Desi Chut Xxx Kahani – बड़ी बहन की वासना जगाकर चोद दिया

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Story Start Here :

देसी चूत Xxx कहानी में मैं हॉस्टल से घर आया तो बड़ी बहन अकेली थी. वो बहुत सेक्सी थी. मेरे दिल में बहन की चुदाई का ख्याल आया और मैंने उसके जिस्म को छेड़ना शुरू कर दिया.

मेरा नाम विवेक है। उम्र 22 साल। लंबाई 5 फुट 7 इंच, बॉडी अच्छी तरह फिट – जिम जाता हूँ, MBBS की पढ़ाई कर रहा हूँ।

घर में सिर्फ़ माँ और मेरी बड़ी बहन रिया के साथ रहता हूँ।
पढ़ाई के कारण ज़्यादातर समय हॉस्टल में गुज़रता है लेकिन छुट्टियाँ मिलते ही घर लौट आता हूँ।

कॉलेज में 7 दिन की अचानक छुट्टी मिल गई।

अगले ही दिन माँ मौसी के घर चली गईं – कुछ पारिवारिक काम था।
घर में अब सिर्फ़ मैं और रिया – चार पूरे दिन और रातें।

यह देसी चूत Xxx कहानी मेरी बहन की चूत चुदाई की है.

रिया 24 साल की है।
गोरी, चिकनी त्वचा, कद 5 फुट 3 इंच।
फिगर ऐसा कि नज़र टिक जाए – 34D-28-36 … उसके स्तन भरे हुए, नरम, भारी – टी-शर्ट या कुर्ते में भी उनकी आकृति साफ़ झलकती है।
कमर पतली, कूल्हे गोल और उभरे हुए।
चेहरा प्यारा, आँखें बड़ी-बड़ी, होंठ गुलाबी।

घर में वो हमेशा ढीले-ढाले लेकिन बॉडी हाइलाइट करने वाले कपड़े पहनती है।

हमारा रिश्ता शुरू से थोड़ा अलग था।
मैं छोटा हूँ, लेकिन घर में अक्सर मैं ही ऑर्डर देता था और वो बिना ज्यादा विरोध किए मान जाती।
जैसे मैं उसका बड़ा भाई बन गया हो।

उस दिन वो घर के काम में लगी थी।
ग्रे रंग की टाइट टी-शर्ट और छोटी शॉर्ट्स। झुकते वक्त टी-शर्ट का गला नीचे सरक जाता, गहरी दरार साफ़ दिखती।
पसीने की हल्की चमक उसकी गोरी त्वचा पर।
हल्की-सी मीठी खुशबू – परफ्यूम और उसके शरीर की मिली-जुली।

मैं किचन के पास खड़ा था, नज़रें बार-बार बहन के जिस्म पर ठहर रही थीं।
मन में एक अजीब सी हलचल हुई पर मैंने खुद को समझाया और मुड़ गया।

रात हुई।
खाना खाकर हम लिविंग रूम में सोफे पर बैठे टीवी देख रहे थे।
लाइट्स कम, सिर्फ़ टीवी की नीली रोशनी।

रिया थककर सोफे पर लेट गई।
उसकी साँसें धीमी और गहरी हो गईं।
होंठ थोड़े खुले, हल्के गीले।

मैं उसके बगल में लेट गया।
उसके शरीर से निकलती गर्माहट मुझे छू रही थी।
साँसों में वही मीठी महक।

धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसके पेट पर रखा।
टी-शर्ट के ऊपर से भी उसकी त्वचा कितनी मुलायम और गर्म लग रही थी।
उसकी नींद गहरी लगी।

मैंने धीरे से टी-शर्ट ऊपर खींचा।
नाभि तक का हिस्सा खुल गया – सपाट, चिकना पेट, नाभि में छोटा-सा गड्ढा।

मेरा हाथ और ऊपर गया, ब्रा की मुलायम कपड़े तक।
ब्रा के ऊपर से ही स्तनों की भारी भरकम महसूस हो रही थी।

मैंने हल्के से दबाया।
इतने भरे हुए कि उंगलियाँ दबने पर भी फिसल रही थीं।
निप्पल्स कपड़े पर उभर आए।

मेरा मन पूरी तरह डोल चुका था।
मैं उसके ऊपर चढ़ गया।
चेहरा उसके चेहरे के बहुत करीब।
होंठ गर्म, नरम।

मैंने हल्का थूक उसके होंठों पर गिराया और जीभ से फैलाया।
फिर जोर से चूम लिया।

अचानक उसकी आँखें खुलीं।
वो घबरा गई, मुझे धक्का देने की कोशिश की।
मैं उसके कान में फुसफुसाया– रुक जा रिया… बस थोड़ा… बहुत अच्छा लगेगा… विरोध मत कर!

