Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Hot Didi Sex Kahani – मामा की शादीशुदा लड़की को चोदा to make every night hot about Hot Didi Sex Kahani – मामा की शादीशुदा लड़की को चोदा story.
Story Start Here :
हॉट दीदी सेक्स कहानी में मेरे मामा की बेटी के पति बाहर नौकरी करते थे. एक बार मैं दीदी के घर गया तो दीदी भीगे ब्लाऊज पेटीकोट में थी. मेरा लंड खड़ा हो गया.
दोस्तो, मेरा नाम जय (बदला हुआ नाम) है.
मैं आगरा शहर का रहने वाला हूँ.
इस हॉट दीदी सेक्स कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी मामा की लड़की को चोदा.
मैं अभी सेकंड ईयर कॉलेज का छात्र हूँ और ज्यादा समय घर पर ही रहता हूँ.
मेरे घर में कपड़े सिलने का काम होता है और उसी काम की वजह से मुझे ये सुंदर मौका मिला, जिससे मैंने अपने बचपन के ख्वाब को पूरा किया.
हमारे घर पर कपड़ों का काम होने की वजह से एक दिन मामा की शादीशुदा लड़की हमारे घर आईं.
उनका नाम नेहा (बदला हुआ नाम) है और वे हमारे घर से कुछ ही दूर रहती हैं.
उनकी उम्र 35 साल है और वे एक चलता-फिरता माल हैं.
उनके मम्मे देखकर कोई भी पागल हो जाए और उनकी गांड भी बहुत बड़ी और कमाल की है.
मैं जब भी उन्हें देखता हूँ, मेरा उन्हें चोदने का मन करता है.
जब वे मेरे घर पर आईं तो मैंने उनसे चाय की पूछा तो वे बोलीं- रहने दे, बस पानी ले आ!
इतने में मेरी मम्मी आ गईं और वे दोनों आपस में बात करने लगीं.
तभी मैंने सुना कि नेहा दीदी बोल रही थीं कि घर में कुछ काम न होने के कारण वे दिन भर बोर हो जाती हैं, इसलिए वे भी चाहती हैं कि कपड़े सिलने का काम शुरू कर दें, जिससे उनका टाइम पास भी हो जाएगा.
फिर क्या था, अगले ही दिन मम्मी ने मुझे उनके घर कपड़े पहुंचाने को बोला.
मैंने भी तुरंत बाइक निकाली और उनके घर की तरफ चल दिया.
जैसे ही मैं घर पर पहुंचा तो देखा दरवाजा बंद है.
मैंने दरवाजा खोलने की कोशिश की तो वह खुल गया.
मैं जैसे ही ऊपर गया, मैंने देखा कि दीदी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थीं और उनका पेटीकोट भी पूरा गीला था.
मैंने उनसे कहा- दीदी, ये कपड़े मम्मी ने पहुंचाए हैं!
उन्होंने कहा- आ … अन्दर आ जा!
मैं अन्दर गया तो उन्होंने मुझसे चाय के बारे में पूछा तो मैंने हां कर दी.
जैसे ही वे चाय बनाने के लिए जाने लगीं, तब मैं उनकी गांड को देख रहा था.
गीले पेटीकोट में दीदी की गांड साफ चमक रही थी.
मेरा लंड मेरे अंडरवियर फाड़ कर बाहर आने की कोशिश करने लगा.
तभी मैंने उनका बाथरूम देखा तो पता चला कि उनके बाथरूम में गेट नहीं है, केवल एक पर्दा है.
मैं उनके बाथरूम में चला गया और देखा कि उनकी पैंटी वहीं पड़ी है. मैंने उनकी पैंटी उठाई और उसे सूँघने लगा.
क्या मादक सुगंध थी!
फिर मैंने अपना लंड निकाला और मुठ मारने लगा.
इतने में ही दीदी ने मुझे आवाज लगाई- जय, कहां हो?
मैंने कहा- आया दीदी!
मैंने सोचा कि आज तो मैं गया, शायद दीदी ने मुझे देख लिया है.
मैं पूरी तरह से घबरा गया और चुपचाप कमरे में बैठ गया.
कमरे में से बाथरूम साफ दिखाई पड़ता है.
थोड़ी देर में दीदी चाय बनाकर आ गईं.
दीदी ने कहा- जय, तुम बाथरूम में क्या कर रहे थे?
इतना कहते ही वे हंस पड़ीं.
मैं पूरी तरह घबरा गया.
मैंने बहाना मारते हुए कहा- कुछ नहीं दीदी, बस देख रहा था कि आपके बाथरूम में दरवाजा क्यों नहीं है!
वे बोलीं- मुझे बाथरूम का दरवाजा बंद करने पर घुटन महसूस होती है, इसलिए बाथरूम में से दरवाजा निकलवा कर रख दिया है.
