Desi Sister Chudai Kahani – भाई बहन के बीच प्यार भरा सेक्स

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Story Start Here :

देसी सिस्टर चुदाई कहानी में मेरी ताई की जवान बेटी बहुत सेक्सी थी. हम साथ ही रहते थे. मैं उसे चोदने की नजर से छेड़ता था. एक दिन हम दोनों घर में अकेले थे.

मेरा नाम प्रकाश है, मैं फरीदाबाद में रहता हूँ. मेरी उम्र अब 20 साल है.

मेरी मां और मेरी ताई जी सगी बहनें हैं इसलिए मेरी ताई ही मेरी मौसी हैं.
उनकी लड़की यानि मेरे ताऊजी की लड़की की उम्र 22 साल है, मुझसे दो साल बड़ी.

वह दिखने में बहुत सेक्सी है और उसकी गांड तो पूछो मत मैं अपनी दीदी (ताऊजी की लड़की) को बहुत दिनों से चोदना चाहता था.
लेकिन कभी मौका ही नहीं मिला.

यह दो साल पहले की देसी सिस्टर चुदाई कहानी है.
उस वक्त मैं और मेरा भाई ट्यूशन जाते थे, तो मेरी छुट्टी जल्दी हो जाती थी.
मैं सीधा मौसी के घर चला जाता.

वहां दीदी को देखते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था क्योंकि वह घर पर हमेशा छोटे-छोटे शॉर्ट्स में रहती थी.

उसे देखकर अन्दर ही अन्दर कुछ हो जाता था.
मैं उसको चोदने की बहुत कोशिश करता, पर मौसी (मेरी ताई जी) किचन में रहती थीं और किचन बिल्कुल कमरे से सटा हुआ था तो आवाज़ जा सकती थी.

फिर भी मैं फोन में वीडियो दिखाने के बहाने कभी उसकी गांड के नीचे हाथ रख देता, कभी उसकी जांघ पर पैर रख देता.
वह कुछ नहीं कहती थी, बस मुझे देखकर मुस्कुरा देती.

मैं समझ गया था कि ये भी मेरे साथ चुदना चाहती है.
क्योंकि हम दोनों आपस में बहुत खुले हुए थे.

कभी मेरा मन घर पर नहीं लगता तो मैं उसे वीडियो कॉल कर लेता.
वह एक ही रिंग में कॉल उठा लेती थी और हम दोनों घंटों बातें करते थे.

एक दिन मैं उसके घर गया तो घर पर सिर्फ उसके पापा थे, वे नीचे दुकान पर बैठे थे.
ऊपर गया तो देखा ताई जी भी घर पर नहीं थीं.

मैंने पूछा- सब लोग कहां गए?
उसने बताया- बड़े भैया तो मम्मी के साथ नानी के घर गए हैं, छोटा भाई अभी-अभी ट्यूशन गया है.

मैंने कहा- अच्छा!
मैं मुस्कुरा दिया.

वह चारपाई पर लेटी हुई फोन चला रही थी.
उसकी चूचियां और चूत की शेप साफ दिख रही थी.

मैं सोचने लगा कि आज मौका है तो इसे चोद ही देता हूँ!

तभी उसने मुझे आवाज़ दी- क्या हुआ प्रकाश?
मैं हड़बड़ा गया कि कहीं इसे शक तो नहीं हो गया.

मैं सामने सोफे पर बैठ गया.

पांच मिनट बाद मैंने कहा- दीदी, तुझे एक वीडियो दिखाता हूँ, बहुत हंसेगी!
वह बोली- दिखा ना!

मैं उसके पास गया, उसने अपना फोन मुझे दिया. मैं बिल्कुल उसके सामने खड़ा हो गया. मेरा खड़ा हुआ लौड़ा उसकी एक चूची से टच हो गया तो मैं झटके से पीछे हटा.
वह मुझे देखकर मुस्कुराने लगी.

मैं भी शर्माते हुए मुस्कुराया लेकिन उसने कुछ नहीं कहा.
मैंने वीडियो दिखाया, वह हंसने लगी.

फिर इसी मौके का फायदा उठाते हुए मैं उसकी चारपाई पर चढ़ गया.
उसके ऊपर से जानबूझ कर चढ़ा, जिससे मेरा खड़ा लौड़ा उसके पेट पर रगड़ गया.

वह थोड़ी हिल गई.
उसने साफ देख लिया था कि मेरा लौड़ा पत्थर जैसा खड़ा है.

मैं उसके बगल में लेट गया और अब वह भी मेरे बगल में ही थी.

चारपाई थोड़ी नीचे झुकी हुई थी, इसलिए मैंने उसकी तरफ मुँह कर लिया.
उसके बाल मेरे मुँह पर आ रहे थे.
मैं मन ही मन सोचने लगा कि आज बढ़िया मौका है.

ऊपर वाले फ्लोर पर कोई नहीं था, बाहर भी कोई नहीं था.
ताऊजी जी नीचे दुकान पर बैठे थे.

