Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Anal Sex Training – मैं चचेरे भाई की बीवी बन गया to make every night hot about Anal Sex Training – मैं चचेरे भाई की बीवी बन गया story.
Story Start Here :
एनल सेक्स ट्रेनिंग दी मैंने अपने चचेरे भाई के दोस्त की बीवी को. उसे गांड मारना पसंद था और मैं बॉटम गांडू हूँ. उसे मेरे बारे में पता चला तो उसने मुझे गांड मरवाना सीखा.
हैलो फ्रेंड्स,
इस कहानी के दूसरे भाग
मैंने अपने चचेरे भाई से शादी कर ली
में अब तक आपने पढ़ा था कि राहुल अपने चचेरे भाई वसंत के साथ दो बेडरूम के फ्लैट में रहता था.
इस कहानी का लेखक राहुल एक बॉटम था. जब ये बात वसंत को पता चली, वसंत राहुल की गांड मारने लगा.
दोनों को नौकरी मिलने के बाद राहुल ने लड़कियों के कपड़े पहने, वसंत ने उसकी मांग में सिंदूर भरकर शादी कर ली.
दोनों पति-पत्नी की तरह रहते.
हर शनिवार राहुल लड़कियों के कपड़े पहनता, दोनों शराब पार्टी करते, फिर जम कर संभोग.
बाक़ी दिन भी दोनों मज़े करते.
राहुल की यह एनल सेक्स ट्रेनिंग की गे सेक्स कहानी आप राहुल की ज़ुबानी ही सुनें.
फ्रेंड्स, मैं राहुल … मेरे पति वसंत के मामा की बेटी की शादी दूसरे शहर में तय हुई थी.
इसलिए वसंत ने चार दिन की छुट्टी ली और शादी में चला गया.
उसने लौटकर बताया कि उसके मामा के लड़के मनोज से मुलाक़ात हुई थी. वह हमारे शहर में दुकान चलाता है.
मुझे मालूम हुआ कि मनोज वसंत से तीन साल बड़ा है. वह इसी शहर में अपनी पत्नी स्वाति और मां के साथ रहता है. उसका तीन साल का एक बच्चा भी है.
जब वसंत ने बताया कि वे लोग हमारे घर रविवार दोपहर आएंगे तो मैंने उनके स्वागत की तैयारी शुरू कर दी.
मैंने रविवार को उनके लिए खास खाना बनाया.
मनोज स्वाति भाभी के साथ आया.
वसंत ने मेरा परिचय कराया.
हम बैठकर बातें कर रहे थे.
स्वाति भाभी गेहुंए रंगत की, भरे शरीर की सुंदर हँसमुख महिला थीं.
थोड़ी देर बाद मैं उठा और कहा कि मैं खाना लगाता हूँ.
यह कहकर मैं किचन में आ गया.
स्वाति भाभी मेरे साथ किचन में गईं.
हम दोनों ने खाना टेबल पर लगाया.
मैं वसंत व मनोज को बुलाने गया.
मनोज वसंत से कह रहा था- वसंत, कब तक अकेला रहेगा? तेरे पिताजी कह रहे थे तेरे लिए लड़की ढूँढने को. मेरी एक साली है … देख ले यह उसकी फ़ोटो है!
ये कहकर वह अपनी साली की फ़ोटो मोबाइल पर दिखाने लगा.
वसंत बोला- मैं शादी नहीं करूँगा!
मैंने भी अपने घर में बोल दिया था मैं शादी नहीं करूँगा.
खाते समय मनोज बोला- खाना अच्छा है!
स्वाति भाभी ने भी मेरे बनाए खाने की तारीफ़ की.
मुझे और वसंत को मनोज ने अगले हफ़्ते डिनर पर बुलाया.
भाभी ने कहा- आपने अच्छा खाना बनाया था. मेरा शायद उतना अच्छा नहीं बना होगा!
हम दोनों ने कहा- नहीं भाभी, आपका खाना भी बहुत अच्छा बना है.
मनोज की मां और मनोज का बेटा सोने चले गए.
मनोज ज़्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था, थोड़ा अक्खड़ था.
मनोज वसंत से बचपन की बातें कर रहा था.
मैं भाभी के साथ अलग बैठकर खाना और अच्छा कैसे बनाते हैं, यह सब सीख रहा था.
उधर से वापस अपने फ्लैट में आकर हम दोनों ने गांड चुदाई का मजा लिया और सो गए.
