Cousin Sex Kahani – विधवा बहन की चुदाई रात के अँधेरे में

Latest Hindi Sex Stories added for who looking to read Cousin Sex Kahani – विधवा बहन की चुदाई रात के अँधेरे में to make every night hot about Cousin Sex Kahani – विधवा बहन की चुदाई रात के अँधेरे में story.

Story Start Here :

कजिन सेक्स कहानी में मेरी मौसी की जवान बेटी विधवा हो गयी. मम्मी उसे हमारे घर ले आई. रात को वे मेरे साथ ही सोयी. उसके जवान बदन ने मेरा लंड खड़ा कर दिया.

मेरा नाम अंकित है. मैं एक काला लड़का हूँ और 12वीं में पढ़ता हूँ.
मेरी मौसा जी की लड़की, यानि मेरी मौसेरी बहन, शादी-शुदा है और उसका जिस्म बिलकुल गदराया हुआ है.

उसके दूध इतने मोटे-मोटे हैं कि कोई अपना मुँह उसके मम्मों में घुसा दे तो मज़े ही आ जाएं.
नीचे उसकी गांड का तो कोई जवाब ही नहीं है. एकदम गदराई और मोटी … बिल्कुल अपनी मां की तरह.

मैंने उसकी मां यानि अपनी मौसी को भी बहुत बार चोदने की कोशिश की, पर चोद नहीं पाया.

कजिन सेक्स कहानी में आगे बढ़ें इससे पहले लड़के अपना लंड हाथ में ले लें और लड़कियां चूत में उंगलियां या खीरा मूली आदि डालना शुरू कर दें.

जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी मौसेरी दीदी शादी-शुदा है और शादी से पहले से ही काफी सुंदर हैं.

उनके साथ एक दुर्घटना हुई. कोरोना के टाइम में उनके पति की मौत हो गई.
हम लोग उनके यहां शोक मनाने गए और दीदी को साथ ले आए.

वे हमारे साथ कुछ दिनों के लिए घर पर रहने आ गईं.
बस यहीं से भाई बहन की सेक्स कहानी शुरू हो गई थी.

एक दिन दीदी नहा रही थीं.
वे मुझे आवाज देती हुई बोलीं- अंकित, मेरे लिए नहाने का एक बाल्टी पानी और ला देना!
तो मैं पानी देने गया.

गांव में बाथरूम के ऊपर कपड़ा डाला होता है ना, तो मैंने आवाज दी कि पानी ले लो!

उन्होंने कहा- बाहर ही रख दे!
मैं बाल्टी रखकर आने ही वाला था कि अचानक मुझे झिरी में से दिख गया.

दीदी अपनी झांटें साफ कर रही थीं.
उनकी चुत एकदम फैली हुई थी तो साफ दिख गई थी.

यार … क्या मोटी और फूली सी चूत थी उनकी … एकदम उभरी हुई, गुलाबी-गुलाबी.
देख कर ही ऐसा लगा कि अभी के अभी हाथ बढ़ा कर हथेली में भर लूँ और उनकी चूत को पी जाऊं.

तभी मेरी छाया से उन्हें कुछ शक हुआ कि कोई बाहर है.
उन्होंने खखारा तो मैं फटाफट वहां से भाग आया.

अब रात हुई.
सबने खाना खाया और सोने लगे.

तभी मम्मी बोलीं- आज तू अपनी दीदी के साथ सो जा!

मैं दीदी के साथ सोने लगा.
पहली बार इतनी छोटी खाट पर दीदी के साथ लेटा था.

हम दोनों ने थोड़ी देर बात की, फिर दीदी बोलीं- मैं सो जाती हूँ … तू भी सो जा.
मुझे नींद कहां आ रही थी. उनका पेट और जांघें मुझसे बार-बार टच हो रही थीं.

थोड़ी देर तक तो मैं ऐसे ही लेटा रहा.

फिर दीदी ने करवट बदली.
अब उनकी मोटी गांड मेरी तरफ हो गई.
खाट छोटी थी तो मुझे भी उनकी तरफ करवट लेकर लेटना पड़ा.

