Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Bride Sex Kahani – दुल्हन की चूत मारी उसके पति के सामने to make every night hot about Bride Sex Kahani – दुल्हन की चूत मारी उसके पति के सामने story.
Story Start Here :
ब्राइड सेक्स कहानी में मैं अपनी भतीजी को मैकलोडगंज होटल में चोद रहा था. बगल वाले कमरे में एक नया कपल था. मैंने उस दुल्हन को कैसे चोदा उसके पति के सामने?
मेरी कहानी के पिछले भाग
जवान भतीजी को चोदा होटल की गैलरी में
में आपने पढ़ा कि मैं अपनी भतीजी की चूत मार रहा था रूम के पीछे वाली गैलरी में. वहां से बगल वाले कमरे के अंदर का नजारा देखा. वहां हनीमून कपल चुदाई कर रहा था कि लड़का पहले ही झड़ गया. यह देख कर मेरी भतीजी ने मुझे उस दुल्हन की चूत दिलवाने का प्लान किया और हम दोनों उनके कमरे में चले गए.
अब आगे ब्राइड सेक्स कहानी:
अलका मेरी बातों से सुलग उठी और खड़ी होकर अपने बदन पर लपेटा हुआ तौलिया उतारकर फेंकते हुए नीचे जमीन पर घुटने टिकाकर बैठ गई।
उसके साथ ही मैं भी सोफे से उठकर खड़ा हो गया और लंड उसके होठों पर फिराने लगा।
अलका ने श्रेया और विजय को एक बार देखा और लंड को अपने हाथ में पकड़कर मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
वह बड़े प्यार से मेरे लंड को आधे से ज्यादा मुंह में लेकर चूस रही थी।
नई चूत की खुशबू मिलते ही मेरा लंड थोड़ी देर में ही अपने विकराल रूप में आ गया।
मैंने श्रेया की तरफ देखा तो श्रेया और विजय से मेरी नज़रें मिलीं।
श्रेया ने मुस्कुराते हुए मुझे आंख मारी और विजय का हाथ पकड़कर हमारे पास आ गई और विजय से बोली, “देखो भइया, कैसे आपकी दुल्हन पापा का लंड मज़े से चूस रही है!”
फिर वो विजय की बॉल्स हाथ से सहलाते हुए बोली, “भइया, देखना थोड़ी देर बाद कैसे पापा आपकी दुल्हन की चूत अपने मोटे डंडे से फाड़ेंगे!”
श्रेया की बात सुनकर अलका ने मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकाला और विजय की तरफ देखकर मुस्कुराई और एक हाथ से उसका लंड पकड़ लिया।
मैं और विजय एक-दूसरे के बराबर खड़े थे।
वो बारी-बारी मेरा और विजय का लंड चूसने लगी।
श्रेया विजय से लिपटकर उससे अपने होंठ चुसवा रही थी।
थोड़ी देर में ही विजय का लंड पूरा खड़ा हो गया, जो अंगूठे जितना मोटा और मुश्किल से पांच इंच का होगा।
मैंने अलका का कंधा पकड़कर उसे उठाया और बेड पर ले जाकर लिटा दिया।
अलका बेड पर अपनी टांगें फैलाकर लेट गई।
उसकी चूत हल्की भूरी थी और उस पर छोटे-छोटे बाल थे।
मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराकर कहा, “जानेमन, इतनी प्यारी चूत है तुम्हारी! इसको एकदम चमका कर रखा कर!”
अलका शर्माते हुए बोली, “अंकल, इनको चूत पर बाल पसंद हैं!”
तभी श्रेया मेरे पास आकर मेरा लंड पकड़कर हिलाते हुए बोली, “भाभी, पापा सही कह रहे हैं! अपनी चूत मेरी तरह चमका कर रखा करो, क्या पता कब कोई मस्त लंड अंदर लेने को मिल जाए!”