फिर एक शनिवार को मैं लड़कियों के कपड़े पहन कर सजकर वसंत के साथ शराब पार्टी की तैयारी कर रहा था.
तभी दरवाज़े की घंटी बजी.
मैंने बेडरूम में जाकर दरवाज़ा बंद कर लिया.
मैंने सुना वसंत किसी से बात कर रहा था.
वसंत ने मुझे आवाज़ लगाई- मनोज आया है!
मैंने जल्दी से लड़कियों के कपड़े उतारे, मेकअप धोया, फिर लड़कों के कपड़े पहन कर बाहर आया.
मनोज ने बताया- उसके इलाक़े की सब दुकानें किसी कारण जल्दी बंद करनी पड़ीं.
वह बियर की बोतलें लाया था.
उसने कहा कि आज पार्टी करते हैं!
मैंने दो गिलास टेबल पर रखकर कहा- मैं डिनर बनाता हूँ, तुम लोग पियो!
थोड़ी बियर पीने के बाद मनोज उठा और ‘बाथरूम जाकर आता हूँ’ कहकर बाथरूम में घुस गया.
बाथरूम में मैंने लड़कियों के कपड़े टांग रखे थे.
मनोज बाथरूम से वापस आकर बैठ गया.
मनोज- वसंत, अब समझ आया तुम शादी से क्यों मना कर रहे थे. मैंने बाथरूम में लड़कियों के कपड़े देखे हैं. तुमने बताया नहीं कि तुम्हारी गर्लफ़्रेंड है और तुम उसके साथ मज़े कर रहे हो! हमें भी उससे मिलाओ. यदि तुम गर्लफ़्रेंड के बारे में अपने पिताजी को बताने में झिझक रहे हो, तो मैं उन्हें बता दूँगा. फ़िक्र मत करो!
वसंत कहने लगा- मेरी गर्लफ़्रेंड नहीं है पिताजी को मत बताना प्लीज!
मनोज अक्खड़ था, ऊपर से पिए हुए था.
वह अड़ गया.
हारकर वसंत ने मनोज को बता दिया कि वह और मैं पति-पत्नी की तरह रहते हैं और रहेंगे.
मनोज- मतलब तुम राहुल की गांड मारते हो?
हम दोनों चुप रहे.
वह आगे बोला- मेरी किस्मत इतनी अच्छी नहीं है. मेरी पत्नी गांड मारने नहीं देती. मैंने एक बार कोशिश की थी मगर वह दर्द से बहुत रोई-चिल्लाई, तो मैं मन मार कर रह गया था. दो दिन उसकी हालत ख़राब रही. उसके बाद मैंने कोशिश नहीं की. मेरी गांड मारने की बहुत इच्छा है. यदि तुम मुझे राहुल की गांड मारने दो तो मैं तुम्हारे पिताजी को कुछ नहीं बताऊंगा!
मैंने सब बातें किचन से सुनीं.
खाने के बाद मनोज जाते समय बोला- राहुल से बात कर, मेरी बात का जवाब देना!
मनोज के जाते ही वसंत ने मुझसे पूछा- अब क्या करना है? तुमने तो सब सुना है?
हमने आपस में बात करके तय किया कि मुझे राज़ी हो जाना चाहिए. नहीं तो मनोज हमारी बदनामी करेगा और घर वाले हमें अलग कर देंगे.
वसंत ने मनोज को फ़ोन पर कहा कि वह टूर पर जा रहा है, तब मनोज आ सकता है.
वसंत के टूर पर जाते ही उसी शाम मनोज ने फ़ोन कर मुझसे कहा- रात को 9 बजे मैं आ रहा हूँ!
मैंने सावधानीवश गांड के अन्दर वैसलीन लगा ली थी.
मनोज आते ही पैंट उतारकर बोला- मेरा लंड चूस!
मैं घुटनों पर खड़ा होकर उसका लंड चूसने लगा.
उसका लंड खड़ा हो गया.
उसका लंड वसंत के लंड से मोटा था
मनोज- अब मैं तेरी गांड मारूँगा, लेट जा!
मैंने पेट के बल लेटकर अपने कूल्हे फैला दिए.
मनोज मेरे ऊपर चढ़कर मेरी गांड मारने लगा.
मुझे दर्द हो रहा था, मैं ‘आआ’ कर रहा था.