यह मुझे भी समझ में आ रहा था कि दीदी के पास दरवाजा लगवाने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए वे ऐसा कह रही थीं.
भला कोई अपने बाथरूम का दरवाजा निकलवाता है.
अरे … यदि घुटन लगती है तो दरवाजा खुला छोड़ कर भी नहाया जा सकता है.
फिर मैंने सोचा कि मुझे क्या करना, जो भी उनका मन हो, उसे वे ही जाने.
मैंने अब चाय पीना शुरू की.
चाय पीते-पीते मैं उनके मम्मों को घूर रहा था.
वे भी ये सब नोटिस कर रही थीं.
इतने में ही लाइट चली गई.
नेहा दीदी कहने लगीं- पता नहीं इस लाइट को क्या बीमारी है, अभी तक मेरे सारे कपड़े भी नहीं धुले, मेरी पैंटी भी गीली है और दूसरी वाली पता नहीं कैसे गीली हो गई. अब मैं क्या पहनूँ?
दीदी के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर मेरा लंड वैसे ही सलामी दे रहा था.
इसका मतलब यह भी साफ था कि दीदी ने अभी पैंटी नहीं पहनी है.
तभी दीदी ने कहा- जय, तुम्हारे पास मोबाइल है क्या?
मैंने कहा- हां दीदी, बोलो क्या काम है?
उन्होंने कहा- उसकी टॉर्च चालू करके मुझे मेरी दूसरी पैंटी ढूँढने में मदद कर दे.
मैंने कहा- ओके.
फिर मैं उनके पीछे-पीछे टॉर्च दिखाकर चलने लगा.
मेरा पूरा ध्यान तो उनकी गांड पर था.
तभी वे एक कमरे के कोने में पहुंच गईं और वहां रखे एक बक्से में अपनी पैंटी ढूँढने लगीं.
जैसे ही पैंटी ढूँढने के लिए झुकीं, मेरा लंड उनकी गांड से सट गया.
मेरा लंड खड़ा था और इस बात का दीदी को भी अहसास था, पर पता नहीं क्यों … वे कुछ नहीं कह रही थीं.
शायद वे भी अपनी प्यास बुझाना चाहती थीं.
वे बार-बार नीचे झुककर पैंटी ढूँढतीं और मेरा लंड उनकी गांड पर रगड़ जाता.
मुझे तो बहुत मजा आ रहा था.
शायद उन्हें भी बहुत मजा आ रहा था.
वे बार-बार बोल रही थीं- इतना दूर खड़े मत हो, मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा!
इसलिए मैं भी बिल्कुल उनसे चिपक कर खड़ा था.
उनका पेटीकोट गीला होने की वजह से मेरा लोवर भी आगे से गीला हो गया था.
तभी अचानक लाइट आ गई और उन्हें उनकी पुरानी पैंटी भी मिल गई, जिसमें बहुत सारे छेद थे और वह साइड से फटी हुई भी थी.
तभी उन्होंने मुझसे कहा- तू मेरा एक काम कर सकता है क्या?
मैंने कहा- हां दीदी, आप हुक्म कीजिए!
तो उन्होंने शर्माते हुए कहा- क्या तू मेरे लिए इस वक्त एक पैंटी ला सकता है?
मैंने कहा- हां, क्यों नहीं बस आप अपना साइज बता दीजिए.
तो उन्होंने कहा कि मुझे अपने साइज का नहीं पता है, मेरे लिए पैंटी अक्सर तेरे जीजा जी ही लाते हैं. तुझे तो मालूम ही है कि वे पिछले 2 साल से बाहर काम से गए हुए हैं.
मैंने इस बात का फायदा उठाते हुए कहा- मैं आपका साइज माप लेता हूँ.
दीदी ने कहा कि मेरे पास तो मापने वाला फीता ही नहीं!
तो मैंने कहा- मैं तो हाथ से भी माप सकता हूँ.
अब वे हंस पड़ीं और बोलीं- बदमाश!
फिर उन्होंने जो किया, उससे मेरा दिमाग पूरी तरह से खराब हो गया और मेरा लंड पागल हो गया.
पहले उन्होंने मुझसे कहा कि टॉर्च बंद कर दे, मैं इसी फटी पैंटी को पहन लेती हूँ.
मैं टॉर्च बंद कर दी.
कुछ देर बाद उन्होंने टॉर्च जलवाई और मैंने देखा कि दीदी ने अपना पेटीकोट खोल दिया था.
वे मेरे सामने केवल पैंटी और ब्लाउज में थीं.
मैं उन्हें बस घूरे जा रहा था.
इतने में उन्होंने कहा- घूरना बंद कर और ये बात किसी को मत बताना, ठीक है?
मैं हां में सिर हिलाते हुए उनके पास गया और कहा- आपको कोई दिक्कत तो नहीं है?
तो उन्होंने कहा- नहीं.
