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Story Start Here :
सेम सेक्स मैरिज गे स्टोरी में मैं अपने चचेरे भाई से गांड मरवाकर मजा लेता था. हम दोनों अब अलग नहीं रह सकते थे. तो हम दोनों ने गन्धर्व विवाह कर लिया और मैं उसकी पत्नी बन कर रहने लगा.
दोस्तो, मैं राहुल आपको लेखक रतन दत्त के माध्यम से बता रहा था कि मैं एक गे हूँ और बॉटम हूँ.
बॉटम उसे कहते हैं जो गे सेक्स में गांड मरवाता है और जो मारता है उसे टॉप कहते हैं.
मेरा टॉप वसंत था जो मेरा चचेरा भाई है.
कहानी के पहले भाग
चचेरे भाई से गांड मरवाई
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि हम दोनों यानि मैं और वसंत गांड चुदाई के बाद बाथरूम में जाकर साफ सफाई करने के बाद बाहर आ गए थे.
अब आगे सेम सेक्स मैरिज गे स्टोरी:
हम दोनों नंगे ही पलंग पर लेटे थे.
वसंत ने मुझे चूमकर पूछा- मज़ा आया या नहीं … सच सच बताना!
मैं- हां मुझे मज़ा आया, क्या हम लोग एक बार और करें?
वसंत- मैं थोड़ा जल्दी झड़ गया. पहली बार संभोग किया था न तो ज़्यादा जोश आ गया था. अभी थोड़ी देर बाद फिर से करते हैं.
हम दोनों ने पानी पिया.
हम दोनों ही एक दूसरे की तरफ मुँह करके करवट में लेटे थे.
थोड़ी देर बाद वसंत मेरे होंठ चूमने लगा, चूचे दबाने लगा.
मेरा लंड खड़ा हो गया.
पर वसंत का लंड नहीं खड़ा था.
मैंने वसंत की छाती और उसके निप्पलों को जीभ से टुनिया कर चाटा और चूसा.
फिर नीचे जाकर मैंने उसका पेट चूमा, फिर जांघ चूमी.
उसके बाद मैंने उसके लंड को चूमा, फिर चाटने लगा.
उसका लंड जागने लगा.
मैंने उसके आधे खड़े लंड को लॉलीपॉप की तरह मुँह में भर लिया और मजे से चूसने लगा.
मैं मोमबत्ती को लंड समझकर चूसा करता था पर असली लंड चूसने में ज़्यादा मज़ा आ रहा था.
उसका लंड पूरा कड़क होकर खड़ा हो गया.
मैंने पूरा लंड मुँह में लेने की कोशिश की, जैसा मैंने वीडियो में देखा था … पर ले नहीं पाया.
अब चुदाई की बारी आ गई थी तो मैंने पेट के बल लेटकर अपने कूल्हे हाथ से फैला दिए.
वसंत ने लंड में तेल लगाकर मेरी गांड में पेल दिया.
वह मेरे ऊपर लेट गया और मेरे निप्पल मरोड़ने लगा.
उसने धीरे-धीरे गांड मारना शुरू किया.
मुझे मज़ा आ रहा था.
कुछ देर बाद वसंत मेरे ऊपर से उतर गया.
उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा.
मैं घोड़ी के समान पलंग पर खड़ा हो गया.
वसंत ने फर्श पर खड़ा मुझे पलंग के किनारे आने को कहा.
मेरे घुटने पलंग पर थे, पैर पलंग से बाहर.
वसंत ने लंड गांड में डाला, मेरी कमर पकड़कर चोदने लगा.
इस बार उसके झटके करारे लग रहे थे.
वह थोड़ी देर रुकता, मेरे लटकते चूचे दबाता, फिर चोदने लगता.
चोदते समय वसंत मेरे कूल्हों पर हल्के चांटे भी मार रहा था.
उसके चांटों से मुझे और जोश आ रहा था.
मैं कमर हिलाकर लंड और अन्दर लेने लगा.
मैं अपना लंड बिना छुए ही झड़ गया.
कुछ देर बाद वसंत भी झड़ गया.
इस बार मुझे सच में मजा आ गया था.
फ्रेश होने के बाद हम दोनों ने एक-दूसरे को बताया कि इस बार बहुत मज़ा आया है.
