Xxx Stranger Sex Kahani – ट्रेन में मस्त मर्द संग गे सेक्स का मजा

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Story Start Here :

Xxx स्ट्रेंजर सेक्स कहानी में मुझे मर्दों से गांड मरवाना पसंद है साथ में गांड मारना भी. एक बार मुझे ट्रेन फर्स्ट एसी में दो यात्रियों वाला केबिन मिला. मेरा सहयात्री तमिल, भरे पूरे बदन वाला था.

मेरा नाम संजय है. मेरी उम्र 48 साल है.
गदराया हुआ मस्त मर्दाना जिस्म.

मुझे हमउम्र झबरीले मर्द पसंद हैं.
उनकी बगलों की झांट सरीखे बाल सूंघकर मैं दीवाना हो जाता हूं.

मुझे सेक्स में सब पसंद है … जैसे लंड चूसना भी और लंड चुसवाना भी.
गांड मरवाना भी और गांड मारना भी.

वैसे तो हमउम्र के साथ ज्यादा मजा आता है, पर सेक्स में कोई भी मिल जाए … तो मजा लेने में कोई कसर नहीं छोड़ता हूँ!

Xxx स्ट्रेंजर सेक्स कहानी में एक बार मुझे ट्रेन से केरल का सफर करने का मौका मिला.
फर्स्ट एसी में बुकिंग करवाई तो दो यात्रियों वाला केबिन मिला.

सफर भी लंबा था.
मैं तो आ गया था, पर सहयात्री नहीं आया था.
सोचा कि शायद कुछ स्टेशन बाद आए.

रात के 8 बज गए.
टीटी भी आ गया और मेरा टिकट चेक कर ही रहा था कि सहयात्री भी आ गया.
थैंक गॉड!

ये तो 35 साल का दक्षिण भारतीय, भरे-भरे जिस्म का मालिक था.
गहरा तांबई रंग, घुंघराले बाल मस्त थे और बिखरे हुए थे.
एकदम मस्त माल था.

उसकी सफेद आधी बाजू की शर्ट के तीन बटन खुले थे और छाती के घुंघराले बाल गजब के थे.
मेरी पैंट में हलचल होने लगी.

टीटी ने लगे हाथ उसका भी टिकट चेक कर लिया और हमें गुड नाइट बोलकर चला गया.

वह अपना सामान ऊपर की बर्थ पर लगाने लगा तो मैं उसकी सहायता करने लगा क्योंकि मैं उसे करीब से सूंघना चाहता था.
वह मुझसे इम्प्रेस्ड हो गया.

शायद उसने तेज कदमों से ट्रेन पकड़ी थी तो उसके जिस्म से आ रही मर्दानी महक मुझे बहुत अच्छी लगी.
इस स्मेल का मैं दीवाना हूं!

मैंने उसे अपने पास बिठाया और पानी पीने को दिया.
अब तो वह मुझ पर फिदा हो गया था.

बस अब ऊपर वाले से यही दुआ थी कि काश इसे भी मर्द पसंद हों, तो सफर का मजा आ जाएगा.

वह बिल्कुल मेरी पसंद का मर्द था!

हमने एक-दूसरे को अपना परिचय दिया.
उसका नाम रमेश रामलिंगम था, वह बिजनेस टूर से वापस लौट रहा था.

दस बजे डिनर भी आ गया.
अब वह थोड़ा खुल गया था तो हम दोनों ने साथ में डिनर किया.

क्योंकि वह काफी समय टूर पर रहता था इसलिए उसकी हिंदी काफी अच्छी थी.
फिर हम लोग इधर-उधर की बातें करने लगे.

फिर उसने शराब की बोतल निकाल ली और मुझसे भी पूछा.
मैंने कहा कि मैं शराब नहीं पीता, ना ही चाहता हूं कि मेरा हमसफर शराब पिए.

उस पर मेरी बात असर कर गई और उसने बोतल वापस रख दी.

