Virgin Gang Bang Kahani – गांव की शादी में चार मर्दों से चुद गई

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Story Start Here :

वर्जिन गैंग बैंग कहानी काल्पनिक है. मैं मस्त माल हूँ, मुझे चुदाई का मजा लेना था पर मुझे लंड नहीं मिला था. एक बार अपनी सहेली के साथ उसके मामा के घर शादी में गयी. वहां क्या हुआ?

यह कहानी सुनें.

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हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम आरती है.

ये बात उस समय की है जब मैं 11वीं में पढ़ती थी.
मैं दिल्ली में स्कूलिंग के साथ-साथ IIT की तैयारी भी कर रही थी.

मेरी एक रूममेट थी फातिमा.

हम दोनों की बहुत अच्छी दोस्ती थी. हम दोनों ही आपस में बहुत खुली हुई थीं और हम दोनों का ही सेक्स की बातों में बड़ा मन लगता था.

फातिमा मुझे मोबाइल पर पॉर्न क्लिप्स दिखाती और हम दोनों अपनी अपनी चुत में उंगली करके खुद को झाड़ लेती थीं.

हालांकि हम दोनों ने कभी भी किसी मर्द से चुदने के बारे में नहीं सोचा था लेकिन तब भी हॉट क्लिप्स में बड़े और मोटे मोटे लंड देख कर हम दोनों ही ऐसे लौड़ों से चुदने की कल्पना करती थीं.

फातिमा ने उसके समाज के मर्दों के कटे हुए लंड के बारे में भी बताया था कि उसने बड़े और मोटे आगे से खुले सुपारे वाले लंड देखे हैं.
मैंने अब तक किसी का भी लंड नहीं देखा था तो मेरे मन में सामने से किसी मर्द के लंड को देखने की बड़ी तमन्ना थी.

मेरी वर्जिन गैंग बैंग कहानी तब शुरू हुई जब फातिमा के मामा की शादी थी.
उसने मुझे बहुत ज़ोर दिया कि मैं भी चलूँ शादी में.

उसने मेरे परिवार से भी मुझे शादी में ले जाने की परमीशन ले ली थी.

घर की सहमति मिलते ही मैं भी मान गई.
हम दोनों शादी से 4 दिन पहले फातिमा के गांव पहुंच गई थीं.

मुझे उसका गांव बहुत अच्छा लगा. उसके घर के पास ही नदी बहती थी.
चारों तरफ खेत थे, बहुत हरियाली थी.
मैं और फातिमा दोनों खूब घूमती थीं.

मैंने कई बार नोटिस किया कि मुझे कुछ लोग अजीब तरह से घूरते हैं.
जवान लड़कों तक तो ठीक था लेकिन उम्रदराज़ मर्द भी खा जाने वाली नज़रों से मुझे देखते थे.

उस समय मुझे बड़ा अच्छा लगता था कि सब लोग मुझे ऐसे देखते हैं, क्योंकि मर्दों के लंड की बात मेरे ध्यान में आ जाती थी.
फिर जब मेरी नाज़ुक चूत और गांड में लंड घुसे, तब मुझे पता चला कि मर्द का लंड क्या होता है!

मैं सुंदर थी और मेरे कपड़े भी ज़्यादा मॉडर्न थे.
जबकि फातिमा तो अक्सर बुर्के में ही रहती थी.
इसी वजह से शायद गांव के मर्द मुझे चोदने की नजर से देखते थे और मुझे उनकी पिपासु नजरों से ही गर्मी चढ़ जाती थी.

मैं अपने बारे में बता दूँ.
मैं स्लिम बदन की लड़की हूँ. मेरा साइज़ उस वक्त 32-28-30 था.
मेरे बाल कमर तक लंबे हैं और मैं बहुत गोरी हूँ.

ये शादी की रात की बात है.
मैं उस दिन लाल रंग का लहंगा पहनी हुई थी, ऊपर बैकलेस ब्लाउज़ था.

वहां सबसे ज़्यादा सुंदर और हॉट मैं ही लग रही थी.

