Milky Boobs Suck Story – प्यासी भाभी ने रिश्ते में देवर को चूची चुसाई

Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Milky Boobs Suck Story – प्यासी भाभी ने रिश्ते में देवर को चूची चुसाई to make every night hot about Milky Boobs Suck Story – प्यासी भाभी ने रिश्ते में देवर को चूची चुसाई story.

Story Start Here :

मिल्की बूब्स सक स्टोरी में एक भाभी को बेबी होने के बाद से उसका पति ढंग से नहीं चोद रहा था तो उसने रिश्ते में लगते एक देवर का लंड अपनी चूत में लेने के लिए एक खेल किया.

यह कहानी सुनें.

milky-boobs-suck-story

दोस्तो, मैं निशा अग्रवाल आपको अपनी सहेली शिल्पा की सीलपैक चुत की चुदाई की कहानी सुना रही थी.
अब आप शिल्पा की कलम से आगे की दास्तान सुनें.

कहानी के पहले भाग
सहेली के भाई का लंड चूसा
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि हम तीनों यानि मैं विवेक और प्रिया एक दूसरे के लंड चुत चूस कर मजा दे चुके थे और रात काफी हो गई थी, तो नंगे ही सो गए थे.

अब आगे मिल्की बूब्स सक स्टोरी:

सुबह 7 बजे सब जाग गए और घर के कामों में व्यस्त हो गए.

रात का सीन मेरी आंखों से नहीं जा रहा था.
मैं और प्रिया आपस में देखकर मुस्कुरा रही थीं.

मैंने विवेक को खोजा पर उसका कोई पता नहीं था.
रिचा से पूछने पर पता चला कि विवेक किसी रिश्तेदार को लेने के लिए सुबह निकल गया था.

हम सबने नाश्ता किया.
फिर प्रिया ने करीब 10 बजे मुझसे उसके साथ नहाने के बारे में पूछा.
मैं झट से उसके साथ विवेक के कमरे में पहुंच गई और दोनों साथ में ही बाथरूम में लॉक हो गईं.

उसने मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे नंगी कर दिया.
फिर मैंने भी उसके सारे कपड़े उतार दिए.

हम दोनों एक-दूसरे के बदन से खेलने लगी.
उसने मुझसे घुटनों के बल होने को कहा.

मुझे लगा उसे अपनी चूत चटवानी है.
जैसे ही मैं घुटनों के बल आई, उसने मेरे मुँह पर मूत की धार लगा दी.
उसके मूत का गर्म-गर्म खारा पानी मेरे माथे से बहता हुआ सारे शरीर को गीला करने लगा.

मैं जीभ से जितना भी पेशाब समेटकर पी सकती थी, मैंने पी लिया.
फिर वह मेरे मुँह से लेकर छाती तक जहां भी उसकी पेशाब लगी थी, उसे जीभ से चाट-चाटकर साफ करने लगी.

फिर मैंने उसे कहा- मुझे भी पेशाब आई है!
तो वह लेट गई और मुझसे उसके मुँह में पेशाब करने को कहा.

मैंने अपनी चूत सैट करके मूतना शुरू कर दिया.
पूरे बाथरूम में ‘सी-सी’ की आवाज़ के साथ उसके पेशाब गटकने की आवाज़ गूंजती रही.

मेरी पेशाब खत्म हुई तो प्रिया ने मुँह में पेशाब भर रखा था.
मैंने उसके मुँह से अपने होंठ लगाकर पेशाब पीना शुरू कर दिया.

हम दोनों कम से कम 20 मिनट तक किस करती रहीं.
फिर एक-दूसरे की चूत चाटना शुरू किया. आह … क्या मज़ा था … सिसकारियां और चूसने की आवाज़ें बाथरूम में गूंज रही थीं.

कुछ मिनट बाद मैं और प्रिया एक साथ पानी छोड़ती हुई एक-दूसरे का पानी पी गईं.

काम-क्रीड़ा करते हुए हमने एक-दूसरे को मल-मलकर नहलाया.
मैंने उसके पूरे बदन पर साबुन लगाया और उसने मेरे बदन पर.