हम दोनों खाना खाकर पढ़ाई करने बैठे.
दोनों संतुष्ट और खुश थे.
पढ़ाई में खूब मन लगा.
दूसरी शाम चाय के बाद हम दोनों बाथरूम गए.
वसंत ने मेरे शरीर के अनचाहे बाल ट्रिमर से साफ़ किए.
मैंने वसंत की झांटों को और कांख के बालों को ट्रिमर से साफ़ कर दिया.
फिर हम दोनों साथ में नहाए और एक दूसरे के लंड से खेलने लगे.
फिर बेडरूम जाकर चूमा-चाटी करते हुए एक-दूसरे के कपड़े उतार दिए.
हम पलंग पर बैठकर गे सेक्स वीडियो देखने लगे.
वसंत मेरे चूचे दबाने लगा, मैं वसंत के लंड को सहलाने लगा.
जो सेक्स आसन हमें पसंद आता, हम कहते कि हम दोनों भी ऐसा करके देखेंगे.
कुछ देर बाद जब उत्तेजना बढ़ी तो हम दोनों 69 की पोज़ीशन में आ गए और एक-दूसरे के लंड चूसने लगे.
दोनों को मज़ा आ रहा था.
कुछ देर में हम झड़ गए.
दोनों ने एक-दूसरे का वीर्य पी लिया.
अब हम दोनों शांत हो गए थे.
फिर खाने के बाद पढ़ने लगे.
तब से हम करीब हर शाम फोरप्ले के बाद संभोग का मज़ा लेते.
कभी मैं वसंत के लंड की सवारी करता.
कभी फर्श पर खड़े होकर सामने झुककर हाथ पलंग पर रखकर घोड़ी बन जाता.
वसंत मेरी गांड मारता, कूल्हे थप्पड़ मारकर बजाता.
कभी मैं पलंग पर घोड़ी बन जाता.
हमने फ्लैट के किचन, बाथरूम, दोनों बेडरूम, ड्राइंग रूम में सेक्स का आनन्द लिया.
मेरा एमबीए की फाइनल ईयर की परीक्षा एक महीने बाद होनी थी.
हमारे कैंपस इंटरव्यू चल रहे थे.
मैंने सिर्फ़ उन्हीं कंपनियों का इंटरव्यू दिया, जिनके ऑफ़िस इस शहर में थे.
मैं वसंत से अलग नहीं होना चाहता था.
मुझे इसी शहर में नौकरी मिल गई.
एक महीने बाद परीक्षा हुई.
अब रिज़ल्ट का इंतज़ार था.
वसंत की भी परीक्षा ख़त्म हुई, उसकी एक और साल की पढ़ाई बाक़ी थी.
मैं और वसंत 15 दिनों के लिए अपने-अपने पिता के घर गए.
हम एक-दूसरे के बिना बेचैन थे.
हम रोज़ फ़ोन पर बात करते.
दस दिन बाद ही बहाना बनाकर हम दोनों वापस आ गए.
उस रात हमने दो बार घमासान सेक्स किया.
मैं फाइनल परीक्षा में पास हो गया और नौकरी करने लगा.
मैं पॉर्न साइट पर नग्न लड़कियों की तस्वीर देख रहा था.
उसमें से कुछ लड़कियों के चूचे छोटे थे- करीब मेरे पुरुष चूचों की साइज़ के … पर वे सुंदर लड़कियां दिख रही थीं.
मैंने कपड़े उतार कर खुद को आईने में देखा.
उनमें और मेरे में फ़र्क इतना सा था कि तस्वीर की लड़कियों के शरीर बाल-रहित चिकने थे और उनकी टांगों के मध्य चूत थी.
पर चूत कोई आकर्षक सुंदर अंग नहीं है.
चूत ऐसी दिखती है, जैसे शरीर पर उस जगह चीरा लगा हो.
मेरा प्यार का छेद पीछे था.
पहली तनख्वाह मिलते ही मैंने पार्लर जाकर शरीर के अनचाहे बाल वैक्सिंग से साफ़ करा लिए.
नहाकर पार्लर की सलाह पर बॉडी क्रीम लगाई.
मेरा बदन चिकना हो गया.
उस रात सेक्स के समय वसंत मेरे चिकने शरीर को देखकर-छूकर खुश हो गया.