फातिमा उस दिन बहुत बिज़ी थी तो मैं अकेली ही इधर-उधर घूम रही थी.

सबकी नज़र मुझ पर ही जमी थी.
मुझे अच्छा भी लग रहा था.

रात के करीब 12 बजे मैं एक रूम में आराम कर रही थी.
तभी एक छोटा सा लड़का आया.
उसने कहा कि फातिमा मुझे बाहर खेत की तरफ बुला रही है.

मैंने सोचा इतनी रात को खेत में क्यों बुला रही है.
लेकिन मुझे लगा शायद कोई सरप्राइज़ होगा.

मैं उठकर अकेले ही उधर जाने लगी.
इतने दिनों से घूम रही थी तो मुझे रास्ता पता था.

मैं फातिमा के घर से थोड़ी दूर चली आई लेकिन मुझे कोई नहीं दिखा.

मुझे लगा ब.च्चे ने मेरे साथ मज़ाक किया.

मैं लौटने लगी लेकिन तभी 3-4 मर्द मेरे सामने आ खड़े हुए थे.

मैं थोड़ा सकपका गई लेकिन मैं सबको इग्नोर करके आगे जाने लगी.

इतने में एक लड़के ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया.
मैं झटके से जाकर उसके सीने से टकरा गई.

‘वाह … क्या माल है यार जबरदस्त दूध हैं इस लौंडिया के!’
उस लड़के की आवाज मेरे कानों में गूंजी.

मुझे भी अपने दूध एक सख्त मर्दाना छाती से पिसते से महसूस हुए तो अनायास ही मेरी टांगों के बीच मेरी चुत में सनसनी सी होने लगी.

तभी एक आवाज आई- हां एकदम कमसिन जवानी है यार … इसकी चूत तो शहद जैसी मीठी होगी!
‘मैं तो इसकी चूत में अपना पूरा लंड घुसा दूँगा!’

उसकी इस बात से मेरी चुत रो पड़ी और डर लगने के बावजूद मेरी अन्दर की वासना ने सर उठाना शुरू कर दिया था.

वे सब लोग मुझे चोदने को लेकर कुछ न कुछ बोल रहे थे.

उनकी इन आवाजों से मुझे सिहरन भी हो रही थी और एक अजीब सा सुख भी मिल रहा था.

मैंने नाटक करते हुए कहा- प्लीज़ मुझे जाने दो, फातिमा मेरी सहेली है, मैं उसकी शादी में आई हूँ.
एक ने हंसते हुए कहा- शादी में आई है तो सुहागरात भी तो मना ले, बहुत मोटा लौड़ा है मेरा!

यह कहते हुए उसने मेरी चूचियां ज़ोर से मसल दीं.
मैं दर्द से कराह उठी.

मेरे करहाने पर एक लड़के ने मेरा मुँह अपने हाथों से जाम कर दिया.
दो लोगों ने मुझे पैरों से उठा लिया और मुझे लेकर नदी किनारे एक खेत में ले आए.

वहां एक झोपड़ी जैसी बनी हुई थी.
ये जगह फातिमा के घर से करीब 300-400 मीटर दूर थी.

मैं मीठे डर से सिहर रही थी.
अजीब सी स्थिति थी.

मुझे अंदाज़ा हो गया था कि मेरे साथ क्या होने वाला है.
मैं कांपने लगी.

मैंने झूठा डर दिखाते हुए कहा- प्लीज़ मुझे छोड़ दो … मैं अभी कुंवारी हूँ … मुझको जाने दो!
जबकि मुझे इस खेल में मजा आ रहा था.

एक ने कहा- कुंवारी हो तभी तो मज़ा आएगा, चुदी चुदाई तो बहुत सी औरतों को चोद चुके हैं. आज तुम्हारी सील पैक चुत को चोदेंगे और तुम्हारी कसी हुई बुर को फाड़ कर बड़ी कर देंगे.