उसने कहा- उसे इतनी कम चौड़ी बर्थ पर नींद नहीं आएगी!
यह कह कर उसने अपने बैग से कुछ निकाला और एक छोटी सी मोटर से जोड़ा और ट्रेन के स्विच से उसे फुला लिया.
अरे ये क्या … ये तो एयर मैट्रेस (बिस्तर) बन गया. अब वह आराम से उस पर लेट गया.

मैंने पूछा कि क्या ये आरामदायक है?
तो वह बोला- आओ, बैठ जाओ और महसूस करो!

मैं भी उसके पास, उससे सटकर बैठ गया.

फिर मैं लेटकर देखने लगा.

उसने कहा- अगर अच्छा लग रहा है तो यहीं लेट जाओ … मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

फिर उसने अपनी शर्ट उतारी और मुझसे कहा- यार, मुझे सिर्फ अंडरवियर में सोने की आदत है, तो क्या आपको कोई प्रॉब्लम तो नहीं?

ये लो नेकी और पूछ-पूछ!
मैं तो खुद उसे बिना कपड़ों के देखना चाहता था.

मेरे हां कहने पर उसने पैंट भी उतार दी.
उसने स्किन-फिट फ्रेंची पहन रखी थी, जिससे उसका सुस्त पड़ा लंड भी खूब उभरकर आ रहा था.

उसके पूरे जिस्म पर घने बाल थे, मेरे तो मुँह में पानी आ गया.
दिल कर रहा था अभी मसल डालूँ साले को, पर मैंने कंट्रोल कर लिया.

मैंने भी कपड़े उतारे क्योंकि मैं अंडर गारमेंट्स नहीं पहनता.
मुझे नंगा देखकर उसकी आंखों में चमक आ गई.
मैं तो यही चाहता था.

पर मैंने टॉवल निकाला और लपेट लिया और उससे पूछा कि मेरे ऐसे लेटने से कोई प्रॉब्लम तो नहीं?
वह मुस्करा कर बोला- यार, आपकी बॉडी तो बहुत मस्त है!

मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई.
शायद वह मेरे लंड को देखकर मस्त होने लगा था क्योंकि उसकी फ्रेंची का उभार बड़ा होने लगा था.
मैं सोने का नाटक करने लगा.

थोड़ी देर में मैंने जानबूझ कर अपना टॉवल ऐसे हटा दिया जैसे मैं नींद में हूँ और मुझे पता ही नहीं.
मुझे नंगा देख वह भी उत्तेजित होने लगा क्योंकि मेरा लंड खड़ा होने लगा था.

मैंने हल्की सी पलक खोलकर देखा तो उसका लंड भी उसके अंडरवियर को फाड़कर बाहर आने को तैयार था.

वह अपने अंडरवियर में हाथ डालकर अपने लंड को मसलने लगा.

मैंने ऐसे करवट ली कि मैं उससे चिपक सा गया.
मेरा लंड उसकी जांघ पर टिक गया था.

अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था … उसने अपना अंडरवियर उतार दिया और मुठ मारने लगा.

मैंने उसके कान में कहा- मैं हेल्प करूँ?
वह झेंप गया और बोला- यार, आप जाग रहे हो!

मैंने कहा- इतना मस्त मर्द पास में हो तो किसे नींद आएगी!
यह कह कर मैंने उसका लंड पकड़ लिया.

वह कसमसाने लगा.

वह कमर के बल लेटा था … मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके सुलगते होंठों पर अपने होंठों को रख कर उसे चूमने लगा.

अब वह पूरी तरह से अंगारा बन गया था और मेरे होंठों को फिर मेरी जीभ चूसने लगा.
मेरी पीठ को नाखूनों से कुरेदने लगा और कभी मेरी गांड की नोंचता तो कभी हाथ से सहलाता.
अब उसने अपनी टांगें भी मेरी गांड पर लपेट लीं और बदहवास हो गया.