अब वह मुझे अपनी गर्लफ़्रेंड कहने लगा है.
वसंत- आज मेरी गर्लफ़्रेंड और अच्छी और चिकनी लग रही है!
ये कहकर वह मेरे चूचे दबाने-चूसने के बाद मेरे पूरे बदन को चूमने लगा.
उसने मुझे पेट के बल लिटाकर मेरे कूल्हे चूमे और अपने लंड को मेरे कूल्हों पर घिसने लगा.
मैंने अपने कूल्हे हाथ से फैला दिए.
फिर हुई घमासान चुदाई.
वसंत की फाइनल ईयर की परीक्षा जब नज़दीक आ गई तो वसंत सिर्फ जब उसका मूड होता, वह तभी सेक्स करता और जल्दी से खत्म कर देता.
मैं भी वसंत को पढ़ाई में मन लगाने को कहता.
वसंत को भी कैंपस इंटरव्यू में हमारे शहर में नौकरी मिल गई.
परीक्षा ख़त्म हुई, कुछ दिनों में रिज़ल्ट आ गया.
वसंत अच्छे नंबर से पास हो गया, उसने नौकरी जॉइन की.
वसंत- मैंने तय किया था कि नौकरी मिलने पर शादी करूँगा. राहुल, क्या तुम मुझसे शादी करोगे?
मैंने तुरंत हां कह दी.
वसंत- कानून और समाज में दो लड़कों की शादी सेम सेक्स मैरिज को मंज़ूरी नहीं है. इसलिए हम दोनों अपने फ्लैट में ही शादी करेंगे. तुम यदि लड़कियों के कपड़े पहनो तो मुझे अच्छा लगेगा!
मेरी भी इच्छा थी लड़कियों के कपड़े पहनने की, इसलिए मैंने नेट पर मेकअप कैसे करना है, वह सीखा.
उसके बाद लड़कियों की ब्रा, पैंटी, ब्लाउज़ और अन्य कपड़ों की साइज़ कैसे तय की जाती है, उसे समझा.
उसी अनुसार मैंने अपने शरीर की माप ली थी.
मैं- हम दोनों कल शाम बाज़ार जाकर लड़कियों के कपड़े ख़रीदेंगे!
हम ब्रा, पैंटी, नाइटी, स्कर्ट, ब्लाउज़, साड़ी ख़रीद लाए.
ब्लाउज़ का कपड़ा लेडीज़ टेलर को दिया माप सहित.
तीन दिन में ब्लाउज़ मिल गया.
हमने नकली गहने, मेकअप का सामान ख़रीदा.
तय हुआ कि हम शनिवार शाम शादी करेंगे क्योंकि रविवार हमारी छुट्टी थी.
मैंने शुक्रवार को पार्लर में फ़ेशियल कराया, बदन की वैक्सिंग कराई.
शनिवार शाम मैंने वसंत से कहा कि मैं तैयार होकर आता हूँ!
मैंने दूसरे बेडरूम जाकर दरवाज़ा बंद कर लिया.
नहाकर मैंने ब्रा, पैंटी, साया, साड़ी, ब्लाउज़ पहना. मेकअप किया, गहने पहने.
मेरे नाक-नक्श तीखे थे तो सजने के बाद मैंने आईने में देखा कि सच में मैं सुंदर लड़की लग रहा था.
मुझे भी लगने लगा था कि मैं सचमुच लड़की हूँ.
मैंने दरवाज़ा खोलकर वसंत को बुलाया.
वसंत मुझे निहार रहा था.
मैं- कैसी लग रही हूँ?
वसंत- दुल्हन बहुत सुंदर लग रही है!
मैं- आज मैं अपने आप को पूरी तरह से लड़की महसूस कर रही हूँ!
वसंत नया कुर्ता-पजामा पहने था.
वह दो माला और सिंदूर ले आया था.
हमने माला की अदला बदली की रस्म की.
वसंत ने मेरी मांग में सिंदूर लगाया.
तब उसने मुझे अपने बेडरूम में जाकर इंतज़ार करने को कहा.
मैं बेडरूम में गई.
बेडरूम फूलों से सजा था.
मैं दुल्हन की तरह घूँघट ओढ़ कर पलंग पर जा बैठी.