पांच-दस मिनट बाद मैंने अपना एक हाथ उसकी कमर से थोड़ा नीचे रख दिया और धीरे-धीरे हिलने लगा.
मैं उसके बिल्कुल करीब आ गया, हम दोनों पूरी तरह चिपक गए.

मेरी छाती उसकी चूचियों से टच होने लगी.
फिर पांच मिनट बाद मैंने हाथ उसके पेट पर रख दिया.

वह फोन चलाने में व्यस्त थी, मैं उसके पेट को सहला रहा था.

जैसे ही मैं हाथ नीचे ले जाने वाला था, तभी कमरे में उसकी बुआ और फूफा आ गए.

मैंने फट से हाथ हटा लिया.
उनके आते ही मैं डर गया और एकदम खड़ा हो गया.

बुआ हम दोनों को देखने लगीं.
मैं सोचने लगा कि कहीं देख तो नहीं लिया?

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

बुआ पास खड़ी हुईं और किचन में चली गईं.
मैं भी कमरे से बाहर आ गया, दीदी को बाय बोला और घर चला आया.

सारा मूड खराब हो गया था.

फिर जल्द ही मुझे एक और मौका मिला.

हमारे घर में मेरी बड़ी बहन की शादी थी और वह ठंड का महीना था.

सभी युवा वर्ग और छोटे बच्चे हमारे घर ही सोते थे.
मेरी बुआ के बच्चे, हम सब एक ही कमरे में सोते थे.

हल्दी वाले दिन तो लड़के अलग सोए थे और लड़कियां अलग, लेकिन मैं तो बस उसी के बारे में सोचता रहा और सुबह हो गई.

फिर शादी की रात को हम लोग डांस करने के बाद पिज्जा पार्टी कर रहे थे.

आज सब एक ही कमरे में सोने वाले थे.
हम सब एक साथ बैठे थे और मस्ती-मजाक कर रहे थे.

मैंने कहा- चलो अब सो जाते हैं, बहुत टाइम हो गया है.
मैंने लाइट बंद कर दी और सब सो गए.

हम सब एक दूसरे से चिपक कर सो रहे थे क्योंकि कंबल सिर्फ दो ही थे.
एक तरफ मेरी मौसेरी बहन, दूसरी तरफ बुआ का लड़का जो मुझसे काफी बड़ा था.

मैंने मन में सोचा कि आज बिल्कुल सही मौका है.

थोड़ी देर बाद सब सो गए, मैं जाग रहा था.
मैंने उसकी तरफ मुँह किया. हमारे मुँह बिल्कुल आमने-सामने थे.

मैंने देखा, वह गहरी नींद में थी. मैंने हिम्मत करके उसके होंठ पर हल्का सा किस किया.
वह थोड़ी हिली, लेकिन गहरी नींद में थी, कुछ पता नहीं चला.

फिर मैंने अपना एक हाथ उसके पेट पर रखा और धीरे-धीरे हिलाने लगा.
उसके बाद हाथ उसकी चूची पर ले आया. मैंने उसकी चूचियों को खूब मसलना शुरू कर दिया, तो वह हिलने लगी.

मुझे लगा अब इसे पता चल गया होगा लेकिन उसने कोई हरकत नहीं की.
फिर मैंने और जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया.
वह अब भी बेसुध थी.

मैंने उसका एक हाथ पकड़ा और अपने लौड़े पर लगा दिया.
उसका हाथ मेरे हाथ के नीचे था, तो मैंने उसके हाथ से ही अपना लौड़ा सहलाना शुरू कर दिया.

जैसे ही उसका हाथ लौड़े पर पड़ा, मेरा लौड़ा एकदम पत्थर जैसा खड़ा हो गया और उसकी चूत की लाइन में लग गया.
हम दोनों अभी भी कपड़े पहने हुए थे.

मैंने फटाक से अपना लोअर नीचे किया, लौड़ा बाहर निकाला और उसके हाथ से हिलवाने लगा.
एक हाथ से मैं उसकी चूचियां दबा रहा था.

तभी मैंने देखा कि वह थोड़ी हिली तो लगा, जैसे वह भी जाग रही है.
उसने करवट ली और उसकी गांड मेरी तरफ हो गई.

उसकी गांड मेरे लौड़े से बिल्कुल चिपक गई.
मैंने लौड़ा उसकी गांड के नीचे कर लिया और हल्के-हल्के धक्के देने लगा.

बिना छेद में लंड पेले ही मुझे ऐसा सुख मिलने लगा मानो जन्नत की सैर कर रहा हूँ.

मैंने हाथों से उसे अपनी तरफ खींचा, फिर उसकी चूत पर हाथ रखकर दबाने लगा.
उसके बाद अपना एक हाथ उसके टॉप के अन्दर डाला, फिर ब्रा के अन्दर … और उसकी नंगी चूचियां मसलने लगा.

ठंड की वजह से मेरे हाथ बर्फ जैसे ठंडे थे, वह एकदम जाग गई.

उसने मुझे देख लिया, पर कुछ बोली नहीं. बस वह मेरा साथ देने लगी.

उसने मेरे लौड़े को पकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया.
‘उफ्फ्फ … प्रकाश … कितना कड़क है तेरा!’

