Seal Chut Ki Chudai – सीलपैक बहन को खुली छत पर चोदा

Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Seal Chut Ki Chudai – सीलपैक बहन को खुली छत पर चोदा to make every night hot about Seal Chut Ki Chudai – सीलपैक बहन को खुली छत पर चोदा story.

Story Start Here :

सील चूत की चुदाई की यह कहानी है जवानी मैं कदम रखते दो जिस्मों की जिन्हें न सेक्स के कायदे मालूम थे, ना जिस्म की प्यास बुझाने की कीमत. बस पता था तो अपने जिस्म की आवाज को सुनना और एक दूसरे का हो जाना!

दोस्तो, मेरा नाम विवान मौर्या है. उम्र छब्बीस साल है. मैं दिल्ली में वीज़ा वेरिफिकेशन के लिए काम करता हूँ. मेरी स्कूलिंग भी दिल्ली में ही हुई है.
मेरा गांव बिहार में है और वहां मेरा बहुत कम ही आना-जाना होता है.

दोस्तो, जवानी में जब हम कदम रखते हैं, तो कुछ बातें ऐसी होती हैं जो हमेशा याद रह जाती हैं.
ऐसी ही अपनी कुछ यादें मैं आप लोगों के साथ साझा करना चाहता हूँ.
यादें जिन्होंने मेरे नज़रिए को पूरी तरह बदल दिया.
जिस्म और जवानी की वह आग, जिसने मुझे बिना समझे किसी अपने के इतना करीब ला दिया कि मैं खुद समझ ही नहीं पाया.

यह सील चूत की चुदाई उस समय की है, जब मैंने स्कूल की बड़ी क्लास पास की थी और घर वालों के साथ गांव जाने का मौका मिला था.

उस वक्त मैं सिर्फ़ उन्नीस साल का था.
मेरे लिए सेक्स का नाम सिर्फ अश्लील साहित्य या ब्लू फिल्म की रील ही था.

मैंने वास्तविकता अब तक सिर्फ किस्से और कहानियां पढ़ कर ही हाथ चलाया था.

ये बिल्कुल सच्ची कहानी है, इसलिए मैं इसे सच ही लिखूँगा.

गांव में मैं अपने ननिहाल गया.
मेरे लिए वहां सब कुछ नया था. भाषा, लोग, वातावरण … सब कुछ मुझे बहुत पसंद आया.

मैं सबसे मिला.

तभी मैंने उसे देखा था.
सांवली, पतली मगर बला की खूबसूरत सपना नामक लड़की.
जी हां … यही नाम था उसका.

वह मेरी दूर की मौसी की बेटी थी.

हम दोनों लगभग एक ही उम्र के थे इसलिए हमारी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई.
जल्दी ही हम एक साथ खेलने, घूमने और ढेर सारी बातें करने लगे.

क्योंकि मामा के घर में शादी थी और मैं पहली बार शहर से गांव गया था इसलिए सपना मुझसे बिना किसी रोक-टोक के मिलती थी.

हमारा रिश्ता भी दूर के भाई-बहन जैसा था तो किसी को कोई आपत्ति भी नहीं थी.
एक दिन हम दोनों खेल रहे थे.

खेलते-खेलते मैंने उसकी किताब छीन ली.
वह वापस लेने के लिए मुझसे लड़ने-झगड़ने लगी.

हम दोनों एक-दूसरे को खींचने लगे.
इसी खींचातानी में मुझे कुछ अजीब-सा महसूस होने लगा.

उसके जिस्म की खुशबू और इतने करीब होने का अहसास पाकर मेरी सांसें तेज़ हो गईं.
न जाने जवानी की झुलसन में मैंने उसके गले पर किस कर लिया.
वह मेरी ज़िंदगी का पहला किस था.

उसने भी मुझे कसकर पकड़ लिया और मैंने उसे जोर-जोर से किस करना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर बाद वह अचानक झटके से अलग हुई और गुस्से में चिल्लाई ‘कुत्ता.’
ये बोलकर वह चली गई.