मुझे जोश नहीं आ रहा था, तो मेरा लंड खड़ा नहीं हुआ.
वसंत के साथ यौन क्रीड़ा से मेरा लंड खड़ा हो जाता था और गांड मरवाने की इच्छा होती थी.
मनोज ने मुझे घोड़ी बनाया.
उसने देखा कि मेरा लंड मुरझाया हुआ है.
मनोज- गांडू, तेरा खड़ा नहीं होता क्या?
मैं चुप रहा.
वह गांड मारने लगा, कूल्हों पर थप्पड़ मारने लगा.
कुछ देर में मनोज झड़ गया.
फ्लैट से जाते समय वह बोला- मैं रविवार दोपहर को आऊंगा! रेडी रहना.
रविवार मनोज आया.
लंड चूसने के बाद मैंने कहा- लंड पर तेल लगा देता हूँ!
यह कहकर मैंने उसके लंड पर तेल लगा दिया.
मनोज गांड मारकर चला गया.
मैंने देखा- किचन में चिकन रखा है.
मुझे लगा मनोज लाया है.
अगली शाम स्वाति भाभी मेरे घर आईं.
आते ही बोलीं- देवर जी, तुम तो मेरी सौत बन गए! मैंने कल चिकन पकाया था तो मनोज ने कहा कि राहुल को भी दे दो, वह अकेला है. तुम्हारे घर की एक चाबी हमारे पास है.
हम दोनों ने ही मनोज को चाबी दी थी.
स्वाति भाभी ने बताया- मैंने उसी चाबी से दरवाज़ा खोला और देखा कि मनोज तुम्हारे पिछवाड़े पर चढ़ा हुआ है. मैं चिकन रखकर चली गई. तुम्हें दर्द नहीं होता? क्या मज़ा आता है? तुम इसके लिए राज़ी कैसे हो गए?
मैं- भाभी, आप शांति से बैठो. मैं आपको सब बताता हूँ!
वे मुझे सुनने लगीं.
‘मैं और वसंत पति-पत्नी की तरह रहते हैं. मैं पत्नी और वसंत पति. वसंत मुझे पत्नी के समान प्यार करता है. यौन क्रीड़ा के समय मुझे चूमता है, मेरी छाती दबाता है आदि आदि.’
भाभी हैरानी से सुन रही थीं.
‘उस समय मैं मन से लड़की बन जाता हूँ. जब हम दोनों गर्म हो जाते हैं, तो हम संभोग करते हैं. हम दोनों को मज़ा आता है.’
‘हम्म …’
‘हां भाभी … फिर ये बात मनोज को पता चली, जब उसने मेरे लड़कियों वाले कपड़े बाथरूम में देख लिए. मनोज मेरे साथ सोने की ज़िद करने लगा. हमें डर था कि यदि मैं राज़ी नहीं हुआ तो वह ये बात हमारे घर में बता देगा!’
‘हम्म …!’
‘मैं आपको इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि मुझे विश्वास है कि आप ये बात किसी को नहीं बताओगी!’
भाभी बोलीं- तुम्हें दर्द नहीं होता?
मैं- मुझे दर्द नहीं होता क्योंकि मैंने अपनी गांड को संभोग के लिए तैयार किया है. पर मुझे मनोज के साथ अच्छा नहीं लगा. वह आते ही लंड चूसने को कहता है, फिर पीछे चढ़ जाता है बिना मुझे प्यार से गर्म किए मेरी गांड मारने लगता है!
भाभी- तुम मुझे सिखा दो कैसे गांड को तैयार करते हैं. तुम एनल सेक्स ट्रेनिंग दो मुझे … अपने पति को सुख देने की ज़िम्मेदारी मेरी है!
मैंने दो आस प्लग भाभी को देकर कहा- पहले छोटा वाला तेल लगाकर पीछे डालना. थोड़ा दर्द होगा, पर जितनी देर हो सके डाले रहना. इसे लगा कर चलते समय आपको मज़ा आएगा. फिर कुछ दिन बाद बड़ा वाला डालना. जब बड़ा वाला आसानी से डाल सको … मतलब आप पति के लिए तैयार हो गई हो!’
भाभी- तुम किस्मत वाले हो. मनोज को प्यार-दुलार करना नहीं आता. वह मुझे बिना तैयार किए चढ़ जाता है. तुम मुझे प्यार करके दिखाओ, जैसे वसंत तुम्हें करता है, पर उससे आगे नहीं!