इतना बोलकर श्रेया खिलखिलाकर हंस पड़ी।
श्रेया के हंसने से अलका भी हंसने लगी।
फिर श्रेया विजय से बोली, “भइया, आज भाभी की चूत पापा के इस मोटे लंड से खुलने वाली है! आप भाभी की चूत चाटकर गीली करो, तब तक मैं पापा का लॉलीपॉप चूसती हूं!”
विजय बिना कुछ बोले चुपचाप खड़ा रहा।
श्रेया फुर्ती से विजय के पास जाकर उसका हाथ पकड़कर बोली, “अरे, आप शरमा क्यों रहे हो! आपको तो डबल फायदा ही है! पापा अपने मोटे लंड से आपकी बीबी की चूत अच्छे से खोल देंगे! फिर आप ये अपना नुनु भाभी की चूत में डालना आसान रहेगा! और खुली चूत में आप ज्यादा टाइम भी कर पाओगे! और साथ में आपको अपनी पत्नी के बदले मेरी चूत भी तो मिल रही है!”
मैं श्रेया और विजय को देखते हुए अलका की चूत के होंठों में अपना अंगूठा फिरा रहा था।
तभी जिस बात की किसी ने उम्मीद नहीं की थी, अलका ने वो बात कह दी।
वो आह… स्स्स्स… आह करते हुए विजय की तरफ देखकर बोली, “आओ ना जानू! आप ही तो थोड़ी देर पहले बोल रहे थे कि मैं रण्डी हूं और जिससे चाहे चुदवा लूं! उफ्फ… देखो ना भगवान ने आपकी बात सुन ली और अंकल को भेज दिया! देखो ना कितना बड़ा लंड है अंकल का! आपसे डबल बड़ा और मोटाई में चार गुणा होगा! आह… आओ ना इस रण्डी की चूत अंकल के लंड के लिए तैयार कर दो! ताकि मैं आराम से अंकल का लंड ले सकूं! उफ्फ… मेरी चूत में चींटियां रेंग रही हैं!”
श्रेया ने विजय को धक्का देते हुए कहा, “चलो ना भइया! चाटो ना भाभी की चूत! फिर आप मेरी चूत में अपना लंड डालकर भाभी की चूत में पापा का लंड अंदर-बाहर होते देखना!”
विजय एक बार अलका का चेहरा देखकर बिना कुछ बोले उसकी चूत चाटने लगा।
श्रेया ने पास रखा तकिया उठाकर अलका की गांड में लगा दिया।
फिर श्रेया बेड पर चढ़ गई और मुझे भी ऊपर बुलाकर मेरा लंड चूसने लगी।
मेरी नज़रें अलका की चूत पर थीं, जिसे विजय अपनी जीभ से अंदर तक चाट रहा था।
अलका मस्ती से आंखें बंद करके अपनी दोनों चूचियां मसलते हुए बोली, “आह जानू… आज तो बहुत अच्छा चाट रहे हो! आह… आपने आज तक मेरी चूत इतने अच्छे से नहीं चाटी! उफ्फ… आह… लगता है आप भी अपनी रण्डी पत्नी की चूत में अंकल जी का लंड देखना चाहते हो!”
फिर वो अपनी नशीली आंखें खोलकर मेरी तरफ देखकर बोली, “आई… आह… अंकल… आ भी जाओ ना! उफ्फ… डाल दो प्लीज़ अपना लंड मेरी चूत में! आह!”
अलका को बुरी तरह तड़पती देखकर मैंने विजय का कंधा पकड़कर उसे साइड में किया।
वो जैसे ही उठा, मेरी नज़रें उससे मिलीं।
मैंने उससे पूछा, “विजय, तुम बोलो तो खोल दूं तुम्हारी पत्नी का छेद?”
इतने में अलका बोली, “खोल दो ना अंकल! आ भी जाओ मेरे अंदर!”
मैंने फिर विजय से पूछा, “बोलो, रण्डी बना दूं अलका को?”
विजय ने बिना कुछ बोले अपना सिर हिलाकर हां कह दिया और साइड में होकर बेड पर बैठ गया।
मैंने अलका की टांगों के बीच आकर पोजीशन ली और उसकी कमर के नीचे एक बाह डालकर उसकी एक टांग अपने कंधे पर रख ली।
फिर लंड का टोपा उसकी चूत पर फिराने लगा।
मैंने अलका की तरफ देखा तो वो थोड़ी सी आंखें खोलकर मुझे देख रही थी और लंड अंदर जाने का इंतज़ार कर रही थी।
मैंने विजय की तरफ देखा तो उसकी नज़रें भी अलका की चूत पर रखे मेरे लंड के टोपे पर जमी हुई थीं।
तभी श्रेया विजय का हाथ पकड़कर बोली, “भइया, देखो ना! पापा के लंड के टोपे ने कैसे आपकी पत्नी की पूरी चूत को ढक लिया है!”
मैंने अलका की नीचे वाली टांग थोड़ी और फैला दी और लंड को उसकी चूत के मुंह पर लगाकर उस पर झुक गया।
अलका को मैंने जकड़ रखा था।
मैंने धीरे-धीरे लंड का दबाव चूत पर दिया तो मेरा सुपाड़ा थोड़ा सा जाकर उसकी चूत में फंस गया।
फिर मैंने कमर को थोड़ा सा घुमाकर लंड पर ज़ोर से धक्का दिया तो मेरा आधे से कम लंड उसकी संकरी गुफा में चला गया।
अलका चीखी, “आह अईईईई… मम्मी… मर गई!”
तभी श्रेया ने उसके दोनों हाथ पकड़कर विजय से कहा, “पकड़ो इसको! जब तक पापा का लंड इसकी चूत में रास्ता नहीं बना लेता, इसे पकड़कर रखना!”
विजय ने अलका का एक हाथ श्रेया से लेकर कस लिया।
तभी श्रेया बोली, “भइया, आप इसकी एक निप्पल चूसो, मैं दूसरी चूसती हूं!”
विजय किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उसकी निप्पल चूसने लगा।
श्रेया मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और आंख मारकर अलका की दूसरी चूची चूसने लगी।
उधर मैंने लंड को हल्का सा बाहर खींचा और वापिस पूरी ज़ोर से अंदर पेल दिया।
ब्राइड सेक्स का मजा लेती हुई अलका बोली, “आह… बस करो प्लीज़! आह… थोड़ा बाहर निकालो!”
मैंने लंड पर उससे ज्यादा दबाव दे दिया और धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगा।
अलका बोली, “आह… आई… आह… मम्मी मर गई! आह… बहुत मोटा और बड़ा लंड है आपका! आह… बस करो… प्लीज़ थोड़ा बाहर निकालो!”
मैंने उसकी बातों की परवाह किए बिना अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसकी चूत मारने लगा।
थोड़ी देर में मेरे लंड ने अलका की गुफा में रास्ता बना लिया और झटके तक अंदर-बाहर होने लगा।
जैसे ही मेरा लंड पूरा अंदर जाता, मेरी बॉल्स अलका की गांड से टकरातीं।
अलका हर झटके के साथ चीखती, “आह… आह… उफ्फ… सी… सी… आई मम्मी!”
तभी श्रेया अलका के सिर के पास अपनी गांड फैलाकर घोड़ी बन गई और विजय से बोली, “आओ भइया! अपनी पत्नी को चुदते हुए देखकर मेरी चूत मारकर मज़े लो!”
विजय फुर्ती से अलका की चूची छोड़ा और उठकर श्रेया के पीछे आ गया।
उसने अपना लंड पकड़कर अलका की चूत में अंदर-बाहर हो रहे मेरे लंड को देखने लगा।
वो कभी अलका की चूत देख रहा था, कभी उसके चेहरे को।
श्रेया अपनी गांड हिलाकर ज़ोर से बोली, “डालो भी अब! अपनी पत्नी की चुदाई बाद में देख लेना!”