यह कह कर दीदी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी कमर पर रख दिया.
मैंने भी अपना हाथ उनकी कमर के चारों तरफ घुमाया और फिर उनकी गांड पर अपना हाथ ले गया.
जैसे ही मैंने अपना हाथ उनकी गांड पर रखा.
उनके मुँह से ‘आहह’ की आवाज निकल गई और वे पूरी तरह से उत्तेजित हो गईं.
मैंने धीरे से उनके कान में कहा- अपनी पैंटी भी उतार दो ना दीदी … उससे मैं सही से आपका नाप ले पाऊंगा!
इस पर उन्होंने जो कहा, उसे सुनकर मैं इतना खुश हुआ कि आपको क्या बताऊं.
उन्होंने मादक भरी आवाज में कहा- तू ही उतार दे न … मुझे तेरे हाथ का अहसास अच्छा लग रहा है.
उनका इतना कहते ही मैंने उनकी पैंटी उतार दी और उनकी चूत पर अपना हाथ रख दिया.
दीदी की चुत पर हल्की हल्की झांटें थीं.
वह दिन मेरी लाइफ का सबसे यादगार दिन था.
मेरे हाथ रखते ही मानो उनकी वासना को जगा दिया हो.
वे पूरी तरह से मेरा साथ देने लगीं.
मैं उनकी चूत में उंगली करने लगा और आगे आकर उन्हें किस करने लगा.
थोड़ी देर किस करने के बाद मैंने उनके ब्लाउज को खोल दिया.
अब दीदी मेरे सामने बिल्कुल नंगी थीं.
उनको ऐसा देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
मैंने तुरंत ही बैठ कर उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया और वे मादक सिसकारियां लेने लगीं ‘उम्मह … आहहहह … हहह!’
उनकी मादक सिसकारियों से मेरा लंड फटने लगा.
कुछ देर बाद मैं उठ कर खड़ा हो गया और दीदी के ब्लाउज को हटा कर उनके मम्मों को मसलने लगा.
वे वासना से मुझे देखती हुई बोलीं- इनको चूसा भी जाता है मेरे छोटे भाई!
मैंने उनके एक दूध को अपने मुँह में भर लिया और निप्पल को होंठों से पकड़ कर खींचते हुए चूसना चालू किया तो वे आह आह कहती हुई मुझे अपने मम्मे चूसने के लिए उकसाने लगीं.
मैं दीदी के दोनों दूध बारी बारी से चूसता रहा और दीदी को खासा चुदास से भर दिया.
वे मेरे सर को अपने मम्मों पर दबाती हुई हाथ से मेरे लौड़े को सहलाने लगी थीं.
लंड एकदम टनटनाने लगा था और दीदी की चुत चुदाई के लिए एकदम रेडी था.
तभी दीदी नीचे बैठीं और उन्होंने मेरा लोवर उतार दिया.
मैं कुछ समझ पाता कि दीदी ने मेरे लंड को पूरा मुँह में ले लिया और एक बच्चे की तरह चूसने लगीं.
थोड़ी देर लंड चूसने के बाद वे बोलीं- जय, अब और न तड़पा … मेरी इस चूत की आग को जल्दी से बुझा दे!
मैंने भी देर न करते हुए उन्हें बेड पर लिटा दिया और अपना 6 इंच का लंड उनकी चूत में सैट कर दिया.
मेरा लंड एक बार में ही पूरा अन्दर चला गया और उनकी दर्द के मारे चीख निकल गई- उई माँ मर गई … मार दिया साले तूने मुझे आज तो … आह.
फिर मैंने उन्हें चोदना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर बाद उनका दर्द कम हुआ और अब वे भी अपनी गांड उठाकर मुझसे चुदने लगीं.
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद उनकी चूत में से पानी आ गया और वे झड़ गईं.
हॉट दीदी सेक्स करके मेरा भी झड़ने वाला था.
दो मिनट बाद मैं भी झड़ गया.
फिर हम दोनों बेड पर पड़े-पड़े एक-दूसरे को किस करने लगे.
करीब आधा घंटा तक किस करने के बाद उन्होंने कहा- जय, आज तूने मेरी चूत की प्यास को बुझा दिया … आज से मैं तुझसे ही चुदूँगी!
मैंने भाषा बदलते हुए कहा- आज से तू मेरी रंडी है.
वे हंस कर बोलीं- तो अपनी रंडी के लिए पैंटी ले आना.
मैंने कहा- ओके चार ले आऊंगा कल … लेकिन जब मैं आऊं तो पैंटी उतारनी होगी.
वे हंस दीं.
उन्होंने मुझे किस किया और मैं अपने घर आ गया.
तब से हमें कभी भी मौका मिलता, तब हम बहुत चुदाई कर लेते.
हॉट दीदी सेक्स कहानी आपको कैसी लगी?
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