Aunty Sex Kahani – होली वाले दिन दोस्त की मम्मी ने चूत दी

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Story Start Here :

आंटी सेक्स कहानी में मेरे दोस्त की मम्मी काफी सेक्सी हैं. होली वाले दिन मैं दोस्त के घर गया. लेकिन दोस्त कहीं और गया हुआ था. मैंने आंटी के साथ लंड की पिचकारी से होली खेली.

मेरे प्यारे दोस्तो, मेरा नाम मोहन है। मैं गुजरात का रहने वाला हूँ।

वैसे तो मैं फ्रीलांसर हूँ और अपना ज़्यादातर काम घर से ही करता हूँ।

आपका ज़्यादा समय बर्बाद नहीं करूँगा, सीधे आंटी सेक्स कहानी पर आता हूँ।

ये कहानी मेरी और मेरे दोस्त की मम्मी की है।
उनका नाम सुनीता है। उम्र करीब 48 साल की होगी।
फिगर एकदम भरा-भरा, ऐसा कि उन्हें देखते ही किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।

चलती हैं तो गांड मटक-मटक करती है और उनके बूबे तो कम से कम 40 के तो होंगे ही।
रंग बिल्कुल गोरा।

अब तो आप समझ ही गए होंगे कि मेरे दोस्त की मम्मी कैसी लगती हैं।

वैसे तो मैं उनकी बहुत इज्ज़त करता हूँ।
मेरे मन में उनके लिए कभी कोई गलत ख्याल नहीं था।

पर एक दिन की बात है, होली का त्योहार था।
मैं बिना बताए उनके घर गया था, अपने दोस्त के साथ होली खेलने।

पता चला कि मेरा दोस्त घर पर है ही नहीं, कहीं गया हुआ है और 1 घंटे बाद आने वाला है।

मैं तो थोड़ा उदास हो गया कि अब किसके साथ होली खेलूँगा।

तभी दोस्त की मम्मी ने कहा- उदास क्यों हो रहे हो बेटा? मैं हूँ ना! मेरे साथ ही होली खेल लो!

ये सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा।
मैंने तुरंत रंग निकाला और उन्हें लगाने लगा।

उनके चेहरे पर गुलाल रंग लगाते समय मेरे हाथों से से थोड़ा रंग उनके चूचों पर गिर गया।

मेरा ध्यान उनके वक्ष पर चला गया।
मैंने नोटिस किया कि उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी, सीधे ड्रेस पहन ली थी।
मेरी आँखें वहीं टिक गईं।

दोस्त की मम्मी ने मुझे देखते हुए पकड़ लिया और पूछा- क्या देख रहे हो बेटा?
मैं डरते हुए बोला- कुछ नहीं आंटी…

तब तक मेरी पैंट में तंबू बन चुका था।
आंटी ने पैंट के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और बोलीं- ये क्या है?

अब तो मुझे और तेज़ डर लगने लगा।
मैं काँपते हुए बोला- कुछ… कुछ नहीं आंटी…

घबराहट से मेरे पूरे चेहरे पर पसीना आ गया था।
तभी आंटी मुस्कुराईं और बोलीं- बेटा, कोई बात नहीं। आज होली है! और बिना पिचकारी के होली कैसे खेल सकते हैं?

मुझे तो लगा जैसे एक पल में जन्नत मिल गई हो!

आंटी अचानक मुझे किस करने लगीं।
मैं भी उनका साथ देने लगा।

हम लोग अभी हॉल में थे।
मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था कि कहीं मेरा दोस्त आ न जाए।

मैंने कहा- वो आ गया तो?
आंटी ने कहा- रुक, कुछ करती हूँ पहले।

उन्होंने तुरंत फोन लगाया और मेरे दोस्त को उसके मामा के घर दूसरे शहर भेज दिया ताकि वो शाम से पहले न आए।

अब आंटी मुझे पागलों की तरह किस करने लगीं।
मैं भी जंगली जानवर की तरह उन्हें किस कर रहा था।

मैंने एक हाथ से उनके बूब दबाने शुरू किए और दूसरे हाथ से उनकी गांड सहलाने लगा।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
उन्हें भी पूरा जोश था चुदने का।
मैंने देर नहीं की, उनके कपड़े उतारने शुरू कर दिए।

उनके पूरे शरीर को पागलों की तरह चूमने-चाटने लगा।

मैंने दोस्त की मम्मी के सारे कपड़े निकाल दिए। फिर उन्हें पूरी नंगी करके सोफे पर बिठाया, आंटी की टाँगें चौड़ी कीं और उनकी मस्त मुलायम चूत को चाटने लगा।

वे मादक सिसकारियाँ लेने लगीं- आह्ह… बेटा… बहुत मज़ा आ रहा है! चाटो… अपनी आंटी की ये चूत को और ज़ोर से चाटो!