वसंत अन्दर आया, मेरा घूँघट उठाकर उसने मुझे उपहार दिया.
मैं नई दुल्हन की तरह शर्मा रही थी.
वसंत ने मुझे प्यार से लिटा दिया.
मेरे सिर पर हाथ फेरकर मुझे निहारने लगा … जैसे मुझे पहली बार देख रहा हो.
एक तरह से ये पहली बार ही था.
मैंने पहली बार लड़की का रूप धरा था तो यह सच में मेरी सुहागरात ही थी.
वसंत मुझे चूमने लगा.
धीरे-धीरे उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए.
मैं अपने चूचे हाथ से ढकने लगी.
वसंत ने मेरा हाथ हटाया, चूचे चूसने-दबाने लगा.
मैं सिसकारियां ले रही थी.
उस रात हमने दो बार संभोग किया.
हम कभी-कभी शनिवार शाम शराब पार्टी करते थे.
अगली शनिवार शाम वसंत ने मुझे सेक्सी स्कर्ट-ब्लाउज़ पहनने को कहा.
मैंने मिनी स्कर्ट, बिना बांह का ब्लाउज़ पहना.
मैं खुद को लड़की समझने लगी.
सजकर पार्टी करने बैठी.
वसंत ने एक ग्लास में शराब डाली.
मुझे गोद में बिठाकर वह एक घूँट मुझे पिलाता, एक घूँट खुद पीता.
इसके साथ ही वह मेरी चिकनी जांघों पर हाथ फेरने लगा, चूचे दबाने लगा.
दो पैग के बाद मुझे खड़ा कर चूमने लगा.
मैं भी उसे चूमने लगी.
वह मेरे कान में बोला- डार्लिंग, मेरा लंड चूसोगी प्लीज़?
मैंने वसंत का पजामा-चड्डी उतार दी.
उसे कुर्सी पर बिठाया और खुद घुटने पर होकर अपने पिया का लंड चूसने लगी.
वसंत का लंड खड़ा होकर झटके ले रहा था.
वसंत ने मुझे खड़ा किया और सामने झुककर सोफ़े पर हाथ रखने को कहा.
उसने मेरी पैंटी उतार दी, हाथ डालकर ब्रा का हुक खोल दिया.
स्कर्ट को उठाकर लंड में तेल लगाकर लंड पेल दिया.
मैं आह आह कर उठी.
मेरा पति बड़े इत्मीनान से मेरी गांड मारने लगा.
थोड़ी देर गांड मारने के बाद वह रुकता, चूचे दबाता, कूल्हों पर चांटे मारता.
कुछ देर में मैं झड़ गई.
मेरी गांड चोदने की स्पीड बढ़ गई.
कुछ देर बाद वसंत मेरी गांड में झड़ गया.
हम दोनों उस रात बेहद खुश थे.
धीरे धीरे हम दोनों सेक्स के साथ साथ अपनी जॉब पर भी ध्यान देने लगे थे.
हमारे ऑफ़िस में काम बढ़ गया था.
इसलिए हम दोनों ही शाम को देर से घर आने लगे थे.
अब हम दोनों किसी-किसी रात ही यौन आनन्द ले पाते.
पर हर शनिवार मैं लड़कियों के कपड़े पहनती और अपने पति का लंड चूसती.
हम दोनों शराब पार्टी करते.
कभी कभी हम दोनों रोलप्ले भी करते.
कभी मैं कालगर्ल बनती, कभी बिल्डिंग की सेक्सी भाभी, कभी सेल्स गर्ल बन कर वसंत के साथ सेक्स का मजा लेती.
सेम सेक्स मैरिज गे स्टोरी अभी बाकी है जिसे मैं तीसरे भाग में लिखूँगी.
दोस्तो, यह मेरी गे सेक्स कहानी आपको कैसी लग रही है. आप इस गे सेक्स कहानी के लिए अपने मेल जरूर भेजें.
प्लीज आप मेल भेजते समय कहानी के शीर्षक का जिक्र अवश्य करें क्योंकि लेखक ने काफी सारी कहानियाँ लिखी हैं.
जबाव देने में आसानी होगी.
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सेम सेक्स मैरिज गे स्टोरी का अगला भाग:
