Virgin Xxx Kahani – मेरी सीलपैक चुत गांव के लड़के ने फाड़ी

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वर्जिन Xxx कहानी में एक जवान लड़की अपनी बहन और सहेलियों की चुदाई की बातें सुनकर खुद भी लंड का मजा लेना चाहती थी पर उसे शर्म आती थी. एक बार वह गाँव गयी तो …

यह कहानी सुनें.

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नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम पूजा है.
मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ.

मेरी उम्र 24 साल है, शरीर भरा हुआ है 32D-30-34 के फिगर वाली गदरायी हुई शरीर की मालकिन हूँ.

मुझे जबसे जवानी चढ़ी है, तब से ही वासना भरी हुई हूँ.
बस ऐसा लगता है कि कोई मसल कर रख दे.
इसीलिए मैं अक्सर बढ़िया सी दिखने वाली प्रिंटेड ब्रा और कलरफुल पैंटी पहनती हूँ.
यह सोच कर कि पता नहीं कब कोई मर्द मिल जाए और वह मुझे प्यार से चोद दे.

लेकिन दोस्तो, मैं एक इंट्रोवर्ट हूँ … यानि अंतर्मुखी हूँ इसलिए जल्दी ही किसी के खुल नहीं पाती हूँ.

मेरे फादर एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं.
हम 5 भाई-बहन हैं.
मेरी दीदी की शादी हो चुकी है, मैं हूँ, मेरी 2 छोटी बहनें और हैं और एक छोटा भाई है जो स्कूल में पढ़ता है.
मेरा होमटाउन भोपाल के पास एक छोटा सा गांव है.

ज्यादा समय न वेस्ट करते हुए अपनी वर्जिन Xxx कहानी बताती हूँ कि मुझे सर्दी की रात में लंड कैसे मिला.

मेरी दीदी और बहनों से मुझे तो बहुत जलन होती है क्योंकि उनके भी बॉयफ्रेंड हैं और वे सब अपने अपने ठोकुओं से चुदवा कर खूब मजे लेती हैं.

दीदी ने तो शादी से पहले अपने ऑफिस के एचआर को ही सैट कर रखा था.
वे उनके साथ हफ्ते में दो बार तो चुदवाती ही थीं.

उनकी चुदाई की मुझे जानकारी इसलिए रहती थी क्योंकि जब वे घर आती थीं तो किसी चुसे हुए नींबू के जैसी लगती थीं.
वे आते ही बिस्तर पर ढेर हो जाती थीं.
फिर जब वे मुझसे पानी मांगती थीं तो मैं समझ जाती थी कि आज दीदी का पानी कुछ ज्यादा ही बह गया है इसलिए ये ऐसी हो गई हैं.

उस दिन दीदी चुदवा कर आई थीं और मुझसे पानी की कह कर कपड़े बदलने लगी थीं.

वे ब्रा पैंटी में ही थीं कि उसी वक्त उनका फोन आ गया और वे बात करने लगीं.
वे फोन पर अपनी किसी सहेली बात कर रही थीं कि आज तो साले ने जबरदस्त रगड़ दिया है. फाड़ कर रख दी है कुत्ते ने!

बस मुझे पता चल गया था कि दीदी को लंड से चुदवाना मिलने लगा है.
उस दिन सच में मुझे बड़ी कुढ़न हुई थी कि बड़ी बहन को अपनी छोटी बहन की चिंता नहीं है.

जैसा कि मैंने आपको लोगों को बताया कि मैं एक इंट्रोवर्ट हूँ … मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं था.
चाहती तो थी लेकिन इंट्रोवर्ट होने के वजह से किसी लड़के को मेरा नेचर पसंद नहीं आता.

मेरी सहेली तो नए-नए बॉयफ्रेंड बनाती और उसके साथ खूब मजे लेती व देती थी.
मैं अभी तक वर्जिन ही थी इसलिए चुदाई की आग में जल रही थी और अपनी इसी भूख को शांत करने के लिए मैं अपनी उंगली से चुत का काम चला-चला कर थक गई थी.

