New Gand Kahani – ट्रक ड्राइवर ने क्लीनर की गांड मारी

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Story Start Here :

न्यू गांड कहानी में घर से भागा हुआ एक लड़का एक सरदार ड्राईवर का क्लीनर बन गया. एक रात दारू पीने के बाद सरदार जी को बीवी की चूत याद आ गयी.

दोस्तो, मैं आपका दोस्त विशु एक और सेक्स कहानी लेकर आया हूँ.

इस सेक्स कहानी के बाद की घटना
राजमिस्त्री ने महिला मजदूर की चूत गांड चोदी
आप पहले पढ़ चुके हैं. यह हिस्सा उसी सेक्स कहानी के पूर्व में हुए हादसे को लेकर लिखा गया है.

ये न्यू गांड कहानी एक राज मिस्त्री की है. वह रेती सीमेंट से मकान में प्लास्टर आदि का काम करता है.

उसका नाम रंग अण्णा है, पर सब उसे रंगना बुलाते है.

रंगना एक ठेकेदार के यहा काम करता है.
रंगना की उम्र 50 साल की हो गई है.

वह बचपन में ही घर से भाग कर एक ट्रक ड्राइवर के साथ क्लीनर का काम करने लगा था.

यह ट्रक एक लंबी दूरी वाली लाईन पर चलता था तो उस ट्रक के ड्राइवर और क्लीनर का खाना पीना सोना रहना आदि सब ट्रक में ही होता था.

उस ट्रक के ड्राइवर का नाम शेरसिंह था.
वह एक सरदार था और शेरसिंह ने ही रंगना को काम पर रख लिया था.

शेरसिंह सरदार ने ही रंगना को खाना बनाना सिखाया.
खाना बनाने के अलावा कपड़े धोना, गाड़ी की साफ सफाई करना आदि ये सब काम भी रंगना को सीखना पड़े थे ताकि ट्रक के ड्राइवर शेरसिंह का काम आसान हो जाए.

रंगना भी चूंकि घर से भागा था. उसे भी रहने खाने आदि की समस्या थी तो वह भी शेरसिंह के साथ राजी राजी सब सीखने लगा था.

काम के पैसे तो मिलते ही थे इसके साथ साथ रंगना को अलग अलग शहरों में घूमने भी मिल रहा था.
शेरसिंह सरदार भी उसे प्यार से बात करता था.

रंगना को ये काम पसंद आने लगा था.

एक रात शेरसिंह ड्राइवर अपना ट्रक लोड करके माल कहीं ले जा रहा था.

अचानक रास्ते में उसका ट्रक खराब हो गया.
आस-पास जंगल था, तो किसी भी तरह की कोई सुधरवाने की जुगाड़ नहीं थी.

रंगना के साथ ऐसी स्थिति पहली बार हुई थी तो वह घबरा गया और ड्राइवर शेरसिंह से पूछने लगा- उस्ताद अब क्या होगा?

शेरसिंह बोला- ओए कोई बात नहीं रंगा, तू खाना बना ले. आज रात यहीं रुकते हैं. सुबह देखेंगे क्या करना है.

ये बोल शेरसिंह दारू की बोतल निकाल कर पीने बैठ गया.

रंगना ने खाना बनाया, तब तक शेरसिंह भी दारू पीने में लग गया.

रंगना ने कुछ देर बाद बताया- उस्ताद खाना रेडी हो गया है!

शेरसिंह बोला- रंगा तू खाना कर सो जा, मैं पीने के बाद खाना खाऊंगा.
रंगना ने खाना खाया और गाड़ी में घुस गया.

उधर उसने पीछे की सीटी पर दोनों के लिए बिस्तर सही किया और अपनी जगह पर सो गया.

शेरसिंह ने काफी मात्रा में दारू पी ली.
उसे खासा नशा हो गया था.

उसके बाद उसने खाना खाया और सिगरेट सुलगा कर अपनी बीवी की याद करने लगा.
वह मोबाइल में एक ब्लू-फिल्म देखने लगा और लंड सहलाने लगा.

वह बहुत दिनों से घर नहीं गया था तो उसका दिल मचलने लगा था.
पर रात में जंगल में क्या करता.

वह ट्रक के अन्दर आ गया और सीट पर बैठ कर अपनी बीवी के साथ बिताए पल याद कर रहा था.

ब्लूफिल्म देखने से उसकी वासना भड़क गई थी और उसका लंड जाग गया था.

अब लंड को तसल्ली देने के लिए वह क्या करता.
या तो हाथ से मुट्ठ मारता या कोई छेद का इंतजाम होता.