मैं उसके जिस्म से खेलने लगा … उसके कानों को चाटने लगा.
वह पागल सा हो गया और मुझे भींचने लगा.
हम दोनों के लौहलाट लंड एक-दूसरे से रगड़ खा रहे थे.

अब मैंने उसके हाथों को ऊपर किया और उसकी बगल में अपना मुँह डाल दिया और मदहोश हो गया.

सच में यार .. क्या माल था!

मैंने चाट-चाटकर उसके बगल की झांटों को तर कर दिया.

अब मैंने अपने हाथ ऊपर करके अपनी बगल उसके मुँह पर रख दी.
वह अपनी नाक को मेरी बगल में उगी झांटों में रगड़ने लगा और मस्ताने लगा.

वह बोला- यार, इतना नशा तो दारू की बोतल में भी नहीं होता … जितना आपकी बगल की झांटों में है. अगर ऐसा मर्द रोज मिल जाए तो दारू छोड़ दूँ!
मैं हंस दिया.

फिर मैं नीचे आने लगा और उसके काले निप्पलों की गांठ को जीभ से सहलाने लगा … फिर उसका पूरा निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा.
वह बुरी तरह से तड़पने लगा और बोला- आज मिला है जानलेवा मर्द … आह यार, मेरी जान ले लो और ये रात इतनी रंगीन कर दो कि उम्र भर याद रहे!

मैं उसके एक निप्पल को चूस रहा था और दूसरे को हाथ से मसल रहा था.
मेरा कड़क लंड उसकी जांघों के बीच रगड़ खा रहा था.

जब मैं उसके निप्पल को दांतों से काटता, तो वह तड़प जाता और मेरा सिर अपनी छाती पर जोर से दबा देता.

अब मैं और नीचे आ गया और उसके पेट को चूमने लगा और धीरे से नीचे सरक कर उसकी काली घनी झांटों में नाक लगा दी.
आह क्या मस्त झांटें थीं यार … इस जंगल में मेरा दिल खो गया और उसकी मस्त झांटों के बीच तनकर खड़ा उसका मस्त-मस्त कत्थई रंग का लंबा मोटा लंड मुझे चुदास से भरने लगा.

उसका लंड इतना मोटा था कि मेरा अंगूठा और तर्जनी आपस में आसानी से नहीं मिल पा रही थीं.
मैं मस्त होकर दोनों हाथों से उसका मुठ मारने लगा.
वह बोला- ऐसे ही माल निकाल दोगे या इसका स्वाद भी लोगे? मुँह में लेकर देखो … ऐसा लौड़ा नहीं चूसा होगा कभी!

सही बात है, इस मस्त लौड़े को पहली बार हाथ लगा था.
पहले मैंने उसका सुपारा जीभ से तर कर दिया.
अब उसका सुपारा उबले सिंघाड़े की तरह चिकना होकर चमक रहा था.

मैं बदहवास उसका लंड चूसने लगा और वह अपने हाथों से मेरा सिर अपने लौड़े पर दबाने लगा था जिससे उसका लंड मेरे हलक तक घुस गया.
मैंने तड़प कर उसका लंड मुँह से बाहर निकाला और चाटने लगा. वह मेरे आंडों को सहलाने लगा.
उसके आंड बहुत बड़े थे और खूब झांटदार.

फिर उसने मेरी गांड चाटने की ख्वाहिश जताई.
मैं उसका लंड चूसते हुए घूम गया.
अब मेरी गांड उसके मुँह पर थी.

वह पागलों की तरह मेरी गांड चाटने लगा.
मेरी गांड आग उगलने लगी थी.

वह कभी अपनी उंगली से और कभी अपनी जीभ से मेरी गांड के छेद को कुरेदने लगा.