अब उनकी गांड सीधे मेरे लंड पर लग रही थी.
बार-बार गदीली गांड लौड़े पर लगने से मेरा लंड एकदम टाइट खड़ा हो गया.
कजिन सेक्स के बारे में सोच कर मेरा मन बहुत मचलने लगा.

मैंने धीरे-धीरे अपना लंड आगे-पीछे करना शुरू कर दिया.
ऊपर कंबल था, लाइट बंद थी तो कोई देख ही नहीं सकता था.
अन्दर तो नहीं जा रहा था, पर मज़े पूरे आ रहे थे.

तभी दीदी थोड़ी सी हिलीं.
मेरी तो गांड फट गई, मैं तुरंत अलग हो गया.

थोड़ी देर बाद मैंने फिर से हिम्मत करके अपना काम शुरू किया.
इस बार डर तो लग रहा था, पर लंड नहीं मान रहा था.

मैंने धीरे-धीरे उनका पेटीकोट ऊपर सरकाना शुरू कर दिया..

फिर मैं अपना हाथ उनके पैरों पर फिराते-फिराते धीरे-धीरे अन्दर ले जाने लगा.
जब दीदी की ओर से कोई हलचल नहीं हुई तो मैंने उनकी चूत को छूना शुरू कर दिया.

एक दो पल रुका, फिर धीरे-धीरे उंगली चूत में डालने लगा.

दीदी की चुत पानी छोड़ रही थी.
इससे मुझे साफ पता चल गया था कि दीदी भी पूरी तरह जाग रही हैं, पर बोल नहीं रही थीं.

अब मैंने अपना लंड उनकी चूत पर लगाया और धीरे-धीरे अन्दर करना शुरू किया.
जैसे ही लंड अन्दर घुसा, बड़ा गर्म-गर्म, रसीला सा लगा. लौड़े को मज़े ही आ गए.

लंड घुसेड़ते ही दीदी थोड़ी सी पुनः हिलीं, पर इस बार मैंने लंड बाहर नहीं निकाला और आगे-पीछे करने लगा.
वे भी अपनी मोटी गांड मेरी तरफ करके ताल मिलाने लगीं.

लंड के साथ-साथ मेरी जांघें भी उनकी गांड से टकरा रही थीं.
हाय मज़े तो इतने आ रहे थे कि क्या ही बताऊं!

जैसे ही मज़ा आने वाला हुआ और ऐसा लगा कि मैं झड़ जाऊंगा, तो मैंने लंड चुत से बाहर निकाला और उनकी जांघों पर झड़ गया.
दीदी भी कुछ नहीं बोलीं.
मैंने उनके पेटीकोट से वीर्य को पौंछ दिया.

कुछ देर बाद दीदी ने अपने हाथ को पीछे किया और मेरे लवड़े को पकड़ लिया.
मेरा लंड पुनः कड़क होने लगा.

इस बार वे पलट कर मुझे चूमने लगीं तो मैंने भी उनके एक दूध को पकड़ लिया.

दीदी ने मेरे मुँह में निप्पल दे दिया और चुपचाप चूचे को चुसवा लगीं.
मैंने उनके होंठ चूसे और उनके ऊपर चढ़ गया.

वे टांगें फैला कर मेरे लौड़े को अपनी चुत पर घिसवाने लगीं.
मैंने लंड पकड़ कर उनकी चुत में पेल दिया तो इस बार मजे से चुदाई चलने लगी.

करीब बीस मिनट तक चुत चोदने के बाद मैंने वापस अपने लौड़े को उनकी चुत के बाहर वीर्य झाड़ दिया.
इस बार मैं झड़ कर उनके ऊपर ही पड़ा रहा.

करीब आधा घंटा बाद एक बार फिर से चुदाई हुई.

इस प्रकार उस रात मैंने तीन राउंड उनके साथ चुदाई का मजा लिया और उनके ऊपर ही वीर्य झाड़ा.