मैं कुछ बोलती कि पीछे से एक ने मुझे पकड़ लिया और वह मुझे खींच कर झोपड़ी के अन्दर ले आया.
अन्दर एक रस्सी मूँज सी बुनी खटिया बिछी थी.

नीचे फर्श पर चटाई बिछी थी, उस पर एक बड़ा सा गद्दा पड़ा था.
एक-दो कुर्सियां भी रखी थीं.

मैंने अभी ठीक से सबको देखा.
एक लड़का था जो शायद 24 साल का होगा. बाकी तीन 35-40 साल के लंबे-चौड़े मर्द थे.

मेरा गला सूखने लगा.
एक अजीब कसमसाहट महसूस हो रही थी.
चार चार मर्दों को देख कर मेरे पैर कांप रहे थे.

एक बोला- कसम से … जब से देखा है, तब से तुमको चोदने का प्लान बना रहा था, सपनों में तो कितनी बार तुझे नंगी किया है. आज हकीकत में तू नंगी होगी.

दूसरा हंसते हुए बोला- कपड़े तो साली हीरोइन वाली पहने हैं, अन्दर सामान भी हीरोइन जैसा ही होगा … हा हा हा.

लड़के ने मुझे खींचकर अपनी बांहों में दबोच लिया और मेरी गर्दन पर किस करने लगा.
पीछे से किसी ने मेरी नंगी पीठ पर जीभ लगाकर चाटना शुरू कर दिया.

मैं आगे और पीछे दोनों तरफ से उनके लंड को महसूस कर रही थी.
मेरे अन्दर एक अजीब डर फैल रहा था. क्या ये चारों मेरी चूत में अपना लंड घुसाएंगे?

ओह येस्स!
मजा आयेगा.

लेकिन मैंने ज़ोर से सामने वाले को धक्का दे दिया और भागने की कोशिश करने लगी.
इतने में दो लोगों ने मुझे पकड़ कर मेरे गालों पर थप्पड़ मारा.

एक ने मेरी पीठ पर ब्लाउज़ की डोरी खींचकर तोड़ दी. मैंने दोनों हाथों से अपने ब्लाउज़ को पकड़ लिया.

एक ने मेरे दोनों हाथों को पकड़ कर अलग कर दिया और ज़बरदस्ती मेरा ब्लाउज़ उतार दिया.
मेरी ब्रा भी फाड़कर फेंक दी.

मैं ऊपर से पूरी नंगी हो गई.
मैंने अपने हाथों से अपने सीने को ढक लिया और घुटनों के बल बैठ गई.

एक ने कहा- ओह भाई … क्या मस्त बदन है साली कुंवारी रंडी का … कितनी गोरी लौंडिया है भाई!

‘उफ्फ़ … इसकी चूचियां देख कर तो मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया है … जल्दी इसको पूरी नंगी करो … अब रहा नहीं जा रहा भाई!’

मैं सिर झुकाकर घुटनों के बल बैठी थी और सिहर जा रही थी लेकिन किसी को कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था.
सबने अपने कपड़े उतार लिए थे.

सब नंगे होकर मेरी चारों तरफ खड़े थे लेकिन मैं अभी तक सिर नीचे करके बैठी थी.
तभी एक ने पीछे से मेरे बालों को पकड़ कर मुझे ऊपर खींचा.
मैंने दर्द से अपने सिर को ऊपर की तरफ किया.

तभी मुझे एक का लंड दिखा जो मेरे चेहरे के सामने पूरा खड़ा था.
मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं.

वह अपना लंड मेरे होंठों पर लगाकर अन्दर करने लगा.
उसका लंड बहुत बदबू दे रहा था.

मैंने अपने होंठ बंद कर रखे थे.

तभी पीछे से एक ने ज़ोर से मेरे बाल खींचे.
मैं दर्द से ज़ोर से चिल्लाई.
इतने में सामने वाले ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसा दिया.

वह ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड मेरे मुँह में अन्दर-बाहर कर रहा था.
मेरे मुँह से गु-गु की आवाज़ आ रही थी.

