Porn Mom Gandi Kahani – मैंने अपनी सेक्सी मम्मी की चुदाई देखी

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Story Start Here :

पोर्न मॅाम गन्दी कहानी में मैं अपनी मम्मी की उनके बॉयफ्रेंड से सेटिंग समझ चुकी थी. मम्मी उसको घर बुला कर चुदाई का मजा लेने वाली थी.

फ्रेंड्स, मैं आपकी अपनी सविता जाधव वक बार पुनः अपनी मम्मी की चुदाई का आंखों देखा हाल सुना रही थी.
कहानी के पहले भाग
सेक्सी मॅाम को पुराना बॉयफ्रेंड मिल गया
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मम्मी राजेश अंकल के साथ सेक्स का मजा लेने के लिए सिर्फ ब्रा पैंटी में होकर साफ सफाई कर रही थीं.
तभी बाहर सुबह वाले अंकल ने बेल बजा दी. मम्मी ने जैसे तैसे उनसे बात करके उन्हें टरकाया और दरवाजा बंद करने के लिए हाथ आगे बढ़ाने लगीं.

अब आगे पोर्न मॅाम गन्दी कहानी:

जैसे ही अंकल गए और मम्मी ने दरवाज़ा बंद किया तो जैसे उनकी जान में जान आई.
मम्मी ने ब्लाउज़-पेटीकोट उठाया, किचन में कुछ किया और रूम में चली गईं.

मम्मी नहाकर तैयार हुईं … नई ट्रांसपेरेंट साड़ी में तो माशाल्ला, वे माधुरी की दूसरी कॉपी लग रही थीं.

सच में मम्मी कयामत ढा रही थीं … जो भी उन्हें देखता, उसका लंड खड़ा होने में एक पल भी न लगाता.

मुझे भूख भी लग रही थी, पर बाहर निकल भी नहीं सकती थी.
दिन के 12 बज चुके थे.

मम्मी ने फिर राजेश को फोन लगाया.
राजेश बोला- बस 10 मिनट में आ रहा हूँ जान!

मम्मी ने फोन काटा ही था कि बेल बजी.
मम्मी दौड़कर गईं और दरवाज़ा खोलते ही बोलीं- जल्दी अन्दर आओ … बहुत देर लगा दी!

राजेश ने हंसते हुए कहा- सब्र का फल मीठा होता है जान!

मम्मी को ऊपर से नीचे तक देखकर राजेश की आंखें चमक उठीं- अरे वाह … इस तरह की ट्रांसपेरेंट साड़ी में तो तुम कयामत ढा रही हो!

मम्मी शर्मा कर मुँह पर हाथ रख लिया.
राजेश तारीफ़ों के पुल बांधे जा रहा था.
उसने मम्मी को बांहों में भर लिया.

मम्मी बोलीं- यहां नहीं … रूम में चलो, सब वहीं करेंगे!
राजेश- यहां कौन देख रहा है?

मम्मी- पहले कॉफ़ी पीते हैं, बातें करते हैं!
राजेश शरारत से बोला- बातें कौन करने आया है?

यह कहते हुए उसने मेरी मम्मी का पल्लू खींचा और किस करने लगा.
मम्मी भी पूरा साथ देने लगीं.
दोनों एक-दूसरे पर टूट पड़े थे … किस का सिलसिला ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था.

अचानक फिर से बेल बजी.

मम्मी के होश उड़ गए.
उन्होंने फटाफट राजेश को रूम में धकेला और बोलीं- जल्दी … मेरे रूम में जाओ.

वह गधा जल्दी-जल्दी में मेरे रूम में घुस गया.

मम्मी ने पल्लू ठीक किया, मुँह पर हाथ फेरा और दरवाज़ा खोला.
बाहर वही सुबह वाले अंकल थे.

वे बोले- मालकिन, मोटर नहीं चल रही … और सविता खेतों में भी नहीं दिखी, सब जगह देखा!
मम्मी ने कहा- होगी कहीं … आप एक बार फिर देख लो, मैं उसको फोन करके आपसे बात करवा दूँगी.

पर मम्मी को पता नहीं था कि उनकी लिपिस्टिक पूरे मुँह पर बकरे के खून की तरह लगी हुई है.

अंकल बार-बार मम्मी को नीचे से ऊपर तक घूर रहे थे. फिर वे ‘ठीक है मालकिन.’ कहकर मुड़े और चले गए.
मम्मी ने तसल्ली से देखा कि वे जा चुके हैं, फिर दरवाज़ा बंद किया और अपने रूम में गईं.

राजेश वहां नहीं था तो मेरे रूम में आईं और बोलीं- अरे … अपना रूम दूसरी तरफ़ है!
राजेश ने शरारत से हंसकर कहा- रूम कोई भी हो … काम तो एक ही है!

