First Blowjob Ki Kahani – सहेली के भाई का लंड चूसा

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Story Start Here :

फर्स्ट ब्लोजॉब की कहानी में मैं सहेली की शादी में गयी तो उसके भाई से मुलाक़ात हुई. वह मुझे अच्छा लगा. वो मुझे लाइन दे रहा था. मैंने सोचा कि इसी से बुर की सील तुड़वाऊँगी.

यह कहानी सुनें.

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दोस्तो, मेरा नाम निशा है और मैं भोपाल में रहती हूँ.

मैं अपने द्वारा रचित एक और सेक्स कहानी शेयर कर रही हूँ, जिसे मैं एक लड़की शिल्पा की दास्तान को बता रही हूँ.

ये मेरी दूसरी कहानी है. आपसे उम्मीद है कि पहली सेक्स कहानी
मामा के बेटे के साथ हनीमून वाला मजा
की तरह ही इस पर भी आप अपना प्यार बरसाएंगे.

फर्स्ट ब्लोजॉब की कहानी में पहले मैं आपको अपने यानी शिल्पा के बारे में बताती हूँ.

मेरी उम्र 23 साल है. रंग गोरा है. सीने का साइज़ 34 और चूतड़ का साइज़ 36 है. दिखने में न ज़्यादा मोटी हूँ, न पतली.
बस ऐसी सीलपैक माल हूँ कि कोई भी लड़का मुझे देखकर लार टपका दे.

मेरी फ्रेंड का नाम रिचा है और वह जबलपुर शहर में रहती है.
उसने मुझे 2 हफ्ते पहले ही अपने पास बुला लिया ताकि मैं उसे शॉपिंग और बाकी तैयारियों में हेल्प कर सकूँ.

उसकी शादी 6 मार्च को थी और मैं 21 फरवरी को वहां पहुंच गई.

मेरी फ्रेंड की फैमिली में उसके दो भाई, उसकी मम्मी व पापा हैं.
बड़े भाई का नाम विवेक है, उम्र 28 साल.
छोटे भाई का नाम विहान है, उम्र 25 साल.
दोनों भाई हैंडसम लगते हैं और पर्सनैलिटी भी बहुत अच्छी है.

मैं वहां पहुंची तो उनकी फैमिली ने मुझे बहुत प्यार से स्वागत किया.
मेरा सामान मेरी फ्रेंड के रूम में ही शिफ्ट करवा दिया.

अभी ज़्यादा लोग नहीं आए थे, बस 10-12 लोग ही थे.

हम लोग फ्रेश होकर उसके बड़े भाई विवेक के साथ शॉपिंग पर चल दिए.

मार्केट में पहुंचकर मुझे याद आया कि मैं जल्दबाज़ी में ब्रा-पैंटी लाना ही भूल गई.
मेरी फ्रेंड साड़ी सिलेक्ट कर रही थी तो मैंने सोचा कि मैं तब तक ब्रा-पैंटी लेकर आ जाऊं.
मैंने विवेक से कहा- मुझे लौंजरी शॉप पर ले चलो.

विवेक मुझे अपनी फ्रेंड रवि की शॉप पर ले गया.
मैं लिंगरी पसंद करने लगी.

विवेक ने शरारती अंदाज़ में मुझसे कहा- आपको पसंद नहीं आ रही हो तो मैं पसंद करा दूँ?
मैंने स्माइल देते हुए बात को नजरअंदाज कर दिया, पर वह मुझे लगातार लाइन दे रहा था.

मैंने उस समय इस सब पर गौर नहीं किया.
हम लोग शाम तक शॉपिंग करके वापस आ गए.

अगले दिन मॉर्निंग में मैंने विवेक को बालकनी में एक्सरसाइज़ करते हुए देखा.
उस समय वह शॉर्ट्स और बनियान में था.

मैं लोअर-टॉप में थी और अन्दर ब्रा-पैंटी नहीं पहन कर सोती हूँ.
टॉप स्किन-टाइट था और उसमें मेरे स्तनों का उभार साफ-साफ दिख रहा था.

मैं बालकनी में गई तो विवेक ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा.
फिर मुस्कुराते हुए बोला- तुम तो पहनती ही नहीं हो … तो लिया क्यों?

मैंने उससे पूछा- आपको कैसे पता, मैंने पहनी है या नहीं?
तो वह बोला- पहनी होती तो ये बड़े-बड़े भारी दूध लटक नहीं रहे होते!

उसने एकदम साफ कहा तो मैं झेंपती हुई वहां से वापस कमरे में लौट आई.
मुझे समझ नहीं आया कि इस बात का मुझे बुरा क्यों नहीं लगा!
कहीं न कहीं उसका छेड़ना मुझे अच्छा लगने लगा था.

दोपहर में विवेक ने कहा कि वह पास ही नदी में नहाने जा रहा है और मुझसे भी चलने का पूछा.
मैं मना नहीं कर पाई.

हम दोनों ही जा रहे थे, बाकी सब शादी की तैयारी में व्यस्त थे तो बाइक से चल दिए.

दोपहर के समय नदी पर ज़्यादा लोग नहीं थे.
हम लोगों ने एक जगह सामान रखा.

मैं लोअर-टॉप पर ही नहाने चली और विवेक सिर्फ चड्डी में.
नहाने के कारण मेरे व्हाइट टॉप से सारा नज़ारा दिख रहा था.

विवेक पास में ही नहा रहा था.
नदी में पानी कमर बराबर था.

जब मैं नहाकर खड़ी हुई तो विवेक देखता ही रह गया.
मेरे गोरे-गोरे बूब्स उसकी आंखों के सामने थे और वह आंखें फाड़े मुझे देखे जा रहा था.

तब तक मैं इस बात से बेखबर थी कि मेरे स्तन स्पष्ट दिख रहे हैं.
मैंने विवेक की तरफ़ देखा तो मेरा ध्यान इस बात पर गया और मैं झट से पानी में ही बैठ गई.

विवेक ने नज़रें हटा लीं और ऐसे बर्ताव किया मानो उसने कुछ देखा ही न हो.

मैंने सोचा कि अब बाहर जाकर कपड़े चेंज कर लूँ.
मैं पानी से बाहर आई और मेरे पीछे-पीछे मेरी गांड को घूरता हुआ विवेक भी पानी से बाहर आ रहा था.

उसका खड़ा लंड उसकी चड्डी में तंबू बनाए हुए था और वह इस बात से बेखबर बाहर आ गया.
शायद मेरी गांड ताकने के चक्कर में उसका ध्यान नहीं गया.

मेरा ध्यान उसकी चड्डी पर गया तो मेरी उस पर से नज़र ही नहीं हट रही थी. कम से कम 8 इंच लंबा लंड होगा.

मैंने डिसाइड कर लिया कि कुछ भी हो जाए, मैं इस लंड को अपनी चूत में घुसवा कर ही रहूँगी.

फिर हम दोनों ने कपड़े चेंज किए और वापस घर के लिए निकल गए.
वापस आते समय मैं उससे चिपक कर बैठी हुई थी, उसे अपने बूब्स का मज़ा दे रही थी.

वापस आकर हम दोनों अपने-अपने कामों में लग गए.

अब विवेक भी अनजान बनते हुए मुझे छूने की कोशिश करता … कभी गांड पर हाथ लगाता, कभी पीठ सहलाता.
मैं भी मुस्कुराकर मज़े लेती रहती.

आग दोनों तरफ़ लगी हुई थी.
बस इंतज़ार था कि पहल कौन करता है.

शाम को फ्रेंड की बुआ की लड़की आ गई.
उसका नाम प्रिया है और वह भी विवेक की ही उम्र की थी.

दोनों में दोस्तों जैसा ही व्यवहार था.
प्रिया की शादी हो चुकी थी.
वह आई, सबसे मिली.
फिर विवेक ने उसे गले लगा लिया और वे दोनों आपस में लड़ने लगे.

दोनों के इस व्यवहार को देखकर मुझे थोड़ी जलन हुई.
पता नहीं ये उसके लिए हुए आकर्षण के कारण था या वह मुझे फील करा रहा था.

प्रिया देखने में काफी सुंदर थी और उसका फिगर देखकर बूढ़े भी तरस जाएं.
कामदेवी जैसा रूप था उसका बड़े-बड़े बूब्स … शायद 34 के आसपास होंगे, पतली कमर 30 की और गांड होगी 38 की. चूतड़ इतने मोटे कि गोद में न समाएं

जब से प्रिया आई थी, तब से विवेक मेरी तरफ़ ध्यान ही नहीं दे रहा था.
दोनों आपस में बातें करते, खाना खाते और मोस्टली साथ में ही टाइम स्पेंड करते.

रात में दोनों आपस में मोबाइल में कुछ देखते हुए बात कर रहे थे तो मैं उनके पास जाकर बैठ गई और सुनने लगी.

वे दोनों आपस में इतने खोए थे कि मुझे वहां होने का भी उन्हें पता नहीं था.
उनके बीच हुई बातें इस प्रकार थीं:

विवेक- यार, इस बार तू बहुत दिनों बाद आई है … लगता है मेरी याद नहीं आती तुझे!
प्रिया- अरे, काम में इतना उलझी रहती हूँ … पर टेंशन न ले, इस बार 20 दिन यहीं रुकूँगी तो सारी कसर पूरी कर लेना.

विवेक- तू 2 दिन और नहीं आती ना तो शिल्पा को ही तेरी जगह दे देता!
प्रिया- कौन शिल्पा? वह रिचा की फ्रेंड? बहन जी टाइप, वह पट भी जाएगी तो मेरे जैसा मज़ा कहां दे पाएगी?

विवेक- तू जानती नहीं … उसे ऐसी पटाखा माल है ना … मैंने नापा है उसका बदन, फ्रेश माल है. बेड पर वह तुझे टक्कर दे पाएगी कि नहीं, अब ये पता करना पड़ेगा!
प्रिया- कुछ बात आगे बढ़ी या दूर से ही नाप रहा है? मना ले … थ्रीसम का मज़ा लेंगे, मेरी भी मसाज हो जाएगी!
विवेक- अभी 3-4 दिन हम दोनों ही काफी हैं. फिर लगेगा तो मना लेंगे … मगर तू चाहे तो आज से ही प्लान वन पर काम करने में लग जा!

उन दोनों की बातें सुनकर मैं उनके रिश्ते को समझ गई थी कि ये दोनों कजिन से बढ़कर ही रिश्ता बनाए हुए हैं.
पर मेरी चूत की खुजली भी बढ़ती जा रही थी.

सोते समय प्रिया विवेक के साथ उसके कमरे में जाने लगी तो विवेक से बोली- चल, लूडो खेलते हैं.
मैंने भी उनसे पूछा- क्या मैं भी खेल लूँ?
प्रिया बोली- यार शिल्पा, ये थोड़ा अलग गेम है … इसमें कुछ न कुछ दांव पर लगाना होता है.

फिर भी मैं इस बात को राज़ी हो गई और उन दोनों के साथ विवेक के रूम में आ गई.

उन्होंने कमरा बंद किया और प्रिया रूल्स बताने लगी.

प्रिया- जो भी गेम जीतेगा, वह बाकी दोनों से जो चाहे करा सकता है. जो राज़ी न हो वह अभी बाहर हो जाए … और गेम स्टार्ट होने के बाद वापसी का कोई चांस नहीं है!

मैंने हामी भर दी ये सोचकर कि जो होगा देखा जाएगा.
गेम शुरू हुआ और पहला गेम मैं जीत गई, तो दोनों को मैंने डांस करने को बोला.
म्यूज़िक लगाकर दोनों ने कपल डांस किया.

दूसरा गेम प्रिया जीती और उसने मुझे टॉप और विवेक को उसकी टी-शर्ट उतारने को बोला.

मैंने बोला- ये क्या मांग हुई?
वह बोली- रूल्स में कुछ भी करा सकते हैं.
विवेक ने हामी भरते हुए कहा- हां, ये तो करना पड़ेगा … रूल्स आर रूल्स!

विवेक ने झट से अपनी टी-शर्ट उतार दी और मैंने भी शर्माते हुए अपना टॉप उतार लिया.
मैं ब्रा में ही रह गई.

प्रिया बोली- विवेक, ये तो सच में मालदार है बड़े-बड़े चूचे हैं इसके तो!
वह मेरी एक चूची दबाती हुई बोली- बड़ी सॉफ्ट चूचियां हैं … मलाई लगाती है क्या इन पर?
विवेक बोला- सोते समय तो ये ब्रा भी नहीं पहनती.

विवेक टॉपलेस था, मैं ब्रा और लोअर में, और प्रिया फुल कपड़ों में.
अगला गेम शुरू हुआ और मैं जीत गई.

तो मैंने भी प्रिया को टॉप उतारने को बोला और विवेक को उसका पैंट उतारने को.

दोनों ने खुशी-खुशी काम कर दिया.
प्रिया की चूचियां उसकी ब्रा को फाड़कर बाहर आने को थीं.
बड़ी गोरी और भारी चूचियां थीं उसकी!

विवेक का लंड तंबू बना हुआ था उसकी चड्डी में.
आखिर जब सामने दो सुंदर लड़कियां ब्रा में बैठी हों, तो किस लड़के का खड़ा नहीं होगा!

अगला गेम शुरू हुआ और विवेक जीत गया.
उसने हमें अपनी लोअर उतारने को कहा और फिर दोनों को रोककर खुद ही दोनों के लोअर उतार दिए.
अब हम तीनों ही अंडरगारमेंट्स में थे.

चौथा गेम शुरू होने से पहले मैंने कहा- 12 बज गए हैं … अब सोने चलते हैं.
दोनों ने कहा- ये गेम 10 गेम खत्म होने पर ही खत्म होता है, बीच में नहीं उठ सकते … तो जब तक 10 गेम नहीं होते, तब तक खेलना ही पड़ेगा!