तभी उसने देखा कि रंगना बेसुध सोया हुआ था.
उसकी गांड शेरसिंह की तरफ थी.

शेरसिंह की नियत रंगना पर खराब हो गयी.
वह आहिस्ता रंगना के बाजू में लेट गया और उसने रंगना की गांड को सहलाना चालू कर दिया.

रंगना कसमसाया और सीधा होकर फिर से सो गया.
अब शेरसिंह ने उसकी जांघों के पास हाथ ले जाकर सहलाने लगा.

अचानक से शेरसिंह ने रंगना की चड्डी में हाथ डाल दिया और रंगना के मुरझाये लंड को सहलाने लगा.
अंजाना स्पर्श पा कर रंगना का लंड खड़ा होने लगा.

शेरसिंह एक हाथ से अपना लंड सहला रहा था तो दूसरे हाथ से रंगना का लंड हिला रहा था.

रंगना कोई सपना देख रहा था तो उसके ऊपर भी कामुकता छाने लगी.
तभी उसकी नींद खुल गई और वह अपने उस्ताद को लंड सहलाते देख कर कामुक होने लगा.

कुछ ही देर में रंगना का रोम रोम खड़ा हो गया.

रंगना को शेरसिंह का लंड हिलाना अच्छा लगा, पर वह सोने का ड्रामा करता रहा.

दोनों के लंड खड़े हो गए थे.

फिर शेरसिंह ने आहिस्ते आहिस्ते एक एक करके उसके सारे कपड़े उतारे, फिर अपने कपड़े भी उतारे और रंगना से चिपक गया.

उसने अपनी एक टांग रंगना पर डाल दी.
रंगना पर वासना का नशा छाने लगा.

उससे रहा नहीं गया तो उसने करवट ली और वह शेरसिंह की तरफ पीठ करके सो गया.

उसकी नसों में खून तेज गति से बहने लगा था, उसका लंड तो इतना कड़क हो गया था मानो फट ही पड़ेगा.
रंगना के करवट लेने से उसकी गांड शेरसिंह की तरफ हो गयी.

शेरसिंह को तो समझो बिन मांगे मोती मिल गया था.
वह फिर से रंगना से चिपक गया. उसने अपनी जांघिया उतार दी थी तो इस बार उसका लंड सीधा रंगना की गांड से छेद को चूमने लगा था.

शेरसिंह ने रंगना की गांड की दरार को अपने हाथ से अलग की और अपने लंड को उस दरार में घुसेड़ते हुए गांड के छेद के मुख पर टिका दिया.
गर्म लंड का मुँह गांड के छेद से लगा तो रंगना को भी अनजाना सुख मिलने लगा था.

तभी शेरसिंह ने अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर रंगना की गांड के छेद में फंसा दिया.
अपनी गांड के छेद में अपने उस्ताद के लंड का स्पर्श पा कर रंगना थोड़ा सहम गया था.

रंगना के गांड का छेद ही उसे शेरसिंह के लंड का आकार बता रहा था कि सुपारा इतना मोटा है तो कितना मोटा होगा.
पर एक अनजानी खुजली रंगना की गांड में होने लगी थी.

उस्ताद के मोटे और गर्म लंड का अहसास उसे अपनी गांड पर अच्छा लगने लगा था.
वह चाह रहा था कि शेरसिंह अपने लंड का दबाव उसकी गांड पर बढ़ाए और अन्दर पेल कर उसकी गांड की खुजली मिटा दे.

उसके अन्दर गांड चुदवाने की इच्छा कब और कैसे जागृत हुई, ये रंगना को भी नहीं मालूम पड़ा.
शेरसिंह ने अपना एक हाथ रंगना की छाती पर ले जाकर उसके एक चूचुक को दो उंगलियों में में पकड़ लिया और मींजने लगा.

उसके ऐसे करने से रंगना को अच्छा लगने लगा तो उसने अपनी गांड को शेरसिंह के लंड पर रगड़ कर अपनी सहमति जता दी.
अब शेरसिंह उसके दोनों चूचुकों के साथ खेलने लगा.

कभी शेरसिंह निप्पल को पकड़ कर खींचता, तो कभी उसे अपनी दोनों उंगलियों में पकड़ कर मींजता, तो कभी अपनी उंगलियों से ऊपर नीचे करके सहलाता.
अपने उस्ताद की इस हरकत ने रंगना को और कामुक बना दिया.

वह शेरसिंह का दीवाना हो गया और पीछे को होकर वह शेरसिंह के बदन से चिपकने लगा.

