Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Hotel Xxx Fuck Kahani – हिमाचल में अनजान पहाड़न की चूत चुदाई to make every night hot about Hotel Xxx Fuck Kahani – हिमाचल में अनजान पहाड़न की चूत चुदाई story.
Story Start Here :
होटल Xxx फक कहानी में हिमाचल में बस के सफ़र के दौरान एक भाभी से मुलाकात हुई, उसकी चूत में उंगली की, फिर रामपुर पहुँच कर उसको होटल ले जा कर चोदा.
कहानी के पहले भाग
चलती बस में अनजान भाभी की चूत में उंगली
में आपने पढ़ा कि शिमला से रामपुर जाते हुए बस में मेरे साथ एक किन्नौरी भाभी बैठी थी. मैंने उस पर ट्राई मारी और मेरी उँगलियों से मैंने उसकी चूत का पानी निकाल दिया.
फिर मौक़ा मिलते ही मैंने उसे अपने साथ समय बिताने के लिए मना लिया.
अब आगे होटल Xxx फक कहानी:
मेरे कहने पर उसने अपने पति को भी फ़ोन कर दिया कि गाड़ी का टायर पंचर होने के कारण वह दो घंटे लेट हो जाएगी।
मैं ज़्यादातर सतलुज होटल में ही रुकता था।
मैंने उसको होटल के बाहर रुकने को बोला और होटल वाले से सेटिंग कर आया ताकि उसकी अपनी पहचान आईडी न देनी पड़े।
मैंने रूम की चाबी ली और उसको लेकर उसी होटल रूम में आ गया।
रूम का दरवाज़ा खुलते ही हमने राहत की सांस ली।
कमरे में हीटर पहले सी चालू था.
मैंने अंदर घुसकर जल्दी से दरवाज़ा बंद किया, बैग रखे और एक-दूसरे से लिपटकर पागलों की तरह चूमने लगे।
हमारी आँखें बंद थीं।
मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में पकड़ रखा था और हमारे होंठ एक-दूसरे में व्यस्त थे।
किस करके जब हम दोनों अलग हुए, तो ऐसा लगा जैसे नशा किया हो।
सुबह से ही मेरा लंड राजा वैसे ही उफान पर था।
टाइम कम था और हमको ‘मिशन चुदाई’ भी कम्पलीट करना था।
मैं तौलिया लेकर वाशरूम में चला गया; हाथ, मुँह और लंड को धोया, अपने सारे कपड़े उतार दिए और तौलिया लपेटकर बाहर आ गया।
मैंने उसको भी वाशरूम जाने, हाथ-मुँह और चूत को धोने को बोला।
सेक्स के दौरान मुझे हाइजीन का ध्यान रहता है।
उसने लॉन्ग कोट उतार दिया और हल्के कपड़े पहने।
मैंने उसको ऊपर से नीचे तक निहारा, वह गज़ब की सुंदर थी!
उसका ध्यान तौलिये में मेरे लंड के उभार पर गया।
मैंने सुहागरात वाली फीलिंग लेते हुए उसको बाहों में लिया, अपने सीने से लगाया और हमारे हाथ एक-दूसरे के बदन पर चलने लगे।
इसी बीच मेरा तौलिया खुलकर नीचे गिर गया और अब उसने मेरे लंड को देखा, पकड़कर उसकी गर्मी और उभरी हुई नसों को अपनी हथेली से महसूस किया।
उसने मुट्ठी में भरकर उसको ऊपर-नीचे किया और ज़ोर से दबा दिया। उसने मेरे लंड से हाथ नहीं हटाए और मेरा लंड उसके कब्जे में था।
वह दोनों हाथों से धीरे-धीरे मेरा लंड हिलाने लगी।
कभी वह मेरे लंड के मशरूम टॉप को तो कभी मेरी आँखों को देखती।
वह घुटनों पर बैठ गई, मेरा लंड उसके चेहरे के पास था।
उसकी गरम सांसें मैं अपने लंड पर महसूस कर रहा था।
मैंने अपने हाथों से लंड को उसके होंठों से लगाया और उसके मुँह में डालने लगा।
वह मुझे देख रही थी।
मैंने भी आँखों से उससे लंड चूसने का इशारा किया।
इस बार उसने अपना मुँह खोलकर लंड को मुँह में ले लिया।
उसके मुँह में जाते ही जन्नत महसूस हुई! मेरा सारा खून मेरे लंड पर महसूस होने लगा और वह उसको लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी।
उसने मंझी हुई रंडी की तरह उसको चूसा!