ऐसा अहसास मिल रहा था मानो मैं कोई राजकुमारी हूँ, जिसे नहलाया जा रहा हो.
बीच-बीच में वह मेरे बूब्स दबा रही थी.

साबुन की चिकनाई से उसके हाथ मेरे बूब्स से फिसलते हुए कामुक अहसास दिला रहे थे.
हम दोनों 15 मिनट बाद नहाकर निकलीं और तैयार हो गईं.

करीब 2 बजे विवेक उसकी मौसी की बहू, जिनका नाम वर्षा है … उसे लेकर आ गया.

वर्षा किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी.
नीली साड़ी जो उसने नाभि से नीचे बांध रखी थी, उसके गोरे पेट को खुला छोड़ रही थी.

स्लीवलेस ब्लाउज़ जो गले से काफी नीचे था, उसमें उसका क्लीवेज साफ दिखता था.
उम्र करीब 30 साल होगी और फिगर 32-30-34 का होगा.
उनके साथ उनका 8 महीने का बच्चा भी था.

वर्षा का सामान विवेक सीधे खुद के कमरे में ले गया.
फिर वह मुझसे और प्रिया से मिलने आया.

हम दोनों बोलने लगी- अगर ये तुम्हारे कमरे में रुकेगी, तो हम मज़े कैसे करेंगे?
विवेक ने कहा- ये तो मैंने सोचा ही नहीं!

वह कोई तरकीब सोचने लगा.

फिर हम लोग अपने-अपने काम में व्यस्त हो गए.

शाम को 5 बजे मैं वर्षा भाभी के बच्चे के साथ खेल रही थी.
उसने मुझसे मेरा परिचय लिया.

उसका बच्चा रोने लगा तो मैंने बोला- शायद बच्चे को भूख लगी है!
तो वह ब्लाउज़ ऊपर करके उसे अपना दूध पिलाने लगी.
ब्लाउज़ टाइट था, उसमें से बूब्स को निकालने में परेशानी हो रही थी.

हम दोनों ही रूम में थे तो वह पल्लू गिराकर ब्लाउज़ के हुक खोलकर पूरा दूध बाहर निकाल कर पिलाने लगी.
उसके बूब्स ज़्यादा बड़े नहीं थे, पर ज़्यादा छोटे भी नहीं थे.
एकदम सफेद बूब्स और बड़े बड़े निप्पल … किसी भी लड़के को दीवाना बना दे.

थोड़ा दबाने के बाद दूध की सफेद बूँदें उसके निप्पल से निकलने लगीं और उसने निप्पल बच्चे के मुँह में डाल दिया.
मैं ये सब गौर से देख रही थी.

मुझे इस तरह देखकर वह बोली- इस तरह क्या देख रही हो शिल्पा? तुम्हारे तो मुझसे बड़े हैं!
मैंने कहा- हैं तो बड़े … पर कब तक खुद से खेलूँगी!

वर्षा भाभी- इसको दूध पिलाकर सुला दूँ … फिर मैं खिला दूँगी!
वह शरारती स्माइल देती हुई बोली.

शिल्पा- आपके बूब्स से तो भैया खेल लेते हैं … कोई मर्द खेले तो मज़ा आता है भाभी!
मैंने हंसते-हंसते कहा.

वर्षा भाभी- अरे … भैया इतना खेलते होते तो तुम्हारे जितने तो हो ही जाते.
मैं- क्यों? भैया नहीं खेलते क्या?

वर्षा भाभी- अरे वह तो आए, किस किए, डाले, निकाले और सो गए … और वैसे भी जब से प्रेग्नेंट हुई हूँ, तब से मुझे छुआ तक नहीं है!
मैं- फिर कैसे मैनेज करती हो आप?

वर्षा भाभी- मन मसोसकर मूली-गाजर के साथ रह जाती हूँ … अब पता नहीं कब मेरी चूत में किसी की बरसात होगी!