कामुकता जब बढ़ती है, तब अपना बदन अपने दिमाग पर हावी हो जाता है.
सही गलत सब जायज हो जाता है.

खुद को किसी लड़की की भांति रंगना, शेरसिंह के बदन की गर्मी सोखना चाह रहा था.
रंगना चाह रहा था कि शेरसिंह उसे चोदे.

शेरसिंह ने अपने एक हाथ से उसके लंड को सहलाना चालू कर दिया.
अपने लंड पर रंगना को शेरसिंह का छूना हिलाना उसे अच्छा लगा.

रंगना भी अपनी गांड को उसके लंड पर दबाने लगा.
अब शेरसिंह समझ गया कि उसके लौड़े के लिए गांड का छेद गर्म हो गया है तो उठ गया.

उसने रंगना को चित कर दिया और उसकी छाती पर चढ़ गया.
शेरसिंह ने पहले अपना लंड रंगना के मुँह के सामने कर दिया.

उसके होंठों पर लंड रगड़ने लगा.
रंगना ने पहले तो मना किया मगर उस्ताद का मूड था तो आखिरकार उसने अपना मुँह खोल दिया और अपने उस्ताद शेरसिंह के लंड को मुँह के अन्दर ले लिया.

वह पहले तो जीभ से लौड़े के सुपारे को चाटने लगा, फिर उसे मजा आया तो वह लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगा.
कुछ ही देर में रंगना अपने उस्ताद शेरसिंह के मोटे लौड़े को ऐसे चूसने लगा था जैसे बच्चा अपनी माँ का दूध चूसता है.

शेरसिंह को भी ऐसा लंड चूसने वाला पहले बार मिला था.
कुछ देर बाद शेरसिंह उसके मुँह में लंड अन्दर तक पेलते हुए उसके गले तक घुसेड़ने लगा.

ऐसे करने से शेरसिंह का लंड रंगना के गले के अंतिम छोर तक जा घुसा.
रंगना को खांसी आयी और उसकी सांस अटकने लगी.
वह मुश्किल से शेरसिंह का लंड झेल रहा था.

इस सबसे बेखबर दारू के नशे में टुन्न शेरसिंह को झांट असर नहीं हो रहा था.
उलटे अब शेरसिंह उसके मुँह को तेज तेज रफ्तार से चोदने लगा था.

ब्लॉकक्क् ब्लूकब्क्क् की आवाज आने लगी थीं.
शेरसिंह जोश के साथ रंगना का मुँह चोद रहा था.

कुछ ही देर में रंगना का मुँह दुखने लगा था.
उसने उस्ताद की जांघ पर तेजी से थपथपाया तो शेरसिंह को समझ में आया कि रंगना को कुछ हो रहा है.

उसने अपना लंड उसके मुँह से निकाल लिया.
फिर शेरसिंह से रंगना को पलट दिया.

शेरसिंह अब रंगना के चूतड़ों पर जा बैठा.
रंगना की गांड की दरार को अलग कर उसमें शेरसिंह ने ढेर सारा थूक डाल दिया.

फिर अपने लंड को भी अपने थूक में डुबो कर शेरसिंह ने लौड़े को रंगना की न्यू गांड के छेद पर रख दिया.
फिर उसने लौड़े की कमर पकड कर लंड पर दबाव बनाया.

रंगना खुश था कि आज उसकी वासना पूरी हो रही थी. उसके छेद की खुजली मिटने वाली थी.
पर उसे आने वाले उस दर्द का अहसास नहीं था, जो उसे रुलाने वाला था.

तभी शेरसिंह ने प्रहार किया तो खुशी में मजे ले रहे रंगना की चीख निकल गई.
शेरसिंह ने रंगना की चीख की कोई परवाह किये बिना अपने लंड का एक और करारा धक्का उसकी गांड में दे मारा.

रंगना की न्यू गांड के छेद को चीरता हुआ लंड का फूला हुआ सुपारा उसकी गांड में जाकर अटक गया.

रंगना की आंख से आंसू आ गए.
वह दर्द से छटपटाने लगा ‘अम्म्मम्म्मा आआह उस्ताद दर्द हो रहा है … मेरी गांड फट गयी … आह बाहर निकालो अपना सामान … मैं नहीं ले पाऊंगा. मेरी गांड छोटी सी है … आह मर गया उस्ताद बहुत दर्द हो रहा है!’

मगर तब तक शेरसिंह का दूसरा प्रहार भी हो गया और इस बार उसका मोटा लंड रंगना की छोटी सी गांड में पूरा अन्दर पेवस्त हो गया.

