगा?”
वो बोली, “मैं बस दिखती मासूम हूं, लेकिन अंदर से हूं बहुत हरामी!”
मैं मुस्कुरा दिया और बोला, “इसलिए यहां चली आई है न…!”
वो भी मुस्कुरा दी और हम दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे।
इधर ट्रेन पूरी रफ्तार से भाग रही थी, उधर हमारे जिस्म की गर्मी एक-दूसरे को जलाने को पागल थी।
उसने मेरा नाम पूछा, मैंने अभिमन्यु बताया।
मैंने उसका नाम पूछा, उसने सायमा शेख बताया।
मैं उसको पागलों की तरह चूम रहा था, वो भी चूम रही थी लेकिन वो मेरे सामने कहां टिकती!
मेरा पचासों औरतों को चोदने और प्यार करने का अनुभव उस पर भारी था।
एक तरफ मैं उसके होंठों को चूसे जा रहा था, दूसरी तरफ मेरे हाथ उसकी पीठ से होते हुए उसकी कमर और फिर उसकी गांड पर पहुंच गए।
इधर उसके होंठ चूस रहा था, उधर उसकी गांड मसल रहा था।
धीरे-धीरे वो गरम होने लगी और अपनी गांड हिला-हिलाकर मेरे लंड की तरफ धक्के मारने लगी।
मेरा लंड भी इंतजार कर रहा था कि कब मेरे शॉर्ट्स से बाहर निकलकर सायमा की बुर की फांकों को चीरते हुए उसके अंदर घुस जाए।
किस करते-करते मैंने सायमा को ट्रेन की दीवार से सटा दिया.
लेकिन अब गांड मसलने में दिक्कत हो रही थी इसलिए मैंने उसको गोद में उठाया और जो बेसिन बना होता है उसके शेल्फ पर बैठा दिया।
भारतीय रेल को धन्यवाद रहेगा, उन्होंने इस समय इतना अच्छा शेल्फ बनाया है कि उधर किसी को भी बैठाकर अच्छे से चोदा जा सकता है और बुर को चाटा और रगड़ा जा सकता है।
सायमा शेल्फ पर बैठकर पीठ के बल दीवार से सट गई।
अब उसने अपने दोनों पैर ऊपर करके शेल्फ के किनारे पर रख लिए जिससे उसकी बुर एकदम सामने आ गई और मेरे लिए उसके होंठों, गालों और गले पर चूमते हुए उसकी बुर की फांकों को सहलाना एकदम आसान हो गया।
मैं उसको चूमते हुए उसकी बुर को अपनी बीच वाली उंगली से रगड़ता रहा।
वो देसी गर्ल Xx इतने जोरदार तरीके से रगड़े जाने को संभाल नहीं पा रही थी, वो हिले जा रही थी।
इतने में उसने खींच कर मुझे अपने आप से चिपका लिया और मेरे सीने में अपना मुंह लगाकर चूमने-चाटने लगी।
वह इतनी ज्यादा उत्तेजित थी कि उसने मेरे सीने पर अपने दांत गड़ा दिए!
मैंने कहा, “आराम से करो, मैं यहीं पर हूं, कहीं जा नहीं रहा हूं!”
ये सुनकर वो धीरे-धीरे स्माइल करने लगी।
तो कैसी लग रही है मेरी देसी गर्ल Xx कहानी?
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मुझे आप सबके ईमेल का इंतजार रहेगा।
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