मैं उसका लंड अपनी भट्टी बन चुकी गांड में जल्दी से घुसा लेना चाहता था.
इसलिए मैं घुटनों के बल उसके गर्मा कर लोहा हो चुके लंड पर बैठने लगा और अपने हाथ से उसका लंड अपनी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगा.

आह इतना मोटा लंड … आज तो जरूर फट जाएगी मेरी!

Xxx स्ट्रेंजर सेक्स करते हुए अभी सिर्फ सुपारा ही अन्दर घुसा था कि मुझे तेज दर्द होने लगा.
मैं थोड़ा सा रुका और उसे चूमने लगा और उसके निप्पलों को मसलने लगा.

उसने कामोत्तेजित होकर आंखें बंद कर लीं.

फिर मैंने जोर लगाकर अपना सारा भार उसके लंड पर डाला तो उसका आधा लंड अन्दर घुस गया.
मैं दर्द से बिलबिला उठा तो मैंने झट से उसका लंड बाहर निकाल लिया.

वह बोला- डार्लिंग, ऐसे कैसे काम चलेगा? मजा लेना है तो दर्द भी सहना पड़ेगा!

उसने अपने एक बैग की तरफ इशारा किया- बैग की पॉकेट से फेस क्रीम निकाल लो!

मैंने क्रीम निकाली और खूब सारी उसके लंड पर लगाई और अपनी गांड में भी.

अब मैं फिर से उसके लौड़े पर बैठ गया और अपनी गांड को उसके लंड के सुपारे पर दबाने लगा.
क्रीम काम कर गई और एक झटके में सारा लंड अन्दर चला गया.

अब मैं ऊपर-नीचे मूव करके जन्नत के मजे लेने लगा.
ऐसा लगने लगा जैसे मैं उसके लंड के हवाई जहाज पर सवार होकर सातवें आसमान में उड़ रहा हूँ.

आज इस लंबे मोटे लंड ने मेरी गांड इतनी खोल दी कि अब छोटे-पतले लंड तो यूँ ही अन्दर सट्ट से घुस जाया करेंगे.

फिर उसने कहा कि वह मेरे ऊपर चढ़कर मेरी गांड मारना चाहता है, सो अब मैं पीठ के बल लेट गया.
उसने मेरी टांगें ऊपर कर दीं.

पहले मेरे आंडों को चूसा और फिर गांड चाटने लगा और धीरे से सुपारा गांड के होल में अन्दर कर दिया.
फिर एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर घुसेड़ दिया … आह मैं दर्द से तड़प उठा.

वह थोड़ा सा रुका, फिर आराम से अन्दर-बाहर करने लगा.
मैंने उसके चूतड़ों को अपने हाथों में ले लिया और चोदने में उसकी हेल्प करने लगा.

वह बार-बार सुपारे को छोड़कर बाकी लंड बाहर निकालता, फिर अन्दर कर देता.

मैं चरम आनन्द की नदी में गोते लगाने लगा.
काश वह पूरी रात ऐसे ही अन्दर-बाहर करता रहे!

कुछ पल बाद वह रुका और आगे झुककर मेरे होंठों को चूसने लगा.
फिर बारी बारी से मेरे दोनों कानों की लौ को चाटने लगा.

वह कभी मेरे कान की लटकन को चूसता और कभी काटता और साथ ही साथ मेरे निप्पलों को भी मसलता.
मैं कामोत्तेजना के चरम पर था.

वह जल्दी नहीं झड़ना चाहता था, सो बार-बार रुककर ऐसा ही करता.
लगभग 15 मिनट बाद उसने जोर-जोर से धक्के मारे और उसका ज्वालामुखी मेरी गांड में फूट गया.
उसके लंड की पिककारी की तेज धार से उसका सारा लावा मेरी गांड के बहुत अन्दर तक चला गया.

माल निकालने के बाद भी उसने 4-5 झटके मारे और अपना लंड निकाल कर मेरे मुँह में दे दिया, जिसे मैंने चाटकर साफ कर दिया.
बड़ा ही मजेदार माल था.
मैंने उसकी आखिरी बूंद तक चाट ली.