विजय ने उसकी बात सुनकर श्रेया की कमर में हाथ डाला और धीरे से लंड उसकी चूत में सरका दिया।
जैसे ही लंड श्रेया की चूत में गया, वो दिखावटी मज़े का ड्रामा करते हुए बोली, “उफ्फ भइया… मज़ा आ गया! आह… बहुत मस्त लंड है आपका!”
विजय श्रेया के चूतड़ पकड़कर पूरी स्पीड से उसकी चूत में लंड अंदर-बाहर करने लगा।
इधर मैं अलका के ऊपर झुककर उसके होंठ चूसते हुए बड़ी तल्लीनता से उसकी चूत में पूरा लंड अंदर-बाहर करते हुए लंड के सुपाड़े की ठोकर उसकी बच्चेदानी पर मारने लगा।
अलका लंड की चोट से मस्ती में आ चुकी थी।
वो मेरी कमर में अपनी बाहें लपेटकर चिल्ला रही थी, “आह जानू! उफ्फ… बहुत मोटा है आपका! आह… मज़ा आ गया आज तो! उफ्फ… मेरा होने वाला है! आह!”
मैंने अलका की चूत से लंड बाहर खींचकर पास में घोड़ी बनी श्रेया के मुंह में दे दिया।
श्रेया बाज़ारू रण्डी की तरह मुस्कुराते हुए मेरे लंड को चूसने लगी।
उधर विजय श्रेया की चूत में झटके मार रहा था।
श्रेया ने शरारत से अपनी गांड को एक तरफ झुका दिया, जिससे विजय का लंड उसकी चूत से बाहर निकल गया।
फिर वो मेरा लंड हाथ में पकड़कर बेड पर बैठ गई।
फिर वो मुस्कुराते हुए विजय से बोली, “भइया, थोड़ी देर अपने लंड को रेस्ट करने दो! फिर मेरी चूत मार लेना, लगातार करने से आपका ढीला हो जाएगा!”
उसकी बात सुनकर विजय ने गर्दन झुका ली।
मैंने अलका को पकड़कर खड़ा किया और श्रेया के पास बिठाकर उसके मुंह में लंड दे दिया।
अलका मस्ती से मेरी बॉल्स पकड़कर लंड चूसने लगी।
मैं बारी-बारी अलका और श्रेया का मुंह चोद रहा था।
थोड़ी देर बाद लंड चूसने के बाद अलका बोली, “अंकल, डालो ना प्लीज़!”
मैंने हंसते हुए विजय से कहा, “देखो विजय, तुम्हारी पत्नी कितनी चुदासी हो रही है! साली इस कुतिया की आग अब ठंडी नहीं की तो ये बाहर जाकर किसी से भी चुदवा लेगी!”
विजय चुपचाप अपनी ब्राइड अलका को सेक्स करते देखने लगा।
मैंने अलका की गर्दन के पास से उसके बालों में हाथ डाला और उसे खींचकर उठाया।
फिर उसका चेहरा अपने चेहरे के पास लाकर उसके होंठों को ज़ोर से काटा।
अलका मेरा लंड थामकर ज़ोर से चीखी, “आईईईई!”
फिर मैंने फुर्ती से उसकी एक चूची पकड़कर मुंह में भर ली और उसे थोड़ी देर चूसने के बाद उस पर भी अपने दांत गड़ा दिए।
अलका मेरी इस हरकत से ज़ोर से चिल्लाई।
मैंने उसके होंठों और दोनों चूचियों पर लव बाइट्स देने के बाद उसे घोड़ी बना लिया।
श्रेया अब भी मेरा लंड चूस रही थी।
मैंने श्रेया को भी घोड़ी बनने को बोला तो वो भी फुर्ती से मेरे लंड का मज़ा लेने के लिए अपनी गांड उठाकर अलका की बगल में घोड़ी बन गई।
श्रेया और अलका दोनों अपने चूतड़ फैलाकर मेरे सामने घोड़ी बनकर लंड अंदर जाने का इंतज़ार कर रही थीं।
इन दोनों का चेहरा विजय की तरफ था।
मैंने श्रेया और अलका के चूतड़ों पर थप्पड़ मारते हुए विजय से कहा, “देखो विजय! मैं अब इन दोनों रंडियों की एक साथ चुदाई करूंगा!”
विजय अलका के बाल पकड़कर पहली बार बोला, “अंकल, इस कुतिया में बहुत गर्मी है! साली रण्डी की चूत फाड़कर रख दो!”
मैंने हंसते हुए कहा, “तुम फिक्र मत करो! तुम्हारी बीबी को मैं अपनी रखैल बनाकर इस तरह चोदूंगा कि ये चलने लायक नहीं रहेगी!”
तब तक श्रेया विजय का ढीला हो चुका लंड पकड़कर अपने मुंह में ले चुकी थी।
इधर मैंने अलका के चूतड़ पकड़कर उसकी चूत के मुंह से अपने लंड का टोपा भिड़ा दिया।
फिर मैंने अलका की कमर में हाथ डालकर धीरे से लंड को धक्का दिया तो वो सरकते हुए आधा अंदर चला गया।
लंड अंदर जाते ही अलका ने आह बोला और जैसे ही अपनी कमर ऊपर उठाई, मैंने एक धक्का और मारकर पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया।
और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।
जब लंड ने उसकी चूत में अपना रास्ता बना लिया तो मैंने अलका के दोनों चूतड़ कसकर पकड़ लिए और फुल स्पीड से उसकी चूत मारने लगा।
अलका मेरे हर झटके के साथ चिल्ला रही थी, “आह… उफ्फ… आई मम्मी! आह… अंकल थोड़ा धीरे! उफ्फ… बहुत मज़ा आ रहा है! कितना मोटा लंड है आपका! आह… मेरी चूत में एकदम फंसा हुआ जा रहा है!”
मैं बीच-बीच में अलका के चूतड़ों पर थप्पड़ मार रहा था और उसे गालियां भी दे रहा था।
विजय की नज़रें कभी अलका के चेहरे की तरफ थीं, कभी वो मुझे देख रहा था।
थोड़ी देर बाद अलका चिल्लाने लगी, “आह… उफ्फ… आईईईई… अंकल मैं झड़ने वाली हूं! आह… और तेज़ करो! आह… अंकल फाड़ डालो मेरी चूत! आह!”
मैंने उसकी चूत से लंड खींचकर श्रेया की चूत में पेल दिया।
लंड अंदर जाते ही श्रेया बोली, “आह डैडी! उफ्फ… चोदो मुझे! आह… कितना मस्त लंड है आपका!”
मैं श्रेया के चूतड़ों पर थप्पड़ मारते हुए पूरी स्पीड से उसकी चूत चोदने लगा।
थोड़ी देर श्रेया की चूत पेलने के बाद मैंने वापिस अलका के पीछे आकर लंड उसकी चूत के फैले हुए छेद पर सेट किया और पूरा लंड एक झटके में उसकी चूत की गहराई तक उतार दिया।
मैंने कोई चार-पांच मिनट अलका की चूत में लंड अंदर-बाहर किया होगा कि वो चिल्लाने लगी, “आह… सी… सी… आईईईई… आह अंकल!”
और झड़ गई।
मैंने अलका के झड़ने के बाद चार-पांच धक्के और मारकर लंड उसकी चूत से बाहर खींच लिया।
आगे की ब्राइड सेक्स कहानी की प्रतीक्षा करें.
अब तक की कहानी पर आपके मेल और कमेंट्स आमंत्रित हैं.
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