एक आदमी पीछे से मेरी दोनों चूचियों को मसल रहा था.
बड़ी बेरहमी से मेरे दोनों दूध को मसल रहा था, निप्पलों को खींच रहा था.
कुछ 5 मिनट तक उसने मेरे मुँह को चोदा और मेरे मुँह में ही झड़ गया.

मुझे बहुत खराब लगा.
लगा जैसे कि मैं उल्टी कर दूँगी.

ऐसे ही बारी-बारी से सबने अपने लंड मेरे मुँह में घुसाए और पानी मेरे मुँह में ही गिरा दिया.
मेरा पूरा चेहरा उनके वीर्य से भर गया था.

मुँह चोदने के बाद मुझे नीचे गद्दे पर गिरा दिया.
एक ने मेरे लहंगे को खींचकर उतार दिया, मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को रगड़ने लगा.

फिर मेरी कमर के दोनों तरफ हाथ लगाकर मेरी पैंटी को निकाल दिया.

मैं कसमसा उठी- आह प्लीज़.
मैं पूरी नंगी चारों के बीच पड़ी थी.

‘क्या मस्त माल है यार … एकदम कमसिन करारी लौंडिया!’
‘बुर पर बाल ही नहीं हैं साली के.. उफ्फ़.’
‘रंडी आज तो तुझे मज़ा आ जाएगा … हम सारे मिल कर आज अपने कटे हुए लंड से चुदाई का खूब मज़ा देंगे!’

मैं समझ गई कि अब कुछ नहीं हो सकता, आज मेरी सील टूट जाएगी.
मैं चुपचाप लेट गई और खुद को उनके हवाले कर दिया.

मैंने एक नज़र सबको देखा.
ओह गॉड .. कितने हट्टे-कट्टे मर्द थे.
सबके लंड बहुत मोटे और लंबे थे.

सबके लंड मेरी चूत में घुसेंगे, ये सोचकर मेरी चूत फड़फड़ाने लगी.

तभी एक ने अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया और ज़ोर-ज़ोर से चाटने लगा.
अपनी जीभ को मेरी चूत में घुसा रहा था … चूस रहा था.

मैं पागल हो रही थी.
एक अजीब नशा चढ़ रहा था.
मैं मदभरी सिसकारियां ले रही थी- आह्ह.. ओह.. क्या कर रहे हो.. ओह्ह इसस्स्स … बस्स्स छोड़ दो … आह्ह्ह .. नहीं …

कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.

सब हंसने लगे.
‘साली का पानी निकल गया, अब रेडी हो गई रंडी चुदने के लिए … हा हा!’

मैं शर्मा गई.
उफ्फ़ … ये क्या हो रहा है … चूत चटाई में तो बहुत मज़ा आ रहा है.

फिर सबने बारी-बारी मेरी चूत को चाटा.

एक बोला- बोल रंडी, मज़ा आया ना … तुझे और मज़ा आएगा जब हमारा लंड तुम्हारी कसी हुई चूत में घुसेगा. इसीलिए हमारा साथ दो .. नहीं तो नंगी तुझे बाहर छोड़ देंगे.. बदनामी तुम्हारी ही होगी!
ये बोलते हुए उसने मेरे दोनों पैरों को अलग कर दिया और अपने लंड को मेरी चूत के छेद पर रगड़ने लगा.

मेरी चूत की फांकों को अलग करके अपने लंड को अन्दर घुसेड़ने लगा.

‘तू पहले कभी चुदाई कराई है?’
मैंने नहीं में सिर हिलाया.

‘यानि माल सच में अनछुआ है … चल आज तेरी सील टूटेगी!’

यह बोलते हुए उसने अपने लंड को अन्दर धक्का दे दिया.
मेरी चूत में उसका लंड एक इंच घुस गया.
मैं दर्द से छटपटाने लगी.

‘आअह्ह.. नहीं.. बस्स्स…’
‘अभी कहां .. अभी तो पूरा लौड़ा बाहर ही है!’