मुझे अब बड़ी लालसा होने लगी थी कि किसी तरह से अपनी चूत में लंड लेने को मिल जाए.

एक दिन अचानक से गांव से फोन आया कि मेरे दादाजी गुजर गए हैं.
उसी वजह से मुझे और मेरी फैमिली को गांव जाना पड़ा.

वहां पहुंचने के बाद दादाजी का अंतिम संस्कार हुआ.

उसके बाद कुछ दिन हम वहीं रहे.
उधर कोई काम तो था नहीं, तो बस मैं घूमती रहती थी.

उसी गांव के एक पड़ोस में रहने वाले लड़के से मेरी बातचीत स्टार्ट हो गई.

उसे शायद गांव की अंतर्मुखी लड़कियों की आदत थी तो उसने मेरी इस आदत का कुछ गलत अर्थ नहीं लगाया बल्कि यूं कहूँ कि उसे सिर्फ मेरी चुत से मतलब था तो उसे मेरी इस आदत से कोई फर्क नहीं था.
हम दोनों बातें करने लगे थे.

वह गांव का देहाती था और कुछ पहलवान किस्म का मर्द था.
उसे देख कर मेरी चुत में आग लगने लगी थी.

वह चूतिया किस्म का लड़का था तो उसने सीधे से मुझसे ‘आई लव यू’ बोल दिया.

जबकि उसे लव का ल भी नहीं मालूम था कि लव किसे कहते हैं.
आज जब मैं सोचती हूँ तो यही पाती हूँ कि शहरों में भी लव का क्या मायने होता है, इधर के लड़के भी तो चोदो और आगे बढ़ो की बात में भरोसा रखते हैं.

बड़े शहरों की लड़कियां भी ऐसी ही सोच रखती हैं कि लड़के से अपनी खुजली मिटवाओ और उससे पैसे खर्च करवाओ.
बाद में ब्रेकअप कह कर दूसरा लंड तलाशो.

खैर उस लड़के ने जब मुझसे आई लव यू कहा तो मैं पहले तो चुप रही.
फिर मैंने अपनी खुजली मिटाने के नजरिए से सोचा और उससे बात करने लगी.
धीरे धीरे हम दोनों में बात सेक्स तक आ पहुंची.

वह मुझसे बोला- पहले लंड लिया है क्या?
मैं शरमाती हुई उससे बोली- कैसे बोलते हो तुम?

वह हंस कर बोला- अरे मुझे लगा कि तुम शहर की हो तो ले चुकी होगी!
मैंने कहा- नहीं, मैं अभी कोरी हूँ!

वह हंस कर बोला- अरे वाह … इसका मतलब तुम सील पैक माल हो!
मैं समझ गई कि ये बेलाग बोलता है, इसे समझाया नहीं जा सकता है.

अब मैंने भी मन में ठान लिया था कि इसका लंड लेना ही है.

गांव में होने के कारण सभी लोग रात को जल्दी सो जाते हैं, तो उसने मुझसे कहा- रात को अपने घर की छत पर आ जाना. मेरा घर तेरे घर के बाजू में ही है तो मैं उधर छत से ही आ जाऊंगा.
चूंकि सर्दियों का मौसम था तो छत पर किसी के आने का कोई खतरा नहीं था.

उसने मुझे दस बजे के बाद घर की छत पर बुलाया था.
मैं डरती डरती छत पर गई और छत पर आने वाले दरवाजे को सांकल लगा दी ताकि कोई आ न पाए.

जैसे ही मैं छत पर पहुंची, उसने अपने घर की छत से मुझे देख लिया और दीवार को फांदता हुआ वह मेरे घर वाली छत पर आ गया.

उसने मुझे दीवार की आड़ में खींचा और किस करना स्टार्ट कर दिया.

पहली बार जैसे ही उसने मुझे अपने आगोश में लेकर चूमा तो मैं डर रही थी कि कहीं कोई आ न जाए … लेकिन जब मैंने चारों ओर देखा तो कोई नहीं दिखाई दिया.

