Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Bottom Gay Boy Kahani – प्रोफेसर ने अपनी रंडी बनाकर मेरी गांड मारी to make every night hot about Bottom Gay Boy Kahani – प्रोफेसर ने अपनी रंडी बनाकर मेरी गांड मारी story.
Story Start Here :
बॉटम गे बॉय कहानी में मुझे गांड मरवाने की आदत हो गयी थी पर एक साल से मुझे बड़ा लंड नहीं मिला था. एक गे ऐप के माध्यम से मेरी दोस्ती मेरे ही कॉलेज के सर से हुई.
हाय दोस्तो, मैं एक बॉटम हूँ और मुंबई से हूँ.
ये गे सेक्स कहानी मेरे और मेरे कॉलेज के सर की है.
इसमें मैंने लिखा है कि कैसे उन्होंने मुझे एक लड़के से क्रॉसड्रेसर बना दिया.
तो इस बॉटम गे बॉय कहानी को पढ़िए और अपने फीडबैक ज़रूर दीजिए.
मैं आपको पर्सनली अपना फर्स्ट सेक्स एक्सपीरियंस बताऊंगी.
मैं खुद को एक लड़की ही समझती हूँ, पर बदनीसबी से लड़का हूँ.
ये बात सन 2019 में मेरे 12वीं के बाद की है.
तब 12वीं पास होने के बाद मैं घर से दूर कॉलेज जाना चाहती थी ताकि वहां पूरी तरह इंडिपेंडेंट रहूँ और मज़े कर सकूँ.
मैंने लोनावला के पास एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया.
उस वक्त मैं नई-नई चुदाई करने लगी थी.
मेरे फर्स्ट सेक्स पार्टनर रितेश और ऋतिक भैया से मुझे चुदे हुए एक साल हो गया था और मैं उस समय किसी मोटे लौड़े से बहुत ज्यादा चुदवाना चाहती थी.
लेकिन कोई मिलने वाला नहीं था.
तभी मुझे एक ऐप के बारे में पता चला.
मैंने वहां आईडी बनाई और वहां सेक्सी अस की पिक डाली.
मैंने एक लड़की की पैंटी पहन कर अपनी गांड की फोटो डाली थी.
बहुत सारे मैसेज आने लगे थे पर कोई नजदीक का नहीं मिल रहा था तो मेरी चुदास बढ़ती ही जा रही थी.
फिर मैं कॉलेज जाने लगी, मैं रोज़ वहां किसी से मिलने के लिए तड़पती रहती थी.
मैं किसी से भी सीधे सेक्स नहीं करना चाहती थी.
पहले कैजुअली मिलना चाहती थी, सब अच्छा रहा तो सोचती थी कि फिर सेक्स करूंगी.
पर लोग तो सीधे चोदने बुलाते थे, तो मैं ज़्यादातर मना कर देती थी.
ऐसे ही 2 महीने बीत गए.
एक दिन जब मैंने कॉलेज में ऐप ओपन किया तो एक आईडी से मैसेज आया था.
आईडी का नाम था ‘लुकिंग फॉर सीडी पार्टनर.’
मैंने रिप्लाई किया- हाय, कैसे हो?
हमारी बातें होने लगीं.
वे बोले- तुम बहुत पास हो, प्लीज़ मिलोगे क्या?
मैंने कहा- सॉरी, मैं पहले कैजुअली मिलना चाहती हूँ. सब अच्छा रहा तो सेक्स करूंगी!
उन्होंने कहा- ठीक है. पास में ही हूँ, मिल लो!
फिर उन्होंने बताया कि वे इसी कॉलेज में फोरमैन हैं.
‘क्या तुम इसी कॉलेज में आ सकती हो या बाहर कैजुअली मिलना पसंद करोगी?
मैं चौंक गई कि ये कॉलेज के कौन से फोरमैन हैं … जो ये सब पसंद करते हैं.
मैंने उन्हें फिर से मैसेज किया- प्लीज़ आप अपना पिक दिखाओगे?
सर ने एक पिक की जगह पूरा एल्बम भेज दिया.
जैसे ही देखा, मैंने उन्हें पहचान लिया … वे मेरी ही ट्रेड के फोरमैन थे.
मैंने बोला- सर, ठीक है. हम दोनों जल्दी ही मिलते हैं, लेकिन आप इस बारे में किसी को नहीं बताओगे क्योंकि मैं आपके ही कॉलेज की स्टूडेंट हूँ!
सर ने कहा- ठीक है, नहीं बताऊंगा. कसम से.
मैंने कहा- ठीक है सर, मिलते हैं राइज़स में.
सर बोले- ठीक है. तुम मेरे केबिन में आ जाना. वहां बात करेंगे. बाकी सब बाद में देखते हैं.
मैंने कहा- ठीक है.
फिर जैसे ही लंच ब्रेक हुआ, तो मैं सर के केबिन के बाहर पहुंच गई.
सर अन्दर से बाहर आए, मुझे देखा और बोले- जो काम है, बाद में बताना. अभी लंच टाइम है.
मैंने कुछ नहीं कहा, बस एप पर मैसेज भेज दिया.
सर ने जैसे ही देखा, मुझसे बोले- सॉरी, आ जाओ ना अन्दर!
मैंने कहा- कोई नहीं सर, आप खाना खा लो. बाद में बात करेंगे.
सर बोले- यार, पेट की भूख से ज़्यादा इंपॉर्टेंट तो तुम हो … आओ ना!
मैं अन्दर चली गई.
सर मुझे पहले से जानते थे.
उन्होंने मुझसे बस इतना पूछा- तुम सीडी करती हो क्या? तुम्हारी डीपी मुझे बहुत अच्छी लगी!
मैंने कहा- वह क्या होता है सर? मुझे नहीं पता!
तो सर ने बोला- इससे पहले कभी किया है तुमने?
मैंने उनको बता दिया- हां सर, मैंने सेक्स पहले भी किया है, लेकिन लास्ट ईयर से कुछ नहीं किया. लेकिन आप एक चांस देकर देखिए, मैं पक्का आपको नाराज़ नहीं करूंगी!
सर ने बस इतना पूछा- क्या तुम रेडी हो सबके लिए?
मैंने कहा- हां सर, मैं रेडी हूँ.
वैसे सर दिखने में बहुत खास नहीं थे लेकिन उनकी बॉडी बहुत अच्छी थी और उम्र भी सिर्फ 32 साल की थी.
मैंने बोला- हां सर, चाहो तो ट्रायल ले लो.
सर बोले- कोई बात नहीं, तुम कॉलेज के बाद इंतज़ार करना और घर बता देना कि आज रात तुम यहीं रुकोगी. कल सुबह घर आओगी.
मैंने कहा- लेकिन सर, पापा नहीं मानेंगे.
सर ने बोला- मैं खुद फोन लगाता हूँ, वे मान जाएंगे.
मैंने कहा- ठीक है सर, अगर पापा हां बोलें तो ही रुकूँगी.
मैं फिर कॉलेज छूटने का इंतज़ार करने लगी.
शाम को 5 बज गए, कॉलेज छूट गया.
उसके बाद मैं गेट से बाहर निकली और चाय की टपरी पर रुक गई.
मैं सर के आने का इंतज़ार कर रही थी. सब लड़के जाने लगे.
कइयों ने पूछा भी कि क्या हुआ? घर नहीं जाना क्या?
मैंने सबको एक ही जबाव बोला- तुम चलो, मैं नेक्स्ट लोकल से आता हूँ.
मैं वहीं इंतज़ार कर रही थी.
फिर कॉलेज पूरी तरह छूटा तो मैंने पापा को कॉल किया परमिशन के लिए.
पापा बोले- हां तुम्हारे सर का कॉल आया था, तुम रुक जाओ. बस ध्यान रखना अपना और फोरमैन सर के घर पर ही जाना, किसी दोस्त के साथ नहीं!
मैंने कहा- ठीक है पापा, सर के घर ही जाऊंगा.
उन्होंने बोला- हां.
मैंने कॉल रख दिया.
तभी सर आए और बोले- चलो पापा तो मान गए आज तुम्हारी जिंदगी बदलने वाली है.
मैंने कहा- ऐसा क्या है सर? बताओ ना!
तभी सर बोले- प्लीज़ निखिल, सर मत बुलाओ. अब तो तुम मुझे नाम से बुला सकते हो!