ये सुनकर मुझे और जोश आ गया।
मैंने करीब 10 मिनट तक उनकी चूत चाटी।

आखिरकार उनका पानी निकल गया, साथ में सूसू भी।
दोनों का टेस्ट बहुत मस्त था!

फिर आंटी ने मुझे खड़ा किया।
मेरी पैंट खोली, लंड बाहर निकाला और मुँह में भरकर मस्त चूसने लगीं।

मुझे तो सचमुच जन्नत मिल गई लग रही थी!

वो सोफे पर बैठी-बैठी ही मेरा लंड चूस रही थीं।
मैं मज़े ले रहा था और एक हाथ से उनके बूब दबा रहा था।

तभी आंटी ने लंड मुँह से निकाला और बोलीं- बेटा, अब मत तड़पाओ! जल्दी से चोद दो मुझे!
मैंने उन्हें वही सोफे पर लिटाया, चूत पर लंड सेट किया और एक ज़ोरदार धक्का मारा।

लंड बहुत आसानी से अंदर चला गया।
मैं उन्हें जोर-जोर से चोदने लगा।
आंटी को बहुत मज़ा आ रहा था।

वो इतने जोश में थीं कि गालियाँ देने लगीं- चोद बेटा! इस रंडी को चोद! रंडी समझ के चोद! इतना चोद कि इस चूत का भोसड़ा हो जाए!

ये सुनकर मुझे और जोश आ गया।
मैं भी गालियाँ देते हुए चोदने लगा- ले मेरी रंडी! तेरे लिए ही आज ये स्पेशल लंड है! मेरी प्यारी रंडी आंटी!

करीब 15 मिनट तक चुदाई चलती रही।
वो 2 बार झड़ चुकी थीं।

फिर मैंने कहा- चलो पोज़िशन चेंज करते हैं, आप मेरे ऊपर आ जाओ!

वो तुरंत मान गईं।
अब वो ऊपर थीं, मैं नीचे।

मैंने लंड डाला और वो अपनी गांड उठा-उठाकर चुदवाने लगीं।

मैं भी गालियाँ देने लगा- चुदा मेरी राँड! बराबर से चुदा! निकाल दे अपनी चूत की गर्मी! कुतिया, तू लंड की भूखी कुतिया है! ले, अपनी हवस मिटा ले इस मोटे दमदार लंड से! अबसे रोज़ तुझे ऐसे ही चोदूँगा और तेरी चूत का भोसड़ा बना दूँगा!

ये सुनकर वो और जोश में आ गईं।
मेरे दोस्त की मम्मी ज़ोर-ज़ोर से गांड उठाकर चुदवाने लगीं।

फिर उनकी चूत का पानी निकला, साथ में पेशाब भी।
मैं आधा भीग गया, पर मज़ा बहुत आ रहा था!

अब मैंने उन्हें खड़ा किया और डॉगी स्टाइल में कर दिया।
तब मैंने पीछे चूतड़ों की दरार के बीच में से लंड डाला और जोर जोर से आंटी को पेलने लगा।
उन्हें बहुत मजा आ रहा था, वे सिस्कारियां भर कर पूरा म्जाले रही थी जवान लंड का.

कुछ देर बाद मैं भी झड़ने वाला था, तो पूछा- कहाँ निकालूँ?
उन्होंने कहा- अंदर ही निकाल दो!

मैं झड़ गया।
मैंने अपना सारा माल दोस्त की मॅाम की चूत में डाल दिया।

आंटी सेक्स करने के 2-4 मिनट तक हम दोनों ऐसे ही रहे।
फिर अलग होकर साथ लेट गए।

उस दिन कुल 2 बार चुदाई हुई।
फिर हम साथ नहाने गए।

नहाते-नहाते मैंने एक बार फिर लंड उनके मुँह में डाल दिया।
वो मज़े से चूसने लगीं।

थोड़ी देर में लंड फिर खड़ा हो गया और वही बाथरूम में एक बार और मैंने आंटी को चोदा।

नहाने के बाद आंटी बोलीं- बेटा, तेरा लंड तो वाकई बहुत मस्त है! इतनी अच्छी चुदाई करता है कि क्या बताऊँ… मैं तो तेरे लंड की दीवानी हो गई हूँ! अब जब भी मौका मिलेगा, लपककर तेरा लंड ले लूँगी। तेरे लंड ने जैसा प्यार दिया है, किसी और लंड ने नहीं दिया!

फिर मैंने उनसे प्रॉमिस लिया कि आगे जब भी मौका मिलेगा, हम ज़रूर करेंगे।
प्रॉमिस लेकर मैं अपने घर चला गया।

बस, यही थी मेरी और सुनीता आंटी की होली वाली कहानी!
आंटी सेक्स कहानी पर आप अनी राय जरूर लिखियेगा.
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