यह कहते हुए उसने मम्मी को खींच लिया.
मैं दरवाज़े के पीछे से सब साफ़-साफ़ देख रही थी.

मम्मी बोलीं- रुको … पहले दरवाज़ा बंद कर दूँ!
पर राजेश ने उनकी एक न सुनी और मम्मी को ज़बरदस्त किस करने लगा.
उसने पल्लू को सरका दिया, फिर ब्लाउज़ के ऊपर से मम्मी के भारी-भारी बूब्स ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा.
कभी दाएं बूब्स पर हाथ, कभी बाएं … जोर-जोर से मसल रहा था.

मम्मी भी उसकी पीठ पर नाख़ून गड़ा रही थीं और गहरे चुंबन ले रही थीं.

ये सब देखकर मेरे बदन में भी कुछ-कुछ होने लगा … पर मैंने खुद को कंट्रोल किया और चुपके से देखती रही.

दोनों किस करते-करते और बूब्स मसलते-मसलवाते पूरी तरह गर्म हो चुके थे.
फिर मम्मी ने राजेश की शर्ट उतारी और उसकी छाती पर किस करने लगीं. कभी छाती पर, कभी मुँह पर वे बेताबी से चूम रही थीं.

राजेश बोला- मुझे भी कुछ करने दोगी?
मम्मी ने हंसते हुए कहा- राजा … आज मुझे मत रोको, इतने दिन बाद मिले हो … तुम्हें जो करना है तुम करो … मैं भी नहीं रोकूँगी!

राजेश ने फटाफट मम्मी का ब्लाउज़ निकाला, ब्रा उतारी और दोनों बूब्स को बेदर्दी से एक साथ करते हुए अपने मुँह में भरने का ऐसे प्रयास लिया … जैसे सालों बाद दूध मिले हों.

मम्मी उसे ऊपर खींचकर फिर मुँह पर किस करतीं और वह बार-बार बूब्स चूसने लगता.
मम्मी का ऐसा भयानक चुदासा रूप मैंने पहली बार देखा था … वे उसे कुछ करने ही नहीं दे रही थीं.

फिर मम्मी ने उसे धक्का देकर ऊपर से हटाया, उसकी पैंट खींची और चड्डी के ऊपर से हवस की भूखी शेरनी की तरह मुँह लगा दिया.
राजेश मज़े से देखता रहा.

मम्मी ने मुस्कुराते हुए उसकी तरफ़ देखा, फिर चड्डी नीचे सरका दी.

उफ्फ़ … पहली बार मैंने इतना बड़ा लंड देखा था. पूरा 8 इंच का मोटा-तगड़ा लंड एकदम फनफना रहा था.

मम्मी आंखें चमकाती हुई बोलीं- कितने सालों बाद मुझे मिलने आया है ये लंड!
दोनों ने एक लंबा किस किया.
फिर मम्मी नीचे झुकीं और लंड मुँह में ले लिया.

मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि मम्मी ऐसा कर सकती हैं.
इतना बड़ा लंड उनके मुँह में ठीक से जा भी नहीं रहा था … फिर भी मम्मी ज़ोर-ज़ोर से लौड़े को मुँह में लेकर अन्दर-बाहर करने लगीं.

राजेश बोला- आह्ह … दांत लग रहे हैं जान … थोड़ा धीरे … मैं यहीं हूँ!
मम्मी ने हंसकर कहा- आज तो इसे पूरा खा जाऊंगी!
राजेश- आज खा जाओगी तो बाद में क्या करोगी?

दोनों ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे.
मम्मी ने लंड को फिर से मुँह में भर लिया.

राजेश ने मम्मी के बाल पकड़ लिए और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा.
मम्मी बहुत मज़े से चूस रही थीं … उम्म … उम्म … उम्म … की आवाज़ें आ रही थीं.
वे अपने सिर को ऊपर-नीचे ऊपर-नीचे करती हुई ‘उमम्म … उमम्म …’ कर रही थीं और लौड़े की चटनी सी बनाने में लगी हुई थीं.

करीब 20 मिनट बाद राजेश चरम पर पहुंच चुका था.
वह बार-बार चिल्ला रहा था- माल आ रहा है … आ रहा है!
वह मम्मी का सिर ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था.

मम्मी ने भी लंड चूसने की स्पीड और तेज कर दी.
आख़िरकार राजेश ने पूरा माल मम्मी के मुँह में छोड़ दिया और मम्मी ने एक बूंद भी नहीं छोड़ी … वे सब पी गईं.

बाद में अपनी उंगलियों से उठा उठा कर जो मुँह के किनारे लगा था, उसे भी मुँह में ले लिया और जीभ से लंड को चाट-चाट कर साफ़ कर दिया.