उसने मेरी चूत में एक ज़ोर का झटका दिया, मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी चूत में कोई लोहा घुस गया हो.
मेरी चूत उसके लंड पर जैसे फंस कर चिपक गई थी.

दो लोग मेरी एक-एक चूची को दबा रहे थे और चूस रहे थे.
एक बैठा देख रहा था और अपने लंड को हिला रहा था.

उसने फिर से एक ज़ोरदार झटका दिया, उसका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया.
मैं ज़ोर से चिल्लाई- आअह्ह.. ना नहीं.. मर गई!

कुछ देर रुककर वह ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा.
हर झटके से मेरा सिर पीछे की तरफ जा रहा था.

कुछ मिनट लगातार चोदने के बाद मेरी चूत से पानी बहने लगा.
इससे मुझे राहत मिली.

अब फच-फच की आवाज़ आ रही थी.
ऐसी आवाज़ मेरी चूत से आ रही थी, मैं शर्म से गर्म हो रही थी.

वह ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूत में लंड पेल रहा था.

कुछ देर में उसने अपना वीर्य मेरी चूत में ही बहा दिया.

वह झड़ गया और हांफने लगा- यार .. आह बहुत चोखा माल है भाई.. बहुत कसी हुई चूत है … अन्दर तो जैसे आग है साली की बुर में!

मेरी चूत लाल हो गई थी … खून निकल रहा था. लेकिन किसी को परवाह नहीं थी.
सब हवस में लंड हिलाने में लगे पड़े थे.

अब एक ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और अपना लंड मेरी गांड में घुसेड़ने की कोशिश करने लगा.
दूसरे ने मुझे आगे से पकड़ लिया और अपना लंड मेरी चूत में घुसेड़ने लगा.

उफ्फ़ दोनों तरफ से दो लंड ज़बरदस्ती मेरे छेदों में घुसने की कोशिश कर रहे थे.
पीछे वाला अपने लंड के आगे वाले भाग को मेरी गांड में घुसा रहा था.

मैंने अपनी गांड में गाजर मूली ली हुई थी तो गांड भी लंड के लिए कुलबुलाने लगी थी.
मैं मदहोश हो रही थी.
अजीब मिठास का अहसास हो रहा था.

आगे वाला मेरी चूत में अपना लंड पूरा घुसाकर चोद रहा था.
‘हाय्यी … इसस्स्स … ओह … आह्ह…!’

कुछ देर बाद पीछे वाले ने मुझे धक्का देकर मेरे आगे वाले के ऊपर लिटा दिया.
अब नीचे से मेरी चूत और पीछे से गांड चुदाई हो रही थी.

दोनों अजीब आवाज़ें कर रहे थे जैसे बहुत मेहनत का काम कर रहे हों.

मैं तो जैसे पागल हो रही थी.
मुझसे मज़ा बहुत आ रहा था.

‘साली रंडी.. उफ्फ़.. आह्हा.. क्या कसा हुआ बदन है.. मज़ा आ गया.. आह्ह..’

दोनों आगे-पीछे से 15 मिनट तक मुझे चोदते रहे.
फिर दोनों ने एक साथ ही रस झाड़ दिया.

मेरी चूत से दो बार पानी बह गया था.
मैं अजीब संतुष्टि फील कर रही थी.

‘चल.. साली अपना लहंगा पहन ले … तेरे लहंगे को उठाकर चुत चोदूंगा!’

अब मुझे भी चुदास चढ़ने लगी थी तो मैंने लहंगा पहन लिया.
उसने मुझे दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया और पीछे से मेरी गांड में लंड घुसेड़ने लगा.

‘आह्ह.. धीरे.. ओह्ह..’

लेकिन मेरी बात अनसुनी कर वह ज़ोर-ज़ोर से मेरी गांड मारने लगा.
मैं दर्द से छटपटाने लगी ‘हाय बस्स्स्स.. नहीं.. इसस्स्स.. प्लीज़ज़.. बस करो…’

‘चुप रंडी.. अभी तो तेरी गांड मारी ना इसने.. चुपचाप खड़ी रहो.. आह्ह आह्ह..’