उसने भी मेरे दूध मसलते हुए कहा- तुम बेफिक्र रहो … कोई नहीं आएगा.

वह कुर्ते के ऊपर से ही मेरे दूध चूसने लगा था.
धीरे-धीरे मुझे भी मज़ा आने लगा और मैं गर्म हो गई.

उसने मेरी सलवार खोलने लगा तो मैंने उसे रोक दिया.

वह मेरे कुर्ते को ऊपर करके वह मेरे मम्मों से खेलने लगा.
वह एक दूध को दबा रहा था और दूसरे के निप्पल को मुँह में भर कर चूस रहा था.

उसके ऐसे करने से मेरी चुत में आग लगने लगी और मैं उसका सर अपने मम्मों पर दबाने लगी.
वह मस्ती से मेरी टांगों के बीच में हाथ चलाने लगा, इससे धीरे-धीरे मेरी चूत गीली हो गई.

तभी उसने छत पर रखी एक कथरी (एक प्रकार की हैंडमेड दरी जो गांवों में महिलाएं पुराने कपड़ों को सिल कर बना लेती हैं.) को बिछाया और मुझे उस पर लिटा दिया.
जैसे ही मैं लेटने लगी तो उसने मेरे कुर्ते को मेरे गले की तरफ से उतारते हुए निकाल दिया.

मैंने उस रात जानबूझ कर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी.
सर्दी की रात में कुर्ते के हट जाने से एकदम ठंडी सी लगी और मेरे निप्पल कड़क हो गए.

उस चाँदनी और ठंडी रात में मेरे बूब्स और भी ज्यादा चमक रहे थे.
तभी उसने अपना पजामा उतारा और झटके से अपना तना हुआ लंड मेरे हाथ में दे दिया.

मैं उसके मोटे लंड को एकदम से अपने हाथ में देखकर डर गई.
मैंने उसके लौड़े को छोड़ दिया.
पर वह शायद पुराना खिलाड़ी था तो उसने मेरे हाथ को अपने लौड़े पर जमा दिया.

वह बोला- इसे प्यार से सहलाओ जान!
मैंने उसके लंड को सहलाना शुरू कर दिया.
लंड बड़ा कड़क था और मुझे उसे रगड़ने और सहलाने में अच्छा लगने लगा था.

वह भी मस्ती से मेरे दूध सहला रहा था.
फिर धीरे से वह अपना लंड छुड़वा कर नीचे को सरक गया.

अब उसने मेरी सलवार का नाड़ा ढीला किया और उसे नीचे खींच कर मुझे नंगी कर दिया.
मैंने पैंटी नहीं पहनी थी तो वह हंसने लगा.

मैंने कहा- क्या हुआ?
वह बोला- तुझे भी चुदने की चुल्ल थी न!

मैंने कहा- तुझे कैसे पता चला?
वह बोला- साली नंगी तो है, चड्डी किधर है तेरी?

मैं शर्मा गई.

उसने मेरी दोनों टांगें फैला दीं और अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया.
मैं सिहर गई पहली बार किसी मर्द ने मेरी बुर पर मुँह लगाया था.

मेरी सहेली बताती थी कि उसका ठोकू उसकी चुत चाटता है.
मैं बस यही सब सोच रही थी कि उसने मेरी चुत पर जीभ लगा दी और चाटने लगा.

मैं मस्त होने लगी और मैंने अपनी गांड उठा उठा कर उससे चुत चुसवाने का मजा लिया.
मेरी चुत टपकने को होने लगी थी.

मेरी वर्जिन Xxx चुत से लिसलिसा रस बहने लगा था और उसका थूक भी मेरी चुत में भर गया था.

अब वह चुदाई की पोजीशन में आ गया और उसने अपना लंड मेरी चूत में रख दिया.

मैं बताना भूल गई कि उसका लंड करीब 7 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा होगा.
उसने एक ही झटके में मेरी चूत में अपना लंड ठांस दिया.

मेरे मुँह से दर्द भरी चीख निकली- उई मां मर गई … फट गई मेरी चुत आह साले मादरचोद … निकाल अपना लंड … आह मर गई … बहन के लौड़े ने फाड़ दी मेरी!
उसने झट से मेरा मुँह बंद किया और गाली देते हुए बोला- चुप साली कुतिया रंडी … मरवाएगी क्या बहन की लौड़ी … मुझे तो सिर्फ मार लगेगी लेकिन तेरी तो जिंदगी नर्क हो जाएगी … साली चुपचाप चुदवा मां की लवड़ी!

मैं उसकी बात से सहम गई और चुप हो गई.
मेरी आंखों से आंसू और चूत से खून बह रहा था.

मैंने उसे बहुत मना किया पर उसने मेरी एक नहीं सुनी.
वह मेरा मुँह दबा कर मेरी चूत चोदता रहा.

मेरे मुँह से बस आहअ आह की आवाज़ निकल रही थी.
उसने मेरी सील पैक चुत की चुदाई के खूब मजे लिए.

धीरे-धीरे मुझे भी मजा आने लगा और मैं भी उसके साथ मस्ती से चुदाई करवाने लगी.
कभी वह मेरी चूत चाटता और कभी मुझे किस करता. कभी नाभि को चाटने लगता था.

उसके साथ चुदाई में मुझे एक रंडी होने का सुख मिल रहा था.
उसका स्टैमिना भी गज़ब का था.

पहली बार ही करीब 40 मिनट तक उसने मुझे रगड़ा था.

उसके साथ पहली चुदाई में मैं आधी हो गई थी और मेरा पूरा शरीर टूट रहा था, पर बेहद खुश भी थी.

मैं अपनी चूत में रोज़ उंगली करती थी, लंड लेने के सपने देखती थी, वह आज किसी के लंड से मस्ती से ठुक रही है.
जनवरी की ठंड में मोटा लंड लेने की खुशी में सारा दर्द भूल गई थी.

मेरी चूत से खून निकल रहा था, तो लग रहा था मानो कोई अमृत की धार निकल रही हो.
मैं वह लड़की हूँ, जिसे उम्मीद ही नहीं थी कि उसकी चुदाई की शुरुआत इतनी जबरदस्त तरीके से होगी.

उस रात में उसने 3 बार मेरी चूत मारी और हर बार अपना पानी भी अन्दर छोड़ दिया.
अगले दिन मैं सुबह चल भी नहीं पा रही थी.

सुबह बाथरूम में शीशे में देखा तो चूत सूज कर लाल हो चुकी थी.
उसने मेरी कमसिन जवानी को खूब कस कर लूटा था.

गांव में रहने के दौरान मैंने कई बार उसके लंड से चुदाई करवाई और उसका मोटा तगड़ा लंड चूसा.
अब तो मैंने गले के आखिरी छोर तक लंड लेना सीख लिया था और उसका काला नाग तो समझो मुझे मेरा दिलबर लगने लगा था.

वह मेरी चुदाई करता था तो मेरे शरीर के एक-एक अंग को खोल कर रख देता था.

जब तक मैं गांव में थी, रोज़ रात को मेरी चुदाई करता था और खूब मजे लेता और देता था.
उसने मेरी पूरी चूत हवा महल बना दी थी.

मैंने सोचा इंट्रोवर्ट होने के कारण किसी को अपनी स्टोरी बता नहीं पाऊंगी, इसलिए मैंने यहां पर लिख दी है.

दोस्तो, पहली चुदाई का आनन्द ही कुछ और होता है.
जितना लड़की को वर्जिनिटी टूटने का दुख होता है, उससे 1000 गुना ज्यादा लंड लेने का सुख होता है!

ये मेरी फर्स्ट रियल सेक्स स्टोरी है.
यह वर्जिन Xxx कहानी आपको कैसी लगी, ज़रूर बताएं.
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