अब राजेश ने मम्मी को खींचकर ऊपर किया, गहरे चुंबन शुरू किए, बूब्स मसलने लगा.
फिर मम्मी को नीचे फर्श पर लिटा दिया और साड़ी पेटीकोट को उतार फेंका. वह पैंटी के ऊपर से हाथ फेरने लगा.

कुछ देर बाद राजेश ने मम्मी को किस करते-करते एक हाथ से पैंटी नीचे सरका दी और चूत में उंगली पेल दी.
मम्मी की मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह्ह … आह्ह्ह!

राजेश ने फिर से एक लंबा किस किया, नीचे बूब्स चूसे, नाभि चाटी … और सकता गया.
वह मेरी मम्मी का पूरा बदन चाटता हुआ नीचे आ गया.

मम्मी की गुलाबी चूत देखकर राजेश पागल हो गया.
उसने चूत पर हमला बोल दिया.

एक तरफ़ से दांतों से हल्का सा काटा तो मम्मी चीख पड़ीं- आआह्ह्ह … राजेश … काटो मत यार!

पर वह कहां सुनने वाला था, उसने अपना पूरा मुँह चूत में डाल दिया और चूसने लगा.
मम्मी फिर से तड़पने लगीं- आह्ह्ह … उमम्म … आह्ह्ह!

बहुत देर चूत चाटने के बाद मम्मी का होने वाला था.
मम्मी ने दोनों टांगों के बीच राजेश का सिर कसकर पकड़ लिया और ज़ोर से चिल्ला दीं ‘आआह्ह्ह …’

वे झड़ने लगीं और अपनी चुत का पूरा रस उसके मुँह में छोड़ दिया.
फिर कुछ देर तक वे निढाल खड़ी रहीं … और चुत को राजेश के मुँह पर ऐसे टिकाए रहीं … जैसे स्वर्ग का सुख मिल गया हो.

फिर वे उठ कर बिस्तर पर धम्म से लेट गईं. राजेश भी उनके ऊपर चढ़ गया.

राजेश अभी भी मेरी मां की चूत चाट रहा था.

फिर वह ऊपर चढ़ गया और मम्मी के बूब्स के साथ खेलने लगा.
कभी दबाता, कभी मुँह में लेता.

मम्मी अभी भी मदहोश सी पड़ी थीं.
धीरे-धीरे राजेश ने फिर उन्हें गर्म करना शुरू किया … और मम्मी फिर से तैयार हो गईं.

मम्मी ने राजेश को नीचे धकेला, खुद ऊपर चढ़ गईं और लंड हाथ में लेकर हिलाने लगीं.
उन्होंने फिर से लौड़े को मुँह में ले लिया और चाटने लगीं ‘उमम्म … उमम्म …’

देखते ही देखते लंड फिर से खड़ा हो गया.
राजेश ने मम्मी को नीचे किया, किस किया और चूत पर लंड रगड़ने लगा … ऊपर-नीचे … ऊपर-नीचे करता हुआ वह चुत को भड़का रहा था.

मम्मी तड़प उठीं- अब रहा नहीं जा रहा … जल्दी डालो ना!
राजेश ने हंसकर कहा- कहा था ना … सब्र का फल मीठा होता है!
मम्मी- सब्र गया भाड़ में … जल्दी से अन्दर डाल दो अब!

राजेश ने लंड सैट किया और ज़ोर से दबाया.
मम्मी को तकलीफ़ होने लगी … वे हाथ से पीछे धकेलने लगीं.
पर राजेश ने मम्मी को कसकर पकड़ रखा था … उसने खुद को पीछे हटने ही नहीं दिया.

फिर एकदम से ताकत लगाकर उसने अपना पूरा 8 इंच का लंड मेरी मां की चूत में पेल दिया.
मम्मी की ज़ोर की चीख निकल पड़ी- उईईई मां … मर गई … राजेश निकालो … चूत फट गई … बहुत बड़ा है … मर गई.

मम्मी की आंखों से आंसू निकल आए.
राजेश ने लंड वैसे ही डाले रखा और मम्मी को किस करके शांत करने लगा.

मम्मी ज़ोर-ज़ोर से उसे धक्का दे रही थीं, वे मोटे लंड को सहन नहीं कर पा रही थीं.

कुछ मिनट बाद जब सब नॉर्मल हुआ, तो मम्मी चुप हो गईं.
राजेश ने लंड थोड़ा बाहर निकाला और फिर से ज़ोर का धक्का दे मारा.

मम्मी ने नाख़ून उसकी पीठ में गड़ा दिए और चीख पड़ीं- मर गई … निकाल इसे कमीने … कुत्ते … मैं रंडी नहीं हूँ!
राजेश ने अनसुना कर धक्के मारना जारी रखा.