तभी विवेक कुछ काम से सीधा अन्दर आ गया.
उसकी नज़र भाभी के बाहर निकले हुए बूब पर पड़ी और वह उसे एकटक देखता रह गया.
आखिर खुला सफेद बूब के दर्शन कौन सा लड़का न करे.

भाभी ने उसकी ओर देखा, फिर उसने भाभी को देखा.

भाभी ने पल्लू से ढक लिया, मुँह मोड़कर आंखें मूँद लीं और विवेक ‘सॉरी’ बोलते हुए बाहर निकल गया.

भाभी बोली- मैं भी कैसी पागल हूँ … दरवाजा लगाया ही नहीं मैंने!
मैंने बोला- अब कुछ नहीं भाभी … देख लिया तो देख लिया!

मैंने भाभी की चुटकी लेते हुए कहा- भाभी, आपके एक बूब ने तो उसका तंबू बना दिया … दोनों बाहर होते तो टूट पड़ता आप पर!
भाभी ने शर्माते हुए कहा- हट … कुछ भी बोलती है!

मैंने भाभी की जांघ पर थपकी देते हुए कहा- हो सकता है भैया का काम विवेक ही कर दे!
भाभी कुछ सोच में पड़ गई और कुछ बोली नहीं.

फिर दूध पिलाकर बच्चे को सुला दिया और मैं बाहर आ गई.

शाम को मैंने ये बात प्रिया से शेयर की और उसने विवेक को बुलाकर सारी बातें बता दीं.
विवेक बोला- यार, पहले मैंने भाभी के बारे में ऐसे कुछ नहीं सोचा था … पर उसका बूब मेरी आंखों से हट नहीं रहा है!

रात में खाना खाने के बाद सारी फैमिली ने दम शराड्स का प्लान बनाया.
दम शराड्स (Dumb Charades) एक बहुत ही मजेदार गेम है!
इसमें एक खिलाड़ी बिना बोले, सिर्फ इशारों (gestures) के जरिए अपनी टीम को किसी फिल्म, किताब या शब्द का नाम समझाने की कोशिश करता है।

हमने 2 टीम बना ली.

एक में मैं, प्रिया और कुछ फैमिली मेंबर्स थे, दूसरी में भाभी, विवेक और कुछ फैमिली मेंबर्स.
गेम के बीच में एक गेम विवेक की टीम जीती, जिसमें भाभी ने जिताया था.

तो भाभी ने खुशी में विवेक को गले लगा लिया.
विवेक ने भी मौका पाकर कसके भाभी को चपेट में ले लिया.
भाभी के बूब्स विवेक की छाती में समा गए थे.
भाभी भी आंखें बंद करके विवेक को कसके पकड़ी हुई थी.

करीब एक मिनट बाद दोनों एक-दूसरे से अलग हुए और स्माइल पास करते हुए बैठ गए.

फिर कुछ गेम हम जीते, कुछ वे लोग.

रात में 11 बजे हम गेम बंद करके मैं, भाभी और प्रिया विवेक के रूम में बैठे थे.

तभी विवेक आया और भाभी को ‘सॉरी’ बोला.
भाभी को समझ नहीं आया.

तब विवेक ने बोला- एक्साइटमेंट में उसने भाभी को गले लगा लिया था!
भाभी बोली- मुझे बुरा नहीं लगा!

तो विवेक आंख मारते हुए बोला- फिर से लगा लूँ गले?
भाभी बोली- लगा लो!

वह खड़ी हो गई.

विवेक ने उसे गले लगाया और अपनी गर्म सांसें भाभी की गर्दन पर छोड़ने लगा.
भाभी के रोंगटे खड़े हो रहे थे, उसकी पीठ और हाथ पर हल्के दाने खड़े हो गए.

वह आंखें बंद करके गले लगाए हुई थी.
फिर विवेक ने उसे ‘थैंक्स सेक्सी भाभी’ बोला और बाहर चला गया.

मैंने भाभी से इशारे में पूछा तो वह भी इशारे में अपना डिसीजन समझाने लगी कि वह विवेक का लंड लेना चाहती है.
उसे अभी हमारी थ्रीसम लीला के बारे में भनक तक नहीं थी.