मैंने प्यार से कहा- ठीक है, सागर जी चलो अभी घर चलते हैं.
मैं कार में बैठ गई.
सर एक 2BHK फ्लैट में रहते थे, अच्छी सोसाइटी थी.
जैसे ही हम दोनों फ्लैट के अन्दर गए, सर ने दरवाज़ा लॉक कर दिया और मुझे गले से लगा लिया.
वे मुझे वाइल्डली किस करने लगे, यहां-वहां छूने लगे.
मैंने सर को दूर किया और बोला- रुको ना सागर जी, इतनी क्या जल्दी? मैं पहले बाथरूम जाना चाहती हूँ. उसके बाद सब करेंगे, वरना मज़ा नहीं आएगा!
जैसे ही मैं बाथरूम जाने लगी, सर ने कहा- तुम नहाकर भी आना, मैं तब तक सब इंतज़ाम कर लेता हूँ!
फिर मैं अन्दर चली गई.
करीब 20 मिनट बाद जब मैं बाहर आई, तो देखा सर बेड के पास खड़े थे.
मैं उनके पास गई तो मैंने देखा कि बेड पर कुछ कपड़े रखे हुए थे.
लड़कियों वाले कपड़े थे.
एक साड़ी, एक ड्रेस, ब्रा, पैंटी, सब कुछ था.
सर ने कहा- प्लीज़ बेबी, मेरे लिए इनमें से एक ड्रेस पहन लो, आज मैं तुम्हें अपनी पत्नी बनाकर सुहागरात मनाना चाहता हूँ!
मैंने कहा- सर सॉरी … मैंने आज तक ऐसा कुछ ट्राई नहीं किया.
सर ने कहा- यार, इसको ही क्रॉसड्रेसिंग यानी सीडी बोलते हैं … प्लीज़ पहन लो ना मेरे लिए … मैं मदद करता हूँ तुम्हारी!
मैंने सोचा और ड्रेस पहनना सही समझा.
सर बोले- साड़ी पहन लो प्लीज़, मैं पहना देता हूँ … वैसे भी मुझे साड़ी में सेक्स बहुत पसंद है और मुझे आदत है पहनाने की!
मैंने कहा- ठीक है.
फिर सर ने मुझे सबसे पहले पैंटी और ब्रा पहनाई. उसके ऊपर ब्लाउज़, नीचे पेटीकोट और फिर साड़ी पहनाई.
पहनाते समय वह मेरी कमर और गर्दन को बहुत प्यार से टच कर रहे थे.
मैं पागल हो रही थी और कह रही थी- प्लीज़ बेबी … निकालनी तो है, क्यों पहनाई?
इस पर वे बोले- बेबी, इसमें तुम और सुंदर लगोगी … और मैं पूरी औरत के रूप में तुम्हें देखना चाहता हूँ!
मैं चुप हो गई. मुझे भी अच्छा लग रहा था.
सर ने मुझे अच्छे से साड़ी पहनाई और उसके बाद पायल, कान के रिंग्स पहनाने लगे.
मेरे कान के छेद बचपन में हो चुके थे, लेकिन सर ने ज़ोर-ज़ोर से फोर्सफुली रिंग्स पहना ही दिए.
मुझे दर्द हुआ, लेकिन मैंने थोड़ा सा सह लिया.
उसके बाद सर ने थोड़ा फाउंडेशन, आइलाइनर लगाया, एक प्यारी सी बिंदी लगाई और लिपस्टिक भी.
मैंने आईने में देखा तो मैं बिल्कुल एक लड़की दिख रही थी.
सर ने मुझे पीछे से हग कर लिया और बोले- आज से तुम निखिल नहीं … रश्मि हो मेरी … और मैं तुम्हें बहुत प्यार करूंगा!
फिर सर पीछे से मेरी गर्दन पर किस करने लगे, मेरे बूब्स दबाने लगे.
मेरी सिसकारी निकल गई.
सर जोश में आ गए. मुझे पीछे से ही गर्दन घुमा कर किस करने लगे.
मुझे घुमा दिया और अपनी बांहों में लेकर वाइल्डली किस करने लगे.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं सर का साथ दे रही थी.