मेरा लंड सुबह से खड़ा था और झड़ने वाला था।
उसके मुँह के अंदर मेरे लंड के टॉप पर उसकी जीभ की अठखेलियां मुझको पागल कर रही थीं।
उसने मेरे प्री-कम की बूंदें चखीं।
मेरे लंड की नसों पर दबाव बढ़ने लगा था।
उसने लंड मुँह से निकालकर मुठियाया और वीर्य की गर्म धार का लावा उसके चेहरे और गालों पर पड़ा!
मैं तौलिये से उसके चेहरे को और वह मेरे लंड को साफ़ करने लगी।
मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए।
अब उसके गोरे बदन पर सिर्फ मैरून कलर की ब्रा और पैंटी थी।
उसकी ब्रा में कैद उसकी दूधिया चूचियाँ बर्फ की पहाड़ियाँ लग रही थीं!
मैंने उनमें अपना चेहरा छुपा दिया और अपने गाल उनसे सहलाने लगा।
उसके बदन की मादक खुशबू चरस के नशे का काम कर रही थी।
सिगरेट के धुएं की तरह मैं उस खुशबू को लम्बी सांस लेकर अंदर तक ले रहा था।
यह सब पागल और मदहोश करने वाला नज़ारा था।
उसके हाथ मेरे सर पर बालों को सहलाने लगे।
हमारी आहें और हल्की आवाज़ें कमरे के सन्नाटे को तोड़ रही थीं।
मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैंने उसकी ब्रा निकाल दी।
उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को मैंने अपने हाथों में लिया।
वे बहुत मुलायम थीं।
उसके निप्पल किशमिश के दाने की तरह थे और उन पर दरारें थीं।
जैसे बच्चे को उसका मनपसंद खिलौना मिल जाए, ऐसे ही मैं उसकी चूचियों से खेलने लगा।
उनको मैंने हर तरह से मसला और लाल कर दिया।
दोनों निप्पल भी पकड़कर मसले, फिर उनको मुँह में लेकर चूस-चूस कर अंगूर के दाने की तरह मोटा कर दिया।
उसके मुँह से “आह आह” की आवाज़ आ रही थी और उसके भारी-भारी लम्बी सांस लेने के कारण उसकी छाती ऊपर-नीचे उठ रही थी।
मैंने अपने मुँह से निप्पल निकाले तो उन पर मेरे थूक की लार लगी थी।
मैंने उसकी आँखों में देखा, उनमें चुदने के लिए बेताबी झलक रही थी।
उसने भी मेरा वार्मर और बनियान उतार दी।
अब मैं पूरी तरह नंगा था।
रूम में ठंड भी थी, मैं उसे पकड़कर बेड पर कम्बल में ले आया।
कम्बल में हमारे नंगे बदन एक-दूसरे से लिपटे हुए थे।
मैंने फिर से उसकी चूचियों में अपना चेहरा छुपा दिया और अपने गाल उनसे सहलाने लगा।
मैंने उसके निप्पल को काटा।
दर्द से उसने आह की।
एक-दूसरे में उलझे हुए हमारे गर्म बदन, वह ‘कोजी-कोजी’ फील चरम पर था।
उसने मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी।
अभी तक मैंने उसकी चूत को छुआ नहीं था।
वह मेरे ऊपर आ गई थी और मैं अपने हाथ उसकी बड़ी गांड पर ले गया।
उसकी गांड के दोनों पुट्ठे मैंने अपने हाथों में पकड़ने की कोशिश की। उसकी गांड बड़ी और बाहर की तरफ उभरी हुई थी।
उसकी चूचियाँ मेरी छाती पर धंसी हुई थीं।
मेरा लंड किसी मुड़े हुए मोटे लोहे की गर्म रॉड की तरह उसके नरम पेट और नाभि में चुभ रहा था।
उसने अपनी कमर हिला-हिला कर अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ना शुरू किया।
उसकी पैंटी चूत से निकले कामरस से भीग चुकी थी।
मैंने उसकी पैंटी निकाल दी और उसे भी नंगा कर दिया।
मैंने उसके बाज़ू, कंधे, गर्दन, उसके गाल और उसके चूचों पर पागलों की तरह अनगिनत किस करने शुरू कर दिए।
वह आह-आह करके कराहने लगी।
चुदाई की मस्ती में वह बोलने लगी- आआह आआह… ईई आआह… जान आआह… और करो!