रंगना की आंखें फैल गईं और उसकी पुतलियां मानो बाहर निकलने को होने लगी थीं.
वह बेहोश होने की कगार पर था.

पर शेरसिंह दारू के नशे में कसी हुई चिकनी गांड मारने के पूरे मूड में था.

शेरसिंह ने अपने मुँह से थूक टपकाया और लंड को हरकत दी.
जरा चिकनाई सी हुई और शेरसिंह रंगना की गांड को कुंवारी लौंडिया की फुद्दी समझ कर चोदने लगा.

रंगना की गांड पर लंड के फटके पड़ने लगे.
ठप्प ठप्प की आवाजें आने लगीं.

कुछ ही देर में रंगना को होश आने लगा और रंगना ऊँह आंह कराहता रहा और गांड चुदवाता रहा.
करीब 30 मिनट तक रंगना की नाजुक सी गांड की गजक के जैसी कुटाई हुई और उसकी गांड का होल फूल कर बंदर की गांड जैसा लाल हो गया था.

कुछ देर बाद रंगना को भी गांड चुदाई में मजा आने लगा था.
अब वह भी गांड उठा उठा कर अपने उस्ताद के बमपिलाट धक्के झेलने लगा था.

इस धक्कमपेली में रंगना के मुरझाये पड़े लंड ने पानी छोड़ दिया.

कुछ देर बाद रंगना ने अपनी गांड में अपने उस्ताद शेरसिंह के लंड के गर्म वीर्य को अन्दर गिरता महसूस किया.

गर्मागर्म वीर्य से उसकी सूजी हुई गांड को सिकाई का सुख मिलने लगा और वह आह आह करते हुए आंखें बंद करके मजा लेने लगा.

चुदाई से वे दोनों थक गए थे.
उसी नग्न हालत में दोनों सो गए.

दोनों को नींद कब लग गयी, कुछ पता ही नहीं चला … कब लंड गांड के छेद से बाहर आया, ये भी उन्हें मालूम नहीं हुआ था.

रात को करीब 2 बजे शेरसिंह मूतने के लिए उठा.
मूत कर आने के बाद शेरसिंग ने रंगना की गांड को देखा.

उसकी गांड से उसका खुद का वीर्य निकल कर टपका हुआ सूख गया था.
गांड का होल फैला हुआ था.

उस नंगा देख शेरसिंह के लंड ने फिर से अंगड़ाई ले ली और उसके सहलाने से जल्द ही कड़क होकर खड़ा हो गया.
फिर से एक बार सोये हुए रंगना पर शेरसिंह चढ़ गया.

उसने लंड को गांड में पेला तो रंगना आह आह करता हुआ उस्ताद का साथ देने लगा.
आधा घंटा तक गांड मारने के बाद शेरसिंह अपने मूसल से पानी निकाल कर ही अलग हुआ.

सुबह तक शेरसिंह ने रंगना को 3 बार चोदा, फिर ढेर हो गया.

शेरसिंह की आंख सुबह दस बजे ही खुली.
तभी उसने रंगना को उठाया.

रंगना लंगड़ाता हुआ उठा और डब्बा लेकर हगने चला गया.

बाद में रंगना ने उस्ताद को चाय बना कर दी.
नाश्ता दिया.

अब तो रंगना उस्ताद की सेवा ऐसे करने लगा था जैसे रंगना उसकी बीवी हो.
हालांकि रंगना की गांड में बहुत ज्यादा दर्द था, तो वह ट्रक के दवाई वाले डिब्बे से दर्द की गोली खाकर लेट गया.

शेरसिंह ने गांव में जाने की जुगाड़ देखी और वह जाकर एक मेकेनिक को बुला लाया.
तीन घंटे बाद गाड़ी ठीक हो गई.

तब तक रंगना भी सोकर उठ चुका था.
अब वे दोनों आगे चल दिए.

अब उस्ताद रोजाना रात को रंगना की लेने लगा था.
रंगना भी दर्द ज्यादा न हो, इसलिए दारू पीकर गांड मरवाने लगा था.

बाद में इस सफर से जब शेरसिंह मुंबई वापस आया तो रंगना उससे अपनी पगार लेकर काम छोड़ दिया.
बाद में वह मिस्त्री बन गया.

इसके आगे तो आप जानते ही हैं कि रंगना के जीवन में क्या हुआ.
आपको यह न्यू गांड कहानी कैसी लगी, जरूर बताएं.
धन्यवाद.
vishuraje010@gmail