उम्म्म … आह्ह … सिसकारियां निकल रही थीं.
सर भी वाइल्डली किस कर रहे थे.
फिर उन्होंने मुझे बेड पर गिरा दिया और मेरे ऊपर आ गए.
मेरा पल्लू हटाकर मेरे बूब्स को दबाने लगे.
वे ब्लाउज़ के ऊपर से ही ज़ोर-ज़ोर से मेरे मम्मों पर किस कर रहे थे.
बाद में वे मेरे होंठों को बेदर्दी से चूसने और चूमने लगे.
उनकी क्रूरता से मेरे होंठों से खून निकलने लगा था लेकिन तब भी वे रुकने का नाम नहीं ले रहे थे.
अचानक से उन्होंने मेरा ब्लाउज़ फाड़ दिया.
मैं भी जोश में थी.
उन्होंने ब्रा हटाई और मेरे लेफ्ट बूब को काटने-चूसने लगे.
मैं चीखी- उम्म्मम … हाय … आराम से ना प्लीज़!
लेकिन सर बिना कुछ सोचे मेरे बूब्स को मसल रहे थे, मुँह से चाटे जा रहे थे, एक बूब दबा रहे थे और दूसरा चूस रहे थे.
फिर सर ने राइट बूब को चूसा और ज़ोर-ज़ोर से खींचते हुए मजा लेने लगे.
मैं चीख रही थी- उम्म्म … उफ्फ् … सागर जी … प्लीज़ … आराम से ना … मैं भाग थोड़ी रही हूँ!
लेकिन सर तो जोश में थे, कुछ सोच ही नहीं रहे थे.
उन्होंने बेड पर ही मेरी पूरी साड़ी खोल दी. मैं बस पेटीकोट में रह गई.
तभी सर मेरे बूब्स से नीचे आए और मेरे पेट व नाभि पर किस करने लगे.
मैं बस … ‘उम्म्म्म … आह्ह … सागर जी … प्लीज़ … रुकिए ना.’ कह रही थी और कराह रही थी.
वे मेरे साथ प्यार किए जा रहे थे.
उसके बाद सर ने मेरी टांगें उठा लीं.
मुझे लगा अभी सर मुझे चोद देंगे.
लेकिन ऐसा नहीं था.
सर ने मेरी गांड को चाटना शुरू किया.
वे अपनी जीभ अन्दर डाल रहे थे.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
मैं उनका सिर अपनी गांड पर दबा रही थी और ‘उम्म्म्म मम … आह्ह … जी … ईईई … ’ कर रही थी.
अचानक सर ने मुझे बैठा दिया और बोले- लंड चूसो!
मैं चूसने लगी.
सर बहुत खुश दिख रहे थे.
मुझे लगा उन्हें बहुत मज़ा आ रहा है.
मैंने 5 मिनट तक उनका लंड आराम से चूसा.
अब सर ने मेरी टांगें फिर से उठा लीं और बिना कुछ सोचे वे मेरी गांड पर अपना मोटा लंड रगड़ने लगे.
मैं बोल रही थी- तेल तो लगाओ!
लेकिन उन पर सेक्स का नशा चढ़ा था.
बिना कुछ सोचे उन्होंने अपना लंड मेरी गांड में ठेल दिया.
चूंकि मेरी गांड की चुदाई कई साल से नहीं हुई थी तो गांड बहुत टाइट थी.
सर का लंड गांड में गया ही नहीं.
सर ने फिर से लौड़े को गांड पर सैट किया और एक ज़ोर का झटका लगा दिया.
इस बार उनके लंड का टोपा गांड के पहले छल्ले को फैलाता हुआ अन्दर फंस गया.
मैं ज़ोर से चिल्लाई- आह्ह … प्लीज़ … दर्द हो रहा है … बस्स्स!
सर बोले- रश्मि, अभी तो सिर्फ़ टोपा गया है … पूरा 7 इंच तो बाहर ही बाकी है!
यह कहते हुए सर ने एक और झटका लगाकर आधा लंड डाल दिया.
मैं ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी- प्लीज़ सागर जी … छोड़िए ना … दर्द हो रहा है … आह्ह … मैं मर गई … उफ्फ्फ!