प्रिया बोली- तू नहीं आती तो अब तक हमारा दूसरा गेम चालू हो चुका होता.

चौथे गेम में विवेक ही जीता और उसने हम दोनों को पूरी नंगी होने को बोला.
मैं शर्माती हुई ब्रा-पैंटी उतारने लगी और प्रिया तो कब से इसी का इंतज़ार कर रही थी.

मुझे शर्म और मज़ा दोनों आ रहे थे.
मेरी चूत अब पानी छोड़ने की स्थिति में थी.

विवेक ने मेरी चूत देखकर कहा- देख साली की चूत … एकदम साफ गुलाबी है लगता है अभी तक किसी के हाथ नहीं लगी!
मैंने भी कहा- मैंने अभी तक किसी के साथ किया नहीं है!
तो विवेक बोला- इसका उद्घाटन भी मैं ही करूँगा … प्रिया की चूत की तरह!

पांचवां गेम प्रिया ने जीता और उसने मुझे विवेक का लंड चूसने को कहा और विवेक को उसकी चूत चाटने को बोला.

मैंने कहा- मुझे ये सब नहीं आता है!
वह बोली- जैसे बर्फ का गोला चूसती है, वैसे ही चूसना शुरू कर दे … इसमें कौन सा बड़ा साइंस है!

उसने एक बार विवेक का लंड मुँह में लेकर चूसकर दिखा दिया.

मैंने सहमते हुए विवेक का लंड चड्डी से निकाल कर चूसना शुरू किया.
बड़ा मोटा लंड था और मुँह में बड़ी मुश्किल से जा रहा था.

विवेक ने प्रिया को एक लिप किस किया, फिर उसकी चूत चाटने लगा.

प्रिया मुझसे बोली- ला, तेरी चूत को मैं चाट लेती हूँ!
उसने मेरी चूत के होंठों से अपने होंठ मिला दिए.

फर्स्ट ब्लोजॉब के अनुभव से मेरे शरीर में सनसनी दौड़ गई, अलग ही मज़ा मिलना शुरू हो गया था.
मैं आंखें बंद करके मज़ा ले रही थी और विवेक का लंड चूसती जा रही थी.

विवेक भी मजे ले-लेकर मेरे मुँह में लंड अन्दर-बाहर करके चोदे जा रहा था.
प्रिया अपनी पूरी जीभ को मेरी चूत के अन्दर डाल रही थी.

हाय … मैं बयान नहीं कर सकती मेरा शरीर काँप रहा था, अलग ही झुनझुनाहट पैदा हुई मेरे शरीर में.
शरीर अकड़ने लगा और अगले ही मिनट मैंने पानी छोड़ दिया, जो प्रिया ने पूरा पी लिया.

प्रिया भी झड़ने वाली थी और मेरे 2 मिनट बाद झड़ गई.
सारा पानी विवेक ने पी लिया.

मैं विवेक का लंड चूसने में लगी हुई थी और प्रिया मेरा पानी साफ करके विवेक को किस करने लगी.
कोई 15 सेकंड बाद विवेक के शरीर में कम्पन हुआ, वह झड़ने को था.

प्रिया ने ये भाँपकर मुझे बोला- विवेक का पानी मुँह में ही रखना … गटकना नहीं!
विवेक ने ‘आह … आह … ’ करते हुए मेरे मुँह में पिचकारी छोड़ दी.
मेरा पूरा मुँह सफेद पानी से भर गया.

थोड़ा सा पानी मैंने गटक लिया, कुछ होठों के किनारे से बहते हुए बाहर निकलने लगा.
विवेक का लंड मेरे मुँह से निकलते ही प्रिया ने मेरे मुँह पर अपने होंठ रख दिए और विवेक के सफेद पानी को हम दोनों पीने लगीं.

प्रिया के नाजुक होंठ मेरे होंठों को चूस रहे थे. उसकी जीभ जैसे स्पर्म की हर एक बूँद को मेरे मुँह से निकालने में लगी हुई थी.
प्रिया किस करने में एक रंडी की तरह खोई हुई थी. बीस मिनट बाद हम अलग हुए.

प्रिया ने पूछा- मज़ा आया?
मैंने बोला- ऐसा मज़ा मेरे जीवन में किसी काम में नहीं आया, जो आज आया है!

इसी सब में हमें समय का होश नहीं रहा.
रात के 2 बज चुके थे … तो प्रिया, मैं और विवेक साथ में ही सो गए.

दोस्तो, मुझे उम्मीद है कि आपको फर्स्ट ब्लोजॉब की कहानी के इस भाग में मजा आया होगा.
प्लीज अपने विचार मुझे मेल करें.
nisha00agrawal@gmail

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