यह कहकर भाभी ने अपनी बांहें फैला दीं.
मैंने भाभी को आलिंगन में ले लिया.
उनके नरम चूचे मेरी छाती में दबे थे. मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था
मेरे दोनों हाथ भाभी की पीठ पर थे, भाभी के हाथ मेरी पीठ पर.
मैंने एक हाथ से भाभी को पकड़े रखा, दूसरा हाथ उनकी पीठ, कमर, कूल्हों पर फेरने लगा.
भाभी की गर्दन चूमने लगा.
मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैंने भाभी को आलिंगन से मुक्त किया.
उनके होंठ चूमने लगा, चूचे दबाने लगा.
भाभी हल्की सिसकारियां लेने लगीं.
उनकी सांसें तेज़ हो गईं.
मैं- अब आपके चूचे चूसकर उसमें कितना आनन्द आता है, यह महसूस कराता हूँ!
यह कहकर मैं भाभी का ब्लाउज़ खोलने लगा.
भाभी ने ‘इतना ही काफी है!’ कहकर मुझे रोका.
उसके बाद मनोज मेरी गांड मारने नहीं आया.
एक शाम भाभी ने मुझे फ़ोन पर पूछा- वसंत टूर से वापस आया क्या?
मैंने बताया- वसंत नहीं आया, मैं घर पर हूँ.
कुछ देर बाद भाभी आईं- मनोज ने मुझे वसंत से अकेले मिलने से मना किया है. पर तुमसे अकेले में मिलने से मनोज को कोई आपत्ति नहीं है. उसे लगता है तुम्हारा खड़ा नहीं होता, पर सच्चाई मुझे मालूम है. मैं तुम्हें धन्यवाद कहने आई हूँ. तुम्हारे बताए तरीके से (आस प्लग से) मैंने अपनी गांड तैयार की.
मैंने स्वाति भाभी को बधाई दी.
स्वाति भाभी- मैंने मनोज से कहा कि मैं पीछे से लेने की कोशिश एक बार करती हूँ, पर उसके लिए तुम मुझे प्यार करके गर्म करो!
मैं भाभी की गांड चुदाई की कहानी सुनने लगा.
‘मैंने यौन क्रीड़ा के समय मनोज को चूमना, चूचे दबाना, चूचे चूसना सिखा दिया … मुझे भी उसके साथ मज़ा आया!’
‘फिर?’
‘उसके बाद मनोज ने मेरी गांड मारी. थोड़ा दर्द हुआ, पर मज़ा आया. गांड मारते समय मनोज मेरे कूल्हों की तारीफ़ कर रहा था.’
मैं और भाभी दो पत्नियों की तरह अपने पतियों के बारे में बातें कर रहे थे.
कैसे हमने नए-नए तरीकों से यौन आनन्द और संभोग लिया, इस सब की चर्चा करते रहे.
भाभी इस बात का ख्याल रखती हैं कि बातें सिर्फ़ गांड संभोग के बारे में हों.
मैंने भाभी को रोल प्ले के बारे में बताया.
कैसे पति की फ़ैंटसी पूरी करने के लिए मैं अलग-अलग रूप धरती हूँ. जैसे कालगर्ल, पड़ोस की भाभी, उसके ऑफ़िस की कोई लड़की आदि.
पुरुष स्वभाव से बहुगामी होते हैं.
भाभी ने मनोज की फ़ैंटसी यौन क्रीड़ा के समय मालूम कर ली.
वे भी मनोज के साथ रोल प्ले करने लगीं.
उसके बाद से मैं अपने लड़कियों वाले कपड़े अलमारी में रखकर ताला लगाने लगा.
मैं रात को लेडीज़ कपड़े धोता और उन्हें दूसरे बेडरूम में टांगकर फ़ैन चलाकर सुखाता हूँ, बालकनी में नहीं सुखाता.
मैं वसंत के साथ पत्नी की तरह 5 साल से रह रहा हूँ.
हम दोनों खुश हैं.
हमारे माता-पिता ने हमारी शादी की बात करना बंद कर दिया है.
आपको ये गे एनल सेक्स ट्रेनिंग कहानी कैसी लगी, जरूर बताएं.
प्लीज मेल भेजते समय कहानी का नाम अवश्य लिखें.
मैंने अनेक कहानियां लिखी हैं.
आपका रतन दत्त
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