करीब 5 मिनट तक लगातार उसने पीछे से मेरी गांड मारी.
अब उसने मुझे सीधा कर दिया.

बहुत चौड़ा सीना था उसका.
मैं उसके सीने तक ही आ रही थी.
उसने मेरे दोनों पैरों को उठाकर अपनी कमर में लगा दिया.

मैं पीछे से दीवार से सटी थी.
इसी पोजीशन में उसने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया.

मैं कामुक भाव से सिसकने लगी ‘ओह्ह.. क्या कर रहे हो.. इसस्स्स.. आह्ह.. धीरे.. ओह … बस्स्स.. प्लीज़ .. आह्ह…’

‘चुप रंडी.. साली.. आह्ह.. ऐसी कमसिन चूत मिलती कहां है.. मालिक ने आज मुझे बहुत बड़ा तोहफा दिया है… आह्ह आह्ह.. मस्त चूत है तेरी!’
मैं उसके लौड़े पर अपनी चुत रगड़ने लगी.

उसने मेरी चूत में धक्के मारते हुए पूछा- किस क्लास में पढ़ती है तू?
‘12वीं में..’
‘ओह्ह.. तभी तो इतनी कसी हुई चूत है तेरी!’

उसने 15 मिनट तक मेरी चूत को खूब चोदा.
मैं पसीने-पसीने हो गई.
उसने अपना सारा वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दिया.

मैंने हाथ जोड़कर कहा- अब मुझे जाने दो … आप सबको जो करना था, कर लिया.. प्लीज़ अब मुझे जाने दो!’

‘ठीक है चली जाना.. पर तुझे छोड़ने का मन नहीं कर रहा.. तुझे अपनी रखैल बनाने का मन कर रहा है!’

‘हां भाई.. हमारी वाली की चूत में अब वह मज़ा नहीं रह गया.. इसको यहीं रखते हैं.. खूब चोदेंगे साली को!’

मैंने कहा- प्लीज़ ऐसा मत करो. आप लोग चाहो तो फिर से मुझे चोद लो.. लेकिन मुझे जाने दो!

सब हंसने लगे- चल जा.. अपने कपड़े पहन ले!

मैंने अपने कपड़े पहन लिए, चेहरे को पानी से साफ किया.

चारों मुझे झोपड़ी से बाहर ले आए.
अभी भी कोई मेरी चूचियां मसल रहा था, कोई मेरी चूत को दबोच रहा था.

मैं बस जल्दी घर जाना चाहती थी.

कुछ देर में हम घर के पास पहुंच गए.
इतने में एक ने कहा- सुन.. एक बार हमारे लंड को चूस दे!

मैं चुपचाप वहीं बैठ गई और बारी-बारी सबके लंड चूसे.
आधा घंटा लगा सबके लंड से पानी गिरने में.

सब वहीं खड़े रहे.
मैं जल्दी-जल्दी घर जाने लगी.

अगले मिनट में मैं घर में थी.

मैं जाकर अपने रूम में लेट गई और सोचने लगी कि ये क्या हो गया मेरे साथ!
मैं एक दर्द निवारक दवा खा कर सो गई.

अगले दिन मैं दिल्ली निकल गई.
कुछ दिनों के बाद मुझे अहसास होने लगा कि मेरी चूत और गांड को अब लंड की ज़रूरत है.

मैं अब शहर के किसी नुक्कड़ पर लंड की तलाश में खड़ी होने लगी थी.
बस मोटा लंड होना चाहिए, वह मुझे कम से कम आधा घंटा तक रगड़ कर चोद सके, ऐसी ख्वाहिश रहने लगी थी.

कोई कोई मस्त चोदता था और पैसे भी दे देता था.
वे पैसे मैं गरीबों में बांट देती हूँ. मुझे तो बस मोटे मोटे लंड चाहिए होते हैं.

आपको क्या कहना है, मेरी इस वर्जिन गैंग बैंग कहानी पर … प्लीज जरूर लिखें.
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