करीब दो बजे रात को हम दोनों सो गए.

फिर सुबह हुई तो मैंने देखा कि दीदी उठ कर जा चुकी थीं.
मैंने अपने कपड़े सही किये और उठ कर बाथरूम में चला गया.

दीदी ने चाय बनाई थी और वे सहज लग रही थीं.
लेकिन मुझे साफ समझ आ रहा था कि दीदी खुश थीं.

हालांकि हम दोनों ने एक-दूसरे से कोई बात नहीं की. पूरे दिन बस नज़रें चुराते रहे.

रात को फिर से हम दोनों एक साथ लेट गए और दो बार मस्त चुदाई की.
उस दिन मैंने 69 में उनकी चुत भी चूसी और दीदी ने मेरे लंड को चूसा.

इसी तरह चार दिन बाद हम दोनों को एक और मौका मिला.
उस दिन हम दोनों ने दिन में ही खुली-खुली चुदाई का खेल खेला.

हुआ यूं कि उस दिन सब लोग शादी में चले गए थे.
दीदी को भी जाना था पर उन्होंने यह कह कर जाने से मना कर दिया कि उनका मन नहीं है.

मम्मी ने मुझसे कहा कि तू घर में ही रुक जा. दीदी का ख्याल रखना.
मैंने ओके कह दिया.

अब घर में सिर्फ हम दोनों थे.

जैसे ही सब गए, मैंने गेट लगाया और दीदी से चिपक गया और सीधे उनके होंठों पर किस करने लगा.
वे भी प्यासी और चुदासी थीं तो मेरे साथ लग गईं.

उस दिन हम दोनों ने बहुत देर तक एक दूसरे को चूमा.
मैं उनके पूरे शरीर को खाता रहा, उनके मोटे-मोटे बूब्स को चूसता और दबाता.
मैं दीदी के दोनों दूध बारी बारी से एकदम आम की तरह चूसता रहा.

दीदी के चूचे इतने मज़े से दब रहे थे मानो रबड़ के गोले हों.

दीदी बोलीं- अंकित, आज मुझे खूब चोद, मैं तेरे जीजा जी से भी कभी ढंग से चुद ही नहीं पाई. आज तू मुझे पूरी तरह संतुष्ट कर दे … खा जा मुझे … अपनी बहन को अपनी रंडी बना ले और खूब चोद मुझे … साले मुझे मालूम है कि तू एक दिन अपनी मां को भी चोदेगा!

मैंने उनके पेट को चाटा-चूमा, फिर नीचे आया और उनकी रसीली चूत को चूसने लगा.
मैंने अपनी पूरी जीभ उनकी चूत के अन्दर डाल दी और चूसते-चूसते उनका सारा पानी पी गया.

हाय … अपनी मौसेरी बहन की चूत का रस पीने का मज़ा ही अलग था.

चुत चुसवाती हुई दीदी चिल्लाईं- अब अपना लंड दे मेरे मुँह में … आह चुत को भी चूसना चालू रख!

यार … मेरी बहन तो पूरी रंडी की तरह मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी थीं.
मैं पागल हो गया था.

इतना मज़ा कभी नहीं आया था.

फिर मैंने उनकी टांगें चौड़ी खोलीं और अपना लंड एक झटके में घुसा दिया.
दीदी को एकदम से लंड पेलने से बहुत दर्द हुआ.

वे चीख उठीं- आआह्ह्ह … धीरे चोद न आह कुत्ते!
पर मैंने उनकी कोई भी आवाज को सुना ही नहीं.

खूब ज़ोर-ज़ोर से चोदा और इस बार मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.

कुछ देर बाद मैंने दीदी को दोबारा से चोदा … और चूंकि घर के सब लोग दो दिन बाद वापस आने वाले थे तो मैंने दो रातों तक उन्हें हचक कर चोदा.

यह मेरी सच्ची कजिन सेक्स कहानी थी, आपको कैसी लगी … प्लीज जरूर बताएं.
धन्यवाद.
[email protected]