उसने फिर से मेरी टांगें उठाईं और मेरी गांड से बाहर आ रहे अपने वीर्य को चाट-चाटकर मेरी गांड बिल्कुल साफ कर दी.
अब वह मेरे ऊपर लेटा था और मेरे होंठों को चूस रहा था.

फिर वह मेरे दोनों निप्पलों को बारी बारी से चूसता हुआ मेरे लंड तक पहुंच गया और मेरे आंडों को मसलते हुए मेरे लंड की मुठ मारने लगा.

फिर उसने मेरा लंड मुँह में ले लिया और जड़ तक निगल लिया.
मैं अपने लंड के सुपारे पर उसके हलक की मांसपेशियों की रगड़ महसूस कर रहा था.

सच में मस्ती का आलम यह था कि मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगा था.

फिर वह पंजों के बल मेरे लोहा हो चुके व उसकी लार से तरबतर हुए लंड पर बैठ गया और अपनी गांड मेरे लंड पर दबाने लगा.

हल्की फच्च की आवाज के साथ मेरा लंड उसकी गांड में घुस गया.

पर मुझे ऊपर चढ़कर चोदने में मजा आता है तो मैंने उसे पीठ के बल लेटने को कहा.
वह चित हुआ तो उसकी टांगें ऊपर उठा लीं और उसकी काली-काली घनी झांटों से घिरी लाल हो चुकी गांड को चाटने लगा.
उसकी गांड का मुँह बार-बार सिकुड़ता और फैलता.

जैसे ही उसकी गांड फैलती, मैं उसमें जीभ घुसा देता जिसे वह गांड सिकोड़कर अन्दर खींच लेता.
फिर मैंने उसकी गांड को अपनी लार से तर किया और अपना लौड़ा अन्दर करने लगा.
दो धक्कों में ही पूरा लंड अन्दर चला गया.

उसने अपने पैर मेरे कंधों पर रख लिए और जोर-जोर से सिसकारियां भरने लगा.
बीच-बीच में जब मैं उसके पैर का तलवा चाटता तो वह बुरी तरह से कसमसाता जाता.

बार-बार मैं रुककर उसे चूमने लगता क्योंकि मैं भी जल्दी नहीं झड़ना चाहता था.
कभी उसके कान पर काटता, कभी निप्पल पर.
हम दोनों ही अब कामसागर में डूब चुके थे.

उसकी इच्छा थी कि मैं उसके मुँह में माल छोड़ूँ.
जब काफी देर हो गई तो मैं अपने घुटनों पर बैठ गया और वह मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगा.

उसने मेरी गांड अपने हाथों से अपने मुँह पर दबानी शुरू कर दी, जैसे वह मेरा पूरा लंड खा जाना चाहता हो.
मेरा लंड उसके हलक में रगड़ खा रहा था.

मैंने 4-5 पिचकारियां उसके हलक में दे दीं और सारा वीर्य उसके हलक में उतार दिया.

वह मेरा लंड छोड़ने को तैयार नहीं था.
झड़ जाने के बाद जब मेरा लंड बिल्कुल ढीला हो गया, तभी छोड़ा.

हम बाकी रात ऐसे ही नंगे, एक-दूसरे से लिपट कर सोते रहे.
सुबह उठकर फिर से 69 की पोजीशन में लेटकर ओरल सेक्स किया, एक-दूसरे के मुँह में लंड झाड़े.

थोड़ी देर में स्टेशन आने वाला था.
दोनों ने सामान इकट्ठा किया.

हम दोनों ने एक-दूसरे से कॉन्टैक्ट नंबर शेयर किए.
उतरते हुए हमने एक लस्टी सा किस किया और अपनी-अपनी राह चल दिए.

यह गे सेक्स कहानी मुझे अभी भी मजा दे रही है.
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