लेकिन सर ने मेरी सुनी ही नहीं.
वे एक के बाद एक झटके देते रहे और अपना पूरा लंड मेरी गांड के अन्दर डाल दिया.
अब वे मुझे किस करने लगे.
अभी मैं चिल्ला भी नहीं सकती थी.
सर थोड़ा रुके रहे और जैसे ही मैं थोड़ी शांत हुई, उन्होंने फिर से धक्के लगाना शुरू कर दिए.
मैं- उफ्फ् … हाय … सागर जी … प्लीज़ … आराम से चोदो न!
वे मेरी सुन ही नहीं रहे थे बस ज़ोर-ज़ोर से धक्के देते हुए मुझे चोदते रहे.
मैं यहां तड़प रही थी, लेकिन सर को तो मानो कोई चिंता ही नहीं थी.
वे तो मस्ती से बस मेरी गांड मारते जा रहे थे.
मैं उनके लौड़े के नीचे पड़ी तड़प रही थी.
‘बस्स्स … उफ्फ् … आह्ह … सागर जी … प्लीज़ … आराम से ना … प्लीज़ सागर जी … आज ही सारी हवस निकाल लोगे क्या? आराम से करो ना … प्लीज़ … मुझे एक साल बाद लंड मिल है … प्लीज आराम से पेलो ना!’
लेकिन सर ने नहीं सुना.
वे मुझे धकापेल चोदते ही रहे.
अचानक से मेरे छोटे से लंड से स्पर्म की धार निकल गई.
आज पहली बार बिना हाथ लगाए मैं झड़ गई थी, मुझे बहुत अच्छा लगा.
लेकिन इससे मुझे थकान हो गई और मैं और कमज़ोर हो गई.
सर ने मेरे चूतड़ पर थपकी देकर कहा- रश्मि, तुम तो झड़ गई इतनी जल्दी? अभी तो सारी रात बाकी है!
मैंने कहा- सागर जी … इतने दिनों बाद कर रही हूँ … होना तो था ही … प्लीज़ आराम से कीजिए ना … उफ्फ … आह्ह!
इस बार भी सर ने नहीं सुना … उलटे हंसने लगे और धकापेल चुदाई करते रहे.
फिर अचानक से एक ऐसा पल आया कि सर ने अपनी स्पीड बहुत तेज बढ़ा दी.
मैं ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी- आह्ह … सागर जी … प्लीज़ … उफ्फ … आराम से ना … मैं मर जाऊंगी!
तभी वे आह आह करते हुए बोले- आह बस्स्स बेबी … एक मिनट और झेल ले … आह मेरा हो गया!
वे अपनी कमर को ज़ोर-ज़ोर से आगे पीछे कर रहे थे.
मैं ‘उफ्फ … सागर जी … आह्ह … आह … उम्म्म …’ कर रही थी.
तभी अचानक से सर ने अपना गर्म वीर्य मेरी गांड में छोड़ना शुरू कर दिया और वे मेरे अन्दर ही झड़ गए.
मुझे महसूस हुआ सर के लंड की गर्म धार … बड़ा सुकून सा मिला.
फिर सर भी थककर मेरे ऊपर ही सो गए.
मैं ज़ोर से हांफ रही थी. मुझे सिर्फ़ उनके दिल की धड़कन फील हो रही थी.
उनका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि क्या ही कहूँ. मुझे दर्द होने के बावजूद भी उन पर प्यार हो गया.
कुछ देर बाद सर ने मुझे एक डीप किस किया और बोले- रश्मि … आई लव यू … प्लीज़ मेरी पत्नी बन जाओ ना … मैं तुम्हारा पूरा ख्याल रखूँगा … प्लीज़!
मैं कुछ नहीं बोली, बस शर्मा कर एक स्माइल दे दी.
सर समझ गए.
हम दोनों 15 मिनट ऐसे ही लेटे रहे और उसके बाद सर मेरे बाजू में आ गए.
बाद में जब मैं उठी, तो मैंने जो देखा … वह मैं अगली गे सेक्स कहानी में बताऊंगी.
अभी के लिए इतना ही.
बॉटम गे बॉय कहानी कैसी लगी आपको?
बाय.
gaybottom600@gmail