मेरे लिए ये सब बहुत अजीब भी थीं और बेहद सुखद भी था.
उसकी गाली भी मुझे मीठी सी ही लगी थी.

अब जब भी हम खेलते, मैं कोई न कोई बहाना बनाकर छीना-झपटी शुरू कर देता और खेल खेल में ही हमारी चूमाचाटी चालू हो जाती.

मामा का घर काफी बड़ा था.
लोग अक्सर बाहर या बाग़ में बैठा करते थे इसलिए हमें रोज़ कुछ देर के लिए कोई न कोई कमरा खाली मिल ही जाता था.

अब तक शायद सपना को भी ये सब अच्छा लगने लगा था.
फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ, जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था.

शाम का समय था.
सब लोग छत पर ही सोते थे.

मैं सपना के बगल में लेट गया था.
धीरे-धीरे रात हो गई और सब लोग सोने लगे.

जब मुझे लगा कि अब सब गहरी नींद में हैं, मैंने सपना को देखा.
वह मेरी तरफ़ पीठ करके सो रही थी.

मैंने धीरे से उसे पलटा तो वह नींद में ही घूम गई.
अब उसका चेहरा बिल्कुल मेरे सामने था.

उसकी गर्म सांसें मैं अपने चेहरे पर महसूस कर रहा था.

फिर मैंने उसके होंठों को किस किया.
उफ्फ … उसके मुलायम रसभरे होंठ …

उसे किस करते हुए मुझे जैसे जन्नत मिल गई, बहुत ही अच्छा अहसास हुआ.
धीरे-धीरे मैंने उसके गले पर किस करना शुरू कर दिया.

फिर मैंने अपना हाथ उसके टॉप के अन्दर डाला, तो उसका पूरा बदन इतना सॉफ्ट और गर्म था कि क्या ही बताऊं!

मैंने उसके मम्मों के ऊपर कड़क हो चुके छोटे-छोटे निप्पलों को दबाना शुरू किया.
नींद में ही उसकी सिसकारियां निकलने लगीं.

धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में डाला.
जैसे ही हाथ अन्दर गया, वह एरिया इतना गर्म और गीला था कि मेरा गला सूखने लगा.

मेरे लिए ये सब बिल्कुल नया था.
धीरे-धीरे मैंने उसकी गर्म चूत के ऊपर हाथ फेरना शुरू किया.

वह बहुत ही अच्छा, बहुत ही प्यारा अहसास था.
फिर मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में घुसानी शुरू की.

क्योंकि वह बहुत टाइट चूत थी तो मुझे थोड़ा जोर लगाना पड़ा लेकिन मैंने पूरी उंगली अन्दर डाल दी.

आह्ह्ह्ह … बहुत ही टाइट चूत थी, पर पूरी गीली हो चुकी थी.
सेक्स की भूख की वजह से उसकी चुत ने रस छोड़ दिया था.

फिर जैसे ही मैंने थोड़ी और अन्दर उंगली डाली, उसने मुझे जोर से हग कर लिया.
अब मैंने उसे जोर-जोर से किस करना शुरू कर दिया, उंगली भी अन्दर-बाहर करने लगा.

लौंडिया पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी.

ऐसे ही हम दोनों पूरे नंगे हो गए.
मुझे बहुत ज़ोर की गर्मी लग रही थी.

जिस तरह वह टाइट से मुझे पकड़े हुए थी, वह भी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था

तभी मैंने अपना अंडरवियर भी उतार दिया.
अपना लंड उसकी चूत के ऊपर रखा.

मेरे लिए ये सब नया था.
मुझे पता भी नहीं था कि मुझे करना क्या है?
पर बस … जैसे वह सब अपने आप हो रहा था.

तभी सपना बोली- विवान प्लीज़ घुसा दो … अब मुझसे नहीं बर्दाश्त हो रहा है.
मैं- रुको … जा नहीं रहा है. थोड़ा सा थूक लगा लूँ.

हम दोनों को ही अंदाज़ा नहीं था कि सील चूत की चुदाई में कितना दर्द होने वाला है.
हम दोनों को ही बस घुसाने की जल्दी थी.

मैंने थूक लगाया और इस बार पूरी ताकत से घुसा दिया.

सपना- आह आह … उफ्फ़ निकालो … जल्दी निकालो मैं मर जाऊंगी … मेरी फट गई है!

क्योंकि उसकी चूत बिल्कुल सील-पैक थी और मैंने जवानी में अभी कदम ही रखा था.
उसे दर्द होना लाज़मी था.

पर मैं हटा नहीं.

थोड़ी देर बाद वह बेसुध हो गई.

मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मैंने किसी गर्म भट्टी में लंड डाल दिया हो.

मेरा पूरा लंड उसकी चूत की गर्मी में जल रहा था.
धीरे-धीरे अपने आप ही मैं लंड अन्दर-बाहर करने लगा.

सपना को भी अच्छा लगने लगा.
हमने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी

हर धक्के के बाद सपना के हाथों की पकड़ मेरी पीठ पर और टाइट हो जाती थी.

पर अचानक सपना ने नीचे से जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए.

हम दोनों खुली छत पर, चादर के अन्दर, पूरे जोश में एक-दूसरे पर धक्के लगा रहे थे.

सील चूत की चुदाई करते वक्त हमें ये अहसास भी नहीं था कि कोई भी जाग सकता है

बीस मिनट तक पूरी ताबड़तोड़ धक्कों के बाद मेरा लंड पूरा फूलने लगा.
इस बीच सपना दो बार झड़ चुकी थी

जब भी वह झड़ती, वह रोकने को कहने लगती ‘आह बस करो … अब रहने दो!’

पर थोड़ी देर बाद खुद ही गर्म होकर वह फिर जोर-जोर से धक्के मारने लगती.

इस बार मैंने पूरी स्पीड और ताकत से धक्के लगाए.
एकदम मेरी सारी बॉडी जैसे अकड़ने लगी. ऐसा लगा जैसे कोई लावा अन्दर से जोर से बाहर आने को बेताब है.
तभी मेरा पहला स्खलन हुआ, जो सपना की चूत में पूरा लबालब भर गया.
मैं सपना के ऊपर ही गिर पड़ा.

उस चांदनी रात में सपना का सांवला चेहरा पूरा पसीने से भीगकर चमक रहा था.
उसके बूब्स जो उसकी सांसों के साथ बेहिसाब ऊपर-नीचे हो रहे थे.

मात्र उन्नीस साल की, औसत सी दिखने वाली वह गांव की लड़की उस दिन पूरी पसीने से भीगकर, सेक्स की आग में तपकर कामदेवी का रूप लग रही थी.

थोड़ी देर बाद जब मैंने लंड उसकी चूत से बाहर निकाला, तो उसकी चूत से उसका पानी, खू.न और मेरे माल का मिला-जुला द्रव्य बाहर आने लगा.
पूरी चादर लाल-लाल हो गई.

वह तुरंत बाथरूम भाग गई.

तब मुझे अपने बदन पर उसके लगे ढेरों नाखूनों का अहसास हुआ.

पर जो खुशी मुझे उसके साथ पहला सेक्स करके मिली थी, उसके आगे ये दर्द कुछ भी नहीं था.

अगली सुबह सपना मुझसे बात तक नहीं कर रही थी … और ना ही वह ठीक से चल पा रही थी.

दोस्तो, ये थी मेरी पहली सेक्स की सच्ची सेक्स कहानी, जो मैंने बिना किसी बनावट के पेश की है.

इसके बाद भी बहुत कुछ हुआ … क्योंकि उस रात सपना मेरे साथ जागने वाली अकेली लड़की नहीं थी.
किसी ने देख लिया था और उस रात हुए सेक्स की मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी.

पर वह सब मैं तब बताऊंगा, अगर आपको मेरी सील चूत की चुदाई सच में पसंद आई हो तो.
आप मुझे अपनी ईमेल पर अपने सुझाव और सवाल पूछ सकते हैं.
मैं सबका ईमानदारी से जवाब दूँगा.
[email protected]