मैंने धीरे से कहा- दीदी … अपनी पैंटी नीचे सरका दो ना … मुझे तुम्हारी चूत में लौड़ा डालना है!
वह बोली- नहीं …
मैंने पूछा- क्यों?

वह शर्माती हुई बोली- सब यहां सो रहे हैं … आवाज होगी. तुम ऐसे ही हाथ डालकर मेरी चूत सहला लो!
मैंने तुरंत उसकी पैंटी में हाथ डाला और हल्का सा नीचे कर दिया.

उसकी चूत साफ़ दिखने लगी.
मैंने अपना लौड़ा उसकी पैंटी पर रखा, थोड़ी देर में वह गर्म हो गई.

फिर मैंने उसकी पैंटी भी पूरी नीचे कर दी.

लौड़ा उसकी चूत पर रखा तो वह खुद ही हाथ से ऊपर-नीचे करने लगी ‘पेलो!’
मैंने चेतावनी दी- आवाज़ मत निकालना!
वह बोली- ठीक है.

मैंने लौड़ा उसकी चूत की लाइन पर रखा और एक ज़ोर का झटका मारा.
टोपा अन्दर घुस गया उसकी ‘आह्ह्ह …’ की आवाज़ निकल गई.

मैंने फट से उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए.
फिर एक और ज़ोर का झटका दिया.
इस बार पूरा लौड़ा एकदम से उसकी चूत में समा गया.

मैं धीरे-धीरे आगे-पीछे होने लगा, वह भी पूरा साथ देने लगी, कमर हिला-हिलाकर चुदने लगी.

मैंने उससे पूछा- मस्त मजा ले रही हो!
वह बोली- क्यों तुझे मजा नहीं आ रहा है क्या?

मैंने कहा- सील पैक होती तो ज्यादा मजा आता!
वह हंस दी और बोली- इतने दिन से गर्म कर रहा है तो मैं मोमबत्ती से चुद गई. उसी से सील टूट गई है.

मैंने उसे रगड़ते हुए कहा- अच्छा मोमबत्ती से ही चुद गई … किसी और का नहीं मिला क्या?
वह बोली- साले फालतू की बात मत कर … जल्दी जल्दी चोद ले और सो जा.

मैंने धकापेल मचा दी.

तभी कुछ आहट हुई तो दीदी ने मुझे रुकने का इशारा किया.
हम दोनों उसी अवस्था में रुक गए.

कोई आंटी कमरे में आई थीं और वे काफी समय तक कमरे में कुछ आवाज करती रहीं.
हम दोनों एक दूसरे के ऊपर चढ़े हुए कंबल में लेटे रहे और उसी अवस्था में दीदी सो गई.

थोड़ी देर बाद मैं भी अपना लौड़ा उसकी चूत में डालकर ही सो गया.

हम एक-दूसरे से चिपके हुए सोए रहे.

काफी देर बाद जब मेरी आंख खुली तो मेरा लौड़ा अभी भी उसकी चूत के अन्दर था. मैं फिर चालू हो गया, वह भी जाग गई.

थोड़ी देर में मेरा माल निकलने वाला था.
मैंने पूछा- कहां निकालूँ?
वह बोली- जैसा तुम्हारा मन करे!

मैं सोचने लगा कि अन्दर निकाल दूँ तो प्रेग्नेंट हो जाएगी, बड़ी दिक्कत होगी.
आखिरकार मैंने लौड़ा बाहर निकाला और उसकी चूत के थोड़ा ऊपर ही सारा माल गिरा दिया.

देसी सिस्टर चुदाई के बाद हम दोनों ने जल्दी-जल्दी कपड़े ठीक किए और सो गए.

थोड़ी देर में सुबह हो गई.
सब उठकर नीचे चले गए, कमरे में सिर्फ हम चार ही बचे थे.

मेरी आंख खुली तो देखा कि दीदी का एक पैर मेरे पैर के ऊपर था और उसका हाथ सीधा मेरे लौड़े पर था.

जैसे ही मैं हिला, उसने ज़ोर से मेरा लौड़ा दबा दिया.
‘आह्ह्ह …’
मुझे दर्द हुआ, पर हालत देखकर मज़ा भी आया.

मैं थोड़ी देर और वैसे ही लेटा रहा.
आधा घंटा बाद जब उठा तो कमरे में कोई नहीं था, सिर्फ मैं अकेला था.

मैं भी नीचे आ गया.
नीचे आते ही नज़र दीदी पर पड़ी.
उसने भी मुझे देखा और हम दोनों एक-दूसरे को देखकर शर्माते हुए मुस्कुराने लगे.

उसकी वे मस्त नज़रें और कातिल मुस्कान … सब कुछ बता रही थी कि रात वाला मज़ा उसे अभी याद आ रहा है.

फिर मुझे पापा और भाइयों के साथ काम करना पड़ा.
उसके बाद आज तक फिर कभी ऐसा मौका नहीं मिला.

तो दोस्तो, आपको मेरी और मेरी मौसेरी दीदी की पहली देसी सिस्टर चुदाई कहानी कैसी लगी?
कमेंट में ज़रूर बताना!
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