मैंने फिर उसके होंठ चूमे, गर्दन पर किस किया।
एक हाथ से मैं टी-शर्ट के ऊपर से स्तनों को मसलता रहा।
दूसरा हाथ मैंने उसकी शॉर्ट्स में डाल दिया।

बहन की पैंटी पर से ही गर्मी और नमी महसूस हुई।
मेरे उंगलियाँ फिसल रही थीं।

कुछ ही पल में उसका विरोध कमज़ोर पड़ने लगा।
उसकी साँसें तेज़ और गर्म हो गईं।

मैंने उसके कपड़े उतार दिए।
टीवी की मद्धम रोशनी में उसका नंगा शरीर चमक रहा था – गोरा, चिकना, पसीने से थोड़ा भीगा हुआ।

मैंने उसकी गर्दन चूमी, हल्के से काटा।
वो सिहर उठी।

फिर मैंने उसके स्तनों के बीच में दाँत गड़ाए।
वो दर्द से चीखी, लेकिन उसी में एक अजीब सा आनंद भी था।

मैंने बहन की ब्रा खोली तो उसके स्तन बाहर आए – बड़े, गोल, भारी।
निप्पल्स सख्त और भूरे।

मैंने उन्हें जोर-जोर से मसला, थप्पड़ मारे – वो लाल हो गए …चाटा, चूसा, हल्के से काटा।
वो कराह रही थी – दर्द और आनन्द की मिलीजुली आवाज थी।

मैं उसकी पैंटी उतारी।
मेरी बहन की चूत पर हल्के, नरम घुंगराले बाल।
चूत गीली, फूली हुई, गुलाबी।

मैंने अपनी जीभ बहन की बालों वाली चूत पर लगाई।
मीठा-नमकीन स्वाद।
भग को चूसा तो वो कमर उठाकर जोर से कराही।

मैंने पूछा- पहले किसी ने किया है?
उसने धीरे से कहा- हाँ…

मैं मुस्कुराया- तो फिर आज भाई तुझे और भी अच्छे से चोदेगा।

मैंने उसके बाल पकड़े, लंड उसके मुँह में डाला।
वो अपने भाई का लंड चूसने लगी।

बहन के गर्म, गीले मुँह में मैंने धक्के मारे।

फिर उसे लिटाया।
मिशनरी पोज़िशन में लंड की नोक उसकी चूत पर घुमाई।
वो खुद बोली- भाई, अंदर डाल दे… प्लीज़!

मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी चूत के अंदर किया।

दीदी की चूत ने भाई के लंड को कसकर जकड़ लिया.
गर्म, फड़कती हुई चूत त्घी मेरी बहन की.

मैंने जोर-जोर से धक्के मारे।
उसकी कराहें पूरे कमरे में गूंज रही थीं।

फिर मैं रुका, फ्रिज से बर्फ़ का टुकड़ा लाया, मुंह में रखकर निप्पल्स पर लगाया – वो ठंड से चीखी।
तब मैंने बर्फ़ को उसके पूरे शरीर पर घुमाया, फिर चूत के अंदर तक डाला।

वो काँप उठी।
मैंने तुरंत लंड उसकी चूत के अंदर डाला – ठंड और गर्मी का अद्भुत मेल।

कुछ देर बाद मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया।
उसकी गोरी गांड पर थप्पड़ मारे – चटक-चटक की आवाज़ें , लाल निशान बन गए।

मैंने जोर-जोर से चोदा।
कुछ ही मिनट में दोनों झड़ गए।

मैंने बहन की फुद्दी के अंदर ही गरम रस छोड़ दिया।
वो पूरी काँप रही थी।

फिर हम लेट गए।

उसका पसीने से भीगा नंगा शरीर देखकर मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।

इस बार वो ऊपर चढ़ी – काउगर्ल बन कर मेरे लंड की सवारी की उसने.
उसके स्तन मेरे मुँह के सामने उछल रहे थे, मैंने दबाए, चूसे।

वो लंड को चूत के अंदर निचोड़ रही थी।

फिर मैंने उसे दीवार से सटाकर पीछे से किया।
गांड मेरी जांघों से टकरा रही थी।

इस तरह से हमने कई पोज़िशन बदले।
आखिरी बार फिर मिशनरी में – दोनों एक साथ झड़े।
उसकी चूत मेरे रस से भर गई।

हम थककर सो गए।
मेरा रस धीरे-धीरे उसकी चूत से बाहर रिस रहा था – गर्म, चिपचिपा।

उस रात हमने दो बार और किया।
और हमारे पास अभी तीन दिन बाकी थे.
शायद पूरी ज़िंदगी?

ये सिर्फ़ कहानी है, वास्तविकता से इसका कोई लेना-देना नहीं।
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