मैंने उसे एक आइडिया दिया और बाहर आ गई.

मुझे आए 2 दिन हो गए थे, तो मैं और प्रिया आज रिचा के कमरे में सोने वाले थे.
उसके बाद के भाभी और विवेक के बीच हुए वाकये को मैं भाभी के शब्दों में बयां करती हूँ.

हैलो मैं वर्षा, रात को मैं अपने बच्चे के साथ विवेक के कमरे में बैठी सोच रही थी कि विवेक को कैसे रिझाऊं.
फिर एक तरकीब सूझी.
मैंने झट से दोनों हाथों में मेहंदी लगवा ली और सुखाने बैठ गई.
मैं विवेक के आने का इंतज़ार करने लगी.

रात में विवेक 12 बजे चार्जर लेने रूम में आया तो मैंने बच्चे को हल्की-सी चिकोटी काट दी, जिससे वह रोने लगा.

विवेक ने पूछा- क्या हुआ भाभी?
मैंने कहा- शायद इसे भूख लगी है इसलिए रो रहा है. मैंने तो मेहंदी लगाकर रखी है … इसे कैसे दूध पिलाऊं? बाकी घर वाले भी सो गए हैं!

विवेक- मैं कुछ हेल्प कराऊं क्या भाभी?
मैं- ठीक है विवेक … मेरा पल्लू मेरी गोद में डालकर बच्चे को गोदी में सुला दो.

उसने गेट लगाकर बच्चे को गोद में सुला दिया.

मैं- मेरे ब्लाउज़ के हुक खोलकर ब्रा को ऊपर करके एक बूब निकाल दो.

विवेक ने हुक खोला, ब्रा को ऊपर कर रहा था तो वह टाइट थी, उससे नहीं हो पा रहा था.
मैं- एक काम करो … ब्रा और ब्लाउज़ दोनों निकाल दो और ध्यान रहे मेहंदी न लगे उन पर!

उसने ब्रा और ब्लाउज़ निकाल कर साइड में रख दिए. मेरे दोनों अमरूद उसके सामने उछल कर बाहर आ गए.
विवेक की आंखें फटी की फटी रह गईं.

मैं- अब दोनों बूब्स को एक-एक करके दबा दो … जब तक दूध निकलने न लगे. फिर निप्पल को बच्चे के मुँह में डाल देना.
विवेक- भाभी, क्या सॉफ्ट-सॉफ्ट बूब्स हैं आपके … मेरा तो मन कर रहा है सारा दिन इनको दबाए जाऊं!

मैं- आह … आह … विवेक … आराम-आराम से दबाओ न … अभी बच्चे को दूध पिला दूँ … फिर मन चाहे जितना खेल लेना!
विवेक- भाभी, एक निप्पल बच्चा चूसेगा और दूसरा मैं … आपने मेरे शरीर में करंट दौड़ा दिया है!
मैं- चूस लो मेरे राजा … मिल्की बूब्स सक करके तुम भी पी लो मेरा दूध!

विवेक बिल्कुल छोटे बच्चे की तरह मेरे बूब्स पर टूट पड़ा और बीच-बीच में काटने लगा.

मैं- उई मां … चूसो मेरे देवर राजा बना लो मुझे अपनी रखैल … रुकना नहीं … आह … आह … लगता है आज इस बच्चे की मां चुदकर रहेगी.

कुछ 15 मिनट बाद बच्चा दूध पीकर सो गया.

मैंने उसे एक कोने में तकिए के सहारे सुला दिया और फोन पर म्यूज़िक चला दिया, जिससे बच्चा जागे ना.

दोस्तो, अब वर्षा भाभी ने किस तरह से विवेक के साथ सेक्स किया और तीन लड़कियों की चुदाई एक साथ एक अकेले मर्द से किस तरह से हुई, वह आप सेक्स कहानी के अगले भाग में पढ़ेंगे.

मिल्की बूब्स सक स्टोरी पर प्लीज अपने विचार मुझे मेल करें.
nisha00agrawal@gmail

मिल्की बूब्स सक स्टोरी का अगला भाग: