Xxx Chachu Sex Kahani – जवान भतीजी ने सहेली के सामने चूत मरवाई

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Story Start Here :

Xxx चाचू सेक्स कहानी में एक जवान लड़की जिसे अपने चाचा का लंड बहुत पसंद था, उसने चाचा को अपने घर बुलाया. वह लंड को अपनी चूत में लेने के लिए आतुर थी.

कहानी के पहले भाग
जवान भतीजी की बेकाबू वासना
में आपने पढ़ा कि अपनी भतीजी की जिद पर मैं उससे मिलने चंडीगढ़ गया. वहां उसके साथ उसकी सहेली भी थी. भतीजी के घर आकर हम दोनों शुरू हो गये. उसकी सहेली हमारी सेक्स वीडियो बना रही थी.

अब आगे Xxx चाचू सेक्स कहानी:

मैंने अवनी के टॉप के ऊपर से उसकी चूची को अंगूठे और अंगुली के बीच लेकर चिमटी काटी।
तो वो बोली, “आऊ! आउच! क्या कर रहे हो जीजू!”
मैंने कहा, “कुछ नहीं! बस देख रहा था तुम्हारे कबूतर कितना उड़ सकते हैं!”

अवनी अपनी चुचियों को उभारकर मेरी छाती से सटाकर शरारत से बोली, “जीजू! ये उड़ तो बहुत सकते हैं, पर कोई इनको प्यार से उड़ाने वाला चाहिए!”

मैंने अवनी की चुचियों को पकड़ना चाहा तो वो हँसकर लहराते हुए मुझसे दूर हो गई और बोली, “जीजू! आप दोनों फिल्म स्टार्ट कीजिए, मैं रिकॉर्ड करती हूँ!”

मैं श्रेया के बाल खींचते हुए उसे सोफे की तरफ ले गया।
श्रेया कुतिया की तरह दोनों घुटनों और कुहनियों के बल चलते हुए सोफे की तरफ आने लगी।
मेरा लण्ड पूरा अकड़कर छत की तरफ मुँह उठाए हुए था।

श्रेया ने सोफे के पास आकर पहले एक कुहनी को सोफे पर रखा, फिर दूसरी को सोफे पर टिकाकर सोफे पर चढ़ गई और अपनी गांड हवा में उछालते हुए चूतड़ मटकाने लगी।

श्रेया के चूतड़ खुल और बंद हो रहे थे जिससे उसकी भीगी हुई चूत के होंठ बार-बार एक-दूसरे को चूम रहे थे।

मैंने श्रेया के दोनों चूतड़ हाथों में कस लिए और उन्हें ज़ोर से फैलाते हुए उसकी चूत चाटने लगा।
श्रेया की चूत से उसके कामरस और मूत का स्वाद आ रहा था।

थोड़ी देर चूत चाटने के बाद मैंने पोज़ीशन लेकर श्रेया की चूत के छेद पर सुपाड़ा सेट किया और अवनी से कहा, “देख अवनी! इस रण्डी की चूत में मेरा फौलादी लण्ड कैसे जाता है!”

अवनी वीडियो रिकॉर्ड करते हुए मेरे पास आ गई और ध्यान से चूत और लण्ड का मिलन होते हुए देखने लगी।

मैंने एक हाथ श्रेया की कमर में डालकर उसे कस लिया और कमर से दबाव देते हुए धीरे-धीरे सुपाड़ा अंदर सरका दिया।
श्रेया की जिस चूत को मेरे सुपाड़े ने पूरा ढक रखा था, वो उसकी चूत में जाना किसी आश्चर्य से कम नहीं था।

सुपाड़ा अंदर जाते ही श्रेया ने जितना हो सकता था अपनी गांड फैला दी और बोली, “ओह डैडी! इट्स टू मच बिग! आह! प्लीज़ डैडी थोड़ा धीरे करना!”

मैंने श्रेया के एक चूतड़ पर ज़ोर से हाथ मारा और कमर को भी ज़ोर से झटका दे दिया, जिससे लण्ड आधे से ज़्यादा उसकी चूत में घुस गया।

श्रेया बोली, “आई मम्मी!”

उधर अवनी चहकते हुए बोली, “वाउ जीजू! गया! घुस गया! ओह माई गॉड! श्रेया की तो आज फट गई!”

फिर वो लण्ड को एक हाथ से पकड़कर नापते हुए बोली, “बस श्रेया! थोड़ा सा और रह गया!”

फिर अवनी ने झुककर श्रेया के गांड के छेद के पास बहुत सारा थूक दिया।
अवनी का थूक बहकर मेरे लण्ड पर इकट्ठा होने लगा, जिसे अवनी ने अपनी कोमल अंगुलियों से मेरे लण्ड पर चुपड़ दिया और मेरी आँखों में देखते हुए बोली, “जीजू! बस एक और स्ट्रोक मारो ज़ोर से! देखना पूरा अंदर चला जाएगा!”

अवनी की कोमल अंगुलियों के टच से मेरे अंदर का जानवर जाग उठा।
मैंने एक हाथ से श्रेया को कमर से जकड़ रखा था, दूसरे हाथ से उसके बाल पकड़कर ज़ोर से खींचे और अपनी एक टाँग को श्रेया के घुटने से आगे रखकर जमकर शॉट मारा।
जिससे पूरा लण्ड सरसराता हुआ उसकी बच्चेदानी की जड़ तक पहुँच गया।

श्रेया ने ज़ोर से आह मारी, “बहनचोद! कुत्ते!”

जैसे ही अपनी गांड को भींचते हुए कमर को ऊपर उठाया, मैंने दोनों हाथ उसकी कमर पर रखकर ज़ोर से नीचे दबा दिया।
जिससे श्रेया के चूतड़ वापिस खुल गए और मैं बिना रुके बहुत ही तेज़ी से लण्ड उसकी चूत के अंदर-बाहर करने लगा।

अवनी बोली, “वाउ जीजू! कितना सुंदर लग रहा है आपका फौलादी लण्ड इसकी छोटी सी चूत के अंदर-बाहर होता हुआ! उफ्फ़ जीजू! पूरा बाहर तक लाकर फिर अंदर डालो!”
मैं अवनी की बात सुनकर उसे फॉलो करने लगा।

श्रेया ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी।
कमरे में फच-फच की आवाज़ें गूँज रही थीं।
मैंने श्रेया की तरफ देखा तो वो एक हाथ से अपनी चूची को टॉप के ऊपर से सहलाते हुए वीडियो बनाने में मस्त थी।

थोड़ी देर तक इसी आसन में चोदने के बाद मैंने श्रेया को गोद में उठा लिया और खड़ा हो गया।
श्रेया की पीठ मेरी छाती से चिपकी हुई थी।
मैंने उसके दोनों पैर एड़ियों के पास से कसकर थाम रखे थे।

मैंने अवनी को कहा, “देख! इस कुतिया की चूत में मेरा लण्ड अंदर-बाहर होते हुए!”
अवनी बोली, “ओह जीजू! श्रेया तो आपकी बाहों में ऐसे लग रही है जैसे छोटी कुतिया किसी बड़े सांड की बाहों में हो! और आपका गधे के लण्ड जैसा लण्ड कैसे इसकी चूत में फँसा हुआ है! वाउ! मज़ा आ गया!”

श्रेया उसकी बात सुनकर उसकी तरफ थूकते हुए बोली, “रुक साली रण्डी! इसी लण्ड से तेरी गांड ना फड़वाई तो मेरा नाम श्रेया नहीं!”
अवनी हमारे सामने से वीडियो रिकॉर्ड करते हुए बोली, “साली! पहले तू अपनी चूत के बारे में सोच! आज जीजू इसका भोसड़ा बना देंगे!”

मैं दोनों की बातें सुनते हुए श्रेया की चूत में लण्ड पेलने लगा।
श्रेया किसी निरीह मासूम ब.च्ची की तरह मेरी मजबूत बाहों में झूल रही थी, “आह! ओह! उफ्फ़ डैडी!”

थोड़ी देर बाद अवनी बोली, “जीजू! अब पोज़ीशन चेंज करो!”

मैंने इतना सुनते ही श्रेया को नीचे छोड़ दिया, जिससे वो गिरते-गिरते बची।
पर मेरी ये हरकत उसकी चूत को दर्द दे चुकी थी क्योंकि जैसे ही मैंने श्रेया को छोड़ा, लण्ड उसकी गांड के छेद की तरफ बुरी तरह दबाव देते हुए कच से बाहर आ गया।

श्रेया बोली, “आई आह मम्मी!”
रोने जैसा मुँह बनाकर चूत को दोनों हथेलियों से कसकर सिसकने लगी।

मैंने श्रेया के मुँह पर थूकते हुए कहा, “साली रण्डी! चल बेड पर! ये तो ट्रेलर ही है! अभी तो अवनी को पूरी फिल्म रिकॉर्ड करनी है!”

मैंने ये बोलकर जैसे ही अवनी की तरफ देखा, वो मुस्कुराते हुए बोली, “येस जीजू! बहुत अच्छे!”

फिर मैंने श्रेया का हाथ पकड़ा और बेड पर लेटते हुए उसे अपने ऊपर खींच लिया।
श्रेया गिड़गिड़ाते हुए बोली, “प्लीज़! दो मिनट चाचू! रुको भी ना!”

पर मैंने उसकी गांड के नीचे हाथ डालकर उसे लण्ड के ऊपर खींच लिया।
अवनी ने पता नहीं कब मेरा लण्ड पकड़ा और उसके छेद पर सेट कर दिया।

मैंने आँखों के इशारे से उसे थैंक्यू बोला और श्रेया के दोनों कंधे पकड़कर नीचे की तरफ दबाव दे दिया, खुद नीचे से कमर उठाकर लण्ड उसकी चूत में सरका दिया।

पूरा लण्ड अंदर जाते ही श्रेया मेरी छाती पर गिर गई।
पर मैं नीचे से उसकी टाइट चूत में धक्के मारता रहा।

श्रेया की सिसकियाँ गूँज उठीं।
वो बोली, “आई आह ओह चाचू! क्या हो गया आज आपको!”

मैं उसके दोनों चूतड़ पकड़कर कसके फैलाकर नीचे से झटके मारे जा रहा था।
मेरे हर झटके के साथ श्रेया के भारी चूतड़ों की थाप-थाप आवाज़ आ रही थी।

श्रेया थोड़ी देर बाद बोली, “आई उम्म आह डैडी!”

फिर झड़ने लगी।
जब वो झड़ गई तो बोली, “आह! बस करो! थोड़ा रुक जाओ! आह चाचू! मेरी अंदर से छिल चुकी है!”

पर Xxx चाचू सेक्स करते हुए मेरा पानी अभी निकला नहीं था।
मैंने उसके मुँह पर थप्पड़ मारकर कहा, “चल! उछल लण्ड पर! साली बाज़ारू रण्डी! मेरा पानी तेरी माँ निकालेगी क्या? बहनचोद कुतिया! मैं इतनी दूर से यहाँ झक मरवाने नहीं आया!”

मैंने इतना बोलकर जैसे ही अवनी की तरफ देखा, वो अपनी जींस उतारकर नीचे से पूरी नंगी होकर अपनी चूत को ज़ोर से मसल रही थी।

मैंने अपनी जीभ निकालकर उसे चूत चाटने का इशारा किया।
तो वो कैमरा रखकर बेड पर आ गई और मेरे मुँह के पास अपने घुटने रखकर अपनी प्यारी सी गुलाबी रंग की चूत को मेरे होंठों से सटा दिया।
मैंने अवनी की कमर में हाथ डालकर श्रेया को कहा, “चल कुतिया! तू शुरू हो जा!”

और अवनी की चूत को जीभ से कुरेदने लगा।

श्रेया ज़ोर-ज़ोर से मेरे लण्ड पर उछलने लगी।
मेरा लण्ड उसकी चूत में बहुत ही कसा-कसा जा रहा था।

थोड़ी देर में मेरे लण्ड का सुपाड़ा जैसे ही फूलने लगा तो मैंने अवनी की चूत चाटने की स्पीड बढ़ा दी।

थोड़े झटकों के बाद मेरे लण्ड ने झटके मारते हुए अपना पानी श्रेया की चूत में छोड़ दिया।

इधर अवनी ने भी बोली, “हाय जीजू! आह! गई मैं!”
उसने अपनी चूत की गर्मी मेरे मुँह पर उड़ेल दी।

श्रेया लण्ड को बिना बाहर निकाले मेरे ऊपर ढेर हो गई।
मैंने अभी भी अवनी की चूत के पानी का स्वाद लेते हुए उसे अपने मुँह पर ही कस रखा था।

थोड़ी देर बाद मैंने अपनी टाँगों को ज़ोर से हिलाकर श्रेया को पीछे धकेला।
तो वो लण्ड से उठकर साइड में लेट गई।
उसके हटते ही मैंने अवनी को खींचकर अपनी बगल में लिटा लिया और उसके काँपते होंठों को चूसने लगा।

अवनी होंठ चूसने में मेरा साथ दिए बिना मेरी बाहों में सिमट गई।

दो-तीन मिनट बाद मैंने आँखें खोलकर धीरे से कहा, “अवनी!”
तो उसने भी आँखें खोलकर कहा, “हाँ जीजू!”

मैंने कहा, “जीजू! तुम्हें लण्ड का पानी पीना अच्छा लगता है?”
अवनी बोली, “जीजू! आई लव बनाना शेक!”

मैंने कहा, “पाओगी?”
तो उसने एक झटके से मेरी बाहों से निकलकर मेरे लण्ड को थाम लिया और उसे चाटने लगी।

श्रेया मेरे पास पड़ी हाँफ रही थी।
मैं उसे अपनी तरफ खींचकर उसके होंठों पर चूमने लगा और उसके बालों में हाथ फिराकर पूछा, “कैसा लगा मेरी जान को?”
श्रेया मेरी छाती पर मुक्का मारते हुए बोली, “चाचू! मज़ा तो बहुत आया पर दर्द भी बहुत हुआ! अभी भी मेरी दुख रही है!”

मैंने कहा, “लण्ड के गर्म पानी से दर्द ठीक नहीं हुआ?”
श्रेया बोली, “उफ्फ़ चाचू! सच बताऊँ? जैसे ही मेरे अंदर आपके पानी की तेज़ धार पड़ी, मुझे बहुत सुकून मिला! आपको नहीं मालूम, मैं तो धार पड़ते ही एक बार और झड़ गई थी!”

अवनी जीभ फिराते हुए लण्ड और बॉल्स को चाट रही थी।
मैंने उसकी तरफ देखकर कहा, “बस करो साली जी! कहीं ये अब दोबारा खड़ा हो गया तो तुम्हारी चूत फाड़ डालेगा!”

वो लण्ड छोड़कर मेरे पास आकर अंगुली से ना-ना बोलते हुए बोली, “जीजू! बस ऊपर से ही ठीक है! मैं आपका अंदर नहीं लूँगी! इसे अंदर लेने का हक तो सिर्फ श्रेया को है!”

अवनी उठकर कपड़े पहनने लगी और श्रेया से बोली, “यार! दो बज चुके हैं! जीजू को खाना तो खिला दो! अगर भूखा रखोगी तो उनमें ज़्यादा टाइम एनर्जी नहीं बचेगी!”

श्रेया उससे बोली, “अवनी! तुम खाना ऑर्डर करो, मैं आती हूँ!”

फिर मैंने उठकर बाथरूम जाने के बाद खुद को साफ किया और कपड़े पहने।

जब मैं बाहर आया तो श्रेया किसी से फोन पर बात कर रही थी।

फोन काटने के बाद मैंने पूछा, “कौन था?”
तो वो बोली, “ऑफिस से कॉल था। सिस्टम में मेरे बिना लॉगिन नहीं हो पा रहा। मुझे थोड़ी देर के लिए जाना पड़ेगा।”

तभी अवनी आ गई और श्रेया के कपड़े उठाकर उसकी तरफ फेंकते हुए बोली, “जानेमन! अब कुछ दिन के लिए सब कुछ भूल जाओ! बस जीजू के मस्त लण्ड के मज़े लूटो!”

श्रेया उसका हाथ पकड़कर उठते हुए उसे चूत दिखाते हुए बोली, “देख ना यार! कैसे एक बार में ही सूज चुकी है!”
अवनी श्रेया की चूत को सहलाकर हँसते हुए बोली, “तुझे ही शौक था जीजू के लण्ड पर चढ़ने का! अब साली तू ही ले बड़े लण्ड के मज़े! मुझे अपनी चूत क्या दिखा रही है!”

श्रेया बोली, “अवनी! तू नहीं समझेगी! चाचू के लण्ड को लेकर मेरा बदन एकदम हल्का हो गया है! दिल कर रहा है सो जाऊँ!”
अवनी बोली, “वो तेरा खडूस बॉस तुझे सोने नहीं देगा! छुट्टी के बाद ऑफिस जाएगी तो वो तेरी गांड मार लेगा!”

श्रेया उठते हुए बोली, “यार! तू सही बोल रही है! मुझे एक बार ऑफिस तो जाना ही पड़ेगा!”
अवनी हँसते हुए बोली, “इस हालत में ऑफिस जाएगी तो तेरे सब चाहने वाले समझ जाएँगे कि तू अच्छे से चुदवा कर आई है!”
श्रेया बोली, “कुछ नहीं होता!”

फिर वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली, “जब चाचू मेरे पास हैं तो मुझे किसी से क्या लेना!”

फिर श्रेया बेड से उठी तो लड़खड़ा कर वापिस बेड पर बैठ गई।
अवनी उसकी बाँह पकड़कर बोली, “चल! तू थोड़ी देर गरम पानी के टब में बैठ जा, फिर ऑफिस चली जाना!”

अवनी श्रेया को लेकर बाथरूम में घुस गई।
थोड़ी देर बाद अवनी आकर मेरे पास बैठ गई और हँसते हुए बोली, “जीजू! ये तो गई काम से! बेचारी अपनी छोटी सी डब्बी को बड़े डंडे से टकरवा बैठी!”

उसकी बात पर मेरी भी हँसी निकल गई।
मैंने कहा, “एक दिन तो हर डब्बी का डब्बा बनना ही है! तो इसमें गलत क्या है? जवानी में जितना हो सके मज़ा ले लेना चाहिए!”

फिर मैंने दो अंगुलियों से चूत बनाकर उसमें दूसरे हाथ की अंगुली घुसाते हुए कहा, “चल! तेरी डब्बी भी खोल दूँ!”

अवनी बोली, “ना ना जीजू! मुझे कोई शौक नहीं है इतनी जल्दी डब्बा बनवाने की!”

फिर वो भी अंगुलियों से चूत का निशान बनाकर उस पर जीभ फेरते हुए बोली, “मेरे लिए तो बस इतना ही काफी है!”

फिर अवनी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी।
मैंने कहा, “ठीक है अवनी! तुम्हारी मर्ज़ी!”

तभी दरवाज़े की घंटी बजी।
तो अवनी बोली, “लगता है खाना आ गया!”

अवनी ने लपककर दरवाज़ा खोला और पैकेट लेकर किचन में चली गई।
थोड़ी देर बाद श्रेया नहाने के बाद काले रंग के ट्रांसपेरेंट थोंग … जिससे उसकी चूत झाँक रही थी … और काले रंग की ट्रांसपेरेंट ब्रा …जिससे उसके दूधिया बूब्स पूरे दिख रहे थे … पहनकर बाहर आ गई।

मैंने उसे देखकर उठते हुए बाहों में भर लिया और पूछा, “अब कैसा लग रहा है?”

श्रेया बोली, “चाचू! टाँगों के बीच अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे कोई मोटा डंडा फँसा हुआ हो! और अंदर बहुत चुभन है!”

मैंने कहा, “चल! दोबारा मेरा डंडा डालकर वो डंडा निकाल देता हूँ!”

श्रेया बोली, “चाचू! थोड़ा सा टाइम दो! मैं ऑफिस जाकर आती हूँ, फिर पूरी रात आपके डंडे को अंदर रखूँगी!”
मैंने कहा, “साली! तू तो पूरी रण्डी है!”
श्रेया मुस्कुराते हुए बोली, “चाचू! रण्डीपने में ही तो मज़ा है!”

फिर वो फिसलती हुई मेरी बाहों से आज़ाद हो गई और कमरे में जाकर तैयार होने लगी।
थोड़ी देर बाद तैयार होकर आ गई।

तो अवनी ने आकर कहा, “चलो! खाना खा लो! फिर मैं तुम्हारे साथ चल लूँगी!”

श्रेया बोली, “नहीं अवनी! तुम चाचू को कंपनी दो, मैं चली जाऊँगी!”

खाना खाने के बाद श्रेया अपनी कार लेकर चली गई।

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