धीरे-धीरे दर्द कम हुआ तो मेरी गन्दी मम्मी भी साथ देने लगीं ‘आह्ह्ह … उमम्म … आह्ह्ह … चोदो और जोर से पेलो आह … जोर जोर से अन्दर बाहर करो … आह!’
राजेश बोला- तुमको मेरे बड़े लंड से चुदने की आदत खत्म हो गई है, इसी लिए चिल्ला रही थीं.
मम्मी हूँ हूँ कह कर बस लंड से चुदने का मजा ले रही थीं.

कुछ देर की रगड़ाई के बाद मम्मी झड़ गईं, पर राजेश चूत चोदता रहा.
रूम में सिर्फ़ ‘पच-पच-पच.’ की आवाज़ गूँज रही थी.

उसके लंड पर मम्मी का सफेद माल चिपक गया था.
राजेश लगातार मां चोद रहा था.

उसे करीब 20 मिनट से ऊपर हो चुके थे.
मेरी मम्मी बार-बार ‘आह्ह्ह … आह्ह्ह … ’ कर रही थीं और न जाने कितनी बार झड़ चुकी थीं.

राजेश बोला- आह मेरा होने वाला है … कहां निकालूँ?
मम्मी हांफती हुई बोलीं- मेरी दोनों औलादें तुम्हारी देन हैं … अन्दर ही निकाल दो!
ये सुनकर मुझे तो झटका लग गया कि मम्मी ये क्या कह रही हैं?

राजेश ने शताब्दी एक्सप्रेस की स्पीड पकड़ ली और पूरा माल मम्मी की चूत में उड़ेल दिया.
मम्मी बोलीं- बहुत दिनों बाद असली सुख मिला है … आह!

फिर मम्मी उसका लंड मुँह में लेकर साफ़ करने लगीं.

तभी वापस से बेल बजी.
दोनों के होश उड़ गए.

मम्मी ने फटाफट साड़ी लपेटी, ब्रा भी नहीं पहनी और बाहर भागीं.
मैं सीढ़ियों के नीचे से दबे पांव निकलने लगी, तभी मम्मी की नज़र मुझ पर पड़ गई … पर मैं अनजान बनकर अन्दर चली गई.

मम्मी ने बाल आगे करके, मुँह पर हाथ रखा और दरवाज़ा खोला. बाहर वही खेतों वाले अंकल जी थे.

मम्मी ने घबराते हुए पूछा- क्यों आए हो?
अंकल- सुबह से शाम हो गई … सविता खेतों में कहीं नहीं दिखी!
मम्मी- वह कब की घर आ गई है!

अंकल ने संदेह से कहा- अन्दर से कुछ अजीब-सी आवाज़ें आ रही थीं!
मम्मी ने डरते हुए कहा- कुछ नहीं … टीवी चल रहा है!

अंकल- सविता को बुलाओ, मालिक से बात करवानी है.
मम्मी- रुको, मैं बुलाती हूँ!

दरवाज़ा बंद करके मम्मी सीधे मेरे पास आईं और फुसफुसाईं- प्लीज़ … हम बाद में सब बात करेंगे … अभी अंकल को वापस भेज दो!
मैंने कहा- ठीक है.

मेरे पास भी कोई ऑप्शन नहीं बचा था.

मम्मी राजेश के पास गईं.

मैं दरवाज़े पर आई और खोला- अंकल जी, बोलिए ना क्या काम था?
अंकल- मोटर बंद है … और सविता तुम कहां थी?

मैं- मैंने पापा से बात कर ली है, वह आने के बाद देख लेंगे.

अंकल मुस्कुराते हुए बोले- घर पर कोई आया है क्या?
मैं- नहीं तो!
पर अंकल सब समझ चुके थे … बस बोल नहीं पा रहे थे.

अंकल ‘ठीक है’ कहकर चले गए.

मैंने दरवाज़ा बंद किया तो मम्मी व राजेश कपड़े पहन कर बाहर आ गए.

पोर्न मॅाम आंखें नीची करके बोलीं- राजेश अंकल कुछ दिन हमारे साथ ही रहेंगे.
मैं ‘ठीक है’ कहकर चुप रह गई.

अब अंकल, राजेश और मम्मी का त्रिकोण कैसे चला … पापा दो दिन बाद भी नहीं आए, तो उनकी गैरहाजिरी में कितने दिनों तक क्या-क्या हुआ … यह सब अगली कहानी में बताऊंगी.
राजेश ने मम्मी की गांड कैसे मारी, मुझे सब पता चल गया … मैं भी कैसे चुदी … और अंकल भी कैसे हमारे साथ आए.
कैसे मम्मी और मैं उन दोनों के लंड की दासी बन गईं … सब बताऊंगी.

आशा करती हूँ आपको ये पोर्न मॅाम गन्दी कहानी पसंद आई होगी.
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लव यू आल.