उसके बाद मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए।
हम दोनों एक-दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे।
उसने अपनी कमर हिला-हिला कर अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ना जारी रखा।
हमने बारी-बारी से एक-दूसरे की जीभ को चूसा।
अब मैंने हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया।
उसकी फूली हुई चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, जो चूत को शेव करने के दस दिन बाद निकले होते हैं।
साथ-साथ में मैं पागलों की तरह उसे चूमे जा रहा था। कभी गर्दन पर, कभी गालों पर, कभी होंठों को चूस रहा था।
वह भी उतावली होकर मुझे चूम रही थी।
वह साइड में लेट गई और मेरा लंड हाथ में लेकर सहलाने लगी।
मैं एक हाथ से उसकी चूत और दूसरे हाथ से उसके मम्मों को दबा रहा था।
मैंने उसकी चूत में उंगली डालकर हिलाना शुरू किया, वह काफी उत्तेजित हो गई थी।
मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसकी मखमली टांगों पर किस करने लगा।
उसकी जांघों पर किस करते हुए मैंने उसके पेट पर भी किस किए।
मैंने अपने दोनों हाथ नीचे उसकी गांड पर ले जाकर उसे ऊपर को उठाया, जिससे उसकी चूत की दरार खुल गई और उसके गुलाबी छेद का दीदार हुआ!
आप लोगों ने देखा होगा कि चुदाई के दौरान बहुत सारे जानवर जैसे कुत्ता और सांड, कुतिया और भैंस की चूत को सूँघकर उसकी चूत की खुशबू अपने नाक के नथुनों में भरकर गहरी सांस लेते हैं, जिसका सीधा असर उनके दिमाग और लंड पर पड़ता है।
ठीक वैसे ही मैंने उसकी चूत को सूँघा और उसकी चूत पर मुँह लगाकर उसकी चूत चाटने लगा और उसका स्वाद चखा।
उसने अपनी आँखें बंद करके मेरे बाल कसकर पकड़े और किसी नागिन की तरह बेड पर हिल-हिल कर अपनी गांड उठाकर तड़पने लगी।
डोलमा के मुँह से आवाज़ निकल रही थी- आहह आहह विशाल… मैं मर जाऊंगी! ऊँह ऊँह… आह आह… मेरी प्यास बुझा दे! प्लीज और मत तड़पाओ!
वह बेड पर फड़फड़ा रही थी।
मुझे उसकी यह तड़प और पागल कर रही थी।
मैंने चूत चाटना नहीं छोड़ा, बल्कि जीभ की नोक से उसके गुलाबी छेद को छेड़ने लगा।
उसने अपने बाज़ू फैलाए और बेड की चादर को मुट्ठियों में भरकर अपने सर को दाएँ-बाएँ घुमाने लगी।
कुछ देर बाद मैंने उसको देखा तो उसका चेहरा लाल हुआ था, आँखें वासना से भरी हुई थीं।
मैं ऊपर आया और उसके चेहरे के पास जाकर अपना लंड उसके होंठों पर रख दिया।
वह पूरी मस्ती में थी और उसने बिना देर किए लंड मुँह में ले लिया।
थोड़ा चूसने के बाद उसने आँखें खोलीं और लंड हाथ में पकड़कर चुदास भरी निगाहों से बोली- जान, मेरी प्यास बुझा दे! प्लीज और मत तड़पाओ!
मैंने पिलो (तकिया) उठाया और उसकी गांड के नीचे लगाया। उसने अपने पैर फैलाए, वह लंड लेने को बेताब थी।
कामरस की बूंदें चूत से बहती हुई पिलो को भिगोने लगी थीं।
मैंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया और उसके पूरे गदराए बदन पर एक नज़र डाली और उसको अपने शरीर से ढक लिया।
मैं अपने लंड को उसकी चूत की दरार में, उसके गुलाबी छेद के मुँह पर घिसने लगा था।
वह तड़प उठी! लंड का टॉप चूत के रस में लिपटकर चमकने लगा था।
वह गांड उठाकर अंदर लेने की कोशिश करने लगी।
“चोदूँ?” मैंने उससे पूछा।
“हाँ! चोद डालो!” वह बोली।
मैंने लंड का सुपारा चूत पर रखकर दबा दिया।
लंड धीरे-धीरे उसकी चूत में घुसता चला जा रहा था।
उसकी चूत काफी टाईट थी। लंड जैसे-जैसे चूत में घुस रहा था, डोलमा वैसे-वैसे मुझसे लिपट रही थी।
“आहह आहह… जान आआह!” वह कराह रही थी।
उसकी ऐसी आवाज़ें मुझे मज़े दे रही थीं।
मैंने चोदने की रफ़्तार को थोड़ा बढ़ाया।
कमरे में हमारे कराहने की आवाज़ें गूँजने लगीं।
मैंने अब उसकी बच्चेदानी के मुँह पर थोड़ा ज़ोर से लंड का टोपा मारने लगा।
चूत से रिसते कामरस और उसकी जांघों के मेरी जांघों से टकराने की ‘फुच-फुच फुच-फुच’ की आवाज़ आने लगी।
हमारे कराहने की आवाज़ें गूँजने लगी थीं।
मैंने चोदना रोककर उसके चूचियाँ पकड़कर होंठों पर लम्बा किस किया।
उसके बाद मैंने उसको कुतिया (Doggy style) बनने को बोला।
वह जल्दी से पलट गई और बेड के किनारे पर घुटनों के बल होकर, सर नीचे झुकाकर गांड को उठाकर मेरे आगे कर दिया।
उसकी गांड का छेद कभी सिकुड़ और कभी फैल रहा था।
मैंने फिर से चूत को सूँघकर उसकी चूत की खुशबू अपने नाक के नथुनों में भरकर गहरी सांस ली। फिर मैं बेड से उतरकर फिर से लंड को चूत पर रगड़ते हुए अन्दर डालने लगा।
जैसे ही लंड का टोपा चूत के अन्दर गया, वह ज़ोर से “आआह” कर उठी! मैंने उसके बाल पकड़कर झटके से उसकी चूत में पूरा लंड पेल दिया।
चुदाई की मस्ती में वह बड़बड़ाने लगी- आआह आआह… ईई आआह… जान आआह… और करो! और ज़ोर से चोदो!
उसको कुतिया बनाकर उसकी बड़ी गांड को देखते हुए, उसकी कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से चोदते हुए बड़ा मज़ा आ रहा था।
हर झटके के साथ उसकी चूचियाँ हवा में लटकी हुई हिलतीं और डोलमा कराहती- आहह आहह… ओह… आहह आह… आआह आआह… ईई आआह… जान आआह… और चोदो!
उसके मस्त चूचे मेरे सामने थिरक रहे थे।
वह गांड उचका-उचका कर अपनी चूत मरवा रही थी।
उसके कामरस ने मेरा लंड और गोटियाँ सब भिगो दिया था।
उसने कहा कि वह झड़ने वाली है।
मैं भी साथ में झड़ना चाहता था।
मैं चोदने की रफ़्तार को बढ़ाकर ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत फाड़ने लगा।
वह पीछे मुड़कर देखने लगी और ज़ोर-ज़ोर से “आहह आहह… ओह… आहह आह” कहते हुए झड़ने लगी!
मेरा पूरा शरीर ऐंठने लगा था और मेरे लंड से भी वीर्य की गर्म धार का लावा फूट गया।
कमरे में ज़ोर-ज़ोर से “आआह आआह… ईई आआह… ओह्ह ओह” की आवाज़ें गूँज रही थीं।
मैं उसके ऊपर ही ढेर हो गया, उससे लिपटे हुए पड़ा रहा।
हमारी सांसें बड़ी तेज़ चल रही थीं और हार्ट बीट भी तेज़ भाग रही थी।
मैं पलटकर उसके सामने आया, हमने फिर धीरे-धीरे एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए किस किया।
होटल Xxx फक करके हम दोनों एक-दूसरे से संतुष्ट थे।
फिर हमने बाथरूम में जाकर एक-दूसरे को साफ़ किया और कपड़े पहने।
साथ ही मैंने ब्रेकफास्ट आर्डर किया क्योंकि अब शरीर को एनर्जी चाहिए थी और उसको बस भी लेनी थी।
जब तक ब्रेकफास्ट आता, मैंने एक हाथ उसके गले में डालकर उसे अपनी ओर खींचा और होंठों को चूमना चालू कर दिया।
मैंने दोबारा मिलने के बारे में पूछा तो वह बोली- लवी मेले के खत्म होने से दो दिन पहले आऊंगी!
“मेरा एक काम अधूरा रह गया!” मैंने बोला।
“कौन सा?” उसने पूछा।
“तुम्हारी गांड मारने की तमन्ना है!” मैंने जवाब दिया।
“इंतज़ार करो!” वह शरमाते हुए बोली।
तभी ब्रेकफास्ट आ गया और ब्रेकफास्ट करके मैं अगली बार मिलने का वादा लेकर उसको बस चढ़ा आया।
अगली चुदाई लवी मेले में कैसे हुई, अगली कहानी में बताऊंगा।
होटल Xxx फक कहानी पर अपने सुझाव और प्रतिक्रिया मेल और कमेंट्स में ज़रूर दें।
आप कमेंट्स और मेल में बताएं.
vishalhpshimla@gmail
